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शाहीन बाग़ का ऐलान : “कोरोना से भी लड़ेंगे और CAA-NRC से भी”
कोरोना वायरस के ख़तरे और दिल्ली सरकार के निर्देश/सलाह के बावजूद शाहीन बाग़ की महिलाएं धरना स्थल पर एकजुट हैं। हालांकि मंगलवार की तुलना में बुधवार को भीड़ थोड़ी कम नज़र आई।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
18 Mar 2020
shaheen bagh

दिल्ली: शाहीन बाग़ में धरनास्थल पर महिलाएं लगातार डटी हुई हैं। हालांकि कोरोना वायरस के खतरे और दिल्ली सरकार की ओर से दिए गए निर्देश/सलाह के चलते मंगलवार की तुलना में बुधवार को भीड़ थोड़ी कम नजर आई लेकिन प्रदर्शन अब भी जारी है।

प्रदर्शन स्थल पर मौजूद इन महिलाओं का कहना है कि उनके स्वास्थ्य की जिम्मेदारी सरकार की है। ऐसे में सबसे आसान तरीका यह है कि सरकार उनकी बात मान ले और वे प्रदर्शन समाप्त कर देंगी। हालांकि प्रदर्शन के दौरान महिलाएं एहतियात बरत रही हैं। उनके बैठने के लिए तख्त की व्यवस्था कर दी गई है। बड़ी संख्या में सेनिटाइजर और मास्क भी धरनास्थल पर बांटे गए हैं।  

दूसरी ओर राष्ट्रीय बाल अधिकार सुरक्षा आयोग ने जानकारी दी कि मंगलवार को उसे कोरोना वायरस के हाहाकार के बीच भी शाहीन बाग़ में छोटे बच्चों को लेकर बैठ रही महिलाओं के खिलाफ शिकायत मिली है। बता दें कि बुधवार को लोकसभा में भी शाहीन बाग़ की महिलाओं को हटाने को लेकर चर्चा हुई है। वहीं, दिल्ली पुलिस और शाहीन बाग़ की महिला प्रदर्शनकारियों के बीच मंगलवार को वार्ता एक बार फिर से विफल हो गई।

कोरोना वायरस और सीएए-एनआरसी दोनों से ही लड़ना है: प्रदर्शनकारी

महिलाओं के प्रदर्शन पर बैठे रहने को लेकर धरने में शामिल रितू कौशिक कहती हैं, 'अरविंद केजरीवाल ने जो 50 लोगों की सीमा तय की है, इसका निर्धारण कैसे हुआ है। क्या डब्लूएचओ ने यह बात कही है या फिर किसी मेडिकल बोर्ड ने इसका रिकमंडेशन दिया है। इसके अलावा बस अड्डे, रेलवे स्टेशन पर सरकार इसे कैसे निर्धारित कर रही है। दिल्ली में संसद भी चल रही है, वहां पर तो 50 से ज्यादा लोग होते हैं। हमें लगता है कि मुख्यमंत्री केजरीवाल शाहीन बाग़ जैसे प्रदर्शन को टारगेट करने के लिए ऐसा कर रहे हैं। उन्हें अपना मकसद साफ करना होगा।'

वे आगे कहती हैं, 'शाहीन बाग़ से पहले सरकार ही यह बताए कि कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए वह क्या कदम उठा रही है। कितने लोगों को मास्क बांटे गए हैं, कितने लोगों को सैनेटाइजर बांटे गए हैं। इतने लोग मलेरिया, डेंगू और टीबी से मर जाते हैं तब तो सरकार कुछ नहीं कर पाती है। दसअसल सरकार सिर्फ सीएए, एनआरसी और एनपीआर के खिलाफ चल रहे आंदोलन को कमजोर करने के लिए ऐसा कदम उठा रही है। हम धरनास्थल छोड़कर कही जाने वाले नहीं हैं।'

प्रदर्शन में मौजूद सोफिया ने कहा, 'हमें कोरोना वायरस और सीएए-एनआरसी दोनों से ही लड़ना है। इस लड़ाई में हमारे लिए कोरोना वायरस से ज्यादा खतरनाक एनआरसी और सीएए है। इसलिए सीएए के खिलाफ हमारी यह लड़ाई लड़ाई जारी रहेगी। बीमार होने के डर से हम अपने आंदोलन को छोड़कर घर नहीं बैठ सकते।'

