NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
रिलायंस कम्युनिकेशंस के चेयरमैन पद से अनिल अम्बानी का इस्तीफ़ा
रिलायंस कम्युनिकेशंस फ़रवरी 2019 से दिवालिया प्रक्रिया में है। बंद हो रही इस टेलीकॉम कंपनी के चेयरमैन अनिल अंबानी समेत चार लोगों ने कंपनी के निदेशक पद से इस्तीफ़ा दे दिया है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
16 Nov 2019
anil ambani
Image courtesy: Telegraph

अनिल अंबानी ने रिलायंस कम्युनिकेशंस (आरकॉम) के डायरेक्टर पद से इस्तीफ़ा दे दिया है। कंपनी ने शनिवार को रेग्युलेटरी फ़ाइलिंग में यह जानकारी दी। अंबानी के साथ ही छाया विरानी, रायना करानी, मंजरी कक्कड़ और सुरेश रंगचर ने भी निदेशक पद से इस्तीफ़ा दे दिया है। इस कंपनी का कामकाज पहले ही बंद हो चुका था। इनमें से अनिल अंबानी, छाया विरानी और मंजरी काकेर ने 15 नवंबर को इस्तीफ़ा दिया, वहीं रायना कारानी ने 14 नवंबर और सुरेश रंगाचर ने 13 नवंबर को इस्तीफ़ा दिया था।

आरकॉम ने बीएसई को बताया कि श्री मणिकांतन वी निदेशक और सीएफ़ओ के पद से पहले ही इस्तीफ़ा दे चुके हैं। इन सभी के इस्तीफ़े कंपनी की कमेटी ऑफ़ क्रेडिटर्स के सामने रखे जाएंगे।

आरकॉम फ़रवरी 2019 से दिवालिया प्रक्रिया में है। कंपनी ने शुक्रवार को बताया कि जुलाई-सितंबर तिमाही में 30,142 करोड़ रुपए का घाटा हुआ। ग़ौरतलब है कि यह कॉर्पोरेट इतिहास में वोडाफ़ोन-आइडिया के बाद दूसरा सबसे बड़ा घाटा है। एजीआर मामले में बक़ाया भुगतान के लिए 28,314 करोड़ रुपए की प्रोविज़निंग करने की वजह से इतना नुक़सान हुआ है।

दिवालिया होने की कगार पर खड़ी कंपनी ने इससे पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में 1,141 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ कमाया था।

आपको बता दें कि उच्चतम न्यायालय के दूरसंचार कंपनियों के सालाना समायोजित सकल राजस्व (एजीआर) की गणना पर फ़ैसले के मद्देनज़र कंपनी को 28,314 करोड़ रुपये चुकाने हैं। पहले एजीआर के तहत टेलीकॉम कंपनियां केवल कोर व्यवसाय से हुई कमाई का एक हिस्सा सरकार को देती थी। लेकिन सरकारी परिभाषा के अनुसार टेलीकॉम कंपनियों को टेलीकॉम सर्विस के अलावा ग़ैर टेलीकॉम सेवाओं से हुई कमाई का भी हिस्सा सरकार को देना था। इस मुद्दे पर वह सरकार से उलझती रही, उन्होंने यह हिस्सा नहीं दिया। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के बाद उन्हें यह हिस्सा भी देना है। इस तरह से पहले से चले आ रहे टेलीकॉम कम्पनियों का घाटा और अधिक बढ़ गया है। और उनपर बोझ भी बढ़ गया है।

आरकॉम की कुल देनदारियों में 23,327 करोड़ रुपये का लाइसेंस शुल्क और 4,987 करोड़ रुपये का स्पेक्ट्रम इस्तेमाल शुल्क शामिल है। आरकॉम और उसकी सहयोगियों  ने 1,210 करोड़ रुपये के ब्याज और 458 करोड़ रुपये के विदेशी विनिमय उतार-चढ़ाव के लिए प्रावधान नहीं किया है।

आरकॉम ने कहा है कि यदि इसके लिए प्रावधान किया जाता तो उसका नुक़सान 1,668 करोड़ रुपये और बढ़ जाता। तिमाही के दौरान कंपनी की परिचालन आय घटकर 302 करोड़ रुपये रह गई जो इससे पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में 977 करोड़ रुपये थी।

बंबई शेयर बाज़ार में आरकॉम का शेयर शुक्रवार को 3.28 फ़ीसदी टूटकर 59 पैसे पर बंद हुआ। अब सवाल यह है कि इन बक़ाया राशियों का भुगतान कौन करेगा? जब कम्पनी दिवालिया प्रक्रिया में है और निदेशक इस्तीफ़ा दे रहे हैं, तब हो सकता है कि यह भी बैंकों का एनपीए बन जाये और भारतीय अर्थव्यवस्था को इसका सामना करना पड़े।  

(भाषा के इनपुट के साथ)

Anil Ambani
Anil Ambani's resignation
Reliance Communications
Telecom companies
Supreme Court
Bombay Stock Exchange

Related Stories

ज्ञानवापी मस्जिद के ख़िलाफ़ दाख़िल सभी याचिकाएं एक दूसरे की कॉपी-पेस्ट!

