NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
पुस्तकें
भारत
राजनीति
बंगाल में सांप्रदायिक सद्भाव को बढ़ावा देते 1200 मार्क्सवादी बुकस्टाल 
शरद ऋतु त्योहार में प्रगतिशील साहित्य की हो रही भारी बिक्री।
संदीप चक्रवर्ती
14 Oct 2021
Translated by महेश कुमार
book
जादवपुर 8बी बुक स्टॉल के भीतर का दृश्य जहां 5000 से अधिक पुस्तक बिक्री के लिए रखी गई हैं

कोलकाता : पश्चिम बंगाल में चल रहे ऑटम फेस्टिवल यानी शरद ऋतु त्योहार के दौरान 1,200 से अधिक मार्क्सवादी साहित्य के बुक स्टॉल लगाए गए हैं। माकपा, जो 90 प्रतिशत से अधिक मार्क्सवादी साहित्य से जुड़े स्टालों का संचालन कर रही है, वह उनका इस्तेमाल प्रगतिशील साहित्य को बढ़ाव देने और सांप्रदायिक शांति और सद्भाव को बनाए रखने के लिए भी करेगी।

कोलकाता में लगाए गए 350 से अधिक बुक स्टॉल में से 109 से अधिक राजधानी के केंद्र में हैं और शेष कोलकाता नगर निगम क्षेत्र में लगाए गए हैं। यदि कोलकाता महानगर क्षेत्र को ध्यान में रखा जाए, तो शुरुवाती अनुमानों के अनुसार यह संख्या लगभग 400 के आस-पास है। सीपीआई (एम) के अलावा, अन्य वामपंथी दल, जैसे सीपीआई (एमएल) लिबरेशन, एसयूसीआई (सी), आरएसपी, फॉरवर्ड ब्लॉक और सीपीआई ने भी राज्य के विभिन्न हिस्सों में लगभग 10 प्रतिशत स्टाल लगाए हैं।

वामपंथ के प्रगतिशील साहित्य का मुकाबला करने के लिए, सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस ने भी मुख्य रूप से कुछ शहरी इलाकों में बुक स्टॉल लगाए हैं।

सीपीआई (एम) पोलित ब्यूरो के सदस्य और राज्य के सबसे वरिष्ठ राजनेताओं में से एक बिमान बोस ने मार्क्सवादी साहित्य स्टालों के बारे में बताया कि इनकी शुरुवात 1955 से हुई है।  उस वक़्त बागबाजार और पार्क सर्कस में दो बड़े स्टाल लगाए गए थे। बोस ने न्यूज़क्लिक को बताया कि 50 और 60 के दशक में, सियालदह, राजाबाजार, श्यामबाजार, उल्तोडंगा, बेलियाघाटा, जादवपुर, ढकुरिया और बल्लीगंज स्टेशन पर अधिक बुक स्टॉल स्थापित किए गए थे।

"पहले के समय में, रूसी लेखकों द्वारा लिखी गई बच्चों की किताबें रबनिद्रनाथ टैगोर की वर्गीकृत किताबें और फिल्म उस्ताद सत्यजीत रे के पिता सुकुमार रॉय द्वारा लिखी गई कविताओं के अलावा बहुत लोकप्रिय थीं। उस समय मुजफ्फर अहमद, ज्योति बसु, प्रमोद दासगुप्ता, सोमनाथ लाहिड़ी और डॉ रानेन सेन नियमित रूप से किताबों की दुकानों पर जाते थे और पाठकों से बातचीत करते थे। बॉस ने बताया तब से स्टालों की संख्या काफी बढ़ गई है।“ 

बोस ने एक स्टाल लगाए जाने का भी जिक्र किया, जिसे वह 1968 से 1970 तक एक पुस्तक विक्रेता के रूप में चलाते थे। वह स्टाल सूर्य सेन स्ट्रीट पर स्टाल 50 से अधिक वर्षों से जारी है।

“जबकि टीएमसी बुक स्टॉल में पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी के लेखन और चित्र वाली 40 से अधिक किताबें हैं, भाजपा का साहित्य मोदी और श्यामा प्रसाद और कांग्रेस गांधीवादी और नेहरूवादी दर्शन पर केंद्रित है। लेकिन प्रगतिशील किताबों की दुकानों में वैचारिक किताबों से लेकर क्लासिक्स और बच्चों की किताबों से लेकर विज्ञान और प्रौद्योगिकी के शीर्षकों की एक विस्तृत श्रृंखला मौजूद है। यही कारण है कि ये अस्थायी प्रगतिशील ज्ञान भंडार ऑटम फेस्टिवल के दौरान सबसे पसंदीदा स्थान हैं” उक्त बातें गरिया स्टेशन क्षेत्र के आयोजकों में से एक बिकाश डे ने बताई। 

