NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
दुनिया भर की: जर्मनी में ‘ट्रैफिक लाइट गठबंधन’ के हाथों में शासन की कमान
मर्केल दौर की समाप्ति, मध्य-वाम मार्गी ओलफ़ शुल्ज़ होंगे नए चांसलर। उम्मीद की जा रही है कि तकरीबन अगले एक माह के भीतर 177 पन्नों वाले गठबंधन समझौते का अनुमोदन करने के बाद नई सरकार सत्ता संभाल लेगी।
उपेंद्र स्वामी
25 Nov 2021
Merkel Scholz
निवर्तमान जर्मन चांसलर एंजेला मर्केल और एसडीपी के नेता ओलफ़ शुल्ज़ 24 नवंबर, 2021 को बर्लिन में। फोटो साभार: रायटर्स

चुनावी नतीजे आने के ठीक दो महीने बाद जर्मनी में नई सरकार के गठन का रास्ता साफ हो पाया है और 16 साल के एंजेला मर्केल के दौर की समाप्ति हो गई है। जैसा कि नतीजों के समय अनुमान लगाया गया था वामपंथी रुझान वाली मध्यमार्गी पार्टी सोशल डेमोक्रेट्स (एसडीपी) के नेता ओलफ़ शुल्ज़ जर्मनी के नए चांसलर होंगे।

यूरोप की इस सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के लिए यह गठबंधन थोड़ा बेमेल तो है क्योंकि वहां स्वाभाविक साझीदार माने जाने वाली एसडीपी और ग्रीन पार्टी ने पहली बार फेडरल स्तर पर वैचारिक रूप से अलग खेमे वाली पार्टी फ्रीम डेमोक्रेट्स (एफडीपी) के साथ हाथ मिलाया है। एफडीपी ऐतिहासिक रूप से जर्मनी की कंजरवेटिव पार्टी की नजदीकी रही है। जाहिर है कि तीनों के बीच सहमति बनाए रखना शुल्ज़ के लिए बड़ी चुनौती होगी। फिलहाल, अहम बात यह है कि तीनों को मिलाकर संसद के निचले सदन में बहुमत हासिल है।

उम्मीद की जा रही है कि तकरीबन अगले एक माह के भीतर इन तीनों के 177 पन्नों वाले गठबंधन समझौते का अनुमोदन करने के बाद नई सरकार सत्ता संभाल लेगी। इसके लिए दोनों ही काम होने होंगे, एक तो जर्मनी की संसद उन्हें चांसलर के रूप में नियुक्त करेगी और दूसरा तीनों पार्टियां गठबंधन के समझौते का अनुमोदन करेंगी।

तीनों पार्टियों के वैचारिक रुझान की झलक देने वाले रंगों के कारण इस गठबंधन को ट्रैफिक लाइट गठबंधन कहा जा रहा है। इसे ट्रैफिक लाइट गठबंधन कहा जाना दरअसल नीतिगत दबावों के काम करने के प्रतीक स्वरूप भी है। शुल्ज़ को भी इस बात का अहसास है। उन्होंने 1924 में जर्मनी में पहली ट्रैफिक लाइट लगाए जाने का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय कई लोगों ने सवाल किया था कि क्या वह कारगर होगी। आज चीजों को स्पष्ट रूप से नियमबद्ध करने, सही दिशा देने औऱ हरेक को सुरक्षित व सही तरीके से आगे बढ़ने देने के लिए ट्रैफिक लाइट अपरिहार्य है। जाहिर है कि उनका इशारा इस बेमेल दिख रहे गठबंधन की ज़रूरत की ओर भी था।

ग्रीन पार्टी की सह-नेता 40 साल की अन्नालेना बेर्बोक के जर्मनी की पहली महिला विदेश मंत्री बनने की संभावना है। शुल्ज़ पहले ही कह चुके हैं कि वह लैंगिक रूप से बराबरी वाली सरकार बनाएंगे। एफडीपी के नेता 42 साल के क्रिश्चियन लिंडनर नए वित्त मंत्री होंगे। आपको बता दें कि खुद शुल्ज़ भी मर्केल की महागठबंधन सरकार में वित्त मंत्री थे। वहीं ग्रीन पार्टी के दूसरे सह-नेता 52 साल के रॉबर्ट हाबेक़ के नए विस्तारित अर्थव्यवस्था व जलवायु परिवर्तन मंत्रालय का कार्यभार संभालने की पूरी संभावना जताई जा रही है। इस तरह तीनों पार्टियों को उनके पसंदीदा विभाग संभालने के लिए दिए गए हैं। हालांकि बात यह भी सही है कि तीनों ही पार्टियों ने अपने मतभेदों को भी छुपाने की कोई कोशिश नहीं की है बल्कि इन मतभेदों के साथ ही आगे बढ़ने की बात कही है।

