NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
सीएए प्रदर्शन: सुप्रीम कोर्ट ने नुकसान भरपाई मामले में यूपी सरकार से मांगा जवाब
सुप्रीम कोर्ट उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें आरोप लगाया गया है कि उत्तर प्रदेश में यह नोटिस एक व्यक्ति के खिलाफ “मनमाने तरीके” से भेजा गया जिसकी 94 की उम्र में छह साल पहले मौत हो चुकी है और साथ ही दो अन्य को भी नोटिस भेजे गए जिनकी उम्र 90 साल से अधिक है।
न्यूज़क्लिक प्रोडक्शन
31 Jan 2020
Supreme court on CAA UP
Image courtesy: logicalIndian

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा राज्य में सीएए विरोध प्रदर्शनों के कारण सार्वजनिक संपत्तियों को हुए नुकसान की वसूली के लिए जारी की गई रिकवरी नोटिस को रद्द करने की मांग पर जवाब मांगा है।

न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति के एम जोसेफ की पीठ ने राज्य सरकार को नोटिस जारी कर चार हफ्ते के भीतर अपना जवाब दायर करने का निर्देश दिया है।

सुप्रीम कोर्ट उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें आरोप लगाया गया है कि उत्तर प्रदेश में यह नोटिस एक व्यक्ति के खिलाफ “मनमाने तरीके” से भेजा गया जिसकी 94 की उम्र में छह साल पहले मौत हो चुकी है और साथ ही दो अन्य को भी नोटिस भेजे गए जिनकी उम्र 90 साल से अधिक है।

मामले में याचिकाकर्ता एवं वकील परवेज आरिफ टीटू ने यह दावा करते हुए इन नोटिस पर रोक लगाने का अनुरोध किया है कि ये उन व्यक्तियों को भेजे गए हैं जिनके खिलाफ किसी दंडात्मक प्रावधान के तहत मामला दर्ज नहीं हुआ और न ही उनके खिलाफ किसी प्राथमिकी या अपराध का ब्योरा उपलब्ध कराया गया है।

वकील निलोफर खान के जरिए दायर याचिका में कहा गया कि ये नोटिस 2010 में दिए गए इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले पर आधारित हैं जो 2009 में शीर्ष अदालत द्वारा पारित फैसले के “दिशा-निर्देशों का उल्लंघन है’’। इन निर्देशों की 2018 के फैसले में पुन: पुष्टि की गई थी।

इसमें कहा गया, “विरोधाभास यह है कि उच्चतम न्यायालय ने 2009 में नुकसान के आकलन और आरोपियों से नुकसान की भरपाई का दायित्व प्रत्येक राज्य के उच्च न्यायालय को सौंपा था जबकि इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 2010 के फैसले में दिशा-निर्देश जारी किए थे कि राज्य सरकार को नुकसान की भरपाई करने संबंधी प्रक्रिया का जिम्मा लेने दें, जिसके गंभीर निहितार्थ हैं।

इसमें कहा गया है, “न्यायिक निगरानी/ न्यायिक सुरक्षा मनमानी कार्रवाई के खिलाफ सुरक्षा तंत्र के समान है। इसका मतलब है कि बहुत संभव है कि राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी अपनी दुश्मनी निकालने के लिए राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों या पार्टी का विरोध करने वालों के खिलाफ इसका इस्तेमाल कर सकती है।”

साथ ही इस याचिका में उत्तर प्रदेश सरकार के लिए ऐसे प्रदर्शनों के दौरान सार्वजनिक संपत्ति को हुए नुकसान की भरपाई वसूलने के लिए शीर्ष अदालत के 2009 और 2018 के दिशा-निर्देशों का पालन करने का निर्देश देने का भी अनुरोध किया गया है।

इसमें उत्तर प्रदेश में संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) के खिलाफ प्रदर्शनों के दौरान हुई घटनाओं की स्वतंत्र न्यायिक जांच की मांग की गई है जैसा कि कर्नाटक उच्च न्यायालय ने किया है।

याचिका में दावा किया गया है कि उत्तर प्रदेश में भाजपा नीत योगी आदित्यनाथ सरकार प्रदर्शनकारियों की संपत्ति जब्त कर, “सार्वजनिक संपत्ति को हुए नुकसान का बदला लेने के मुख्यमंत्री के वादे पर आगे बढ़ रही है” ताकि “अल्पसंख्यक समुदाय से राजनीतिक कारणों के लिए बदला लिया जा सके’’।

इसमें आरोप लगाया गया है कि उत्तर प्रदेश में हिंसक प्रदर्शनों के संबंध में अब तक गिरफ्तार करीब 925 लोगों को तब तक आसानी से जमानत नहीं मिलेगी जब तक कि वे नुकसान की भरपाई नहीं करते क्योंकि उन्हें रकम जमा कराने के बाद ही “सशर्त जमानत” दी जाएगी।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि उत्तर प्रदेश सरकार और उसका प्रशासन लोकतांत्रिक सरकार के तौर पर काम नहीं कर रहा क्योंकि इसने सीएए/ एनआरसी के खिलाफ प्रदर्शनों पर कार्रवाई की। पुलिस ने उत्तर प्रदेश प्रशासन के निर्देशों पर अत्यधिक बल का प्रयोग किया और सार्वजनिक जवाबदेही से इनकार किया’’।