आर्य समाज द्वारा जारी विवाह प्रमाणपत्र क़ानूनी मान्य नहीं: सुप्रीम कोर्ट

समलैंगिक साथ रहने के लिए 'आज़ाद’, केरल हाई कोर्ट का फैसला एक मिसाल

मायके और ससुराल दोनों घरों में महिलाओं को रहने का पूरा अधिकार

जब "आतंक" पर क्लीनचिट, तो उमर खालिद जेल में क्यों ?

विचार: सांप्रदायिकता से संघर्ष को स्थगित रखना घातक

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक आदेश : सेक्स वर्कर्स भी सम्मान की हकदार, सेक्स वर्क भी एक पेशा

तेलंगाना एनकाउंटर की गुत्थी तो सुलझ गई लेकिन अब दोषियों पर कार्रवाई कब होगी?

मलियाना कांडः 72 मौतें, क्रूर व्यवस्था से न्याय की आस हारते 35 साल

क्या ज्ञानवापी के बाद ख़त्म हो जाएगा मंदिर-मस्जिद का विवाद?


बाकी खबरें

  • इज़रायल और क़ब्ज़े वाले फ़िलिस्तीनी क्षेत्रों में मानवाधिकारों के उल्लंघन की जांच के लिए तीन सदस्यीय आयोग गठित
    पीपल्स डिस्पैच
    इज़रायल और क़ब्ज़े वाले फ़िलिस्तीनी क्षेत्रों में मानवाधिकारों के उल्लंघन की जांच के लिए तीन सदस्यीय आयोग गठित
    23 Jul 2021
    तीन सदस्यीय जांच आयोग का नेतृत्व नवी पिल्ले करेंगे जो 2008-2014 के बीच यूएनएचआरसी के प्रमुख थे।
  • 400 से अधिक पूर्व राष्ट्राध्यक्षों, बुद्धिजीवियों की अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडेन से क्यूबा पर लगा प्रतिबंध हटाने की मांग
    पीपल्स डिस्पैच
    400 से अधिक पूर्व राष्ट्राध्यक्षों, बुद्धिजीवियों की अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडेन से क्यूबा पर लगा प्रतिबंध हटाने की मांग
    23 Jul 2021
    400 से अधिक हस्तियों द्वारा हस्ताक्षरित एक खुला पत्र अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन से डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन के दौरान क्यूबा पर लगाए गए 243 एकतरफ़ा प्रतिबंधों को हटाने की मांग करता है जिसने इस द्वीप…
  • अध्ययन के मुताबिक भारत में कोरोनावायरस की दूसरी लहर ‘विभाजन के बाद की सबसे भयावह त्रासदी’, सरकार ने किया आंकड़े से इंकार
    दित्सा भट्टाचार्य
    अध्ययन के मुताबिक भारत में कोविड-19 की दूसरी लहर ‘विभाजन के बाद सबसे बड़ी त्रासदी’, सरकार का आंकड़े से इंकार
    23 Jul 2021
    रिपोर्ट में कहा गया है, “वास्तविक मौतों का आंकड़ा कई लाखों में होने का अनुमान है, न कि कुछ लाख में, जो इसे यकीनन विभाजन और स्वतंत्रता के बाद से भारत की सबसे भयावह मानवीय त्रासदी बना देता है।” 
  • अयोध्या में बीएसपी के कार्यक्रम का पोस्टर। बीएसपी नेता सतीश चंद्र मिश्रा के ट्विटर हैंडल से साभार
    असद रिज़वी
    दलित+ब्राह्मण: क्या 2007 दोहरा पाएगी बीएसपी?
    23 Jul 2021
    पार्टी अपने 2007 के सोशल इंजीनियरिंग के प्रयोग को दोहराने की कोशिश कर रही है, लेकिन ये इस बार इतना आसान नहीं होगा। एक विश्लेषण...
  • ज़मीन और आजीविका बचाने के लिए ग्रामीणों का विरोध, गुजरात सरकार वलसाड में बंदरगाह बनाने पर आमादा
    दमयन्ती धर
    ज़मीन और आजीविका बचाने के लिए ग्रामीणों का विरोध, गुजरात सरकार वलसाड में बंदरगाह बनाने पर आमादा
    23 Jul 2021
    वलसाड में उमरागाम तालुक के स्थानीय लोग प्रस्तावित बंदरगाह के निर्माण का विरोध 1997 से ही करते आ रहे हैं, जब पहली बार इसकी घोषणा की गई थी। 
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License