NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
कोविड-19
स्वास्थ्य
जानकारों की मुताबिक कब तक मिलेगा कोरोना से निजात?
इसका निश्चित जवाब देना नामुमकिन है। इंसान और वायरस के बीच चूहे-बिल्ली का खेल तब तक चलेगा जब तक लोग वायरस के प्रति प्रतिरक्षा तंत्र विकसित ना कर लें।
अजय कुमार
21 May 2021
जानकारों की मुताबिक कब तक मिलेगा कोरोना से निजात?

कोरोना महामारी से पहले हर रोज चौराहे पर खड़े होकर काम करने वाले सुरेश का मन अब हर रोज सुबह बासी रोटी खाते हुए यही सोचता है कि आखिर कर इस महामारी से छुटकारा कब मिलेगा? वह दिन कब आएगा जब वह दिन भर के मेहनत के बाद इतनी कमाई कर पाएगा कि उसे पेट भर खाने की चिंता से थोड़ी राहत मिल पाए। सुरेश जैसे भारत के अधिकतर लोगों की यही चिंता है कि कब वह दिन आएगा कि दुनिया फिर से पटरी पर चली आएगी। हकीकत तो यह है कि वायरस की प्रकृति ही ऐसी है कि इस सवाल का कोई निश्चित जवाब नहीं है। 

इस सवाल से देश के बड़े-बड़े वैज्ञानिक और पूरी जिंदगी बायलॉजी की दुनिया में अपनी जिंदगी खपाने वाले जानकार जूझ रहे हैं। वह भी सवाल का कोई निश्चित जवाब नहीं देते हैं। वह लहरों में बात करते हैं। वह कहते हैं कि संक्रमण धीरे-धीरे बढ़ता हुआ शिखर यानी पीक पर पहुंचता है, वहां से ढलना शुरू करता है, तब थोड़ी राहत मिलती है। पहली लहर के बाद यह दूसरी लहर चल रही है।

भारत में पश्चिमी तट पर दस्तक देने वाली यह महामारी अब पूर्वी तट और दक्षिण की तरफ बढ़ रही है। कोरोना के मामलों की भारत में इस समय पॉजिटिविटी रेट 21 फ़ीसदी है। 26 राज्य में लॉकडाउन लगा हुआ है लेकिन फिर भी पॉजिटिविटी रेट 15 फ़ीसदी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक अगर यह पॉजिटिविटी रेट 5 फ़ीसदी से अधिक है तो इसका मतलब है कि स्थिति बहुत गंभीर है। गोवा तो एक ऐसा राज्य है जहां पर हर दो में से एक व्यक्ति कोरोना से जूझ रहा है।

इस डरावने माहौल में चलिए कुछ जानकारों के राय के सहारे इस सवाल का जवाब ढूंढने की कोशिश करते हैं कि भारत को कोरोना से निजात कब तक मिलेगी।

* वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी की इंस्टीट्यूट ऑफ हैल्थ एंड इवेलुएशन नाम की संस्था दुनियाभर के कोरोना के आंकड़ों के डेटाबेस के आधार पर रिसर्च का काम कर रही है। इस संस्था का अनुमान है कि माई के मध्य में भारत में दूसरी लहर अपनी शिखर पर होगी। यानी सबसे अधिक मामले मई के मध्य में आने शुरू होंगे। यहीं से मामलों में गिरावट की शुरुआत होगी। अगस्त 2021 में सबसे अधिक मौतें हो सकती हैं।मौतों का आंकड़ा देशभर में 10 लाख से ऊपर जा सकता है। इस संस्था का मानना है कि भारत में जितने मौत के आंकड़े मिल रहे हैं, स्थिति उस से बदतर है। शायद मरने वाले लोगों की संख्या बताई जाने वाली आंकड़ों के मुकाबले दोगुनी हो सकती है।

* मिशीगन यूनिवर्सिटी की महामारी विज्ञान की प्रोफेसर भ्रमर मुखर्जी कहती हैं कि 27 फरवरी को महाराष्ट्र में कोरोना के मामलों में इजाफा होना शुरू हुआ। तभी उन्हें लग गया था कि भारत में कोरोना की दूसरी लहर की शुरुआत हो चुकी है। उन्होंने इस पर ट्वीट भी किया था। अपने परिवार और देश दोनों को आगाह करने की कोशिश की थी। लेकिन ना परिवार ने सुनी और न ही देश ने। अप्रैल अंत से भारत में कोरोना के मामले लगातार तीन लाख के पार आ रहे हैं। इनका अनुमान कहता है कि मई के मध्य में कोरोना के मामले 8 से 10 लाख के बीच होंगे। मौतों की संख्या साढ़े चार हजार के अधिक होगी। दूसरी लहर का शिखर बिंदु यही होगा। चूंकि भारत में टेस्टिंग की दिक्कतों की वजह से न ही आधिकारिक आंकड़े सही होने की बात कर सकते हैं और न ही अनुमान के तहत बताए जाने वाले आंकड़े। यह गलत भी हो सकता है।

