NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
कृषि
मज़दूर-किसान
भारत
राजनीति
किसान आंदोलन के 90 दिन: सरकार का अड़ियल रुख और किसानों के बुलंद हौसले
आंदोलन भीषण ठंड में शुरू हुआ था जो अब धीरे धीरे गर्मी के मौसम में प्रवेश कर गया है लेकिन किसान के हौसले आज भी बुलंद हैं। किसानों ने अपना आंदोलन तेज करने के लिए 23 से 27 फरवरी के बीच कई कार्यक्रम आयोजित करने की घोषणा की है।
मुकुंद झा
22 Feb 2021
किसान आंदोलन

किसान आंदोलन अपने तीसरे माह में प्रवेश कर गया है। यानी इसे 90 दिन हो गए हैं। ये आंदोलन दिल्ली की सीमाओं पर भीषण ठंड में शुरू हुआ था जो अब धीरे धीरे गर्मी के मौसम में प्रवेश कर रहा है लेकिन किसानों के हौसले आज भी बुलंद हैं। दूसरी तरफ सरकार आज भी अपने कृषि कानूनों के वापस न लेने के हट पर अड़ी हुई है। लेकिन किसान आंदोलन रोज नए आयाम गढ़ रहा है और अपने भविष्य के योजनाओ को और मज़बूती से रख रहा है। कल रविवार को पंजाब के बरनाला में किसानों ने एक बड़ी रैली की। इस रैली में बड़ी संख्या में मज़दूर वर्ग के लोग और महिलाएँ शामिल हुईं। इसी के साथ अब किसान संगठन आने वाले दिनों में राजस्थान के किसान बहुल क्षेत्रों में भी महपंचायतों को और तेज़ करने की तैयारी कर रहे हैं। जबकि संयुक्त मोर्चा ने भी अपने भविष्य के कार्यक्रम की घोषणा की है।

आंदोलन का बदलता स्वरूप, बरनाला की ‘‘किसान मजदूर एकता महारैली’ में उमड़ा जनसैलाब

ऐसा लगता है कि सरकार किसानों के हौसले की परीक्षा ले रही है और किसान भी हर अग्निपरीक्षा के लिए तैयार हैं। अब आंदोलन स्थलों की तस्वीर बदलने लगी है जहाँ पहले ठंड से बचने के इंतेज़ाम रजाई और आलाव जलाने के सामान दीखते थे अब वहां गर्मी से बचने के लिए कूलर पंखे दिख रहे हैं। जबकि भीषण गर्मी और ताप से बचने के लिए फूस और चटाई की छत और दीवार तैयार की जा रहीं हैं। प्रदर्शन स्थल पर मौजूद किसान लगतार कह रहे हैं वो जब तक कानूनों की वापसी नहीं होगी वापस नहीं जाएंगे।

दूसरी तरफ भारतीय किसान यूनियन (एकता-उग्राहन) और पंजाब खेत मजदूर यूनियन ने साथ मिलकर पंजाब के बरनाला शहर में रविवार को ‘किसान मजदूर एकता महारैली’ की गई।

इस विशाल शक्ति प्रदर्शन के बाद किसान नेता और भारतीय किसान यूनियन (एकता-उग्राहन) के राष्ट्रीय अध्यक्ष जोगिंदर सिंह उग्राहन ने कहा कि ये इतिहास में पहली बार है जब फासीवादी और सांप्रदायिक सरकार को चुनौती देने के लिए भारत में इस तरह के बढ़े पैमाने का विरोध किया जा रहा हो।

उग्राहन ने रैली को ऐतिहासिक कहा। उग्राहन के अलावा, बलबीर सिंह राजेवाल, रुल्लू सिंह मनसा और सुखदेव सिंह सहित संयुक्त किसान मोर्चा के कई नेताओं ने भी रैली में भाग लिया।

'दिल्ली पुलिस अगर आपको गिरफ़्तार करने आती है तो उनका घेराव कीजिए'

कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन का समर्थन कर रहे लोगों को नोटिस जारी किए जाने का आरोप लगाते हुए बीकेयू नेता बलबीर सिंह राजेवाल ने रविवार को किसानों से कहा कि दिल्ली पुलिस के कर्मी अगर आपके गांवों में गिरफ्तारी करने आते हैं तो उनका शांतिपूर्वक घेराव कीजिए।

बीकेयू (राजेवाल) के नेता ने अमरिंदर सिंह नीत पंजाब सरकार से कहा कि राज्य पुलिस को दिल्ली पुलिस के साथ सहयोग नहीं करना चाहिए।

राजेवाल ने किसानों से कहा कि दिल्ली पुलिस अगर जांच में शामिल होने के लिए उन्हें नोटिस जारी करती है तो उन्हें उनके समक्ष पेश नहीं होना चाहिए और अगर दिल्ली पुलिस के जवान उनकी गिरफ्तारी करने आते हैं तो उनका शांतिपूर्वक घेराव कीजिए। दो दिन पहले हरियाणा बीकेयू के प्रमुख गुरनाम सिंह चढूनी ने इसी तरह की अपील की थी।

उन्होंने दावा किया कि केंद्र की नरेंद्र मोदी की सरकार किसान आंदोलन से डरी हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि जो लोग दिल्ली की सीमाओं के नजदीक प्रदर्शन स्थल पर ‘लंगर’ चला रहे हैं या किसानों का सहयोग कर रहे हैं उन्हें पुलिस नोटिस जारी कर रही है। राजेवाल ने कहा कि यह पंजाब सरकार के लिए ‘‘परीक्षा का समय है’’ जिसे राज्य पुलिस को कहना चाहिए कि वह दिल्ली पुलिस से सहयोग नहीं करे।

राजस्थान के किसान बहुल इलाकों में होगी कई किसान महापंचायत

केंद्रीय कृषि कानूनों के खिलाफ जारी आंदोलन के बीच अखिल भारतीय किसान सभा अगले हफ्ते राजस्थान के कृषि बहुल इलाकों में कई किसान महापंचायत आयोजित करने का निर्णय किया है, जिन्हें राकेश टिकैत और अमरा राम समेत कई किसान नेता संबोधित करेंगे।

अखिल भारतीय किसान सभा के एक प्रवक्ता के अनुसार प्रदेश में 22 फरवरी से 26 फरवरी तक लगातार कई किसान महापंचायतें की जाएंगी। उन्होंने बताया कि ऐसी पहली महापंचायत हनुमानगढ़ जिले के नोहर में 22 फरवरी को होगी। प्रवक्ता के अनुसार 23 फरवरी को सरदारशहर (चूरू) व सीकर में, 25 फरवरी को मेंहदीपुर बालाजी (दौसा) व 26 फरवरी को पदमपुर मंडी (गंगानगर) और घड़साना मंडी (गंगानगर) में ऐसी किसान महापंचायत होगी।

भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत भी इन महापंचायतों को संबोधित करेंगे। टिकैत ने ट्वीट किया,' किसान आंदोलन को धार देने व संयुक्त मोर्चा के नेताओं को सुनने के लिए आप भी शामिल अवश्य हो।'

ऑल इंडिया किसान सभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व पूर्व विधायक अमरा राम भी इन महापंचायतों को संबोधित करेंगे।

उल्लेखनीय है कि केंद्र के कृषि कानूनों के विरोध में राजस्थान से भी बड़ी संख्या में किसान भाग ले रहे हैं और अलवर के पास शाहजहांपुर बार्डर के साथ कई अन्य जगह पर लगातार धरने पर बैठे हैं।

किसानों ने आंदोलन तेज़ करने के लिए कई कार्यक्रमों की घोषणा की

केन्द्र के तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसानों ने अपना आंदोलन तेज करने के लिए 23 से 27 फरवरी के बीच कई कार्यक्रम आयोजित करने की रविवार को घोषणा की।

