NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
अफ़ग़ानिस्तान की घटनाओं पर एक नज़र
काबुल छोडने से पहले, प्रतिशोधी अमेरिका ने काबुल हवाई अड्डे का "ग़ैरफ़ौजीकरण" कर दिया और साथ ही इसने सी-रैम सिस्टम को भी निष्क्रिय कर दिया जो रॉकेट हमलों के ख़िलाफ़ हवाई रक्षा प्रदान करते हैं।
एम. के. भद्रकुमार
03 Sep 2021
Translated by महेश कुमार
अफ़ग़ानिस्तान की घटनाओं पर एक नज़र

30 अगस्त को जनरल केनेथ एफ मैकेंजी जूनियर, जो यूएस सेंट्रल कमांड के कमांडर भी हैं और एंटनी ब्लिंकन, सेक्रेटरी ऑफ स्टेट ने अफ़ग़ानिस्तान पर एक के बाद एक प्रेस ब्रीफिंग की जिसमें उन्होने दर्शाया कि विश्व की महाशक्ति बुरी तरह से आहत हुई है और जोकि कड़वा सच है लेकिन वह प्रतिशोध लेने की इच्छा भी रखता है। जो अपने में एक बुरी खबर है।

प्रेस ब्रीफिंग के दौरान जनरल मैकेंजी ने कहा: "तालिबान बहुत ही व्यावहारिक और काम से काम रखने वाला साबित हुआ है ... क्योंकि वास्तव में तालिबन हमारे लिए बहुत मददगार और उपयोगी रहा तब जब हम अफ़ग़ानिस्तान में अपने ऑपरेशन को बंद कर रहे थे"। लेकिन बावजूद इसके, अमेरिका ने तालिबान के साथ "देश से बाहर निकलने की रणनीति" का सही समय भी साझा नहीं किया। न ही इस दौरान "क्या कुछ हुआ पर कोई चर्चा" हुई थी।

लेकिन तालिबान द्वारा निर्धारित समय सीमा 31 अगस्त तक अमरीका के लिए असैन्य और सैन्य अमेरिकी कर्मियों के पांच भरे विमान के जरिए अफ़ग़ानिस्तान से कब्जे को खत्म करना एक दुर्लभ घटना बन गई थी! "हमेशा के लिए युद्ध" को समाप्त करने का यह एक विचित्र तरीका साबित हुआ है!

इसमें एक कड़वाहट दिखाई दे रही है। जाने से पहले, अमेरिका ने काबुल हवाई अड्डे का "गैर-फ़ौजीकरण" कर दिया। यही नहीं, अमेरिका ने सी-रैम सिस्टम को भी निष्क्रिय कर दिया जो रॉकेट हमलों के खिलाफ हवाई अड्डे को हवाई रक्षा प्रदान करता था - "ताकि उनका फिर कभी इस्तेमाल न किया जा सके" - और कुछ सात दर्जन एमआरएपी (माइन-रेसिस्टेंट एम्बुश प्रोटेक्टेड लाइट टैक्टिकल व्हीकल) - "जिनका फिर कभी किसी के द्वारा इस्तेमाल न किया सके" – के साथ ही 27 हमवीज सामरिक वाहन - "जिसे फिर कभी नहीं चलाया जा सकेगा को भी निष्क्रिय कर दिया था।"

"और इसके अलावा, एचकेआईए (हामिद करजई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे) के रैम्प पर कुल 73 विमान खड़े हैं। वे (अफ़ग़ान) विमान हमारे जाने के बाद फिर कभी नहीं उड़ेंगे। उन्हे कभी भी किसी के द्वारा संचालित नहीं किया जा सकेगा ... निश्चित रूप से वे फिर कभी उड़ान भरने में सक्षम नहीं होंगे," जनरल मैकेंजी ने प्रैस ब्रीफिंग के दौरान दावा किया।

याग झुलसी हुई नीति क्यों? यह एक बौखलाहट को दिखाती है। लेकिन चार सितारा जनरल से किसी ने यह नहीं पूछा कि आखिर वह खुद से इतना खुश क्यों दिखा रहा है। ज़ाहिर है, अमेरिका तालिबान को संभावित दुश्मन मानता है और हर संभव हद तक उसने इसे विकृत करने की कोशिश की है।

