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दुनिया भर की: जर्मनी में ‘ट्रैफिक लाइट गठबंधन’ के हाथों में शासन की कमान
मर्केल दौर की समाप्ति, मध्य-वाम मार्गी ओलफ़ शुल्ज़ होंगे नए चांसलर। उम्मीद की जा रही है कि तकरीबन अगले एक माह के भीतर 177 पन्नों वाले गठबंधन समझौते का अनुमोदन करने के बाद नई सरकार सत्ता संभाल लेगी।
उपेंद्र स्वामी
25 Nov 2021
Merkel Scholz
निवर्तमान जर्मन चांसलर एंजेला मर्केल और एसडीपी के नेता ओलफ़ शुल्ज़ 24 नवंबर, 2021 को बर्लिन में। फोटो साभार: रायटर्स

चुनावी नतीजे आने के ठीक दो महीने बाद जर्मनी में नई सरकार के गठन का रास्ता साफ हो पाया है और 16 साल के एंजेला मर्केल के दौर की समाप्ति हो गई है। जैसा कि नतीजों के समय अनुमान लगाया गया था वामपंथी रुझान वाली मध्यमार्गी पार्टी सोशल डेमोक्रेट्स (एसडीपी) के नेता ओलफ़ शुल्ज़ जर्मनी के नए चांसलर होंगे।

यूरोप की इस सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के लिए यह गठबंधन थोड़ा बेमेल तो है क्योंकि वहां स्वाभाविक साझीदार माने जाने वाली एसडीपी और ग्रीन पार्टी ने पहली बार फेडरल स्तर पर वैचारिक रूप से अलग खेमे वाली पार्टी फ्रीम डेमोक्रेट्स (एफडीपी) के साथ हाथ मिलाया है। एफडीपी ऐतिहासिक रूप से जर्मनी की कंजरवेटिव पार्टी की नजदीकी रही है। जाहिर है कि तीनों के बीच सहमति बनाए रखना शुल्ज़ के लिए बड़ी चुनौती होगी। फिलहाल, अहम बात यह है कि तीनों को मिलाकर संसद के निचले सदन में बहुमत हासिल है।

उम्मीद की जा रही है कि तकरीबन अगले एक माह के भीतर इन तीनों के 177 पन्नों वाले गठबंधन समझौते का अनुमोदन करने के बाद नई सरकार सत्ता संभाल लेगी। इसके लिए दोनों ही काम होने होंगे, एक तो जर्मनी की संसद उन्हें चांसलर के रूप में नियुक्त करेगी और दूसरा तीनों पार्टियां गठबंधन के समझौते का अनुमोदन करेंगी।

तीनों पार्टियों के वैचारिक रुझान की झलक देने वाले रंगों के कारण इस गठबंधन को ट्रैफिक लाइट गठबंधन कहा जा रहा है। इसे ट्रैफिक लाइट गठबंधन कहा जाना दरअसल नीतिगत दबावों के काम करने के प्रतीक स्वरूप भी है। शुल्ज़ को भी इस बात का अहसास है। उन्होंने 1924 में जर्मनी में पहली ट्रैफिक लाइट लगाए जाने का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय कई लोगों ने सवाल किया था कि क्या वह कारगर होगी। आज चीजों को स्पष्ट रूप से नियमबद्ध करने, सही दिशा देने औऱ हरेक को सुरक्षित व सही तरीके से आगे बढ़ने देने के लिए ट्रैफिक लाइट अपरिहार्य है। जाहिर है कि उनका इशारा इस बेमेल दिख रहे गठबंधन की ज़रूरत की ओर भी था।

