NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
दुनिया भर की: दक्षिण अमेरिका में वाम के भविष्य की दिशा भी तय करेंगे बोरिक
बोरिक का सत्ता संभालना सितंबर 1973 की सैन्य बगावत के बाद से—यानी पिछले तकरीबन 48-49 सालों में—चिली की राजनीतिक धारा में आया सबसे बड़ा बदलाव है।
उपेंद्र स्वामी
14 Mar 2022
Gabriel Boric
फ़ोटो साभार:  रायटर्स

गेब्रियल बोरिक ने आखिरकार चिली के सबसे युवा राष्ट्रपति के बतौर कार्यभार संभाल लिया है। लेकिन यहां पर उनका संघर्ष खत्म नहीं होता है, बल्कि यहां से उनकी असली चुनौती खड़ी होती है। केवल चिली ही नहीं बल्कि समूचे लैटिन अमेरिकी की निगाहें उन पर होंगी क्योंकि गाहे-बगाहे उनके कंधों पर दक्षिणी अमेरिकी महाद्वीप में वाम राजनीति को एक लोकप्रिय स्वरूप देने की भी जिम्मेदारी होगी।

आधुनिक दौर के एक युवा होने के नाते अगर वह प्रगतिशील वामपंथ में अपनी हमपीढ़ी की रुचि को ठोस स्वरूप दे पाने में कामयाब रहते हैं तो उसका असर यकीनन दूर तक जाएगा- चिली, और शायद दक्षिण अमेरिका की सीमाओं के भी पार।

बोरिक का सत्ता संभालना सितंबर 1973 की सैन्य बगावत के बाद से—यानी पिछले तकरीबन 48-49 सालों में—चिली की राजनीतिक धारा में आया सबसे बड़ा बदलाव है। उस सैन्य बगावत के बाद जनरल अगस्तो पिनोचे का तानाशाही शासन 17 साल तक चला और फिर जब लोकतंत्र बहाल हुआ तो तब से लेकर अब तक वहां दक्षिणपंथी सरकारें ही सत्ता में काबिज रहीं।

जो लोग इन दिनों यूक्रेन पर रूसी हमले से परेशान हैं, उन्हें यहां यह याद दिलाना ज़रूरी है कि 1973 के उस सितंबर माह में अमेरिकी सीआईए की शह व पूरी मदद के साथ जनरल पिनोचे के नेतृत्व में सैन्य बागियों ने सैंटियागो में राष्ट्रपति भवन पर रॉकेट, बमों और टैंकों से हमला बोला था। बागियों के धावा बोलते ही चिली के पहले समाजवादी-मार्क्सवादी राष्ट्रपति सल्वाडोर अयांदे ने खुद को गोली मार ली थी।

राष्ट्रपति भवन पर एक-दो नहीं बल्कि 17 बम गिराये गये थे और इस पूरे सैन्य तख़्तापलट में हजारों लोगों की जान गई थी। कहा यह भी जाता है कि पिनोचे की तानाशाही के दौर में कम से कम तीन हजार राजनीतिक विरोधी सेना ने या तो मार डाले या फिर ‘गायब’ कर डाले।

ऐसे में यह अनायास ही नहीं था कि बोरिक ने राष्ट्रपति का पदभार संभालने के वक़्त दिये गए भाषण में अयांदे की विरासत का जिक्र किया। वह पिछले कई सालों में सल्वाडोर अयांदे का जिक्र करते रहे हैं। राष्ट्रपति के तौर पर बोरिक के शपथ ग्रहण कार्यक्रम में शिरकत करने पहुंचे कई पुराने लोगों ने कहा कि उन्हें गेब्रियल को देखकर सल्वाडोर अयांदे की याद हो आती है, उनकी उम्मीद बस इतनी थी कि उनका भविष्य सुखद रहे।

बोरिक ने इस मौके पर स्वीकार किया कि आगे की चुनौतियां गंभीर हैं। लेकिन उन्होंने यह भी वादा किया कि वह सबकी सुनेंगे। 36 साल के बोरिक ने बंदरगाह शहर वालपेराइसो में स्थित कांग्रेस की इमारत में निवर्तमान धनकुबेर राष्ट्रपति सैबेस्टियन पिनेरा से पदभार अपने हाथों में लिया।