इस घोषणा से पहले सयुंक्त किसान मोर्चा की जनरल बॉडी की बैठक की गई जिसकी अध्यक्षता अखिल भारतीय किसान सभा के नेता इंदरजीत सिंह ने की और उन्होंने ही प्रेस वार्ता की शुरुआत की। सबसे पहले उन्होंने कीरती किसान यूनियन पंजाब के प्रधान दातार सिंह के निधन पर अफ़सोस व्यक्त किया और उन्हें एक बहादुर साथी बताया। उन्होंने कहा हम उनको क्रांतिकारी श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। दातार सिंह का किसान हितों में, विशेषकर इस आंदोलन में, योगदान अतुलनीय है।

उन्होंने यह भी कहा कि वे प्रदर्शन को लंबे समय तक चलाने के लिए जल्द ही नई रणनीति तैयार करेंगे।

प्रदर्शन की अगुवाई कर रहे संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि उनके प्रस्तावित कार्यक्रम के तहत 23 फरवरी को ‘पगड़ी संभाल दिवस’ और 24 फरवरी को ‘दमन विरोधी दिवस’ मनाया जाएगा और इस दौरान इस बात पर जोर दिया जाएगा कि किसानों का सम्मान किया जाए और उनके खिलाफ कोई ‘‘दमनकारी कार्रवाई’’ नहीं की जाए।

मोर्चा ने कहा कि 26 फरवरी को ‘युवा किसान दिवस’ और 27 फरवरी को ‘मजदूर किसान एकता दिवस’ मनाया जाएगा।

मोर्चो के नेता दर्शन पाल ने भी सरकार पर ‘‘दमन’’ का आरोप लगाया। उन्होंने बताया कि गणतंत्र दिवस पर राष्ट्रीय राजधानी में ‘ट्रैक्टर परेड’ के दौरान हुई हिंसा और तोड़फोड़ के मामले में दिल्ली पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए 122 लोगों में से 32 को जमानत मिल चुकी है।

सरकार अपने अड़ियल रुख पर कायम

लेकिन इन सबके बीच सरकार लगातार अपने अड़ियल रुख पर कायम है। वो लगातार इन नए विवादित कृषि कानूनों को किसान और कृषि हितैषी बताने में लगी है। रविवार को बीजेपी की राष्ट्रीय बैठक में प्रधानमंत्री के मौजूदगी में किसान कानूनों के समर्थन में एक प्रस्ताव पास किया गया। जबकि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में किसान आंदोलन से नुकसान होता देखे बीजेपी ने अपने बड़े जाट नेताओ को गांव जाने को कहा लेकिन वहां भी उन्हें किसान आईना दिखा रहे हैं। एक टीवी चैनल के रिपोर्ट के मुताबिक रविवार को केंद्रीय मंत्री और बीजेपी के नेता संजीव बालियान ने तीन गांवों में जाकर खाप के बड़े नेताओं से मिलने का कार्यक्रम बनाया था। लेकिन उन्हें इस दौरान भारी विरोध का सामना करना पड़ा। शामली के एक गांव में तो उन्हें घुसने नहीं दिया गया जबकि एक गांव में जहां उनका कार्यक्रम तय था वहां के भी प्रधान, उनका स्वागत करने के बजाय आंदोलन में शामिल होने के लिए दिल्ली बॉर्डर पर आए हुए थे। एक गांव में लोग उनसे मिले तो उन्होंने भी उनकी बात सुनने से अधिक किसानों की समस्या उन्हें बताई और कहा इसे सरकार के मुखिया तक पहुंचा दें।

इस सबको देखकर ऐसा लग रहा है कि सरकार अभी भी किसान आंदोलन को समझने में नाकाम है। वो लगातार इसे एक छोटे दायरे में देख रही है जबकि किसान लगातार अपने आंदोलन को तेज़ कर रहे हैं और कभी चक्का जाम, कभी रेल रोको के माध्यम से शक्ति प्रदर्शन कर रहे हैं।

(समाचार एजेंसी भाषा इनपुट के साथ)

farmers protest
kisan andolan
MSP
Farmers vs Government
Modi government
Narendra Singh Tomar
Narendra modi
BJP
agricultural crises
delhi police

Related Stories

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

छात्र संसद: "नई शिक्षा नीति आधुनिक युग में एकलव्य बनाने वाला दस्तावेज़"

मूसेवाला की हत्या को लेकर ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन, कांग्रेस ने इसे ‘राजनीतिक हत्या’ बताया

दलितों पर बढ़ते अत्याचार, मोदी सरकार का न्यू नॉर्मल!

