NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
स्वास्थ्य
भारत
राजनीति
देश के 36 प्रमुख रेलवे स्टेशन साफ़-सफ़ाई के मामले में हुए फ़ेल
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण द्वारा एनजीटी को दी गई रिपोर्ट से पता चला है कि रेलवे को साफ़ और स्वछ रखने के लिए बने ख़ास दिशानिर्देशों के बावजूद प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर सफ़ाई को लेकर कई ख़ामियों उभर कर समाने आई हैं।
अयस्कांत दास
29 Jul 2020
Translated by महेश कुमार
देश के 36 प्रमुख रेलवे स्टेशन

नई दिल्ली: स्वच्छ भारत अभियान के माध्यम से पिछले छह वर्षों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने भले ही स्वच्छता पर बड़े पैमाने पर ज़ोर दिया हो, लेकिन हमारे देश के रेलवे स्टेशन विशेष सुरक्षा उपायों के अभाव में पर्यावरण को प्रदूषित करते रहते हैं।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की एक रिपोर्ट ने देश भर से 36 प्रमुख रेलवे स्टेशनों में कई ख़ामियों को उजागर किया है जहां पर्यावरणीय मानदंडों की अनदेखी की जा रही है।

सीपीसीबी, जिसने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के निर्देश पर रेलवे स्टेशनों का आकलन किया था, ने 13 जुलाई को अपनी रिपोर्ट पेश की थी। इन सभी 36 स्टेशनों को बाकायदा आईएसओ 14001 प्रमाण का पत्र मिला हुआ है लेकिन बावजूद इसके ये गंभीर खामियां सामने आई हैं, यह वह प्रमाण पत्र है जिसे अंतरराष्ट्रीय मानक के रूप में माना जाता है और प्रभावी पर्यावरण प्रबंधन प्रणाली की खास ज़रूरतों को इसमें तय पाया गया है।

रिपोर्ट के अनुसार, 20 रेलवे स्टेशनों में अभी भी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट उपलब्ध नहीं हैं, जिनमें दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, वाराणसी और लखनऊ जैसे बड़े स्टेशन शामिल हैं। ये 20 स्टेशन देश के सबसे व्यस्त स्टेशनों में से एक हैं, जहां रोजाना लाखों यात्री आते हैं।

13 रेलवे स्टेशनों पर प्रभावी उपचार संयंत्र उपलब्ध नहीं कराए गए हैं, जिसका मतलब है कि बिना किसी उपचार के गंदे पानी (या विषाक्त पानी) को नालियों में छोड़ा जा रहा है। इन स्टेशनों में चेन्नई, आगरा, विजयवाड़ा, विजयनगरम, वडोदरा और मुंबई शामिल हैं।

+[मूल्यांकन किए गए सभी 36 रेलवे स्टेशनों ने ठोस कचरा प्रबंधन गतिविधियों को पहले ही अन्य एजेंसियों को आउटसोर्स कर दिया है। हालांकि, रिपोर्ट में कहा गया है कि इनमें से 10 अनुबंध संबंधित रेलवे स्टेशनों पर पर्याप्त मात्रा में ठोस अपशिष्ट नहीं मिलता हैं।

इसके अलावा, कई रेलवे स्टेशनों के अनुबंधों में अपशिष्ट यानि को कचरे को अलग करने और उन्हे प्रोसेस (प्रसंस्करण) करने के प्रावधान नहीं हैं। रिपोर्ट में यह भी पाया गया है कि इन 36 स्टेशनों में से लगभग नौ में सूखे और गीले कचरे को अलग-अलग नहीं ढोया जाता हैं।

