NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
आख़िर फ़ायदे में चल रही कंपनियां भी क्यों बेचना चाहती है सरकार?
मोदी सरकार अच्छे ख़ासी प्रॉफिट में चल रही BPCL जैसी सार्वजानिक कंपनी का भी निजीकरण करना चाहती है, जबकि 2020-21 में BPCL के प्रॉफिट में 600 फ़ीसदी से ज्यादा की वृद्धि हुई है। फ़िलहाल तो इस निजीकरण को टाल दिया गया है, लेकिन यह प्रक्रिया कब तक स्थगित रहेगी कहना मुश्किल है।
पुलकित कुमार शर्मा
30 May 2022
bpcl
Image courtesy : FI

भारतीय वित्त मंत्रालय के निवेश और लोक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग (DIPAM) ने गुरुवार को बयान जारी कर कहा है कि भारत पेट्रोलियम (BPCL) के निजीकरण प्रकिया को फिलहाल टाल दिया गया है। आपको बता दें कि BPCL, इंडियन आयल के बाद भारत की दूसरी सबसे बड़ी आयल मार्केटिंग कंपनी है। साथ ही रिलायंस और इंडियन आयल कंपनी के बाद तीसरी सबसे बड़ी रिफाइनिंग क्षमता वाली कंपनी है। जिसमें भारत सरकार की 52.98% की हिस्सेदारी है।

सरकार ने मार्च 2020 में अपनी पूरी हिस्सेदारी बेचने का लक्ष्य निर्धारित किया था। जिसके लिए सरकार ने खरीदने योग्य लोगों से लेटर ऑफ़ इंटरेस्ट की मांग की थी। BPCL को खरीदने के लिए Vedanta Group के चेयरमेन अनिल अग्रवाल, Apollo Global Management Inc और, Squared Capital Advisors ने रुचि जाहिर की थी। 

बताया जा रहा की मौजूदा समय में रूस और यूक्रेन युद्ध के चलते वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता का माहौल बना हुआ है। जिसके कारण 3 बिडर्स में से 2 बिडर्स पीछे खिसक गए हैं। इस बारे में निवेश और लोक परिसंम्पत्ति प्रबंधन विभाग का कहना है कि वैश्विक स्तर पर ऊर्जा बाजार के हालातों को देखते हुए एलिजिबल बिडर्स ने मौजूदा प्रक्रिया के तहत BPCL को खरीदने में असमर्थता जताई है। लेकिन हकीकत यह है की BPCL और HPCL के कर्मचारियों के भारी विरोध के बाद 2 बिडर्स ने BPCL को ख़रीदने से पीछे हट गए है |

आपको बता दे की भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (HPCL) के करीब 22 हजार कर्मचारी 28 नवंबर 2019 को हड़ताल पर रहे थे | केंद्र सरकार के BPCL के निजीकरण के फैसले के खिलाफ तमाम कर्मचारी यूनियन लामबंद हुए थे | यह हड़ताल BPCL के केंद्र सरकार के विनिवेश के फैसले के विरोध में हुई थी | जिसमे BPCL की सभी रिफाइनरी डिपो और बॉटलिंग प्लांट के सभी कर्मचारी इस हड़ताल में हिस्सा लिया था | जोकि बिडर्स के पीछे हटने का सबसे बड़ा कारण रहा है |

जबकि सरकार का कहना है की रूस और यूक्रेन युद्ध के चलते वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता के चलते 3 बिडर्स में से 2 बिडर्स ने BPCL को खरीदने में असमर्थता जताई है। जिसके चलते विनिवेश के लिए वर्तमान EOI प्रक्रिया को बंद करने का निर्णय लिया है। ऐसे में जो बोलियां अब तक मिली हैं, वो रद कर दी जाएंगी। हालांकि सरकार ने फिर से BPCL को बेचने के संकेत दिए है और कहा है कि स्थिति की समीक्षा के आधार पर विनिवेश प्रक्रिया को फिर से शुरू करने लिए नए सिरे से योजना बनाएगी। 

अब हम बात कर लेते है BPCL के आर्थिक हालात के बारे में - आखिर क्या कारण है कि सरकार को भारत की तीसरी सबसे बड़ी रिफाइनिंग क्षमता वाली कंपनी को बेचने की जरूरत पड़ गई है। आंकड़ों की मानें तो BPCL के सकल बिक्री कारोबार में पिछले पांच सालों में अच्छी ख़ासी ग्रोथ हुई है। हालांकि 2019-20 में आर्थिक मंदी और 2020-21 में कोरोना के चलते पिछले दो सालों से सकल बिक्री कारोबार में 2019-20 में 2.97 प्रतिशत और 2020-21 में 7.83 प्रतिशत की गिरावट सामने आयी है। यह तो सर्वविदित है कि आर्थिक मंदी और कोरोना के चलते काफी हद तक लोगों के व्यापार में कमी आयी है।  लेकिन इसके चलते एक अच्छी खासी सरकारी कंपनी को बेचना सरकार की कामचोरी को दर्शाता है। 

