NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
आगरा: पारस अस्पताल को मिली क्लीन चिट सवालों के घेरे में क्यों है?
मृतकों के परिजन इस जांच रिपोर्ट पर तमाम सवालिया निशान खड़े कर रहे हैं। उनका कहना है कि जांच करने वाले अफसरों ने सिर्फ अस्पताल प्रशासन के बयान के आधार पर रिपोर्ट बना दी। अस्पताल में मरने वालों की डेथ ऑडिट रिपोर्ट में भी वही लिखा गया है जो अस्पताल प्रशासन ने बताया।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
19 Jun 2021
Paras Hospital
Image courtesy : India Today

आगरा के श्री पारस अस्पताल को 22 मरीजों की मौत के मामले में जांच कमेटी ने क्लीन चिट दे दी है। कमेटी के मुताबिक अस्पताल में 16 मरीजों की मौत तो हुई लेकिन इन सभी की स्थिति गंभीर थी। इनमें 14 मरीज कोमोरबिडिटी (अस्थमा, ब्लडप्रेशर, आदि) बीमारियों से ग्रसित थे। अन्य दो का सीटी स्कोर काफी हाई था यानी इन्फेक्शन उनके फेफड़ों में फैल चुका था।

मृतकों के परिजन इस जांच रिपोर्ट पर तमाम सवालिया निशान खड़े कर रहे हैं। उनका कहना है कि जांच करने वाले अफसरों ने सिर्फ अस्पताल प्रशासन के बयान के आधार पर रिपोर्ट बना दी। अस्पताल में मरने वालों की डेथ ऑडिट रिपोर्ट में भी वही लिखा गया है जो अस्पताल प्रशासन ने बताया। हालांकि, ये रिपोर्ट प्रशासन की तरफ से कोई आधिकारिक घोषणा से पहले ही मीडिया में सामने आ गई।

क्या है पूरा मामला?

दैनिक भास्कर ने अपनी रिपोर्ट में विस्तार से मृतकों के परिजनों से बातचीत कर पूरे मामले में कई बड़े सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक जांच करने वाले अफसरों ने केवल अस्पताल प्रशासन के आधार पर रिपोर्ट बना दी। वायरल वीडियो की जांच किए बगैर ही उसे मैनिपुलेटेड करार दे दिया गया। अगर वीडियो मैनिपुलेटेड है तो डॉ. अरिंजय के उस बयान को उनके पक्ष में कैसे मान लिया गया जिसमें उन्होंने लोगों को ऑक्सीजन लाने के लिए अस्पताल की तरफ से पैसे और एंबुलेंस मुहैया कराने की बात कही है?

जांच दल की रिपोर्ट में इस बात का भी कहीं कोई जिक्र नहीं है कि आखिर उस दिन सीसीटीवी क्यों बंद किए गए थे। इस रिपोर्ट में पीड़ितों के बयानों को भी कहीं नहीं दिखाया गया है। 

26 अप्रैल की रात पारस अस्पताल में जान गंवाने वाले 11 लोगों के परिजन सामने आए थे, लेकिन जांच कमेटी ने इन लोगों से कोई बात क्यों नहीं की। जांच रिपोर्ट में खुद कहा गया है कि अभी कुछ बिंदुओं पर जांच जरूरी है। ऐसे में बगैर उन बिंदुओं की जांच कराए अस्पताल प्रशासन को क्लीन चिट देने की जल्दी क्या थी?

रिपोर्ट में क्या खामियां हैं?

जांच रिपोर्ट में मृतक महिला की बहन से हुई बात की वॉट्सऐप चैट समेत सारे पीड़ितों के बयानों को कहीं भी नहीं दर्शाया गया है। इस बात का कहीं जिक्र नहीं है कि आखिर उस दिन CCTV क्यों बंद किए गए थे। वीडियो बनाने वाले का बयान और उसकी मंशा की कोई जानकारी जांच रिपोर्ट में नहीं है। अस्पताल में सिर्फ उतनी ही मौतें दिखाई गई हैं जो पीड़ित परिवारों के जरिए सामने आई हैं। अस्पताल के रिकॉर्ड की जानकारी डिटेल में नहीं बताई गई है।