वहीं, 80 वर्षीय दादी सरवरी कहती हैं, 'अगर सरकार को हमारी इतनी ही चिंता है तो क्यों नहीं कानून को वापस ले लेती है। अगर सीएए का कानून वापस हो जाए, तो हम आज ही इस सड़क को साफ करके अपने घरों को लौट जाएंगे, लेकिन कानून वापस न होने की शक्ल में हम यहां से नहीं हटेंगे।'

एक दूसरी दादी 85 वर्षीय आस्मां खातून कहती हैं, 'हमें अपने आंदोलन के लिए सब कुर्बानियां मंजूर हैं। प्रदर्शन के दौरान हमने कई समस्याएं बर्दाश्त की हैं। हमने सर्दी सहन की, अब गर्मी आएगी, हम बर्दाश्त करेंगे। बारिश और सर्द रातों में भी हम यहां डटे रहें। हम यह लड़ाई तब तक जारी रखेंगे जब तक देश के हुक्मरान हमारी बात नहीं सुनते।'

पुलिस ने की मुख्य सड़क मार्ग खाली करने की अपील

दिल्ली पुलिस और शाहीन बाग़ की महिला प्रदर्शनकारियों के बीच मंगलवार को एक बार फिर वार्ता हुई। मंगलवार को पुलिस और प्रदर्शनकारी महिलाओं के बीच वार्ता के लिए एक निष्पक्ष स्थान का चुनाव किया गया था। शाहीन बाग़ में चल रहे प्रदर्शन से करीब 100 मीटर दूर स्थित चौराहे पर पुलिस और महिला प्रदर्शनकारियों के बीच यह बातचीत हुई। यहां पुलिस की ओर से स्थानीय एसएचओ और एसीपी जगदीश यादव मौजूद थे।

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वहीं प्रदर्शनकारियों की ओर से करीब 20 महिलाएं इस वार्ता में शामिल हुईं। महिलाओं से बातचीत के दौरान एसीपी जगदीश यादव ने कहा, 'आप पिछले कई महीनों से यहां प्रदर्शन कर रही हैं, इस दौरान हमने आपको पूरी सुरक्षा मुहैया कराई है। हमारा आपसे निवेदन है कि आप मुख्य सड़क मार्ग खाली करके किसी और स्थान को अपने प्रदर्शन के लिए चुनें।'

पुलिस के आग्रह का सभी प्रदर्शनकारी महिलाओं ने एक स्वर में विरोध किया। इसके बाद एसीपी यादव ने महिलाओं से कहा कि आप सड़क का दूसरा हिस्सा वाहनों की आवाजाही के लिए खाली कर दें। दरअसल, पुलिस चाहती है कि शाहीन बाग़ की जिस सड़क पर नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ यह धरना दिया जा रहा है, उस सड़क का सामने वाला हिस्सा वाहनों की आवाजाही के लिए खोल दिया जाए। लेकिन प्रदर्शनकारी महिलाओं ने इससे भी इनकार कर दिया।

पुलिस के साथ बातचीत के लिए आई प्रदर्शनकारी महिलाओं ने कहा, 'सड़क का दूसरा हिस्सा खोलने पर हमारी सुरक्षा को खतरा है, इसलिए हम इसके लिए हामी नहीं भर सकते।' इसके बाद पुलिसकर्मी चर्चा को आगे बढ़ाते इससे पहले ही बातचीत के लिए आई तमाम महिलाएं नारेबाजी करती हुई वापस धरना स्थल पर चली गईं।' बता दें कि अगले सप्ताह इस मामले को लेकर अदालत में सुनवाई होनी है। इस सुनवाई से पहले पुलिस शांतिपूर्ण वार्ता के जरिए इस मसले का हल खोजने की कोशिश कर रही है।

शाहीन बाग़ की महिलाओं को लगातार समर्थन मिल रहा है तो दूसरी ओर कुछ नाराज़गियां भी सामने आ रही हैं। बहुत से मोहल्ले वाले और दुकानदार यह चाह रहे हैं कि अब धरने को समाप्त किया जाय। नाम न छापने के शर्त पर शाहीन बाग़ के एक दुकानदार ने कहा कि दुकानें बंद होने से उनके सामने आर्थिक व रोजी रोटी का संकट उत्पन्न हो गया है। 

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