मूल्यांकन किए गए चौदह स्टेशनों को अभी भी उनके परिसर के भीतर पैदा हो रहे ठोस कचरे में मौजूद प्लास्टिक की ठोस मात्रा का आकलन करना बाकी है। इस मामले में उत्तर प्रदेश का प्रयागराज (यानि इलाहाबाद) इस रिपोर्ट में सामने आया है, जो एकल उपयोग वाले प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगाने में विफल रहा है, यह तब है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले साल अपने स्वतंत्रता दिवस के संबोधन में घोषणा की थी कि प्लास्टिक के पदार्थ पर प्रतिबंध 2 अक्टूबर, 2019 से लागू होगा। 

सभी 36 स्टेशनों में प्रदूषण अधिकतम स्वीकार्य स्तर से काफी अधिक पाया गया है। सात स्टेशनों को अभी भी खुले में शौच पर रोक लगाने के लिए संबंधित शहरी स्थानीय निकायों से बात करनी है- खुले में शौच के लिए सबसे अधिक शहरों में रेलवे पटरियों का इस्तेमाल किया जाता है- जबकि खुले में शौच को शून्य पर लाना केंद्र सरकार की एक प्रमुख परियोजना है।

दिसंबर 2019 में ट्रिब्यूनल की प्रिंसिपल बेंच ने इसका मूल्यांकन करने के आदेश जारी किए थे, ये आदेश तब दिए गए जब रेलवे स्टेशनों के साथ-साथ ट्रेनों और इसके डिब्बों में ठोस कचरे, प्लास्टिक के कचरे, जल और सीवेज के प्रभावी प्रबंधन के मुद्दों के बारे में एक याचिका पर सुनवाई चल रही थी। 

इस मामले की कई सुनवाईयों के दौरान, रेलवे ने एक स्टैंड ले लिया कि चूंकि इसकी गतिविधियाँ विभिन्न विभागों, संस्थानों और प्रशासन के माध्यम से संचालित की जाती हैं, इसलिए उसे जल अधिनियम, वायु अधिनियम या खतरनाक सामग्री अधिनियम के तहत सरकार से सहमति हासिल करना जरूरी नहीं है।

ट्रिब्यूनल के चेयरपर्सन आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षता वाली पीठ ने रेलवे के रुख को अस्थिर और बेरुखा बताया।

पीठ ने अपने दिसंबर के आदेश में कहा था कि यह स्वीकार करना मुश्किल है कि प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर रेलवे प्रशासन की गतिविधियाँ प्रदूषण का कारण बनती हैं, जो भूमि के पर्यावरणीय नियमों से परे हैं।

विशेषज्ञों की राय के अनुसार, रेलवे में साफ-सफाई और स्वच्छता को सुनिश्चित करने के लिए बजटीय आवंटन को अधिक से अधिक बढ़ाने की जरूरत है जो काफी कम है। 2019-20 में, रेलवे में पूंजीगत खर्च  का बजटीय अनुमान लगभग 1.60 लाख करोड़ रुपये था। 2019-20 में संशोधित खर्च 1.56 लाख करोड़ रुपये था। इस राशि में से यात्री सुविधाओं पर 3,422.57 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया था, जो संशोधित अनुमानों में घटकर कुल 1,881.39 करोड़ रुपये पर आ गया था।

वित्तीय वर्ष 2020-21 के लिए, केंद्र सरकार ने रेलवे पर खर्च का 1.61 लाख करोड़ रुपये का बजटीय अनुमान लगाया है। इसमें यात्री सुविधाओं के लिए 2,725.63 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की गई है।

“यह तथ्य सही है कि कई एजेंसियां रेलवे में साफ-सफाई और स्वच्छता के काम को देखती हैं। लेकिन इन एजेंसियों को समेटना, निर्देशित करना भी रेलवे का काम है क्योंकि वे इसके परिसर के भीतर काम करती है। एक तथ्य यह भी है कि पिछले कुछ वर्षों में पर्यावरण के मानदंड काफी सख्त हुए हैं, इसलिए रेलवे में साफ-सफाई और स्वच्छता पर बजटीय आवंटन में वृद्धि की जानी चाहिए,” उपरोक्त बातें सुधान्सू मणि, जोकि इंडियन रेलवे सर्विस मेकेनिकल इंजीनिरींग (IRSME) के पूर्व अफसर हैं ने कही।