ग्रीन पार्टी की सह-नेता 40 साल की अन्नालेना बेर्बोक के जर्मनी की पहली महिला विदेश मंत्री बनने की संभावना है। शुल्ज़ पहले ही कह चुके हैं कि वह लैंगिक रूप से बराबरी वाली सरकार बनाएंगे। एफडीपी के नेता 42 साल के क्रिश्चियन लिंडनर नए वित्त मंत्री होंगे। आपको बता दें कि खुद शुल्ज़ भी मर्केल की महागठबंधन सरकार में वित्त मंत्री थे। वहीं ग्रीन पार्टी के दूसरे सह-नेता 52 साल के रॉबर्ट हाबेक़ के नए विस्तारित अर्थव्यवस्था व जलवायु परिवर्तन मंत्रालय का कार्यभार संभालने की पूरी संभावना जताई जा रही है। इस तरह तीनों पार्टियों को उनके पसंदीदा विभाग संभालने के लिए दिए गए हैं। हालांकि बात यह भी सही है कि तीनों ही पार्टियों ने अपने मतभेदों को भी छुपाने की कोई कोशिश नहीं की है बल्कि इन मतभेदों के साथ ही आगे बढ़ने की बात कही है।

हमारे नजरिये से भले ही इन तीनों पार्टियों को गठबंधन खड़ा करने में तीन महीने लग गए हों, लेकिन जर्मन विश्लेषकों का मानना है कि जिस तेज गति से इसे अंजाम दिया गया है, उससे इसके भविष्य को लेकर अच्छे शुरुआती संकेत मिलते हैं। अगर यह अंदाज सरकार के कार्यभार संभालने के बाद भी कायम रहा तो जर्मनी में सुधारों व निवेश का बहुप्रतीक्षित दौर शुरू हो सकता है।

खास बात यह भी है कि 63 साल के शुल्ज़ के सभी गठबंधन सहयोगी तुलनात्मक रूप से युवा हैं। इस गठबंधन को आगे ले जाने में शुल्ज़ का तर्जुबा ही काम आएगा क्योंकि वह मार्केल की तरह करिश्माई व्यक्तित्व वाले तो नहीं हैं लेकिन राजनीतिक रूप से खासे अनुभवी हैं। मर्केल के उत्तराधिकारी के तौर पर उनपर निगाह इसलिए भी होगी क्योंकि मर्केल ने खुद को केवल जर्मनी ही नहीं बल्कि समूचे यूरोप की सबसे कद्दावर नेता के रूप स्थापित कर रखा था।

शुल्ज़ को यूरोप को कई तरीके से दिशा दिखानी होगी। बाकी यूरोप की ही तरह जर्मनी भी कोरोना की चौथी लहर से जूझ रहा है। चीन व रूस से राजनीतिक टकराव का मोर्चा अलग है और पूर्वी यूरोप के कई इलाके सीमाओं पर माइग्रेशन से भी निबट रहे हैं। तो देखना यह होगा कि क्या मर्केल के बाद शुल्ज़ यूरोप की राजनीतिक दिशा भी बदलेंगे। हालांकि मर्केल के कई आलोचकों का यह कहना रहा है कि वह समस्याओं का हल ढूंढने के बजाय हमेशा उन्हें दबाने में लगी रही हैं, उन्हें मैनेज करती रही हैं।

इस ट्रैफिक लाइट गठबंधन ने पहली ही प्रेस कांफ्रेंस में कई नए दिखने वाले फैसलों का ऐलान कर ही दिया है। बहु-नागरिकता को मंजूरी दे दी गई है, नियमित रूप से होने वाले इमिग्रेशन को भी बढ़ा दिया गया है, वोट देने की उम्र को घटा कर 16 साल कर दिया गया है और जर्मनी यूरोप का पहला देश बन गया है जहां मारिजुआना (कैनाबिस) के इस्तेमाल को वैधानिक रूप से इजाजत दे दी गई है।

हालांकि नाटो से अलग होने के बारे में शुल्ज़ ने फिलहाल कुछ नहीं कहा है और इस तरह फिलहाल दूसरे देशों से तकरार के एक बिंदु को किनारे रखा है। देखना यह है कि आगे चीजें कैसे रंग लाती हैं।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं। विचार व्यक्तिगत हैं।)

International news
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