NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
शांत पड़ी सड़कों पर दोबारा चहलक़दमी देखना सुकून भरा है!
तमाम अपील, वादों और दावों के बीच हक़ीक़त में दिल्ली के आम लोग ख़ुद को पिसा हुआ महसूस कर रहे हैं। वो हिंसा के लिए नेताओं और प्रशासन से सवाल कर रहे हैं।
सोनिया यादव
28 Feb 2020
Delhi violence

दिल्ली के उत्तर पूर्वी इलाके में भड़की हिंसा के पांच दिन बाद अब धीरे-धीरे स्थिति सामान्य हो रही है। लोग अपने काम के लिए घरों से निकल रहे हैं, दुकानें खुल रही हैं और सड़कों पर चहलक़दमी बढ़ गई है। कुछ इलाकों में शांति क़ायम होने के बाद सुरक्षा बलों की तैनाती भी कम हो गई है। लोग फिर से अपनी गुज़र-बसर के साधन तलाशने में जुट गए हैं और इस जद्दोजहद में उनकी मदद कर रहे हैं स्थानीय गुरद्वारे और वहां के सेवादार...

हिंसा के बाद हालात का जायज़ा लेने के लिए हमने शुक्रवार 28 फ़रवरी को हिंसा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया। हम गुरुद्वारे गए और कुछ स्थानीय लोगों के बातचीत की।

शुरुआत जाफ़राबाद इलाक़े से हुई। सड़कों पर दौड़ते दो-चार वाहन, चाय की टपरी पर कुछ लोगों का जमावड़ा और भारी संख्या में अर्धसैनिक बलों की तैनाती। ये नज़ारा निश्चित ही सामान्य नहीं है, लेकिन लोगों से बात करने पर पता चला की फ़िलहाल ये स्थिति बहुत सुकून भरी है क्योंकि बीते दिनों जो कुछ भी हुआ, उसने लोगों के अंदर दहशत भर दिया है। लोग अपने घरों की चारदीवारी से बाहर निकलने में डर रहे हैं। हालांकि आज फिर भी यहां लोगों ने हिम्मत दिखाई है और अपने कामों में लगे हैं।

delhi-normal_1582864737 (1).jpeg

थोड़ी दूर आगे चलने पर हम मौजपुर पहुंचे। यहां कुछ दुकानें खुली थीं, लोग अपनी गाड़ियों से आ-जा रहे थे, आपस में बातचीत कर रहे थे और हर गली के बाहर उनकी सुरक्षा में जवान तैनात दिखाई दिए। मोहल्ले का माहौल शांत था, यहां गुरुद्वारे से आए सेवादार सुरक्षा बलों और लोगों को चाय-नाश्ता बांट रहे थे।

गुरुद्वारा श्री नानक साहब के सेवादार जोगिंदर सिंह ने बताया, "हम सभी लोगों को चाय-नाश्ता करवाते हैं और इसके बाद दोपहर और रात को लंगर भी चलता है। जिन लोगों के घरों में हिंसा हुई है हम उनके रहने की व्यवस्था भी करवा रहे हैं। सभी धर्मों के लोगों के लिए गुरु का द्वार हमेशा खुला है, सिखों के साथ ही कई हिंदू परिवार भी हमारे इस सहायता मिशन से जुड़े हैं।"

मौजपुर के गुरुद्वारे के सेवादार गज़ब सिंह का कहना है कि दिल्ली के ख़राब हुए हालात के मद्देनज़र श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने सभी पीड़ितों की मदद के लिए सिख समुदाय से अपील की है साथ ही सभी गुरद्वारों को निर्देश भी दिए गए हैं कि जो भी पीड़ित आए उसकी मदद की जाए।