और यह तब है जब, जनरल मैकेंजी ने स्वीकार किया कि आईएसआईएस "एक बहुत ही ख़तरनाक ताकत है और मुझे लगता है कि हमारे आकलन के हिसाब से अफ़ग़ानिस्तान में शायद कम से कम 2,000 कट्टर आईएसआईएस आतंकवादी हैं ... और मुझे लगता है कि आने वालों दिनों में तालिबान के लिए यह एक बड़ी चुनौती होगी।"

दूसरी ओर, जनरल ने जोर देकर यह भी कहाकि, "हमें (काबुल) हवाई अड्डे को जल्द से जल्द चालू करने की जरूरत है ताकि नागरिकों की आवाजाही के लिए हवाईअड्डा काम कर सके - आप जानते हैं, नागरिक आवाजाही के लिए ये कितना जरूरी है। इसलिए हम वह सब कुछ करने जा रहे हैं जो हम कर सकते हैं – जिससे मदद मिल सके।"

इसलिए, अमेरिका ने हवाईअड्डे के संचालन के लिए जो आवश्यक उपकरण जैसे कि फायर ट्रक और फ्रंट-एंड लोडर को नहीं हटाया ताकि काबुल हवाई अड्डे को "जितनी जल्दी हो सके" चालू किया जा सके और "अफ़ग़ान तथा फंसे हुए विदेशी लोगों को वहाँ से बाहर निकाला जा सके। 

आपको यह जानने के लिए जनरल होने की जरूरत नहीं है कि जब तक काबुल हवाई अड्डे पर रॉकेट हमलों का खतरा है, तब तक कोई भी नागरिक एयरलाइन वहां से उड़ान नहीं भर सकती है। फिर भी, अमेरिका ने हवाई अड्डे का "विसैन्यीकरण" किया!

सच का आभास होना एक बात है लेकिन इस मामले का तथ्य यह है कि अमेरिका को किसी एक विद्रोही बल के हाथों अपमानित होना पड़े और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वह एक “हारी हुई ताक़त” नज़र आए इसलिए वह तालिबान को माफ़ करने के मूड में नहीं है। अपनी सेना के बल पर अमरीका तालिबान के जीवन को नरक बनाने के लिए जो कुछ भी जरूरी होगा, वह सब करेगा। यानि मेरे बाद सिर्फ तबाही!

जनरल मैकेंजी ने तालिबान के साथ अमेरिका का भविष्य में कैसा व्यवहार होगा, पर चर्चा करने से इनकार कर दिया। वह टालमटोल करता रहा और कहा: “मैं अभी यह नहीं देख सकता कि हमारे (अमेरिका-तालिबान) के बीच भविष्य का समन्वय या रिश्ता किस तरह का होग। मैं फिलहाल इसे कुछ भविष्य की तारीखों पर छोड़ देता हूं। मैं बस इतना ही कहूंगा कि वे हमें बाहर निकालना चाहते थे; जबकि हम अपने लोगों के साथ और अपने दोस्तों और भागीदारों के साथ बाहर निकलना चाहते थे। और इसलिए उस कम समय के लिए, हमारे मुद्दे - दुनिया के बारे में हमारा दृष्टिकोण एक जैसा था, यह वही था जो होना चाहिए था।"

उनका कड़वा स्वर खुद में स्पष्ट था। और उनके चेहरे पर दुर्भावनापूर्ण खुशी भी नज़र आ रही थी: “मुझे विश्वास है कि तालिबान के भीतर आईएसआईएस-के लड़ाकों की बड़ी फौज है। और उन्होंने ऐसे बहुत से लड़ाकों को जेलों से बाहर जाने दिया, इसलिए अब वे जो बो रहें हैं आगे चलकर उसे ही काटेंगे”

"मुझे लगता है कि - आतंकवाद का खतरा बहुत अधिक बढ़ने वाला है। और मैं इसे कम करके नहीं आंकना चाहता हूं।" गेम प्लान यह है कि एक वक़्त आएगा जब तालिबान को घुटनों के बल रेंगेगा और काबुल हवाई अड्डे के संचालन के लिए नाटो से मदद माँगेगा।

