NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
मुस्लिम विरोधी नारेबाजी: छात्र-नौजवानों का विरोध प्रदर्शन; अदालत ने भाजपा नेता सहित 6 को न्यायिक हिरासत में भेजा
दिल्ली की एक अदालत ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान कथित रूप से मुस्लिम विरोधी नारे लगाने के मामले में गिरफ्तार किए गए भाजपा नेता अश्विनी उपाध्याय समेत छह लोगों को मंगलवार को दो दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। जबकि दूसरी तरफ इस घटना के विरोध में छात्र कार्यकर्ता और नागरिक संस्थाओं के सदस्य मंगलवार शाम को जंतर-मंतर के पास एकत्र हुए।

न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
11 Aug 2021
KJH

नयी दिल्ली:  मंगलवार का पूरा दिन जंतर-मंतर मुस्लिम विरोधी नारेबाजी मामले को लेकर चर्चा में रहा। देश के न्यूज़ चैनलों से लेकर कोर्ट, पुलिस और सड़क पर भी ये घटना छाई रही। दिल्ली की एक अदालत ने इस मामले में गिरफ्तार किए गए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता और पूर्व प्रवक्ता अश्विनी उपाध्याय समेत छह लोगों को मंगलवार को दो दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। जबकि दूसरी तरफ नारेबाजी की इस घटना के विरोध में छात्र कार्यकर्ता और नागरिक संस्थाओं के सदस्य मंगलवार शाम को जंतर-मंतर के पास एकत्र हुए। लेकिन पुलिस ने इन्हे प्रदर्शन करने की इजाज़त नहीं दी।  वहीं इन आरोपियों के समर्थन में भी कुछ लोग सडकों पर उतरे और कनॉट प्लेस थाने के पास हंगामा किया,जिन्हें पुलिस ने हटा दिया।  

कोर्ट में क्या हुआ?

मंगलवार को ड्यूटी मजिस्ट्रेट तन्वी खुराना ने आरोपियों की जमानत अर्जी लंबित होने पर विचार करते हुए उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया। न्यायाधीश ने यह भी निर्देश दिया कि आरोपी अश्विनी उपाध्याय, प्रीत सिंह, दीपक सिंह, दीपक कुमार, विनोद शर्मा और विनीत बाजपेयी द्वारा दाखिल अर्जियों को बुधवार को ही संबंधित अदालत के समक्ष रखा जाए।

अदालत ने कहा, ‘‘यह देखा जा सकता है कि जांच प्रारंभिक चरण में है और इस स्तर पर सबूतों के साथ छेड़छाड़ की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है।’’ हालांकि, अदालत ने मामले में जांच अधिकारी द्वारा किए गए निवेदन का भी उल्लेख किया कि वह जमानत अर्जियों का विस्तृत जवाब दाखिल करना चाहते हैं।

आरोपियों को दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के विभिन्न इलाकों से गिरफ्तार किया गया। जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन के दौरान मुस्लिम विरोधी नारे लगाने संबंधी एक वीडियो के सोशल मीडिया पर वायरल होने और शिकायतें मिलने के बाद दिल्ली पुलिस ने सोमवार को इस संबंध में मामला दर्ज किया था।

‘भारत जोड़ो आंदोलन’ के नाम पर रविवार को जंतर-मंतर पर आयोजित प्रदर्शन में सैकड़ों लोग शामिल हुए थे। ‘भारत जोड़ो आंदोलन’ की प्रवक्ता शिप्रा श्रीवास्तव ने कहा था कि प्रदर्शन अश्विनी उपाध्याय के नेतृत्व में हुआ था। हालांकि उन्होंने मुस्लिम विरोधी नारे लगाने वालों से किसी प्रकार के संबंध से इनकार किया है। उपाध्याय ने भी मुस्लिम विरोधी नारेबाजी की घटना में शामिल होने से इनकार किया।

जंतर-मंतर पर भड़काऊ नारेबाजी के ख़िलाफ़ छात्र संगठनों, नागरिक संस्थाओं के सदस्यों का प्रदर्शन

