NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
म्यांमार में 4,800 खदान कर्मचारियों की हड़ताल के छह महीने पूरे
माइनिंग वर्कर्स फ़ेडरेशन ऑफ़ म्यांमार से जुड़े ये खनिक फ़रवरी में सैन्य तख़्तापलट के बाद से हड़ताल पर हैं। उनकी लंबी हड़ताल ने सैन्य शासन के राजस्व को प्रभावित किया है।
पीपल्स डिस्पैच
28 Jul 2021
म्यांमार
तस्वीर सौजन्य : mmciviliansnews/ट्विटर

लगभग छह महीने पहले हुए सैन्य तख्तापलट के बाद माइनिंग वर्कर्स फेडरेशन ऑफ म्यांमार (एमडब्ल्यूएफएम) से जुड़े कम से कम 4,800 खनिक मोनिवा टाउनशिप में हड़ताल पर हैं।

म्यांमार में कन्फेडरेशन ऑफ ट्रेड यूनियनों के अध्यक्ष मौंग मौंग के अनुसार, खनिकों की हड़ताल ने तख्तापलट के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के रूप में सैन्य शासन के राजस्व के हिस्से की प्रभावी ढंग से कटौती कर दी है। उन्होंने इंडस्ट्रीऑल (IndustriALL ) को बताया, “मैं अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से 4,800 बहादुर खनिकों के संघर्ष का समर्थन करने का आग्रह करता हूं। उनका प्रतिरोध बहुत हद तक अविभाजित अंतरराष्ट्रीय एकजुटता पर निर्भर है।"

इस महीने की शुरुआत में, म्यांमार के सबसे बड़े श्रमिक संघ, कन्फेडरेशन ऑफ ट्रेड यूनियन ऑफ म्यांमार ने भी इस सैन्य शासन के खिलाफ व्यापक आर्थिक प्रतिबंधों का आह्वान किया था। यूनियनों के गठबंधन ने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से अपने संसाधनों से इस शासन को अलग-थलग करने और मदद न करने का समर्थन करने का अनुरोध किया।

कर्मचारी सैन्य शासन को असंवैधानिक मानते हैं जिसके चलते हज़ारों लोगों ने म्यांमार से खनिजों के निर्यात को रोकने के लिए सविनय अवज्ञा आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लिया।

इस हड़ताल में शामिल खनिक वानबाओ माइनिंग कॉपर, म्यांमार यांग त्से कॉपर, पे पॉक औक्शिन और साइनोहाइड्रो पावर चाइना में काम कर रहे हैं। इनमें से दो कंपनियों म्यांमार यांग त्से और वानबाओ माइनिंग कॉपर का सैन्य-स्वामित्व वाली म्यांमार इकोनॉमिक होल्डिंग लिमिटेड के साथ रेवेन्यू-शेयरिंग समझौता है।

इन खनिकों ने म्यांमार में खतरनाक कामकाजी परिस्थितियों और कम वेतन पर भी चिंता जताई है। कर्मचारियों के रहन-सहन की स्थिति को पहले अंतरराष्ट्रीय श्रमिक संघों द्वारा घटिया करार दिया गया है।

जब से सेना ने तख्तापलट किया है तब से 900 से अधिक प्रदर्शनकारी मारे गए हैं जिसमें एमडब्ल्यूएफएम के सदस्य चान म्याये क्याव शामिल हैं, जबकि 10,000 अन्य लोगों को सेना ने हिरासत में लिया है। प्रदर्शनकारियों पर प्रत्यक्ष हिंसा के अलावा देश में करीब 250,000 लोग आंतरिक रूप से विस्थापित हुए हैं।

26 जुलाई को ग्लोबल यूनियन इंडस्ट्रीऑल (Global Union IndustriALL) ने एक रिपोर्ट में बहुराष्ट्रीय ब्रांडों से "म्यांमार में मानव और श्रम अधिकारों के लिए गरिमा सुनिश्चित करने" का आह्वान किया। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि उन्होंने अपने सहयोगियों को वैश्विक स्ट्राइक फंड में योगदान करने के लिए लामबंद किया है और अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) में सैन्य शासन की वैधता को चुनौती देने के लिए अन्य वैश्विक संघों के साथ काम किया है।