डे ने बताया कि, बुक स्टॉल राज्य में किसी भी धर्म- या भाषा-आधारित हिंसा का मुकाबला करने के लिए सांप्रदायिक सद्भाव और सौहार्द का प्रसार कर रहे हैं। "यह एक अतिरिक्त जिम्मेदारी है। हम त्योहार के दौरान अपने-अपने इलाकों में किसी भी अप्रिय घटना से सावधान रहें।"

दिलचस्प बात यह है कि इस साल केंद्रीय चुनाव आयोग द्वारा राज्य में शुरू किए गए मतदाता सत्यापन अभियान के लिए सभी प्रगतिशील स्टालों को सुविधा केंद्रों के रूप में भी जोड़ा जाएगा।

कोलकाता जिला सचिवमंडल के सदस्य और प्रमुख आयोजकों में से एक, सुदीप सेनगुप्ता के अनुसार, प्रसिद्ध फिल्म अभिनेता सब्यसाची चक्रवर्ती द्वारा उद्घाटन किए जाने के दो घंटे में जादवपुर बुक स्टॉल पर जोकि सबसे पुराने स्टाल में से एक है, में 25,000 रुपये से अधिक की किताबें बेची गईं। यह स्टाल पिछले दो दशकों से चल रहा है। “पिछले साल, हमने 2,80,000 रुपये से अधिक की बिक्री दर्ज की थी। इस साल आर्थिक मंदी के बावजूद, हमें अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है क्योंकि हम ऐसी किताबें बेच रहे हैं जो जानकारीपूर्ण हैं और महंगी नहीं हैं। सेनगुप्ता ने कहा, कश्मीर और श्यामा प्रसाद की विभाजनकारी भूमिका पर आरएसएस से लड़ने पर लेखक बुद्धदेव गुहा की किताबें और प्रसिद्ध इतिहासकार प्रोफेसर सुकुमारी भट्टाचार्य की किताब रीविजिटिंग द मिथ ऑफ राम काफी बिक रही हैं।

जादवपुर 8बी स्टाल, जिसे मतदाता सत्यापन के लिए एक सुविधा केंद्र के रूप में इस्तेमाल किया गया था और पिछले साल नागरिकों के राष्ट्रीय रजिस्टर के बारे में एक सूचनात्मक कियोस्क के रूप में इस्तेमाल किया गया था और पिछले साल इसकी विभाजनकारी नीति का मुकाबला करने के लिए भी व्यापक समर्थन मिला है।

2011 से पहले त्योहारों के दौरान 2,000 से अधिक प्रगतिशील बुक स्टॉल स्थापित किए जाते थे। हालांकि, 2013 में यह संख्या घटकर लगभग 600 हो गई थी, क्योंकि टीएमसी कार्यकर्ताओं ने  कई बुक स्टॉल में तोड़फोड़ की थी। लेकिन तोड़फोड़ करने के कुछ ही घंटों बाद स्टॉल फिर से खुल गए थे।

"वरिष्ठ पत्रकार अनिरुद्ध चक्रवर्ती, नेशनल बुक एजेंसी के निदेशक- राज्य के सबसे बड़े प्रगतिशील पुस्तक घर, जिसकी कल्पना कम्युनिस्ट नेता 'काकाबाबू' (अहमद) ने की थी, ने कहा कि "यहां तक ​​कि विधानसभा चुनाव हिंसा से प्रभावित गोघाट, खानकुल पुरसुराह, आरामबाग और नारायणघाट (हुगली जिले में) मार्क्सवादी साहित्य के स्टाल वामपंथी कार्यकर्ता लगा रहे हैं।  उन्होंने कहा कि "एनबीए त्योहार खत्म होने के बाद अपनी पुस्तकों की बिक्री के लिए एक ई-कॉमर्स साइट लॉन्च करेगा"।

चक्रवर्ती ने कहा, "जलवायु परिवर्तन पर पुस्तकों के अलावा, प्रख्यात दार्शनिक देबिप्रसाद चट्टोपाध्याय, भगत सिंह द्वारा पारंपरिक लोक-आधारित दर्शन और आदि शंकराचार्य पर प्रकाशित कॉमरेड ईएमएस '[नंबूदरीपाद] पुस्तक की काफी मांग है।" 

प्रगतिशील साहित्य को काफी समर्थन मिल रहा है, जोकि सीधे राज्य और देश में गहराते संकट के जवाब में है,” चक्रवर्ती ने कहा, पिछले साल त्योहार के दौरान लगभग करोड़ से अधिक पुस्तकों की बिक्री हुई थी।