अमेरिका से अफ़ग़ान संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करने की संभावना नहीं की जा सकती है। चीन, रूस और ईरान को अपना नियंत्रण बढ़ाने के लिए एक रणनीतिक केंद्र के रूप में अफ़ग़ानिस्तान का अत्यधिक महत्व है। काउंटर-इंटेलिजेंस और आईएसआईएस आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई के नाम पर, हमेशा हस्तक्षेप की गुंजाइश होती है चाहे तालिबान सरकार इसे मंजूरी दे या नहीं। साथ ही, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का 30 अगस्त का प्रस्ताव तालिबान पर ढेर सारे दबाव बनाने का काम करता है - हालांकि बहस से पता चलता है कि इस मामले में रूस और चीन पहले से ही सतर्क हैं।

अफ़ग़ान राजनीति में गैर-तालिबानी पक्ष के बीच अमेरिका का बहुत प्रभाव है। जब तक तालिबान अमेरिका की इच्छा के आगे नहीं झुकता है, तब तक वाशिंगटन के पास तालिबान के भीतर के गुटों सहित, एक दूसरे के खिलाफ अफ़ग़ान गुटों में खेलने का बड़ा विकल्प बाकी है। अमेरिका के अनुमान में, तालिबान को देश में प्रभुत्व स्थापित करने के लिए एक लंबा रास्ता तय करना है। कुल मिलाकर, जनरल मैकेंज़ी तालिबान के भविष्य के बारे में संशय लगा रहे थे।

 निःसंदेह अमेरिकी खुफिया तंत्र तालिबान में घुस चुका है और संभवत: वह तालिबान को छिन्न-भिन्न करने में भी सक्षम है। यह कहना काफी होगा कि अगर धक्का देने के लिए धक्का दिया जाता है, तो अमेरिका अफ़ग़ानिस्तान को प्रभावी ढंग से अस्थिर रखने के लिए सीरिया जैसी स्थिति पैदा कर सकता है ताकि बेल्ट एंड रोड के लिए चीन की योजनाओं को विफल किया जा  सके और देश के विशाल खनिज संपदा जिसका कि 3 खरब डॉलर होने का अनुमान है का दोहन किया जा सके। 

सीरियाई पैटर्न का अर्थ है स्थानीय लोगों के साथ परदे के पीछे काम करना। पंजशीर के  विद्रोहियों के साथ पश्चिमी देशों के संबंध मजबूत है। अमरुल्ला सालेह को 1990 के दशक में सीआईए ने प्रशिक्षित किया था। अहमद मसूद सैंडहर्स्ट और किंग्स कॉलेज, लंदन का एक उत्पाद है (जोकि "प्रतिभा खोज" के मामले में सक्षम है।) मसूद ने वास्तव में तालिबान से लड़ने के लिए पश्चिमी मदद मांगी है।

30 अगस्त की अपनी प्रेस ब्रीफिंग में, ब्लिंकन काफी कुंद दिख रहे थे - "हालांकि हमें तालिबान से उम्मीदें हैं, इसका मतलब यह नहीं है कि हम तालिबान पर भरोसा करते हैं ... आगे चलकर, काबुल में तालिबान के नेतृत्व वाली सरकार के साथ किसी भी तरह का जुड़ाव एक बात से प्रेरित होगा: कि हमारे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय हित किस में हैं।"

अमेरिका तालिबान पर दबाव बनाने के लिए जरूरी बल प्रयोग कर रहा है। ब्लिंकन के शब्दों में, "आज मैं यहां एक मुख्य बात बताना चाहता हूं कि अफ़ग़ानिस्तान में अमेरिका का काम जारी है। हमारे पास आगे की योजना है। हम उसे अमल में ला रहे हैं।"

नहीं, आज की तारीख़ में "वियतनाम सिंड्रोम" की कोई पुनरावृत्ति नहीं होने वाली है।

एम.के. भद्रकुमार एक पूर्व राजनयिक हैं। वे उज़्बेकिस्तान और तुर्की में भारत के राजदूत थे। व्यक्त विचार व्यक्तिगत हैं।

