NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
शिक्षा
भारत
राजनीति
लखनऊ विश्वविद्यालय में एबीवीपी का हंगामा: प्रोफ़ेसर और दलित चिंतक रविकांत चंदन का घेराव, धमकी
एक निजी वेब पोर्टल पर काशी विश्वनाथ मंदिर को लेकर की गई एक टिप्पणी के विरोध में एबीवीपी ने मंगलवार को प्रोफ़ेसर रविकांत के ख़िलाफ़ मोर्चा खोल दिया। उन्हें विश्वविद्यालय परिसर में घेर लिया और आपत्तिजनक नारेबाज़ी की।
असद रिज़वी
10 May 2022
Lucknow University

हिन्दुत्ववादी ताक़तें असहमति और प्रतिरोध का कोई स्वर बर्दाश्त नहीं कर पा रही हैं। ऐसा ही कुछ आज देखने को मिला लखनऊ विश्वविद्यालय में जहां काशी विश्वनाथ मंदिर को लेकर की गई एक टिप्पणी के विरोध में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने एक प्रोफ़ेसर के ख़िलाफ़ मोर्चा खोल दिया। उन्हें विश्वविद्यालय परिसर में घेर लिया और आपत्तिजनक नारेबाज़ी की।

एबीवीपी के छात्रों के हंगामे के बाद  विश्वविद्यालय परिसर में तनाव हैं। प्रशासन द्वारा एहतियात के तौर पर परिसर में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। आरोप है कि प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने प्रॉक्टर ऑफिस में तोड़-फोड़ भी की।  

दरअसल विश्वविद्यालय में हिंदी विभाग के प्रोफ़ेसर और दलित चिंतक–विचारक रविकांत चन्दन ने एक निजी वेब पोर्टल पर चर्चा में भाग लेते हुए वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर और मुग़ल बादशाह औरंगजेब के इतिहास के बारे में एक टिप्पणी की थी। यह टिप्पणी एबीवीपी को बहुत नागवार गुजरी। एबीवीपी के अनुसार यह टिप्पणी बहुसंख्यक हिन्दू समाज के “ऋषि-मुनियों” के खिलाफ थी।

मंगलवार सुबह जब प्रोफ़ेसर रविकांत चन्दन अपने विभाग में पढ़ा रहे थे। उसी समय विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर उनके खिलाफ प्रदर्शन शुरू हो गया। प्रोफेसर रविकांत की बर्खास्तगी की मांग करते हुए एबीवीपी के छात्र पुलिस की मौजूदगी में हिन्दी विभाग के बहार आ गए। यह देखकर प्रोफेसर रविकांत अपनी कक्षा ख़त्म करने के बाद सीधे  प्रॉक्टर ऑफिस पहुंच गए।

छात्रों की भीड़ को जब यह खबर मिली तो वह  प्रॉक्टर ऑफिस के बहार जमा होकर नारेबाज़ी करने लगे। एबीवीपी छात्रों द्वारा विश्वविद्यालय परिसर में आपत्तिजनक नारे जैसे “देश के गद्दारों को-गोली मारो …. को” लगाए गए। आरोप है कि एबीवीपी छात्र जिनके साथ कहा जा रहा है की कुछ बाहरी लोग भी शामिल थे प्रॉक्टर के ऑफिस में घुस गए और तोड़फोड़ करने लगे। प्रशासन ने बड़ी मुश्किल से प्रोफेसर रविकांत चन्दन को बचाया। जबकि प्रोफेसर रविकांत चन्दन ने अभिवक्ति की आज़ादी का हवाला भी दिया और अपनी  टिप्पणी का संदर्भ भी छात्रों को बताया।

प्रोफेसर रविकांत चन्दन से नाराज़ एबीवीपी छात्र ने सिर्फ उनके खिलाफ बल्कि वामपंथी विचारधारा और कांग्रेस के छात्र संगठन नेशनल स्टूडेंट यूनियन ऑफ इंडिया के खिलाफ भी नारे लगा रहे थे।

एबीवीपी के सौम्या श्वेतांशु ने प्रोफ़ेसर रविकांत चन्दन के प्रति आपत्तिजनक टिप्पणी करते हुए कहा कि हम इनको अध्यापक नहीं मानते हैं। उन्होंने कहा की एबीवीपी छात्र मांग करते हैं की प्रोफेसर रविकांत चन्दन हमसे माफ़ी मांगे और विश्वविद्यालय उनको बर्खास्त करे, अन्यथा आन्दोलन जारी रहेगा। 