बिहार : नीतीश सरकार के ‘बुलडोज़र राज’ के खिलाफ गरीबों ने खोला मोर्चा!   

आशा कार्यकर्ताओं को मिला 'ग्लोबल हेल्थ लीडर्स अवार्ड’  लेकिन उचित वेतन कब मिलेगा?

दिल्ली : पांच महीने से वेतन व पेंशन न मिलने से आर्थिक तंगी से जूझ रहे शिक्षकों ने किया प्रदर्शन

राम सेना और बजरंग दल को आतंकी संगठन घोषित करने की किसान संगठनों की मांग

विशाखापट्टनम इस्पात संयंत्र के निजीकरण के खिलाफ़ श्रमिकों का संघर्ष जारी, 15 महीने से कर रहे प्रदर्शन

आईपीओ लॉन्च के विरोध में एलआईसी कर्मचारियों ने की हड़ताल


बाकी खबरें

  • ambedkar
    न्यूज़क्लिक टीम
    जनतंत्र पर हिन्दुत्व का बुल्डोजर और अंबेडकर की भविष्यवाणी
    13 Apr 2022
    देश में संसद है, संविधान है, न्यायालय और मीडिया है। लेकिन लोगों पर सत्ता का बुल्डोजर बेधड़क चल रहा है। हिन्दुत्व की राजनीति और सत्ता ने राष्ट्र और संविधान के समक्ष अभूतपूर्व संकट पैदा कर दिया है।…
  • THAKRE
    रवि शंकर दुबे
    अब राज ठाकरे के जरिये ‘लाउडस्पीकर’ की राजनीति
    13 Apr 2022
    महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के नेता राज ठाकरे ने महाराष्ट्र सरकार को अल्टीमेटम दिया है कि अगर ईद से पहले लाउडस्पीकर नहीं हटे तो तेज़ आवाज़ में हनुमान चालीसा बजाएंगे।
  • inflation
    अजय कुमार
    महंगाई 17 महीने के सबसे ऊंचे स्तर पर, लगातार तीसरे महीने पार हुई RBI की ऊपरी सीमा
    13 Apr 2022
    सरकारी आंकड़े बता रहे हैं कि खुदरा महंगाई दर पिछले 17 महीने के सबसे उच्च स्तर पर पहुंच चुकी है। पिछले तीन महीने से महंगाई की दर लगातार 6 फीसदी से ऊपर रही है। मार्च महीने में बढ़कर 6.95 प्रतिशत पर…
  • akhilesh
    न्यूज़क्लिक टीम
    आज़म खान-शिवपाल का साथ छोड़ना! क्या उबर पाएंगे अखिलेश यादव?
    13 Apr 2022
    बोल के लब आज़ाद हैं तेरे के आज के एपिसोड में अभिसार शर्मा बात करेंगे अखिलेश यादव के सामने आने वाली गंभीर राजनीतिक चुनौती एवं भाजपा कर्नाटक के मंत्री, के एस ईश्वरप्पा की जिनपर एक कांट्रेक्टर की…
  • स्मार्ट सिटी मिशनः प्रोजेक्ट कैटेगरी में चयनित 34 शहरों में बिहार के एक भी शहर नहीं
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    स्मार्ट सिटी मिशनः प्रोजेक्ट कैटेगरी में चयनित 34 शहरों में बिहार के एक भी शहर नहीं
    13 Apr 2022
    पिछले दो साल के दौरान प्रोजेक्ट कैटेगरी में चयनित हुए 34 शहरों में राज्य की राजधानी पटना के साथ-साथ राज्य के अन्य तीन शहर भागलपुर, मुज़फ़्फ़रपुर और बिहारशरीफ़ का नाम नहीं है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License