NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
चुनाव के बाद एक बार फिर पेट्रोल-डीज़ल के दाम का हो रहा है "विकास'
राजस्थान और मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में पेट्रोल का दाम 102 रुपये प्रति लीटर की ऊंचाई तक पहुंच चुका है। तेल कंपनियों के लगातार चौथे दिन पेट्रोल, डीजल के दाम बढ़ाने से यह स्थिति बनी है। हालांकि, इससे पहले पांच राज्यों में जारी विधानसभा चुनावों के दौरान दो सप्ताह से अधिक समय तक दाम में कोई बदलाव नहीं किया गया।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
07 May 2021
चुनाव के बाद एक बार फिर पेट्रोल-डीजल के दाम का हो रहा है "विकास'

नई दिल्ली: राजस्थान और मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में पेट्रोल का दाम 102 रुपये प्रति लीटर की ऊंचाई तक पहुंच चुका है। तेल कंपनियों के लगातार चौथे दिन पेट्रोल, डीजल के दाम बढ़ाने से यह स्थिति बनी है। हालांकि, इससे पहले पांच राज्यों में जारी विधानसभा चुनावों के दौरान दो सप्ताह से अधिक समय तक दाम में कोई बदलाव नहीं किया गया।

सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों द्वारा जारी अधिसूचना के मुताबिक शुक्रवार को पेट्रोल के दाम में 29 पैसे और डीजल के दाम में 31 पैसे प्रति लीटर की तेज वृद्धि की गई। इस वृद्धि के बाद दिल्ली में पेट्रोल का खुदरा मूल्य 91.27 रुपये प्रति लीटर हो गया जबकि डीजल का दाम 81.73 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गया।

राजस्थान के गंगानगर जिले में इस वृद्धि के बाद पेट्रोल का दाम 102.15 रुपये लीटर पर पहुंच गया। तेल कंपनियों के मूल्य चार्ट में यह दर्शाया गया है। वहीं मध्यम प्रदेश के अनुपपुर में पेट्रोल का दाम 101.86 रुपये लीटर हो गया है जबकि महाराष्ट्र के परभनी में यह 99.95 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच चुका है।

इस साल यह दूसरा मौका है जब देश के कुछ हिस्सों में पेट्रोल का दाम 100 रुपये प्रति लीटर से ऊपर निकल गया। इससे पहले फरवरी मध्य में पेट्रोल का दाम इस आंकड़े से ऊपर निकला था।

ईंधन के खुदरा दाम अलग अलग राज्यों में भिन्न होते हैं। राज्यों में मूल्य वर्धित कर (वैट) की दर और माल पहुंचाने का भाड़ा अलग होना इसकी मुख्य वजह होती है। देश में राजस्थान में पेट्रोल पर सबसे अधिक वैट लगता है, उसके बाद मध्य प्रदेश का स्थान आता है।

शुक्रवार को लगातार चौथा दिन रहा है जब तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ाये हैं। वहीं इससे पहले विधानसभा चुनावों के दौरान 18 दिन तक इनके दाम में कोई बदलाव नहीं किया गया। चार दिन की वृद्धि में पेट्रोल के दाम 88 पैसे और डीजल के दाम में एक रुपये प्रति लीटर की वृद्धि हो चुकी है। इस वृद्धि से 24 मार्च से लेकर 15 अप्रैल के बीच दाम में जो कमी आई थी वह समाप्त हो चुकी है। इस दौरान तेल कंपनियों ने पेट्रोल का दाम 67 पैसे और डीजल के दाम में 74 पैसे प्रति लीटर की कटौती की थी।

तेल कंपनियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल का दाम लगातार ऊंचा बना हुआ है। कच्चे तेल का दाम 70 डालर प्रति बैरल के आसपास चल रहा है।

एक समय ख़ासतौर से 2014 से पहले यूपीए सरकार के समय में तेल के दाम बढ़ने पर मुख्य धारा के मीडिया में बड़ी-बड़ी हेडलाइन बनतीं थी और उस पर घंटों-घंटों बहस होती थी। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) जो उस समय विपक्ष में थी लगातार तेल, गैस के दामों को लेकर सड़कों पर उतरती थी और मनमोहन सरकार से इस्तीफ़ा मांगती थी। तेल-गैस के साथ सभी तरह की महंगाई उस समय एक बड़ा मुद्दा था, लेकिन मोदी सरकार आने के बाद से ऐसा नहीं रहा। टीवी स्क्रीन पर अब लगातार नौवें दिन तेल के दाम बढ़ने पर हेडलाइन और बहस नहीं दिखाई देती।