रेलवे में साफ-सफाई रखने के केंद्र सरकार के विशेष दिशा-निर्देश के बावजूद गंभीर खामियां सामने आई हैं।

2017 में, केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय ने रेलवे स्टेशनों में साफ-सफाई और स्वच्छता में सुधार लाने और यात्रियों, विक्रेताओं और रेलवे कर्मचारियों को एक स्वस्थ वातावरण मुहैया कराने के उद्देश्य से मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) का एक सेट जारी किया था। ‘स्वच्छ रेलवे स्टेशनों’ नामक एक दस्तावेज को स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसेस के संकलन के साथ, 2 अक्टूबर, 2019 को प्रधान मंत्री मोदी के स्वच्छ भारत उद्देश्य को हासिल करने के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया था।

“यह एसओपी सभी तरह के कचरे के पुनर्चक्रण (recycling) और प्रसंस्करण (processing) के माध्यम से उचित अपशिष्ट प्रबंधन सुनिश्चित करने और स्वच्छता को रेलवे स्टेशनों की व्यवस्था में स्थापित करने का लक्ष्य रखता है। यह दस्तावेज़ इस तथ्य पर जोर देता है कि रेलवे स्टेशनों (रेलवे ट्रैक पर और साथ ही प्लेटफॉर्म पर) कचरे के प्रबंधन में संक्रामक तत्वों और विषाक्त पदार्थों के संपर्क से बचने के लिए ध्यान देना जरूरी है,"। 

दिशानिर्देशों में बुनियादी ढांचे की स्थापना और सर्वोत्तम परंपराओं को अपनाने के अलावा समय-समय पर व्यवस्था की जांच और मूल्यांकन करना शामिल हैं।

“यहां यह बात महत्वपूर्ण है कि भारत सरकार द्वारा जारी स्वच्छ भारत मिशन दिशानिर्देशों और पर्यावरण से संबंधित अन्य दिशानिर्देशों को सफाई और स्वच्छता प्रावधान के सभी पहलुओं में जोड़ा गया है,"।

वर्ष 2019 में स्वच्छ रेल पर स्वच्छ भारत रिपोर्ट में विभिन्न स्वच्छता मानकों के आधार पर देश भर में 720 रेलवे स्टेशनों की रैंकिंग की गई थी। सर्वेक्षण में शामिल गैर-उपनगरीय रेलवे स्टेशनों में से केवल 2 प्रतिशत ने समग्र स्वच्छता को हासिल किया जिनका स्कोर 90 प्रतिशत से ऊपर पाया गया था। सर्वेक्षण में उपनगरीय रेलवे स्टेशनों में से कोई भी 80 प्रतिशत से अधिक का स्कोर पार नहीं कर पाया।

रिपोर्टों के अनुसार, रेल मंत्रालय ने अपनी चाहत के हिसाब से परिणाम हासिल करने के लिए पारंपरिक जैव-शौचालयों की विफलता के बाद डिब्बों में वैक्यूम बायो-शौचालय की स्थापना का प्रयोग करना शुरू कर दिया है। दिसंबर 2017 में भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक की एक रिपोर्ट ने बताया था कि जैव शौचालयों में खराबी के बारे में लगभग दो लाख शिकायतें मिली थीं। हालांकि, जून 2020 तक, रेलवे ने देश के सभी क्षेत्रों में 68,800 यात्री डिब्बों में जैव-शौचालय स्थापित करने का दावा किया है।

“जब तक बायो-टॉयलेट वांछित परिणाम देना शुरू नहीं करते हैं, तब तक स्टेशन परिसर के भीतर रेलवे पटरियां ऐसे ही गंदी रहेंगी और इनकी सफाई के लिए इंसानी हस्तक्षेप की जरूरत पड़ेगी। तब तक रेलवे को किसी वैकल्पिक तंत्र पर विचार करने की जरूरत है,” उपरोक्त कथन केंपेन फॉर डिगनीटी एंड राइट्स ऑफ सिवेज एंड अलाइड वर्कर्स के एचपी मिश्रा ने कही।

