NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
तालिबान के लिए अमेरिका जिम्मेदार, हम अफगानी जनता के साथ खड़े हैं- भाकपा माले
अफगानिस्तान में 1996 से 2001 तक के तालिबानी शासन का अनुभव, और उसकी घोर प्रतिगामी व तानाशाही क़िस्म की विचारधारा व राजनीति, पूरी दुनिया में अफगानिस्तान के भविष्य को लेकर गहरी आशंका पैदा कर रही है
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
19 Aug 2021
भाकपा माले

अफगानिस्तान में अमेरिका समर्थित सरकार के गिर जाने और वहां के राष्ट्रपति अशरफ गनी के देश छोड़ जाने के बाद रविवार को तालिबान ने काबुल पर कब्जा कर लिया। तालिबान ने 11 सितंबर के हमलों के बाद अमेरिका नीत सेना के अफगानिस्तान में आने के 20 साल बाद फिर से देश पर कब्जा कर लिया है।

अफगानिस्तान में तालिबान के कब्जे पर भाकपा माले ने भी अपना वक्तव्य जारी कर दिया है. भाकपा माले ने कहा है ''अफगानिस्तान में चल रहे घटनाक्रम से हम बेहद चिंतित हैं. वहां तालिबान द्वारा तेजी से सत्ता पर किये गये कब्जे ने उस देश को भयानक अराजकता और अनिश्चितता में धकेल दिया है. नागरिकों पर हिंसक हमलों, महिलाओं पर अत्याचार, और मानवाधिकारों एवं नागरिक स्वतंत्रताओं पर व्यवस्थित तरीके से हमलों की खबरें हैं.''

भाकपा माले ने आगे कहा है ''आज के हालातों के लिए अमेरिकी विदेश नीति ही पूरी तरह से जिम्मेदार है. 1980 व 1990 के दशकों के दौरान तालिबान को बढ़ावा देने की नीति से लेकर 9/11 के बाद के दौर में अफगानिस्तान में अमेरिकी घुसपैठ और कब्जा, और फिर अब बिना किसी ठोस तैयारी के अमेरिकी सेनाओं को हटाने तक, यह सैन्य हस्तक्षेप और कब्जा करने की अमेरिकी नीति ही है, जिसके कारण आज अफगानिस्तान की ऐसी दयनीय हालत बन गई है.

अफगानिस्तान में 1996 से 2001 तक के तालिबानी शासन का अनुभव, और उसकी घोर प्रतिगामी व तानाशाही क़िस्म की विचारधारा व राजनीति, पूरी दुनिया और खासकर दक्षिण एशिया के लोगों  में अफगानिस्तान व इस क्षेत्र के भविष्य को लेकर गहरी आशंका पैदा कर रही है. हम आशा करते हैं कि वैश्विक अभिमत और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय का दबाव अफगानिस्तान में आने वाले तालिबानी शासन पर कुछ अंकुश लगा पायेगा और इस संकटग्रस्त देश की जनता लड़कर शांति, प्रगति, व लोकतंत्र हासिल कर पाएगी.

''हम भारत सरकार से मांग करते हैं कि अफगानिस्तान में फंसे सभी भारतीय नागरिकों को सुरक्षित वापस लाया जाये और जो अफगानी नागरिक शिक्षा, रोजगार या अन्य वजहों से इस समय भारत में रह रहे हैं उन्हें पूरी सुरक्षा मिले. अफगान संकट के चलते जाहिर है कि कई अफगानी नागरिक उनके देश में शांति स्थापित होने तक भारत में शरण मांगने के लिए बाध्य होंगे. भारत में अफगानिस्तान से आने वाले मुस्लिम प्रवासियों के साथ बेतुके रूप में भेदभाव करने वाले नागरिकता संशोधन कानून की निरर्थकता इस समय हर कोई महसूस कर रहा है.''

''हम अफगानिस्तान में शांति, स्थायित्व, व लोकतंत्र की स्थापना की जद्दोजहद में अफगानी जनता एवं विश्व जनमत के साथ खड़े होते हुए हैं, अफगानिस्तान की घटनाओं को बहाना बना कर भारत में मुस्लिम विरोधी घृणा एवं हिंसा फैलाने के किसी भी प्रयास को नाकाम करने के लिए पूरी तरह सजग रहना होगा. अफगानिस्तान में धर्मान्ध कट्टरपंथी राजनीतिक ताकतों की उभार से पैदा हुए संकट से हमें सबक और प्रेरणा लेनी चाहिए कि भारत में धर्मांध कट्टरपंथी राजनीति को समय रहते खारिज करें और साम्प्रदायिक सौहार्द, समाजिक प्रगति और लोकतांत्रिक अधिकारों के संघर्षों को मजबूत करने का संकल्प लें.''

इसी प्रकार कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सिस्ट) और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया ने भी अपना जॉइंट स्टेटमेंट जारी कर दिया है. दोनों पार्टियों ने अपने स्टेटमेंट में कहा है ''अफगानिस्तान में अमेरिका को करारी हार का सामना करना पड़ा है। तत्कालीन तालिबान शासन को गिराने के बीस साल बाद, तालिबान एकबार फिर से सत्ता में वापस आ गया है। अशरफ गनी के नेतृत्व वाली सरकार और राष्ट्रीय सेना का पतन अमेरिका और उसके नाटो सहयोगियों द्वारा स्थापित राज्य के खोखलेपन को दर्शाता है।

वक्तव्य में कहा गया है ''भारत सरकार की अफगान नीति अमेरिकियों का आँख बंद करके अनुसरण कर रही थी और इसके परिणामस्वरूप इस क्षेत्र में उसका सबसे अलगाव हो गया है और कुछ ही विकल्प बचे हैं.