तेल विपणन कंपनियों द्वारा जारी मूल्य अधिसूचना में कहा गया है कि ईंधनों के दाम पूरे देश में एक साथ बढ़ाये गये हैं लेकिन राज्यों में इन पर लगने वाले बिक्री कर अथवा मूल्य वर्धित कर (वैट) की दर अलग होने से यह वृद्धि अलग अलग हो सकती है।

सरकार ने मार्च 2020 के मध्य में पेट्रोल, डीजल पर उत्पाद शुल्क में वृद्धि की थी तब से दोनों ईंधनों के दाम में घटबढ रुकी हुई थी। इस दौरान सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों इंडियन आयल कार्पोरेशन (आईओसी), भारत पेट्रोलियम कार्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल), हिन्दुस्तान पेट्रोलियम कार्पोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) ने उत्पाद शुल्क वृद्धि को ग्राहकों पर डालने के बजाय अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम में आने वाली गिरावट के साथ उसका समायोजन किया। इससे दाम स्थिर रहे। हालांकि जानकारों का कहना था कि जिस स्तर पर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दामों में गिरावट आई, उसकी तुलना में भारतीय उपभोक्ता को कोई भी लाभ नहीं दिया गया।

(समाचार एजेंसी भाषा इनपुट के साथ )

petrol price hike
Crude oil Price hike
Petrol & diesel price
Modi government
Narendra modi
Inflation

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

डरावना आर्थिक संकट: न तो ख़रीदने की ताक़त, न कोई नौकरी, और उस पर बढ़ती कीमतें

तिरछी नज़र: सरकार जी के आठ वर्ष

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

भारत के निर्यात प्रतिबंध को लेकर चल रही राजनीति

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

आर्थिक रिकवरी के वहम का शिकार है मोदी सरकार

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !

क्या जानबूझकर महंगाई पर चर्चा से आम आदमी से जुड़े मुद्दे बाहर रखे जाते हैं?


बाकी खबरें

  • भाषा
    अदालत ने कहा जहांगीरपुरी हिंसा रोकने में दिल्ली पुलिस ‘पूरी तरह विफल’
    09 May 2022
    अदालत ने कहा कि 16 अप्रैल को हनुमान जयंती पर हुए घटनाक्रम और दंगे रोकने तथा कानून एवं व्यवस्था बनाए रखने में स्थानीय प्रशासन की भूमिका की जांच किए जाने की आवश्यकता है।
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 3,207 नए मामले, 29 मरीज़ों की मौत 
    09 May 2022
    राज्यों में कोरोना जगह-जगह पर विस्पोट की तरह सामने आ रहा है | कोरोना ज़्यादातर शैक्षणिक संस्थानों में बच्चो को अपनी चपेट में ले रहा है |
  • Wheat
    सुबोध वर्मा
    क्या मोदी सरकार गेहूं संकट से निपट सकती है?
    09 May 2022
    मोदी युग में पहली बार गेहूं के उत्पादन में गिरावट आई है और ख़रीद घट गई है, जिससे गेहूं का स्टॉक कम हो गया है और खाद्यान्न आधारित योजनाओं पर इसका असर पड़ रहा है।
  • राजेंद्र शर्मा
    कटाक्ष: एक निशान, अलग-अलग विधान, फिर भी नया इंडिया महान!
    09 May 2022
    क्या मोदी जी के राज में बग्गाओं की आज़ादी ही आज़ादी है, मेवाणियों की आज़ादी अपराध है? क्या देश में बग्गाओं के लिए अलग का़ानून है और मेवाणियों के लिए अलग क़ानून?
  • एम. के. भद्रकुमार
    सऊदी अरब के साथ अमेरिका की ज़ोर-ज़बरदस्ती की कूटनीति
    09 May 2022
    सीआईए प्रमुख का फ़ोन कॉल प्रिंस मोहम्मद के साथ मैत्रीपूर्ण बातचीत के लिए तो नहीं ही होगी, क्योंकि सऊदी चीन के बीआरआई का अहम साथी है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License