NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
मज़दूर-किसान
भारत
राजनीति
'किसान और किसानी को बर्बाद करने के लिए लाए गए हैं कृषि विधेयक'
300 से ज्यादा किसान संगठनों और देश के 10 केन्द्रीय श्रमिक संगठनों ने केंद्र सरकार की श्रमिक विरोधी, किसान विरोधी, जन विरोधी नीतियों के ख़िलाफ़ 26 नवंबर को हड़ताल का आह्वान किया है।  
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
09 Nov 2020
Medha Patekar

इंदौर: केंद्र की मोदी सरकार ने लॉकडाउन की आड़ में 44 श्रम कानूनों में बदलाव कर जहां श्रमिकों का जीना दूभर कर दिया है वहीं, तीन कृषि अध्यादेशों से देश की जमीन को पूंजीपतियों और कॉरपोरेट घरानों को देने की साजिश रची है। इसके खिलाफ देशभर में मजदूरों किसानों में आक्रोश है और 26 तथा 27 नवंबर को देश के लाखों किसान मजदूर सड़कों पर होंगे। दिल्ली में भी घेराव होगा और देश के सभी हिस्सों में मजदूर और किसान आंदोलन करेंगे। ये बातें इंदौर में आयोजित किसान मजदूर आदिवासी अधिकार सम्मेलन में बोलते हुए विभिन्न वक्ताओं ने कही।

बता दें कि हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा कृषि सुधार के नाम पर पास किए गए कृषि कानूनों के विरोध में देश भर के 300 से ज्यादा किसान संगठनों का साझा मंच ऑल इंडिया किसान संघर्ष समन्वय समिति की अपील पर देश के कोने कोने में किसान मजदूर आदिवासी सम्मेलन आयोजित किये जा रहे हैं। इस सम्मेलन में आगामी 26 नवम्बर को अखिल भारतीय हड़ताल और 26-27 नवम्बर को दिल्ली चलो की अपील की जा रही है।

इस संदर्भ में नर्मदा बचाओ आंदोलन, ऑल इंडिया किसान महासभा, ऑल इंडिया किसान खेत-मजदूर संगठन, राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ एंव किसान संघर्ष समिति के संयुक्त तत्वावधान में ऑल इंडिया किसान संघर्ष समन्वय समिति इंदौर द्वारा एक किसान आदिवासी मजदूर सम्मेलन इंदौर के प्रेस क्लब में आयोजित किया गया। जिसमें हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा पारित किसान मजदूर व आदिवासी विरोधी नीतियों की जमकर आलोचना की गयी। और 26 नवम्बर दिल्ली चलो का नारा दिया गया।

इस अवसर पर अ. भा. किसान संघर्ष समिति की नेत्री मेधा पाटकर ने कहा कि " गांव गांव में आज किसान, आदिवासी, मछुआरे और मजदूर तबका बदहाली की स्थिति में हैं। सरकारी नीतियों के चलते आज ग्रामीण आदिवासियों वनवासियों को उनकी जल जंगल जमीन से बेदखल किया जा रहा है वहीं, बरसों पुरानी संचालित सेंचुरी जैसी मिलों को बंद किया जा रहा है। सरकार पूरी तरह प्राकृतिक संसाधनों को देसी विदेशी कॉरपोरेट्स के हवाले कर रही है। ऐसे में कृषि सुधार के लिए नाम पर पारित किए गए तीनों कानून किसानों को बड़ी-बड़ी कंपनियों का बंधक बना देंगे इनके खिलाफ सभी लोगों को एक एकजुट होने की जरूरत है।"

कार्यक्रम में पूर्व एडवोकेट जनरल आनंद मोहन माथुर ने कहा कि "सरकार कृषि को पूरी तरह कारपोरेट के हवाले कर रही है। नयी बीज नीति भी लाने का प्रयास किया जा रहा है जो किसान को बीज के लिए कम्पनियों पर निर्भर कत देगा।"

इस अवसर पर ऑल इंडिया किसान खेत मजदूर संगठन के राज्य सचिव मनीष श्रीवास्तव ने कहा कि "देशभर के किसानों द्वारा लंबे अरसे से उठाई जा रही "कर्ज से मुक्ति और फसलों की लागत से डेढ़ गुणा लाभकारी दाम" देने की दो प्रमुख मांगों को अनदेखा कर केंद्र की भाजपा सरकार ने देशी-विदेशी कॉरपोरेट कम्पनियों के स्वार्थ में इन तीनों अध्यादेशों को कानूनी शक्ल दी है। इसके चलते न सिर्फ किसान बल्कि आम जनता, मंडी कर्मचारी व छोटे छोटे स्थानीय व्यापारी तबाह हो जाएंगे।'