सौजन्य: इंडियन पंचलाईन

इस लेख को मूल अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें।

Reflections on Events in Afghanistan

ISIS Middle East
TALIBAN
Afghanistan
US
China
Russia
IRAN
NATO

Related Stories

बाइडेन ने यूक्रेन पर अपने नैरेटिव में किया बदलाव

डेनमार्क: प्रगतिशील ताकतों का आगामी यूरोपीय संघ के सैन्य गठबंधन से बाहर बने रहने पर जनमत संग्रह में ‘न’ के पक्ष में वोट का आह्वान

रूसी तेल आयात पर प्रतिबंध लगाने के समझौते पर पहुंचा यूरोपीय संघ

यूक्रेन: यूरोप द्वारा रूस पर प्रतिबंध लगाना इसलिए आसान नहीं है! 

पश्चिम बैन हटाए तो रूस वैश्विक खाद्य संकट कम करने में मदद करेगा: पुतिन

और फिर अचानक कोई साम्राज्य नहीं बचा था

हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शक्ति संतुलन में हो रहा क्रांतिकारी बदलाव

ईरानी नागरिक एक बार फिर सड़कों पर, आम ज़रूरत की वस्तुओं के दामों में अचानक 300% की वृद्धि

90 दिनों के युद्ध के बाद का क्या हैं यूक्रेन के हालात

हिंद-प्रशांत क्षेत्र में आईपीईएफ़ पर दूसरे देशों को साथ लाना कठिन कार्य होगा


बाकी खबरें

  • loksabha
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    संसद में चर्चा होना देशहित में- मोदी, लेकिन कृषि क़ानून निरस्त करने का बिल बिना चर्चा के ही पास!
    29 Nov 2021
    सरकार की कथनी-करनी का फ़र्क़ एक बार फिर तुरंत देश के सामने आ गया। आज सुबह संसद सत्र शुरू होने से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने मीडिया से कहा कि संसद में चर्चा होना देशहित में है और सरकार हर सवाल का जवाब…
  • TN
    श्रुति एमडी
    तमिलनाडु इस सप्ताह: राज्य सरकार ने सस्ते दामों पर बेचे टमाटर, श्रमिकों ने किसानों के प्रति दिखाई एकजुटता 
    29 Nov 2021
    इस सप्ताह, तमिलनाडु ने 52,549 करोड़ रूपये की 82 औद्योगिक परियोजनाओं के लिए सभी क्षेत्रों के प्रमुख उद्योगपतियों के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किये। इसके साथ ही सरकार ने थूथुकड़ी, नागापट्टिनम और…
  • alok dhanwa
    अनिल अंशुमन
    ‘जनता का आदमी’ के नाम ‘जनकवि नागार्जुन स्मृति सम्मान’: नए तेवर के कवि आलोक धन्वा हुए सम्मानित
    29 Nov 2021
    यह सम्मान 2020 में ही दिल्ली में नागार्जुन जी के स्मृति दिवस पर दिया जाना था। लेकिन कोरोना महामारी के कारण यह संभव नहीं हो सका। इसलिए महामारी प्रकोप के कम होते ही यह सम्मान आलोक धन्वा के प्रिय शहर…
  • Assam
    संदीपन तालुकदार
    असम: नागांव ज़िले में स्वास्थ्य ढांचा उपलब्ध होने के बावजूद कोविड मरीज़ों को स्थानांतरित किया गया
    29 Nov 2021
    महामारी ने स्वास्थ्य सुविधा संकट की परतें खोलकर रख दी हैं और बताया कि कैसे एम्स की सुविधा होने पर नागांव बेहतर तरीक़े से महामारी का सामना कर सकता था।
  • Bahgul River
    तारिक़ अनवर
    यूपी के इस गाँव के लोग हर साल बांध बना कर तोड़ते हैं, जानिए क्यों?
    29 Nov 2021
    हालांकि सरकार ने पिछले साल एक स्थायी जलाशय बनाने के लिए 57.46 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत की थी, लेकिन इस परियोजना को अभी तक अमल में नहीं लाया गया है और इस साल भी मिट्टी से बांध बनाने की प्रक्रिया…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License