न्यूज़क्लिक ने जब प्रोफेसर रविकांत चन्दन से संपर्क किया तो उन्होंने कहा की प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने उनके साथ अभद्र व्यवहार किया। उनके अनुसार छात्र उनको मरना चाहते थे। प्रोफेसर रविकांत चन्दन ने कहा कि एबीवीपी ने जो वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर पोस्ट की है, वह “एडिटेड” है.। उनके अनुसार टिप्पणी का एक हिस्सा काट कर सोशल मीडिया पर भेजा जा रहा है ताकि  विश्वविद्यालय का माहौल ख़राब किया जा सके।

उन्होंने इस बारे में एक वीडियो भी जारी किया।

हिंदी विभाग में प्रोफेसर रविकांत चन्दन ने बताया कि उनकी टिप्पणी “सीता रमैया की किताब ‘फेदर्स एंड स्टोन्स” के हवाले से थी। उन्होंने कहा कि उन्हें एक दलित होने की वजह से प्रताड़ित किया जा रहा है।

फ़िलहाल प्रोफेसर रविकांत चन्दन के घर के बाहर पुलिस तैनात कर दी गई है। उन्होंने कहा कि वह विश्वविद्यालय  में आपत्तिजनक नारे और तोड़फोड़ करने लगाने वाले छात्रों की शिकायत प्रशासन से करेंगे।

वहीं विश्वविद्यालय का कहना है की सारा मामला उनके संज्ञान में आ चुका है। प्रोफेसर रविकांत चन्दन ने  स्वयं छात्रों से बात कर उनको अपनी टिप्पणी का  संदर्भ-हवाला बताया है। विश्वविद्यालय की तरफ से बात करते हुए डॉ. दुर्गेश श्रीवास्तव ने कहा की आज हुई हिंसा की जांच की जाएगी और दोषियों के खिलाफ अनुशासनात्मक व कानूनी कार्रवाई की जाएगी। 

आल इंडिया स्टूडेंट एसोसिएशन (आइसा) के प्रदेश अध्यक्ष आयुष ने इस घटना की निंदा करते हुए कहा है की आज एबीवीपी ने गुरु-शिष्य की मर्यादा पर हमला किया है। आयुष का कहना की जिस तरह एबीवीपी ने दिल्ली विश्वविद्यालय, जेएनयू और जामिया में हिंसा का माहौल बनाया है वैसे ही  लखनऊ विश्वविद्यालय में बनाने का प्रयास किया जा रहा है। वही  नेशनल स्टूडेंट यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) की सदफ़ तसनीम का कहना है की अफ़सोस की बात है कि विश्वविद्यालय परिसर में पुलिस-प्रशसन की मौजूदगी में एबीवीपी ने हिंसा की और हिंसक छात्रों के खिलाफ कोई करवाई नहीं हुई है। सदफ़ तसनीम ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ  से सवाल किया क्या वह लखनऊ विश्वविद्यालय की संपत्ति का नुकसान करने वालों को वसूली का नोटिस भेजेगे ?

लखनऊ की सिविल सोसायटी और अन्य लेखक-बुद्धिजीवियों ने इस घटना की कड़ी निंदा की है और एक साझा बयान जारी किया है। बयान में घटना का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि—

हम सामाजिक कार्यकर्ता, लेखक, रंगकर्मी और नागरिक लखनऊ विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में कार्यरत शिक्षक डॉक्टर रविकान्त के विरुद्ध कुछ युवाओं द्वारा किये गये प्रदर्शन की भर्त्सना करते हैं। यह विचारों की आज़ादी का ही मामला नहीं है, विद्वानों के विचारों को बहस में सामने लाने के अधिकार का भी मामला है।

रविकान्त जी ने ज्ञानवापी पर आयोजित एक टी वी परिचर्चा में पट्टाभि सीतारमैय्या जी के लेखन को उधृत किया था। उसके विपरीत विचार भी परिचर्चा में आये। ऐसी स्थिति में रविकान्त जी को घेरना और उनके ख़िलाफ़ नारे लगाने का कोई औचित्य नहीं बनता। विचारों के क्षेत्र में बहस और विचारों का आदान प्रदान ही शोभा देता है, धमकी या डराना नहीं।

किसी भी विषय पर बहस होने पर विभिन्न विचार और व्याख्यायें स्वाभाविक भी हैं और स्वागत योग्य भी। विचारों का मतभेद किसी भी बहस का ज़रूरी हिस्सा है। इसे दबाने की कोशिश और इसके प्रति असहनशीलता दुर्भाग्यपूर्ण है।

 