87629389_499355667446374_2401177062548176896_n.jpg

यहां कुछ गलियों में कई दुकाने भी खुली थीं। एक दवाई के दुकानदार से हालात पूछने पर पता लगा कि यहां हिंदू-मुसलमान मिलकर कई रातों से पहरा दे रहे हैं। गलियों में अराजक तत्वों से बचने के लिए ख़ुद ही स्थानीय लोग सभी बाहर से आने-जाने वालों पर नज़र बनाए हुए हैं। इलाक़े में कई दिनों बाद आज स्थिति सामान्य होने पर कई दुकानें खुली हैं।

हमारे दौरे का अगला पड़ाव वेलकम, सीलमपुर और चांद बाग़ था। यहां भी हालात बेहतर नज़र आए। सड़कों पर चाट के ठेले और फलों की रेड़ी पर लोगों का जमावड़ा दिखाई दिया। छोटी दुकानें खुली थीं लेकिन बड़े शो रूम अभी भी बंद ही नज़र आए।

यहां स्थानीय लोग मीडिया से बात करने को तैयार थे, लेकिन साफ तौर पर किसी रिकार्ड़िंग या कैमरे को मनाही थी। लोगों का कहना है, "मीडिया हिंसा की आग को और बढ़ा रहा है। सब यहां से कुछ और सुनकर जाते हैं और वहां दिखाते कुछ और हैं। हिंदू-मुसलमान की आग को भड़काने का काम नेता तो कर ही रहे हैं, मीडिया उससे कहीं ज़्यादा कर रहा है।"

delhi-new.jpg

लोगों का ये भी कहना है कि हिंसा और डर के माहौल में सबसे ज़्यादा नुकसान आम लोगों का ही हुआ है। ज़रूरी सामान के लिए दुकानें बंद हैं, सब्जियों की गुमटी नहीं लग रही। ऐसे में सीलमपुर के गुरुद्वारा नानक साहिब के भरोसे ही यहां के कई लोगों का रात-दिन का बसर हो रहा है।

सीलमपुर गुरुद्वारे के सेवादारों का कहना है कि हम सभी की सेवा के लिए तैयार हैं, जो भी हमारे द्वार पर आएगा, हम उसकी खुले मन से सेवा करेंगे। हमें प्रबंधन कमेटी ने भी यही निर्देश दिए हैं।

हम आगे बढ़े शहादरा, भजनपुरा और शिव विहार इलाके की ओर। यहां भी सड़कों पर लोगों की अच्छी ख़ासी तादाद नज़र आई। बच्चे स्कूलों के लिए घरों से निकल रहे थे, लोग अपने रोज़मर्रा के कामों में व्यस्त थे और किसी से कुछ भी बोलने से पहले बहुत सतर्कता बरत रहे थे।

यहां लोगों ने बातचीत में बताया कि वह सब मिलकर रहना चाहते हैं, जो लोग यहां हिंसा करके चले गए वो यहां के रहने वाले नहीं थे। हम आपस में ऐसा कर ही नहीं सकते। ये सब करवाया गया है। नेता भड़का रहे हैं और ख़ुद ही महान भी बन रहे हैं। लोग अमन और शांति चाहते हैं, हिंसा नहीं। लोग यहां आस-पास के लोगों की मदद भी कर रहे हैं और ज़रूरतों को पूरा भी। हांलाकि लोग पुलिस पर सुरक्षा को लेकर भरोसा नहीं कर पा रहे हैं। वो इस हिंसा का ज़िम्मेदार उन्हें भी मानते हैं।

शहादरा गुरुद्वारे के सेवादार इंद्रजीत सिंह ने कहा, "जिनके घर हिंसा में जल गए हैं, हम उनको भी सहारा दे रहे हैं, लोगों को लगातार लंगर के माध्यम से खाना पानी उपलब्ध करवा रहे हैं ताकि किसी को कोई दिक़्क़त ना हो।"