2016-17 में BPCL का सकल बिक्री कारोबार 2,41,859 करोड़ रुपये था जोकि 2017-18 में 14.28 प्रतिशत बढ़कर 2,76,401 करोड़ रुपये हो गया था | वही 2018-19 में सकल बिक्री कारोबार 21.70 फ़ीसदी बढ़कर 3,36,384 रुपये करोड़ हो गया था।  हलाकि 2019-20 में आर्थिक मंदी और 2020-21 में कोरोना के कारण पिछले दो सालों से सकल बिक्री कारोबार में गिरावट हुई है। जैसा की निचे चित्र में दिखाया गया है |

वहीं हम BPCL के प्रॉफिट की बात करे तो BPCL सरकार की अच्छी ख़ासी आमदनी करने वाली कंपनी है। हालाँकि ये बात अलग है कि जब से मोदी सरकार केंद्र में आयी है, तब से मोदी सरकार का सार्वजानिक कंपनियों के प्रति रवैया बहुत ही निराशाजन रहा है। मोदी सरकार लगातार सार्वजानिक कंपनियों का निजीकरण कर रही है | जबकि 2020-21 में BPCL के प्रॉफिट में 600 फ़ीसदी से ज्यादा की वृद्धि हुई है।  2019-20 में BPCL का प्रॉफिट 2,683 करोड़ रुपये था जोकि 2020-21 में बढ़कर 19,042 करोड़ रुपये हो गया है।  जैसा की निचे चित्र में दिखाया गया है

दरअसल मोदी सरकार का मॉडल निजीकरण को बढ़ावा देना है। जिसके चलते मोदी सरकार सारी सम्पत्तियों को बेचने में लगी है। अभी आने वाले समय में दो और सरकारी बैंको का निजीकरण करने की बात चल रही है।

BPCL
Bharat Petroleum Corporation Limited
Privatisation
FDI
Union Ministry of Commerce and Industry
Narendra modi
Modi government

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

तिरछी नज़र: सरकार जी के आठ वर्ष

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

भारत के निर्यात प्रतिबंध को लेकर चल रही राजनीति

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !

PM की इतनी बेअदबी क्यों कर रहे हैं CM? आख़िर कौन है ज़िम्मेदार?

छात्र संसद: "नई शिक्षा नीति आधुनिक युग में एकलव्य बनाने वाला दस्तावेज़"

भाजपा के लिए सिर्फ़ वोट बैंक है मुसलमान?... संसद भेजने से करती है परहेज़


बाकी खबरें

  • moon
    संदीपन तालुकदार
    चीनी मिशन में इकट्ठा किये गये चंद्रमा के चट्टानों से शोध और नये निष्कर्षों को मिल रही रफ़्तार
    23 Mar 2022
    इस परिष्कृत चीनी चंद्र मिशन ने चीन और उसके बाहर दोनों ही जगहों पर पृथ्वी या उसके वायुमंडल से बाहर के चट्टानों पर शोध किया है। जानकार उम्मीद जता रहे हैं कि इससे हमें सौर मंडल के बारे में नयी-नयी…
  • bhagat singh
    हर्षवर्धन
    जाति के सवाल पर भगत सिंह के विचार
    23 Mar 2022
    भगत सिंह के जाति व्यवस्था के आलोचना के केंद्र में पुनर्जन्म और कर्म का सिद्धांत है। उनके अनुसार इन दोनों सिद्धांतों का काम जाति व्यवस्था से हो रहे भीषण अत्याचार के कारण उत्पन्न होने वाले आक्रोश और…
  • bhagat singh
    लाल बहादुर सिंह
    भगत सिंह की फ़ोटो नहीं, उनके विचार और जीवन-मूल्यों पर ज़ोर देना ज़रूरी
    23 Mar 2022
    शहादत दिवस पर विशेष: भगत सिंह चाहते थे कि आज़ाद भारत में सत्ता किसानों-मजदूरों के हाथ में हो, पर आज देश को कम्पनियां चला रही हैं, यह बात समाज में सबसे पिछड़े माने जाने वाले किसान भी अपने आन्दोलन के…
  • भाषा
    साल 2021 में दिल्ली दुनिया की सबसे प्रदूषित राजधानी थी : रिपोर्ट
    22 Mar 2022
    साल 2021 में वैश्विक स्तर पर वायु गुणवत्ता की स्थिति बयां करने वाली यह रिपोर्ट 117 देशों के 6,475 शहरों की आबोहवा में पीएम-2.5 सूक्ष्म कणों की मौजूदगी से जुड़े डेटा पर आधारित है।
  • रबीन्द्र नाथ सिन्हा
    वित्त अधिनियम के तहत ईपीएफओ फंड का ट्रांसफर मुश्किल; ठेका श्रमिकों के लिए बिहार मॉडल अपनाया जाए 
    22 Mar 2022
    केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने ईपीएफओ के अधीन रखे गए 100 करोड़ के 'बेदावा' फंड को वरिष्ठ नागरिक कल्याण कोष में हस्तांतरित करने पर अपनी आपत्ति जताई है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License