सीएए विरोधी प्रदर्शनों का ब्योरा देते हुए याचिका में दावा किया गया है कि उत्तर प्रदेश में “कानून का कोई शासन” नहीं रह गया है और संविधान के तहत सुनिश्चित मौलिक अधिकारों का “पूरी तरह उल्लंघन” हो रहा है।

गौरतलब है कि यूपी सरकार ने नागरिकता संशोधन कानून को लेकर अलग-अलग विरोध प्रदर्शन के दौरान सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने वाले लोगों की पहचान कर उनसे वसूली करने का आदेश दिया है। इसी संबंध में राजधानी लखनऊ में चिह्नित 150 कथित आरोपियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। वहीं मुजफ्फरनगर में हुई हिंसा के मामले में 46 लोगों को चिह्नित करते हुए उन्हें नुकसान की क्षतिपूर्ति के लिए नोटिस जारी किए गए थे। परवेज आरिफ द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कि यूपी सरकार का यह निर्णय सही नहीं है। इसे निरस्त किया जाना चाहिए।

(समाचार एजेंसी भाषा इनपुट के साथ)

UttarPradesh
CAA
Protest against CAA
Violence in UP
Yogi Adityanath
Supreme Court
yogi sarkar
BJP

Related Stories

बदायूं : मुस्लिम युवक के टॉर्चर को लेकर यूपी पुलिस पर फिर उठे सवाल

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

ज्ञानवापी मस्जिद के ख़िलाफ़ दाख़िल सभी याचिकाएं एक दूसरे की कॉपी-पेस्ट!

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

आर्य समाज द्वारा जारी विवाह प्रमाणपत्र क़ानूनी मान्य नहीं: सुप्रीम कोर्ट


बाकी खबरें

  • JEWER
    मुकुंद झा
    जेवर एयरपोर्टः दूसरे फेज के लिए भूमि अधिग्रहण नहीं होगा आसान, किसानों की चार गुना मुआवज़े की मांग
    29 Dec 2021
    जेवर एयरपोर्ट के निर्माण के दूसरे फेज के लिए छह अन्य गांवों से 1,334 हेक्टेयर और भूमि के अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इसको लेकर किसानों ने विरोध शुरू कर दिया है।
  • कोरोना अपडेट: देश में 20 दिन बाद 9 हज़ार से ज़्यादा मामले दर्ज, ओमीक्रॉन के मामले बढ़कर 781 हुए
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 20 दिन बाद 9 हज़ार से ज़्यादा मामले दर्ज, ओमीक्रॉन के मामले बढ़कर 781 हुए
    29 Dec 2021
    देश में कोरोना के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है | देश में 20 दिन बाद कोरोना के 9 हज़ार से ज़्यादा मामले सामने आए हैं। वहीं मंगलवार को ओमीक्रॉन के सबसे ज्यादा यानी 128 नए मामले सामने आए हैं।
  • लड़कियों की शादी की क़ानूनी उम्र बढ़ाकर 21 साल करना बाल विवाह का समाधान नहीं
    सुमैया खान
    लड़कियों की शादी की क़ानूनी उम्र बढ़ाकर 21 साल करना बाल विवाह का समाधान नहीं
    29 Dec 2021
    इसकी बजाय सरकार को लड़कियों को शिक्षा के अवसर, स्वास्थ्य-सेवाएं एवं सुरक्षा प्रदान करने में और अधिक निवेश करना चाहिए। उन्हें अपना करियर चुनने में मदद करनी चाहिए।
  • एमएसपी कृषि में कॉर्पोरेट की घुसपैठ को रोकेगी और घरेलू खाद्य सुरक्षा को सुनिश्चित करेगी
    नवप्रीत कौर, सी सरतचंद
    एमएसपी कृषि में कॉर्पोरेट की घुसपैठ को रोकेगी और घरेलू खाद्य सुरक्षा को सुनिश्चित करेगी
    29 Dec 2021
    एक गारंटीशुदा एमएसपी प्रणाली सार्वजनिक भंडारण लागत/अपव्यय को भी कम करेगी बशर्ते इसे एक सार्वभौमिक सार्वजनिक वितरण प्रणाली द्वारा पूरक बनाया जाए।
  • डीजेबी: यूनियनों ने मीटर रीडर्स के ख़िलाफ़ कार्रवाई वापस लेने की मांग की, बिलिंग में गडबड़ियों के लिए आईटी कंपनी को दोषी ठहराया
    रौनक छाबड़ा
    डीजेबी: यूनियनों ने मीटर रीडर्स के ख़िलाफ़ कार्रवाई वापस लेने की मांग की, बिलिंग में गडबड़ियों के लिए आईटी कंपनी को दोषी ठहराया
    29 Dec 2021
    डीजेबी यूनियन ने मंगलवार यह आरोप लगाते हुए एक प्रदर्शन किया कि राष्ट्रीय राजधानी में इस समय पानी की बिलिंग की जो गड़बड़ियां सामने आ रही हैं,वह विप्रो की ओर से व्यवस्थित किये जा रहे राजस्व प्रबंधन…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License