लेखक एक स्वतंत्र पत्रकार हैं।

 

Railway Stations
CPCB report
indian railways
ISO
Environment Norms
Green Norms
36 Rail Stations
Swacch Bharat Abhiyan
Railway Sanitation

Related Stories

रेलवे के 872 कर्मचारी कोरोना संक्रमित, अब तक 88 लोगों की मौत  

संकट :  रेलवे ठेका श्रमिकों का कोई पुरसाहाल नहीं, एटीएम तक रहते हैं ठेकेदारों के पास

कोरोना काल: सट्टेबाज़ी और रेल भ्रमण

कोविड-19 ने मज़दूरों की सुरक्षा के मामले में भारतीय क़ानूनों की कमी को किया उजागर

लॉकडाउन के बीच चली पहली विशेष ट्रेन, अन्य राज्यों को भी मदद की उम्मीद

कार्टून क्लिक: Positivity ठीक है, लेकिन ग़लतफ़हमी...!

जनता कर्फ़्यू के बाद अब देश के कई राज्यों में लॉकडाउन


बाकी खबरें

  • Gujarat Riots
    बादल सरोज
    गुजरात दंगों की बीसवीं बरसी भूलने के ख़तरे अनेक
    05 Mar 2022
    इस चुनिन्दा विस्मृति के पीछे उन घपलों, घोटालों, साजिशों, चालबाजियों, न्याय प्रबंधन की तिकड़मों की याद दिलाने से बचना है जिनके जरिये इन दंगों के असली मुजरिमों को बचाया गया था।
  • US Army Invasion
    रॉजर वॉटर्स
    जंग से फ़ायदा लेने वाले गुंडों के ख़िलाफ़ एकजुट होने की ज़रूरत
    05 Mar 2022
    पश्चिमी मीडिया ने यूक्रेन विवाद को इस तरह से दिखाया है जो हमें बांटने वाले हैं। मगर क्यों न हम उन सब के ख़िलाफ़ एकजुट हो जाएं जो पूरी दुनिया में कहीं भी जंगों को अपने फ़ायदे के लिए इस्तेमाल करते हैं?
  • government schemes
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना के दौरान सरकारी योजनाओं का फायदा नहीं ले पा रहें है जरूरतमंद परिवार - सर्वे
    05 Mar 2022
    कोरोना की तीसरी लहर के दौरान भारत के 5 राज्यों (दिल्ली, झारखंड, छत्तीसगढ, मध्य प्रदेश, ओडिशा) में 488 प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना हेतु पात्र महिलाओं के साथ बातचीत करने के बाद निकले नतीजे।
  • UP Elections
    इविता दास, वी.आर.श्रेया
    यूपी चुनाव: सोनभद्र और चंदौली जिलों में कोविड-19 की अनसुनी कहानियां हुईं उजागर 
    05 Mar 2022
    ये कहानियां उत्तर प्रदेश के सोनभद्र और चंदौली जिलों की हैं जिन्हे ऑल-इंडिया यूनियन ऑफ़ फ़ॉरेस्ट वर्किंग पीपल (AIUFWP) द्वारा आयोजित एक जन सुनवाई में सुनाया गया था। 
  • Modi
    लाल बहादुर सिंह
    यूपी चुनाव : क्या पूर्वांचल की धरती मोदी-योगी के लिए वाटरलू साबित होगी
    05 Mar 2022
    मोदी जी पिछले चुनाव के सारे नुस्खों को दुहराते हुए चुनाव नतीजों को दुहराना चाह रहे हैं, पर तब से गंगा में बहुत पानी बह चुका है और हालात बिल्कुल बदल चुके हैं।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License