* अशोका यूनिवर्सिटी के भौतिकी और जीव विज्ञान के प्रोफ़ेसर गौतम मेनन का कहना है कि भारत में एक शख्स के पॉजिटिव होने का मतलब है कि 20 लोग ऐसे हैं जिनमें कोरोना पॉजिटिव होने की संभावना पनपती है। लेकिन यह तभी पता चलेगा जब टेस्टिंग में दिक्कत न हो और यह ठीक ढंग से हो। मौत के आंकड़े फर्जी हैं। जो मौतों कोरोना से हो रही है, उनमें से कई दर्ज भी नहीं हो रही हैं।

* जितना अच्छा आंकड़ा मिलेगा, अनुमान लगाना उतना ही सही होगा। दूसरे वैज्ञानिकों के साथ मिलकर गौतम मेनन इंडियन साइंटिस्ट रेस्पॉन्स टू covid-19 के जरिए विकसित अपने मॉडल के आधार पर कहते हैं कि अगर सारी खामियों को शामिल करके अनुमान किया जाए तो मई के मध्य में दूसरी लहर की पिक की स्थिति की संभावना दिखती है। पिछले साल संक्रमण की पहली लहर बहुत धीरे-धीरे बड़ी थी और धीरे-धीरे गिरी थी। इस साल भी गिरावट अचानक नहीं आएगी। इसमें लंबा समय लगेगा। हो सकता है कि गिरावट होने में एक से डेढ़ महीने का समय लग जाए। मामले जब तक घटकर 50 हजार रोजाना तक नहीं आएंगे तब तक नहीं कहा जा सकता कि स्थिति नियंत्रित हुई है। ऐसी भी संभावना बनती है कि नए वैरीअंट आए और पूरे खेल को बिगाड़ कर चले जाएं। स्थिति बेकाबू हो जाए।

* वेल्लूर की माइक्रोबायोलॉजी की प्रोफेसर गगनदीप सिंह कहती हैं कि भारत इतना बड़ा देश है कि यह सोचना नामुमकिन लगता है कि कब कहां पर पीक आए। भारत के बड़े शहर अगर कोरोना के बढ़ते मामलों की तरफ बढ़ रहे हैं तो गांव और छोटे शहरों में इसने अब गहरे तौर पर पैर पसारना शुरू किया है। इसलिए देश भर के लिए अनुमान लगाना बहुत मुश्किल काम है।

* पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया के प्रोफेसर गिरधर बाबू का मानना है कि भारत में कोरोना के मामलों और मौतों की संख्या दोनों को कम करके दिखाया जा रहा है। दिखाए जा रहे आंकड़े और हकीकत के आंकड़े दोनों के बीच 3 से लेकर 7 गुने का अंतर हो सकता है। यानी अगर आंकड़े 3 लाख मामले रोजाना दिखा रहे हैं तो हकीकत में यह 6 से 8 लाख के बीच हो सकता है। ऐसे में अनुमान लगाना बहुत मुश्किल है।

* अशोका यूनिवर्सिटी के बायो साइंसेज के निदेशक शाहिद जामिल कहते हैं कि राहत की बात इतनी है कि गांव के इलाके में आबादी का घनत्व उतना नहीं है जितना शहर के इलाके में है। इसलिए गांव में प्रसार धीमी गति से हो रहा है। नहीं तो गांव में स्वास्थ्य सुविधाएं इतनी जर्जर हैं की स्थिति बहुत खराब हो सकती है। इंसान और वायरस के बीच चूहे बिल्ली का खेल बहुत लंबे समय तक चलेगा। स्थिति तभी काबू में आएगी जब बड़ी संख्या में लोग वायरस के प्रति प्रतिरक्षा तंत्र विकसित कर लेंगे। प्रतिरक्षा तंत्र तभी विकसित होगा जब बड़ी संख्या में लोग संक्रमित हो जाएं और वायरस की चपेट से बाहर निकल आए या वैक्सीन अधिकतर लोगों तक पहुंचा दी जाए। यह वायरस लोगों के खून में रहता है। जब ऐसा म्युटेंट प्राप्त कर लेता है जब वह प्रतिरक्षा तंत्र को भेज सकें तब शरीर रोग ग्रस्त हो जाता है।

तीसरी लहर आएगी। लेकिन कब आएगी इसकी कोई भविष्यवाणी नहीं की जा सकती है। इससे बचने का यही उपाय है कि अधिकतर लोगों तक वैक्सीन पहुंचा दी जाए। स्वास्थ्य के बुनियादी ढांचे को इतना विकसित कर लिया जाए कि वह तीसरी लहर से होने वाले नुकसान को कम से कम कर सके। 