ला मोनेदा सरकारी पैलेस की बालकनी से राष्ट्रपति के रूप में अपने पहले भाषण में बोरिक ने कहा कि आगे का रास्ता लंबा व मुश्किल होगा। उन्होंने आर्थिक दृष्टिकोण से सबको शामिल करने, प्रवासियों और जलवायु परिवर्तन के मुद्दों का जिक्र किया। लेकिन उन्होंने साफ कहा कि वह सारे नागरिकों का प्रतिनिधित्व करेंगे और अपने वामपंथी आधार से भी आगे जाकर लोगों तक पहुंच बनाएंगे। उन्होंने कहा कि वह हमेशा उन लोगों की बात को भी ध्यान से सुनेंगे जो उनसे अलहदा तरीके से सोचते हैं।

बोरिक के शासनकाल का महत्व इसलिए भी ज्यादा रहेगा क्योंकि वह क्यूबा या वेनेजुएला की तरह वाम क्रांति के बाद सत्ता में नहीं आए हैं बल्कि कई दशकों तक मुक्त बाजारों को प्रश्रय देने वाली राजनीतिक व्यवस्था को चुनावों में परास्त करने के बाद राष्ट्रपति बने हैं। इसी से प्रगतिशील खेमे में काफी उम्मीदों का माहौल है।

बदलाव का यह दौर इसलिए भी अहमियत रखता है क्योंकि इसी दौरान पिनोचे के शासनकाल से चल रहे संविधान को बदलने की कवायद भी चल रही है। उसी संविधान में निहित बाजार-आधारित आर्थिक व्यवस्था की पैदा की गई असमानता के विरोध में 2019 में फैले राष्ट्रव्यापी हिंसक विरोध प्रदर्शनों ने बोरिक को वामपंथी धड़े की नेतृत्वकारी भूमिका में पहुंचाया था।

बोरिक ने कहा कि चिली को ऐसा संविधान चाहिए जो लोगों को जोड़े जो तानाशाही द्वारा थोपे गए संविधान से अलग हो। जाहिर है कि नए संविधान की रचना के साथ-साथ बोरिक के सामने प्रगतिशील वामपंथ की आर्थिक नीतियों को भी स्थापित करने की चुनौती होगी। आर्थिक सुस्ती, महंगाई और दक्षिणपंथी विपक्ष उनके लिए मुश्किलें ही खड़ी करेंगे। स्वास्थ्य देखरेख, पेंशन और सख्त पर्यावरण नियमों के वाम के पसंदीदा मुद्दे तो उनके सामने होंगे ही।

इस हकीकत को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता कि बोरिक के नेतृत्व में प्रगतिशील वाम के उदय के साथ-साथ ही धुर-कट्टरपंथी गुटों का भी जोर बढ़ा है। उन्होंने भी चुनावों में उल्लेखनीय प्रदर्शन किया। वे बोरिक को चैन नहीं लेने देंगे।

लेकिन युवा वामपंथी नेता की दिशा स्पष्ट है, और यह पहले दिन से ही साफ हो गया है। उनकी कैबिनेट में महिलाओं का बहुमत है। कार्यभार संभालने के कार्यक्रम में चिली के तमाम मूल समुदायों के प्रतिनिधि अपनी पारंपरिक वेशभूषाओं में मौजूद थे। लोगों का कहना था कि ऐसा पहली बार था कि हर मूल समुदाय का प्रतिनिधित्व राष्ट्रपति के पदभार संभालने के कार्यक्रम में रहा। साफ था कि इन सभी समुदायों को नई सरकार से खासी उम्मीद है। इसी से बोरिक को आगे के उन सभी सामाजिक बदलावों के लिए भी ताकत मिलने वाली है, जिनका पूरे देश को इंतजार है। देखना यही है कि दक्षिणपंथी विपक्ष की चुनौतियों के बीच बोरिक कैसे यह संतुलन कायम करते हैं।

बोरिक के राष्ट्रपति बनने के कार्यक्रम में शिरकत करने चिली की सबसे प्रतिष्ठित साहित्यकार इसाबेल अयांदे भी पहुंची। इसाबेल के पिता राष्ट्रपति सल्वाडोर अयांदे के चचेरे भाई थे। इसाबेल को अक्सर दुनिया में स्पेनिश भाषा की सबसे पढ़ी जाने वाली साहित्यकार माना जाता है। साल 2004 में उन्हें अमेरिकन एकेडमी ऑफ आर्ट्स ऐंड लेटर्स में शामिल किया गया था। 2010 में वह चिली के राष्ट्रीय साहित्य पुरस्कार से सम्मानित की गई थीं। और फिर, 2014 में ओबामा ने उन्हें प्रेसिडेंशियल मेडल ऑफ फ्रीडम प्रदान किया था। उनके बोरिक के साथ खड़े होने की काफी अहमियत थी। अमेरिका, स्पेन, अर्जेंटीना, पेरु व न् तमाम देशों के प्रतिनिधि भी एक इतिहास का साक्षी होने के लिए वहां मौजूद थे।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं। विचार व्यक्तिगत हैं।)