अखिल भारतीय किसान महासभा के जसविंदर सिंह ने कहा कि "आवश्यक वस्तु कानून 1955' में संशोधन कर भाजपा सरकार ने भोजन के लिए जरूरी सभी अनाज, दाल, तिलहन, खाद्य तेल, आलू व प्याज समेत छह तरह की चीजों के स्टाक को चाहे जितनी मात्रा में जमा करने की अनुमति दे दी है। साफ जाहिर है कि व्यापारिक कंपनियां किसानों से इन आवश्यक वस्तुओं को सस्ते दामों पर खरीद कर अपने गोदामों में इन्हें भारी मात्रा में जमा कर सकेंगी और बाजार में बनावटी कमी दिखाकर उन्हें महंगे दामों पर बेच कर अथाह मुनाफा अर्जित कर सकेंगी। किसानों के साथ-साथ इसका सबसे ज्यादा खामियाजा गरीब उपभोक्ताओं को उठाना पड़ेगा। इससे देश में पहले ही से ही कायम भयंकर कुपोषण, महंगाई व भुखमरी और भी ज्यादा बढ़ेगी।"

सम्मेलन में निर्णय किया गया है कि मध्य प्रदेश के सभी जिलों से किसान और मजदूर बड़ी तादाद में दिल्ली के लिए कूच करेंगे। साथ ही जिला मुख्यालयों पर और संभागीय मुख्यालयों पर प्रदर्शन भी होंगे।

Medha Patekar
Farm Bills
Farm bills 2020
agricultural crises
farmer crises
Central labor organizations
26 November strike
trade unions
Narmada Bachao Andolan
All India Kisan Mahasabha
All India Kisan Khet-Mazdoor Sangathan
National Kisan Mazdoor Mahasangh
Kisan Sangharsh Samiti

Related Stories

दक्षिण अफ्रीका में सिबन्ये स्टिलवाटर्स की सोने की खदानों में श्रमिक 70 दिनों से अधिक समय से हड़ताल पर हैं 

मुंडका अग्निकांड: सरकारी लापरवाही का आरोप लगाते हुए ट्रेड यूनियनों ने डिप्टी सीएम सिसोदिया के इस्तीफे की मांग उठाई

ट्रेड यूनियनों की 28-29 मार्च को देशव्यापी हड़ताल, पंजाब, यूपी, बिहार-झारखंड में प्रचार-प्रसार 

2021 : जन प्रतिरोध और जीत का साल

निर्माण मज़दूरों की 2 -3 दिसम्बर को देशव्यापी हड़ताल,यूनियन ने कहा- करोड़ों मज़दूर होंगे शामिल

किसान मोदी को लोकतंत्र का सबक़ सिखाएगा और कॉरपोरेट की लूट रोकेगा: उगराहां

दिल्ली में मज़दूरों ने अपनी मांगों को लेकर केंद्र और दिल्ली सरकार के ख़िलाफ़ हड़ताल की

किसानों की जीत: “यह आज़ादी का दूसरा आंदोलन रहा है”

खेती गंभीर रूप से बीमार है, उसे रेडिकल ट्रीटमेंट चाहिएः डॉ. दर्शनपाल

ट्रेड यूनियनों के मुताबिक दिल्ली सरकार की न्यूनतम वेतन वृद्धि ‘पर्याप्त नहीं’


बाकी खबरें

  • भाषा
    हड़ताल के कारण हरियाणा में सार्वजनिक बस सेवा ठप, पंजाब में बैंक सेवाएं प्रभावित
    28 Mar 2022
    हरियाणा में सोमवार को रोडवेज कर्मी देशव्यापी दो दिवसीय हड़ताल में शामिल हुए जिससे सार्वजनिक परिवहन सेवाएं बाधित हुईं। केंद्र की कथित गलत नीतियों के विरुद्ध केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के एक संयुक्त मंच ने…
  • आज का कार्टून
    कार्टून क्लिक: “काश! हमारे यहां भी हिंदू-मुस्लिम कार्ड चल जाता”
    28 Mar 2022
    पाकिस्तान एक मुस्लिम बहुल और इस्लामिक देश है। अब संकट में फंसे इमरान ख़ान के सामने यही मुश्किल है कि वे अपनी कुर्सी बचाने के लिए कौन से कार्ड का इस्तेमाल करें। व्यंग्य में कहें तो इमरान यही सोच रहे…
  • भाषा
    केरल में दो दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल के तहत लगभग सभी संस्थान बंद रहे
    28 Mar 2022
    राज्य द्वारा संचालित केरल राज्य सड़क परिवहन निगम (केएसआरटीसी) की बसें सड़कों से नदारत रहीं, जबकि टैक्सी, ऑटो-रिक्शा और निजी बसें भी राज्यभर में नजर नहीं आईं। ट्रक और लॉरी सहित वाणिज्यिक वाहनों के…
  • शिव इंदर सिंह
    विश्लेषण: आम आदमी पार्टी की पंजाब जीत के मायने और आगे की चुनौतियां
    28 Mar 2022
    सत्ता हासिल करने के बाद आम आदमी पार्टी के लिए आगे की राह आसन नहीं है। पंजाब के लोग नई बनी सरकार से काम को ज़मीन पर होते हुए देखना चाहेंगे।
  • सुहित के सेन
    बीरभूम नरसंहार ने तृणमूल की ख़ामियों को किया उजागर 
    28 Mar 2022
    रामपुरहाट की हिंसा ममता बनर्जी की शासन शैली की ख़ामियों को दर्शाती है। यह घटना उनके धर्मनिरपेक्ष राजनीति की चैंपियन होने के दावे को भी कमज़ोर करती है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License