सबसे जरूरी बात यही है कि कोरोना से अधिक मौतें इसलिए हो पा रही हैं क्योंकि बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं की हालत भारत में बहुत अधिक कमजोर है। अगर यह वायरस बहुत लंबे समय तक रहने वाला है तो इतने लंबे समय तक पूरे देश को बंद करके सबकी जिंदगी मरने के हालात में पहुंचाकर जिंदगी नहीं बचाई जा सकती है। वैक्सीन सब तक पहुंचा कर कोरोना पर काबू पाया जा सकता है। स्वास्थ्य सुविधाओं को बहुत बेहतर कर कोरोना से होने वाले नुकसान को कम किया जा सकता है।

इसलिए अगर असल में सरकार को भारत के उन लोगों की चिंता है जो दो जून की रोटी दो जून मेहनत करके कमाते हैं तो वह यह न सोचे कि कोरोना से अपने आप निजात मिल जाएगी बल्कि यह सोचे कि कैसे भारत के हर शरीर को कोरोना से बचाने की क्षमता विकसित कर ली जाए।

( जानकारों की राय अलग-अलग पत्रिकाओं इंटरव्यू और लेखों के सहारे हासिल की गई है)

Coronavirus
COVID-19
Pandemic Coronavirus
Experts on Coronavirus

Related Stories

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना ने फिर पकड़ी रफ़्तार, 24 घंटों में 4,518 दर्ज़ किए गए 

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 3,962 नए मामले, 26 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 84 दिन बाद 4 हज़ार से ज़्यादा नए मामले दर्ज 

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना के मामलों में 35 फ़ीसदी की बढ़ोतरी, 24 घंटों में दर्ज हुए 3,712 मामले 

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में 2,745 नए मामले, 6 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में नए मामलों में करीब 16 फ़ीसदी की गिरावट

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 2,706 नए मामले, 25 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 2,685 नए मामले दर्ज

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 2,710 नए मामले, 14 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली में फिर से बढ़ रहा कोरोना का ख़तरा


बाकी खबरें

  • श्याम मीरा सिंह
    यूक्रेन में फंसे बच्चों के नाम पर PM कर रहे चुनावी प्रचार, वरुण गांधी बोले- हर आपदा में ‘अवसर’ नहीं खोजना चाहिए
    28 Feb 2022
    एक तरफ़ प्रधानमंत्री चुनावी रैलियों में यूक्रेन में फंसे कुछ सौ बच्चों को रेस्क्यू करने के नाम पर वोट मांग रहे हैं। दूसरी तरफ़ यूक्रेन में अभी हज़ारों बच्चे फंसे हैं और सरकार से मदद की गुहार लगा रहे…
  • karnataka
    शुभम शर्मा
    हिजाब को गलत क्यों मानते हैं हिंदुत्व और पितृसत्ता? 
    28 Feb 2022
    यह विडम्बना ही है कि हिजाब का विरोध हिंदुत्ववादी ताकतों की ओर से होता है, जो खुद हर तरह की सामाजिक रूढ़ियों और संकीर्णता से चिपकी रहती हैं।
  • Chiraigaon
    विजय विनीत
    बनारस की जंग—चिरईगांव का रंज : चुनाव में कहां गुम हो गया किसानों-बाग़बानों की आय दोगुना करने का भाजपाई एजेंडा!
    28 Feb 2022
    उत्तर प्रदेश के बनारस में चिरईगांव के बाग़बानों का जो रंज पांच दशक पहले था, वही आज भी है। सिर्फ चुनाव के समय ही इनका हाल-चाल लेने नेता आते हैं या फिर आम-अमरूद से लकदक बगीचों में फल खाने। आमदनी दोगुना…
  • pop and putin
    एम. के. भद्रकुमार
    पोप, पुतिन और संकटग्रस्त यूक्रेन
    28 Feb 2022
    भू-राजनीति को लेकर फ़्रांसिस की दिलचस्पी, रूसी विदेश नीति के प्रति उनकी सहानुभूति और पश्चिम की उनकी आलोचना को देखते हुए रूसी दूतावास का उनका यह दौरा एक ग़ैरमामूली प्रतीक बन जाता है।
  • MANIPUR
    शशि शेखर
    मुद्दा: महिला सशक्तिकरण मॉडल की पोल खोलता मणिपुर विधानसभा चुनाव
    28 Feb 2022
    मणिपुर की महिलाएं अपने परिवार के सामाजिक-आर्थिक शक्ति की धुरी रही हैं। खेती-किसानी से ले कर अन्य आर्थिक गतिविधियों तक में वे अपने परिवार के पुरुष सदस्य से कहीं आगे नज़र आती हैं, लेकिन राजनीति में…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License