इस बयान पर हस्ताक्षर करने वालों में शामिल हैं—

रूप रेखा वर्मा

डॉक्टर रमेश दीक्षित

वंदना मिश्र

मधु गर्ग

मीना सिंह

वीरेंद्र यादव

रामदत्त

शहीरा नईम

तनवीर अख़्तर

नलिन रंजन सिंह

नवीन जोशी

अतहर हुसैन

लाल बहादुर सिंह

आशा मिश्रा

शुभम तिवारी

ममता यादव

विष्णु शुक्ला

आलोक जोशी

कौशल किशोर

दुर्गेश कुमार चौधरी

नासिरा शर्मा

असद ज़ैदी

अजय, जनज्वार

कात्यायनी

रफ़त फ़ातिमा

अरुंधति धूरू

चंद्रशेखर

नदीम हसनैन

मीना काला

सबीहा अनवर

तज़ीन

अंकिता मिश्रा

तसनीम

शावेज़

कुलदीप

दीपक कबीर

उषा राय

……

 

UttarPradesh
Lucknow University
ABVP
ABVP Goons
Ravikant Chandan
Hindutva
Hindutva Agenda
AISA

Related Stories

छात्र संसद: "नई शिक्षा नीति आधुनिक युग में एकलव्य बनाने वाला दस्तावेज़"

‘धार्मिक भावनाएं’: असहमति की आवाज़ को दबाने का औज़ार

लखनऊ विश्वविद्यालय: दलित प्रोफ़ेसर के ख़िलाफ़ मुक़दमा, हमलावरों पर कोई कार्रवाई नहीं!

इफ़्तार को मुद्दा बनाने वाले बीएचयू को क्यों बनाना चाहते हैं सांप्रदायिकता की फैक्ट्री?

नई शिक्षा नीति से सधेगा काॅरपोरेट हित

ऑस्ट्रेलिया-इंडिया इंस्टीट्यूट (AII) के 13 अध्येताओं ने मोदी सरकार पर हस्तक्षेप का इल्ज़ाम लगाते हुए इस्तीफा दिया

‘जेएनयू छात्रों पर हिंसा बर्दाश्त नहीं, पुलिस फ़ौरन कार्रवाई करे’ बोले DU, AUD के छात्र

JNU: मांस परोसने को लेकर बवाल, ABVP कठघरे में !

यूपी चुनाव : छात्र संगठनों का आरोप, कॉलेज यूनियन चुनाव में देरी के पीछे योगी सरकार का 'दबाव'

नई शिक्षा नीति के ख़िलाफ़ AISA का 'रोल बैक NEP' अभियान


बाकी खबरें

  • JAHANGEERPURI
    नाज़मा ख़ान
    जहांगीरपुरी— बुलडोज़र ने तो ज़िंदगी की पटरी ही ध्वस्त कर दी
    27 Apr 2022
    अकबरी को देने के लिए मेरे पास कुछ नहीं था न ही ये विश्वास कि सब ठीक हो जाएगा और न ही ये कि मैं उनको मुआवज़ा दिलाने की हैसियत रखती हूं। मुझे उनकी डबडबाई आँखों से नज़र चुरा कर चले जाना था।
  • बिहारः महिलाओं की बेहतर सुरक्षा के लिए वाहनों में वीएलटीडी व इमरजेंसी बटन की व्यवस्था
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    बिहारः महिलाओं की बेहतर सुरक्षा के लिए वाहनों में वीएलटीडी व इमरजेंसी बटन की व्यवस्था
    27 Apr 2022
    वाहनों में महिलाओं को बेहतर सुरक्षा देने के उद्देश्य से निर्भया सेफ्टी मॉडल तैयार किया गया है। इस ख़ास मॉडल से सार्वजनिक वाहनों से यात्रा करने वाली महिलाओं की सुरक्षा व्यवस्था बेहतर होगी।
  • श्रीलंका का आर्थिक संकट : असली दोषी कौन?
    प्रभात पटनायक
    श्रीलंका का आर्थिक संकट : असली दोषी कौन?
    27 Apr 2022
    श्रीलंका के संकट की सारी की सारी व्याख्याओं की समस्या यह है कि उनमें, श्रीलंका के संकट को भड़काने में नवउदारवाद की भूमिका को पूरी तरह से अनदेखा ही कर दिया जाता है।
  • israel
    एम के भद्रकुमार
    अमेरिका ने रूस के ख़िलाफ़ इज़राइल को किया तैनात
    27 Apr 2022
    रविवार को इज़राइली प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट के साथ जो बाइडेन की फोन पर हुई बातचीत के गहरे मायने हैं।
  • MGNREGA
    सरोजिनी बिष्ट
    ग्राउंड रिपोर्ट: जल के अभाव में खुद प्यासे दिखे- ‘आदर्श तालाब’
    27 Apr 2022
    मनरेगा में बनाये गए तलाबों की स्थिति का जायजा लेने के लिए जब हम लखनऊ से सटे कुछ गाँवों में पहुँचे तो ‘आदर्श’ के नाम पर तालाबों की स्थिति कुछ और ही बयाँ कर रही थी।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License