चक्रवर्ती ने कहा कि “मंदी के बावजूद इन स्टालों को स्थापित करने में रुचि को देखते हुए, बिक्री में और वृद्धि हो सकती है। गोर्की, तुर्गनेव, टॉल्स्टॉय और टैगोर की प्रगतिशील पुस्तकों की इंटरनेट के युग में भी भारी मांग है। यह दिखाता है कि कैसे लोग राज्य में कठिन परिस्थिति से निपटने के लिए ज्ञान को एक स्थायी स्रोत के रूप में पसंद करते हैं और अध्ययन संसाधनों के बेहतरीन रूप में भी पसंद करते हैं।” 

1952 से, माकपा मार्क्सवादी साहित्य के स्टालों को उन क्षेत्रों के आसपास लगा रही है जहाँ दुर्गा पूजा पूरे राज्य में तर्कवादी प्रगतिशील विचारों को फैलाने के लिए मनाई जाती है।

अंग्रेजी में मूल रूप से प्रकाशित आलेख को पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें:-

1,200 Marxist Bookstalls in Bengal Promote Communal Harmony

kolkata
Autumn Festival
book festival
CPI(M)
Marxist
communist
Leftist
Mamata
TMC
Congress
Gandhi
nehru
Tagore
Tolstoy
Gorky
BJP
Shyama Prasad
RSS
Satyajit Ray

Related Stories

सत्यजित रे : सिनेमा के ग्रेट मास्टर

दिल्ली में लगाई गई सत्यजीत रे द्वारा डिज़ाइन किये गए किताबों के कवर की प्रदर्शनी

हिंदुत्व की तुलना बोको हरम और ISIS से न करें तो फिर किससे करें?

वाराणसी: कारमाइकल लाइब्रेरी ढहाए जाने पर सुप्रीम कोर्ट की रोक, योगी सरकार से मांगा जवाब

‘यथार्थ स्वप्नलोकों की परिकल्पना’ देकर चले गए एरिक ऑलिन राइट

विश्व पुस्तक मेला पर छाए भगवा राजनीति के काले बादल!

“अखंड भारत” बनाम भारत


बाकी खबरें

  • गुजरात: धर्म-परिवर्तन क़ानून को लेकर हाईकोर्ट और सरकार के बीच क्या विवाद है?
    सोनिया यादव
    गुजरात: धर्म-परिवर्तन क़ानून को लेकर हाईकोर्ट और सरकार के बीच क्या विवाद है?
    29 Aug 2021
    धर्म-परिवर्तन के नए क़ानून पर हाईकोर्ट की सख़्ती से गुजरात सरकार सकते में है। कानून के कई प्रावधानों पर हाईकोर्ट की रोक के ख़िलाफ़ राज्य की विजय रुपाणी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट जाने की घोषणा की है।
  • 200 हल्ला हो: अत्याचार के ख़िलाफ़ दलित महिलाओं का हल्ला बोल
    रचना अग्रवाल
    200 हल्ला हो: अत्याचार के ख़िलाफ़ दलित महिलाओं का हल्ला बोल
    29 Aug 2021
    "जाति के बारे में क्यों ना बोलूं सर जब हर पल हमें हमारी औक़ात याद दिलाई जाती है..."
  • रोटी के लिए जद्दोजहद करते खाना पहुंचाने वाले हाथ
    समृद्धि साकुनिया
    रोटी के लिए जद्दोजहद करते खाना पहुंचाने वाले हाथ
    29 Aug 2021
    नई श्रम सुधार संहिता के दायरे में गिग वर्कर्स को लाए जाने और उन्हें सामाजिक सुरक्षा के लाभ प्रदान करने के बावजूद फुड डिलीवरी कर्मचारियों का शोषण बदस्तूर है, खासकर महामारी के बाद से। समृद्धि साकुनिया…
  • अफ़गानिस्तान: ‘ग्रेट गेम’  खेलने की सनक में अमेरिका ने एक देश को तबाह कर दिया
    जॉन पिलगर
    अफ़गानिस्तान: ‘ग्रेट गेम’  खेलने की सनक में अमेरिका ने एक देश को तबाह कर दिया
    29 Aug 2021
    कुछ दशक पहले अफ़गानिस्तान की अवाम ने अपनी आज़ादी ली थी, लेकिन अमेरिका, ब्रिटेन और उनके सहयोगी देशों की महत्वाकांक्षाओं ने उसे तबाह कर दिया
  • अन्न महोत्सव: मुफ़लिसी का मंगलगान, सरकारी खर्च पर हिंदुत्व प्रचार
    असद रिज़वी
    अन्न महोत्सव: मुफ़लिसी का मंगलगान, सरकारी खर्च पर हिंदुत्व प्रचार
    29 Aug 2021
    “उतना ही खाद्यान्न मुफ़्त मिला जितना पहले मिलता आ रहा था। मुफ़्त सिर्फ़ एक थैला मिला है, जो पहले नहीं मिला था। थैला देने के बदले सरकार अगर मुफ़्त खाद्यान्न बढ़ा कर देती तो ज़्यादा अच्छा होता।”
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License