1990 के दशक की पूर्ववर्ती तालिबान सरकार एक चरम कट्टरपंथी दृष्टिकोण वाली सरकार थी, जो महिलाओं, बालिकाओं और पहले से ही दबे-कुचले हुए जातीय अल्पसंख्यकों के लिए विनाशकारी थी।
''भारत को प्रमुख क्षेत्रीय शक्तियों के साथ मिलकर काम करना चाहिए ताकि अफगान लोग शांतिपूर्ण और स्थिर वातावरण में रह सकें। भारत सरकार को तुरंत अफगानिस्तान में फंसे सभी भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकालने की दिशा में भी काम करना चाहिए।''

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के सांसद विनय विश्वम ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर आग्रह किया है कि अफगानिस्तान में तालिबान के कब्जा करने के बाद अब भारत आने के इच्छुक अफगान नागरिकों को धर्म से इतर हटकर भारत में शरण में दी जाए।

अफगानिस्तान में ‘मानवीय और सुरक्षा संकट’ का हवाला देते हुए विश्वम ने कहा, ‘‘हमारी पहली प्राथमिकता अफगानिस्तान से सभी भारतीय नागरिकों की सुरक्षित वापसी होनी चाहिए। हमें हालात पर पैनी नजर रखनी चाहिए और मौका मिलते ही सबको वापस लाना चाहिए।’’

उन्होंने पत्र में लिखा, ‘‘भारत की अंतरराष्ट्रीय स्थिति और दक्षिण एशिया में उसकी भूमिका को देखते हुए यह महत्वपूर्ण है कि हम शरणार्थियों को उनके धर्म से इतर अनुमति दें।’’

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ )

CPI-ML
America
Afghanistan

Related Stories

बिहार : नीतीश सरकार के ‘बुलडोज़र राज’ के खिलाफ गरीबों ने खोला मोर्चा!   

बिना अनुमति जुलूस और भड़काऊ नारों से भड़का दंगा

जहांगीरपुरी हिंसा: वाम दलों ने जारी की फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट, पुलिस की भूमिका पर सवाल

बिहार: 6 दलित बच्चियों के ज़हर खाने का मुद्दा ऐपवा ने उठाया, अंबेडकर जयंती पर राज्यव्यापी विरोध दिवस मनाया

रूस पर बाइडेन के युद्ध की एशियाई दोष रेखाएं

बिहार: विधानसभा स्पीकर और नीतीश सरकार की मनमानी के ख़िलाफ़ भाकपा माले का राज्यव्यापी विरोध

माले का 11वां राज्य सम्मेलन संपन्न, महिलाओं-नौजवानों और अल्पसंख्यकों को तरजीह

बिहार: "मुख्यमंत्री के गृह जिले में दलित-अतिपिछड़ों पर पुलिस-सामंती अपराधियों का बर्बर हमला शर्मनाक"

‘बिहार विधान सभा पुस्तकालय समिति’ का प्रतिवेदन प्रस्तुत कर वामपंथ के माले विधायक ने रचा इतिहास

बिहार में शिक्षा व्यवस्था को बेहतर करने की मांग में भाकपा-माले विधायकों का प्रदर्शन


बाकी खबरें

  • Merkel
    एम. के. भद्रकुमार
    मर्केल के अमेरिकी दौरे से रूस, भारत के लिए क्या है ख़ास
    14 Jul 2021
    भारतीय दृष्टिकोण से देखें तो बाईडेन-मर्केल के मध्य कोविड-19 टीकों के लिए अस्थाई ट्रिप्स छूट के विवादास्पद मुद्दे पर होने वाली वार्ता के निष्कर्षों को लेकर गहरी उत्सुकता होनी चाहिए।
  • aims
    रिचा चिंतन
    सेंट्रल विस्टा में लगे पैसे से खोले जा सकते हैं 16 एम्स या 1.2 लाख स्वास्थ्य और कल्याण केंद्र
    14 Jul 2021
    भारत अब भी कोरोना महामारी से जूझ रहा है, हम पर तीसरी लहर का ख़तरा बना हुआ है, लेकिन सरकार अब भी सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास कार्ययोजना में संसाधन लगा रही है। कहा जा रहा है कि यह संसाधन 2026 में संसद के…
  • योगी सरकार द्वारा किए जा रहे रोजगार के दावों को 'युवा हल्ला बोल' ने बताया "Fake News"
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    योगी सरकार द्वारा किए जा रहे रोजगार के दावों को 'युवा हल्ला बोल' ने बताया "Fake News"
    14 Jul 2021
    "जब एक RTI के माध्यम से सरकार से इन 4 लाख नौकरियों का ब्योरा मांगा गया तो जवाब में सरकार ने कहा की उनके पास ये आंकड़ा नहीं है की ये नौकरियां किन किन विभागों में किन किन लोगों को दी गई। तो फिर सरकार…
  • पीपल्स डिस्पैच
    फ़िलिस्तीनी पीपल्स पार्टी फ़िलिस्तीनी सरकार से हटी
    14 Jul 2021
    वामपंथी पार्टी ने अपने फ़ैसले के बावजूद सरकार से इस्तीफ़ा देने से इनकार करने के बाद पीए श्रम मंत्री नारी अबू जैश को अपनी सदस्यता से भी निष्कासित कर दिया।
  • पीपल्स डिस्पैच
    इजिप्ट की संसद ने आतंकवादी समूहों से कथित संबंधों वाले सरकारी कर्मचारियों को बर्ख़ास्त करने के लिए क़ानून पारित किया
    14 Jul 2021
    संसद ने 2017 से लागू देश की आपात स्थिति को 24 जुलाई से अगले तीन महीनों के लिए बढ़ा दिया है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License