छात्र कार्यकर्ता और नागरिक संस्थाओं के सदस्य मंगलवार को जंतर-मंतर के पास एकत्र हुए। जंतर-मंतर की ओर बढ़ने की कोशिश कर रहे करीब 100 प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। 

ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एनसाई बालाजी ने दावा किया कि पुलिस ने शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करने वालों को रोका। उन्होंने कहा, ‘‘सांप्रदायिक भाषण देने वाले लोगों को पुलिस ने हिरासत में नहीं लिया। उन्होंने हमें रोका, जो यहां अभद्र भाषा का शांतिपूर्ण विरोध करने आए थे। सोशल मीडिया पर इस घटना की व्यापक आलोचना होने के बाद उन्होंने (पुलिस) आरोपियों को गिरफ्तार किया है।’’ 

प्रदर्शनकारी शाम करीब चार बजे संसद मार्ग से जंतर-मंतर की ओर जा रहे थे, तभी उन्हें रोका गया और वहां से जाने को कहा गया। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि प्रदर्शनकारियों को प्रदर्शन करने की अनुमति नहीं थी और जब वे संसद मार्ग पहुंचे तो उन्हें जाने के लिए कहा गया। उन्होंने कहा कि जब प्रदर्शनकारी वहां से नहीं हटे तो उनको हिरासत में लिया गया और दो बसों के जरिए मंदिर मार्ग पुलिस स्टेशन ले जाया गया।

प्रदर्शनकारियों में शामिल प्रशांत टंडन ने कहा, ‘‘वह भाषण बहुत खतरनाक था। यह भारतीय संविधान और भारतीय परंपरा के अनुरूप नहीं था। पुलिस को तुरंत आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए थी। मैंने सुना है कि वीडियो वायरल होने के तीन दिन बाद आज कुछ लोगों को गिरफ्तार किया गया है।’’

आइसा ने एक बयान में कहा कि दिल्ली पुलिस ने भारतीय जनता पार्टी-राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सदस्यों द्वारा इस्तेमाल की गयी अभद्र भाषा का विरोध करने वाले छात्रों, नागरिक संस्थाओं के सदस्यों, पत्रकारों, आइसा कार्यकर्ताओं और अन्य संगठनों के लोगों को हिरासत में लिया। छात्र संगठन ने हिरासत में लिए गए लोगों को रिहा करने की मांग की। 

स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) के सदस्यों ने भी विरोध प्रदर्शन में भाग लिया। एसएफआई ने कहा कि प्रदर्शन का उद्देश्य शांति और धर्मनिरपेक्षता के संदेश के साथ सांप्रदायिक ध्रुवीकरण का विरोध करना था।

एसएफआई के दिल्ली राज्य अध्यक्ष सुमित कटारिया जिन्हे प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिया गया था। उन्होंने बताया उन्हें और उनके साथ बाकी अन्य संगठन के लोगो को पुलिस ने कुछ घंटे हिरासत में रखने के बाद छोड़ दिया था। 

सुमित ने न्यूज़क्लिक से बात करते हुए कहा कि ये अचानक हुई घटना नहीं थी बल्कि इस सरकार और आरएसएस की सोची समझी चाल थी। आज ये जब जन मुद्दों पर घिरी है तो उससे ध्यान भटकाने के लिए अपने पुराने सांप्रदायिक उन्माद के एजेंडे पर लौट रही है। लेकिन ये भारत और उसके इंसाफ पसंद लोगो ऐसा नहीं होने देंगे। हम इनके सांप्रदयिक उन्माद का भी तिरंगे से जवाब देंगे और शिक्षा, स्वाथ्य और किसानी से जुड़े सवाल भी इनसे पूछते रहेंगे। 

अंत में उन्होंने कहा इस बार हम तैयार हैं किसी भी कीमत पर हम दिल्ली और देश को दोबारा जलने नहीं देंगे। 