ग़ौरतलब है कि देश की राजधानी दिल्ली के एक बड़े इलाक़े में रविवार यानी 23 फ़रवरी से हिंसा शुरू हुई। पहले हिंसा की छिटपुट ख़बरें आईं लेकिन सोमवार यानी 24 फ़रवरी की दोपहर तक लगने लगा कि दिल्ली में दंगे जैसा माहौल है। एक के बाद एक आगज़नी और सोशल मीडिया पर हिंसा के वीडियो, फ़ोटो और दावों की लाइन लग गई। सोमवार की रात तक नॉर्थ ईस्ट दिल्ली के बाबरपुर, मौजपुर, मुस्तफ़ाबाद, शिवपुरी, खजूरी ख़ास, चाँदबाग और अशोक विहार जैसे इलाकों में हिंसा होती रही। 

तमाम अपील, वादों और दावों के बीच हक़ीक़त में दिल्ली के आम लोग ख़ुद को पिसा हुआ महसूस कर रहे हैं। वो हिंसा के लिए नेताओं और प्रशासन से सवाल कर रहे हैं। लेकिन जिनके अपने चले गए वो ख़ुद को ज़िंदा होते हुए भी मरा हुआ महसूस कर रहे हैं।

Delhi Violence
Anti CAA
Pro CAA
hindu-muslim
communal violence
Communal riots
delhi police
Khureji
Chandbagh
Bhajanpura
Jafrabad
East-Delhi Violence
Amit Shah
BJP
AAP
Arvind Kejriwal

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

कानपुर हिंसा: दोषियों पर गैंगस्टर के तहत मुकदमे का आदेश... नूपुर शर्मा पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं!

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

मुंडका अग्निकांड: 'दोषी मालिक, अधिकारियों को सजा दो'


बाकी खबरें

  • nonaligned movement
    एन.डी.जयप्रकाश
    गुटनिरपेक्ष आंदोलन ने अंतर्राष्ट्रीय संबंधों को कैसे बदला? : भाग 1
    20 Nov 2021
    उपनिवेशवाद और साम्राज्यवाद का संगठित विरोध 1920 के दशक के अंत में शुरू हुआ था। जवाहरलाल नेहरू ने गुटनिरपेक्ष आंदोलन के ज़रिए महत्वपूर्ण योगदान दिया था।
  • Farmers Protest
    न्यूज़क्लिक टीम
    किसानों की जीत: “यह आज़ादी का दूसरा आंदोलन रहा है”
    20 Nov 2021
    शुक्रवार, 19 नवंबर को गुरु नानक जी की जयंती पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीन कृषि क़ानून वापस लेने की घोषणा की और कहा कि संसद के आगामी शीतकालीन सत्र में इन तीनों कानूनों को निरस्त करने की…
  • Srinagar Encounter
    अजय सिंह
    मुद्दा: कश्मीर में लिंचिंग के दिन आने वाले हैं
    20 Nov 2021
    पिछले दिनों चीफ़ ऑफ़ डिफ़ेंस स्टाफ़ (सेना, नौसेना व वायुसेना के मुखिया) जनरल बिपिन रावत ने जो सार्वजनिक बयान दिया, वह बहुत चिंताजनक है।
  • farmers
    अब्दुल अलीम जाफ़री
    MSP और लखीमपुर खीरी के किसानों के न्याय तक जारी रहेगा आंदोलन, लखनऊ में महापंचायत की तैयारी तेज़
    20 Nov 2021
    विवादास्पद कृषि कानूनों को निरस्त किये जाने की घोषणा के बावजूद, किसानों के द्वारा उत्तर प्रदेश में आगामी महापंचायतों के मद्देनजर लामबंदी और तैयारी जारी है।
  • farmers celebrating
    विक्रम सिंह
    किसान जानता है कि फसल पकना तो शुरुआत है, मंडी में दाम मिलने तक उसका काम पूरा नहीं होता
    20 Nov 2021
    मोदी जी ने तो अपने चिरपरिचित अंदाज़ में किसानों से घर वापस जाने के लिए कहा परन्तु किसान जानता है कि खेत में फसल पकना तो शुरुआत है लेकिन जब तक फसल का मंडी में उचित मूल्य नहीं मिल जाता तब तक काम पूरा…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License