क्लीन चिट देने के लिए इन बातों को आधार बनाया

जांच टीम की रिपोर्ट में कहा गया है कि अस्पताल के रिकॉर्ड के अनुसार वहां अपर्याप्त ऑक्सीजन और मॉक ड्रिल का कोई प्रमाण नहीं है। इसके साथ ही वहां हुई 16 मौतों का समय वीडियो में कही बात के अनुसार सुबह सात बजे के आसपास न होकर अलग-अलग समय का था। वायरल वीडियो में डॉक्टर की ओर से दोगुने पैसे ले लेने, सोना चांदी ले लेने, भोपाल से ऑक्सीजन लाने की बात से पता चलता है कि उनकी मंशा गलत नहीं थी। जांच टीम ने डॉक्टर अरिंजय जैन के बयान को भी पूरी जांच रिपोर्ट का आधार बनाया है।

डॉक्टर के बयान के मुताबिक, उसका मॉक ड्रिल से मतलब ऑक्सीजन का लेवल कम कर गंभीर मरीजों को छांटना था, ताकि ऑक्सीजन का सही उपयोग किया जा सके। डॉक्टर के बयान के अनुसार वीडियो में कई जगह उसकी आवाज नहीं है और उसे काट कर उन्हें भेजा जा रहा था और ब्लैकमेल करने के प्रयास किए जा रहे थे। किंतु पिता की मौत के बाद होने वाले कार्यक्रमों में वे व्यस्त थे। जांच कमेटी की ओर से वायरल वीडियो की सही जांच करने और एक मीडियाकर्मी की भूमिका की जांच पुलिस की ओर से किए जाने की बात कही गई है।

विपक्ष ने क्या बोला?

अखबार से बात करते हुए कांग्रेस के प्रदेश सचिव अमित सिंह ने कहा कि इस जांच का कोई औचित्य नहीं है, क्योंकि सभी जानते थे कि जांच रिपोर्ट में ऐसा ही कुछ होना था।

इस संबंध में समाजवादी पार्टी के विधान परिषद सदस्य सुनिल सिंह यादव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर तंज कसते हुए ट्वीट किया, “सुना था जो "पारस" को छू दे वो सोने का हो जाता था। आज योगी आदित्यनाथ सरकार की जाँच को देख कर यक़ीन हो गया। खुद एक वीडियो में ऑक्सीजन मॉक ड्रिल के नाम पे 22 मरीज़ों की जान लेने वाले आगरा के "पारस" हॉस्पिटल और उसके मालिक को क्लीन चिट दे दिया गया। जाने पारस ने कितनों को छुआ होगा।”

इस मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से हस्तक्षेप की मांग करने वाले समाजसेवी नरेश पारस ने भास्कर को बताया कि बिना जांच के ही इतनी ऑक्सीजन की किल्लत के समय जिलाधिकारी द्वारा अस्पताल को क्लीन चिट दे दी गई। जबकि सिर्फ मेरे पास उस दिन ऑक्सीजन के लिए 800 फोन आए थे। तमाम जगह ऑक्सीजन की कमी के मामले दिखाई दिए थे। इस मामले में मैं चुप नहीं बैठूंगा। मैं आर्थिक खर्च वहन करने में अक्षम हूं पर कुछ वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने आश्वासन दिया है और पीड़ित परिजन भी साथ आ रहे हैं। अब हम हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।”

प्रशासन का रवैया टालमटोल वाला, न्याय के लिए लंबा सफर

गौरतलब है कि आगरा के श्री पारस हॉस्पिटल के संचालक के कुछ कथित वीडियो वायरल हुए थे। इन वीडियो में अस्पताल के संचालक डॉ. अरिंजय जैन ने कहा था कि मरीजों की छंटनी के लिए 26 अप्रैल को सुबह 7 बजे मॉक ड्रिल की गई थी। ड्रिल के तौर पर कोरोना संक्रमित मरीजों की ऑक्सीजन सप्लाई को भी बाधित किया गया। 5 मिनट ऑक्सीजन रोकने से 22 मरीज ‘छंट’ गए। खबरें चलीं कि अस्पताल की मॉक ड्रिल के कारण 22 मरीजों की मौत हो गई। विपक्ष ने इसे उत्तर प्रदेश की ‘चिकित्सा व्यवस्था’ पर एक बड़ा धब्बा बता दिया। मामला गरमाया तो अस्पताल को प्रशासन द्वारा सीज़ कर दिया गया है। अस्पताल के संचालक डॉक्टर अरिंजय जैन पर महामारी अधिनियम की धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया। हालांकि शुरुआत से ही प्रशासन का रवैया इस मामले में टालमटोल वाला रहा है।

ऐसे में मृतकों के परिजनों ने भी डीएम साहब से कई सवाल पूछे हैं। उन्होंने आगे न्याय के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की बात भी कही है। जाहिर है मृतकों के परिजनों को अभी न्याय के लिए लंबा सफर जरूर तय करना है।

इसे भी पढ़ें: क्या आगरा के पारस अस्पताल का मामला यूपी की ‘चिकित्सा व्यवस्था’ पर एक बड़ा धब्बा है?