South America
Chile
Gabriel Boric
Left party
Left politics

Related Stories

क्यूबाई गुटनिरपेक्षता: शांति और समाजवाद की विदेश नीति

झारखंड-बिहार : महंगाई के ख़िलाफ़ सभी वाम दलों ने शुरू किया अभियान

दुनिया भर की: कोलंबिया में पहली बार वामपंथी राष्ट्रपति बनने की संभावना

क्या चिली की प्रगतिशील सरकार बोलीविया की समुद्री पहुंच के रास्ते खोलेगी?

पुतिन को ‘दुष्ट' ठहराने के पश्चिमी दुराग्रह से किसी का भला नहीं होगा

यूक्रेन पर रूसी हमला जारी, क्या निकलेगी शांति की राह, चिली-कोलंबिया ने ली लाल करवट

उत्तराखंड चुनाव: मज़बूत विपक्ष के उद्देश्य से चुनावी रण में डटे हैं वामदल

2.2 करोड़ अफ़ग़ानियों को भीषण भुखमरी में धकेला अमेरिका ने, चिले में वाम की ऐतिहासिक जीत

नज़रिया : ग्रेबिएल बोरिक की जीत चिली के वामपंथ के लिए बड़ा मौक़ा

लैटिन अमेरिका दर्शा रहा है कि दक्षिणपंथी उभार स्थायी नहीं है


बाकी खबरें

  • New Service Rules in Jammu and Kashmir
    डॉ राधा कुमार
    ज़ुल्म के दरवाज़े खोलते जम्मू-कश्मीर के नये सेवा नियम
    12 Oct 2021
    बर्ख़ास्त किये गये ज़्यादातर लोगों के ख़िलाफ़ जो आरोप क़ायम किये गये हैं, वे गंभीर हैं, लेकिन चूंकि आम लोगों के सामने इसे लेकर कोई सबूत नहीं रखा गया है, इसलिए यह साफ़ नहीं है कि इन आरोपों में दम है…
  • facebook
    प्रबीर पुरकायस्थ
    एक व्हिसलब्लोअर की जुबानी: फेसबुक का एल्गोरिद्म कैसे नफ़रती और ज़हरीली सामग्री को बढ़ावा देता है
    12 Oct 2021
    बेशक, यह सवाल पूछा जा सकता है कि जब फेसबुक के सिलसिले में ये सभी सवाल पहले भी उठाए जाते रहे हैं, तो इसमें नया क्या है। इस सब में बड़ी खबर यह है कि अब हमारे पास इसके सबूत हैं कि फेसबुक को इसकी पूरी…
  • Fb
    सोनाली कोल्हटकर
    समझिए कैसे फ़ेसबुक का मुनाफ़ा झूठ और नफ़रत पर आधारित है
    12 Oct 2021
    फ़ेसबुक की पूर्व कर्मचारी फ़्रांसेस हौगेन द्वारा किए गए खुलासों से पता चलता है कि दुनिया का सबसे बड़ा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म अच्छी तरह जानता है कि उसके प्लेटफॉर्म का समाज पर किस तरह नकारात्मक प्रभाव…
  • attack on dalit
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    राजस्थान में दलित युवक की पीट-पीटकर हत्या, तमिलनाडु में चाकू से हमला कर ली जान
    12 Oct 2021
    दलित समाज के लोगों पर हमलों की घटना लगातार सामने आ रही हैं। एक तरफ जहां राजस्थान के हुनुमानगढ़ जिले में दलित युवक जगदीश की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई, वहीं तमिलनाडु के तंजावुर में दलित युवक प्रभाकरण की…
  • Afghanistan
    एम. के. भद्रकुमार
    यूके ने अफ़ग़ानिस्तान के नए खेल में बढ़ाया पहला क़दम
    12 Oct 2021
    यह एक कड़ी चेतावनी है कि अफ़ग़ानिस्तान में युद्ध 19वीं सदी के एक खेल में बदल गया है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License