छात्र संगठन केवाईएस ने मांग की है कि कार्यक्रम के आयोजन से जुड़े सभी लोगों को गिरफ्तार किया जाना चाहिए। संगठन ने अपने बयान में कहा कि "इसके अलावा, संबंधित कानूनों के तहत देश में विभिन्न समुदायों के बीच सांप्रदायिक सौहार्द को तोड़ने की कोशिश के लिए उन्हें कड़ी सजा दी जानी चाहिए। इसके अलावा, देश भर के जिला और पुलिस प्रशासनों को सख्त निर्देश दिया जाना चाहिए कि वे सांप्रदायिक सद्भाव को तोड़ने और समुदायों के बीच नफरत फैलाने के उद्देश्य से आयोजित किसी भी कार्यक्रम के लिए जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाएं।"

 (समाचार एजेंसी भाषा इनपुट के साथ) 

Jantar Mantar
Anti Muslim
Anti-Muslim Slogans
delhi police
Communal Hate

Related Stories

दिल्ली: रामजस कॉलेज में हुई हिंसा, SFI ने ABVP पर लगाया मारपीट का आरोप, पुलिसिया कार्रवाई पर भी उठ रहे सवाल

तिरछी नज़र: ये कहां आ गए हम! यूं ही सिर फिराते फिराते

विचार: सांप्रदायिकता से संघर्ष को स्थगित रखना घातक

मोदी के आठ साल: सांप्रदायिक नफ़रत और हिंसा पर क्यों नहीं टूटती चुप्पी?

क्या पुलिस लापरवाही की भेंट चढ़ गई दलित हरियाणवी सिंगर?

बग्गा मामला: उच्च न्यायालय ने दिल्ली पुलिस से पंजाब पुलिस की याचिका पर जवाब मांगा

मनासा में "जागे हिन्दू" ने एक जैन हमेशा के लिए सुलाया

‘’तेरा नाम मोहम्मद है’’?... फिर पीट-पीटकर मार डाला!

ताजमहल किसे चाहिए— ऐ नफ़रत तू ज़िंदाबाद!

शाहीन बाग़ : देखने हम भी गए थे प तमाशा न हुआ!


बाकी खबरें

  • Agriculture
    शिरीष खरे
    देशभर में घटते खेत के आकार, बढ़ता खाद्य संकट!
    12 Jan 2022
    प्रधानमंत्री के निर्णय के बाद राजधानी दिल्ली की सीमाओं पर लंबे समय से आंदोलन कर रहे किसान घर लौट गए हैं। एक बार फिर गंभीरतापूर्वक यह प्रश्न पूछा जाना चाहिए कि क्या कृषि क्षेत्र पर छाया संकट टल गया है?
  • daily
    न्यूज़क्लिक टीम
    हरियाणा में डॉक्टरों की हड़ताल, बिहार बॉयलर ब्लास्ट में कोई गिरफ़्तारी नहीं और अन्य ख़बरें
    11 Jan 2022
    न्यूज़क्लिक के डेली राउंडअप में आज हमारी नज़र रहेगी हरियाणा में डॉक्टरों की हड़ताल, बिहार बॉयलर ब्लास्ट में कोई गिरफ़्तारी नहीं और अन्य ख़बरों पर।
  • Agriculture
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकरण कराने वाले कामगारों में सबसे अधिक कृषि क्षेत्र से
    11 Jan 2022
    इस पोर्टल पर पंजीकरण कराने वाले कामगारों की सबसे अधिक संख्या कृषि क्षेत्र से जुड़े कामगारों की है। पिछले साल अगस्त से शुरू हुए इस पोर्टल पर अब तक क़रीब 10 करोड़ से अधिक कृषि क्षेत्र के कामगारों ने…
  • unemployment
    अजय कुमार
    चुनाव में जा रही राज्य सरकारें रोज़गार के मोर्चे पर फेल
    11 Jan 2022
    सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनामी के साल 2021 के दिसंबर माह के आंकड़ों का विश्लेषण बताता है कि जिन चार राज्यों में चुनाव होने वाला है,उनमें से हर एक राज्य में पिछले 5 सालों में काम की तलाश में…
  • Farmer
    राजा मुज़फ़्फ़र भट
    नए आदेश से जम्मू-कश्मीर अपनी सीमित कृषि भूमि भी गंवा देगा
    11 Jan 2022
    कृषि भूमि को गैर-कृषि गतिविधियों के लिए बदलने की अनुमति देना विनाशकारी साबित होगा।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License