UttarPradesh
agra
Paras Hospital
death in paras hospital
Mock drill in Paras Hospital

Related Stories

बदायूं : मुस्लिम युवक के टॉर्चर को लेकर यूपी पुलिस पर फिर उठे सवाल

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

यूपी में  पुरानी पेंशन बहाली व अन्य मांगों को लेकर राज्य कर्मचारियों का प्रदर्शन

मलियाना नरसंहार के 35 साल, क्या मिल पाया पीड़ितों को इंसाफ?

ख़ान और ज़फ़र के रौशन चेहरे, कालिख़ तो ख़ुद पे पुती है

मनरेगा मज़दूरों के मेहनताने पर आख़िर कौन डाल रहा है डाका?

लखनऊ विश्वविद्यालय में एबीवीपी का हंगामा: प्रोफ़ेसर और दलित चिंतक रविकांत चंदन का घेराव, धमकी

ज्ञानवापी मस्जिद सर्वे: कोर्ट कमिश्नर बदलने के मामले में मंगलवार को फ़ैसला

ज्ञानवापी विवाद में नया मोड़, वादी राखी सिंह वापस लेने जा रही हैं केस, जानिए क्यों?  

ज्ञानवापी मस्जिद सर्वे: कमिश्नर बदलने की याचिका पर फ़ैसला सुरक्षित, अगली सुनवाई 9 को


बाकी खबरें

  •  Kashi Vishwanath Temple
    विजय विनीत
    एक और ‘इवेंट’: यूपी में भाजपा का नया चुनावी दांव ‘चलो काशी’ 
    05 Dec 2021
    भाजपा का नया नारा है, "दिव्य काशी, भव्य काशी, चलो काशी।" यह नारा ऐसे वक्त में गढ़ा गया है जब पीएम नरेंद्र मोदी काशी विश्वनाथ मंदिर के लोकार्पण के लिए बनारस आ रहे हैं। इसी के ईर्द-गिर्द बुना गया है एक…
  • skm
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट/भाषा
    किसान आंदोलन : एसकेएम ने सरकार से बातचीत के लिए बनाई पांच सदस्यीय समिति
    04 Dec 2021
    किसान नेता बलबीर सिंह राजेवाल, अशोक धावले, शिव कुमार कक्का, गुरनाम सिंह चढूनी और युद्धवीर सिंह को समिति का सदस्य नामित किया गया है।
  • Vinod Dua passes away
    भाषा
    दुखद: मशहूर पत्रकार विनोद दुआ का निधन
    04 Dec 2021
    विनोद दुआ जिगर की पुरानी बीमारी से पीड़ित थे। इस साल की शुरुआत में वह कोविड से भी संक्रमित हुए और कोविड की वजह से ही इसी साल जून में उन्होंने अपनी पत्नी, रेडियोलॉजिस्ट पद्मावती 'चिन्ना' को खो दिया था।
  • road
    राजेंद्र शर्मा
    नारियल से सड़क टूटी: ...पर डंका तो लगातार बज रहा है!
    04 Dec 2021
    नया विश्व रिकार्ड बिजनौर में कायम हुआ है। यह रिकार्ड थ्री इन वन है यानी तीन तरह का विश्व रिकार्ड। पहला रिकार्ड तो भाजपा विधायक सूची चौधरी के ही नाम है--नारियल मारकर नयी-निकोरी सड़क तोड़ देने का…
  • UAPA
    सोनिया यादव
    यूपी: सबसे ज़्यादा UAPA के तहत गिरफ़्तारियां, क्या विरोधी आवाज़ों को दबाने की कोशिश है?
    04 Dec 2021
    उत्तर प्रदेश में 'बेहतर कानून व्यवस्था' और 'न्यूनतम अपराध' के नाम पर योगी आदित्यनाथ की बीजेपी सरकार में साल 2020 में यूएपीए के तहत कुल 361 गिरफ़्तारियां हुईं, जबकि जम्मू कश्मीर में 346 और मणिपुर में…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License