Myanmar
Mine Workers
mine workers strike myanmar

Related Stories

भारत के कर्तव्यों का उल्लंघन है रोहिंग्या शरणार्थियों की हिरासत और उनका निर्वासन

कैसे सैन्य शासन के विरोध ने म्यांमार को 2021 के तख़्तापलट के बाद से बदल दिया है

तख़्तापल्ट का एक वर्ष: म्यांमार का लोकतंत्र समर्थक प्रतिरोध आशाजनक, लेकिन अंतरराष्ट्रीय एकजुटता डगमग

म्यांमार के प्रति भारतीय विदेश नीति अब भी अस्पष्ट बनी हुई है

म्यांमार की पुरानी रिपोर्ट कोलकाता में रोहिंग्या मुसलमानों द्वारा हिंदुओं की हत्या के नाम पर शेयर की

म्यांमार के नयपीडाव में सैन्य छापेमारी में 31 लोग मारे गए

रोहिंग्या कैंप: आग लगने के बाद अब क्या हैं हालात

दिल्ली के इकलौते रोहिंग्या कैंप में बार-बार आग लगने से उठते सवाल

सुप्रीम कोर्ट का रोहिंग्या मुसलमानों को वापस भेजने का फ़ैसला कितना मानवीय?

हिरासत में लिए गए रोहिंग्याओं को निर्धारित प्रक्रिया के बिना म्यांमा प्रत्यर्पित नहीं किया जायेगा:सुप्रीम कोर्ट


बाकी खबरें

  • Iran
    प्रबीर पुरकायस्थ
    ईरान नाभिकीय सौदे में दोबारा प्राण फूंकना मुमकिन तो है पर यह आसान नहीं होगा
    21 Feb 2022
    वाशिंगटन की मूर्खता सबसे कठोर परमाणु समझौते से बाहर निकलना था, जिस पर कोई देश भी सहमत हो सकता था। ईरान अभी भी उन पुरानी शर्तों में से अधिकांश को स्वीकार कर सकता है, लेकिन जो कुछ उन्नत क्षमताएं इसने…
  • Newsletter
    ट्राईकोंटिनेंटल : सामाजिक शोध संस्थान
    इस साल रेड बुक्स डे (21 फ़रवरी) पर आप कौन-सी रेड बुक पढ़ेंगे?
    21 Feb 2022
    गोविंद पानसरे की हत्या के कुछ साल बाद, नयी दिल्ली स्थित लेफ़्टवर्ड बुक्स (एक प्रकाशन संस्थान) ने रेड बुक्स डे पर विचार करना शुरू किया। एक ऐसा दिन जब परिवर्तनवादी किताबों और उन्हें तैयार करने वाले…
  • vp
    न्यूज़क्लिक टीम
    क्यों थे वी.पी सिंह गठबंधन की सरकार के मज़बूत स्तंभ
    20 Feb 2022
    'इतिहास के पन्ने मेरी नज़र से' के इस अंग में नीलांजन बात करते हैं वरिष्ठ पत्रकार देबाशीष मुखर्जी से। देबाशीष ने हाल ही में ही वी पी सिंह पर एक किताब लिखी है. उन्होंने सिंह, गठबंधन सरकार और उसके महत्व…
  • punjab
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    जनादेश 2022: पंजाब चुनाव में दिखे कई रंग, अगली सरकार ईवीएम में बंद
    20 Feb 2022
    पंजाब विधानसभा चुनाव के लिए शाम पांच बजे तक 63 प्रतिशत से अधिक मतदान दर्ज किया गया। अंतिम आंकड़ों का इंतज़ार है।
  • up elections
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    जनादेश 2022:  तीसरे चरण की 59 सीटों के साथ यूपी की 172 सीटों का भविष्य ईवीएम में लॉक
    20 Feb 2022
    निर्वाचन आयोग की ओर से अभी शाम 5 बजे तक के आंकड़े जारी किए हैं। जिसके अनुसार शाम 5 बजे तक कुल औसतन मतदान 57.58% रहा। इनमें ललितपुर में सबसे ज़्यादा 67.38 प्रतिशत वोट पड़े जबकि सबसे कम कानपुर नगर में…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License