हमारे नजरिये से भले ही इन तीनों पार्टियों को गठबंधन खड़ा करने में तीन महीने लग गए हों, लेकिन जर्मन विश्लेषकों का मानना है कि जिस तेज गति से इसे अंजाम दिया गया है, उससे इसके भविष्य को लेकर अच्छे शुरुआती संकेत मिलते हैं। अगर यह अंदाज सरकार के कार्यभार संभालने के बाद भी कायम रहा तो जर्मनी में सुधारों व निवेश का बहुप्रतीक्षित दौर शुरू हो सकता है।

खास बात यह भी है कि 63 साल के शुल्ज़ के सभी गठबंधन सहयोगी तुलनात्मक रूप से युवा हैं। इस गठबंधन को आगे ले जाने में शुल्ज़ का तर्जुबा ही काम आएगा क्योंकि वह मार्केल की तरह करिश्माई व्यक्तित्व वाले तो नहीं हैं लेकिन राजनीतिक रूप से खासे अनुभवी हैं। मर्केल के उत्तराधिकारी के तौर पर उनपर निगाह इसलिए भी होगी क्योंकि मर्केल ने खुद को केवल जर्मनी ही नहीं बल्कि समूचे यूरोप की सबसे कद्दावर नेता के रूप स्थापित कर रखा था।

शुल्ज़ को यूरोप को कई तरीके से दिशा दिखानी होगी। बाकी यूरोप की ही तरह जर्मनी भी कोरोना की चौथी लहर से जूझ रहा है। चीन व रूस से राजनीतिक टकराव का मोर्चा अलग है और पूर्वी यूरोप के कई इलाके सीमाओं पर माइग्रेशन से भी निबट रहे हैं। तो देखना यह होगा कि क्या मर्केल के बाद शुल्ज़ यूरोप की राजनीतिक दिशा भी बदलेंगे। हालांकि मर्केल के कई आलोचकों का यह कहना रहा है कि वह समस्याओं का हल ढूंढने के बजाय हमेशा उन्हें दबाने में लगी रही हैं, उन्हें मैनेज करती रही हैं।

इस ट्रैफिक लाइट गठबंधन ने पहली ही प्रेस कांफ्रेंस में कई नए दिखने वाले फैसलों का ऐलान कर ही दिया है। बहु-नागरिकता को मंजूरी दे दी गई है, नियमित रूप से होने वाले इमिग्रेशन को भी बढ़ा दिया गया है, वोट देने की उम्र को घटा कर 16 साल कर दिया गया है और जर्मनी यूरोप का पहला देश बन गया है जहां मारिजुआना (कैनाबिस) के इस्तेमाल को वैधानिक रूप से इजाजत दे दी गई है।

हालांकि नाटो से अलग होने के बारे में शुल्ज़ ने फिलहाल कुछ नहीं कहा है और इस तरह फिलहाल दूसरे देशों से तकरार के एक बिंदु को किनारे रखा है। देखना यह है कि आगे चीजें कैसे रंग लाती हैं।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं। विचार व्यक्तिगत हैं।)

International news
Merkel Scholz
germany
SDP

Related Stories

दुनिया भर की: कोलंबिया में पहली बार वामपंथी राष्ट्रपति बनने की संभावना

अमेरिका में महिलाओं के हक़ पर हमला, गर्भपात अधिकार छीनने की तैयारी, उधर Energy War में घिरी दुनिया

यूक्रेन की स्थिति पर भारत, जर्मनी ने बनाया तालमेल

रूस-यूक्रैन संघर्षः जंग ही चाहते हैं जंगखोर और श्रीलंका में विरोध हुआ धारदार

दुनिया भर की: सोमालिया पर मानवीय संवेदनाओं की अकाल मौत

यूक्रेन युद्ध की राजनीतिक अर्थव्यवस्था

मॉस्को कर रहा है 'गुड कॉप, बैड कॉप' का सामना

कोविड -19 के टीके का उत्पादन, निर्यात और मुनाफ़ा

नॉर्ड स्ट्रीम 2: गैस पाइपलाइन को लेकर दूसरा शक्ति संघर्ष

जर्मनी के चुनावों में सेंटर-लेफ़्ट को मिली बढ़त


बाकी खबरें

  • कोविड टीकाकरण: क्या यह देश का पहला Vaccine Drive है?
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोविड टीकाकरण: क्या यह देश का पहला Vaccine Drive है?
    13 Jun 2021
    देश में कोरोना संक्रमण से लड़ने के लिए टीकाकरण जारी है। पर क्या यह देश का पहला वैक्सीन ड्राइव है ? भारत में पहले महामारियों से लड़ने के लिए किस तरह के टीकाकरण अभियान चलाए गए थे? इतिहास के पैन के इस…
  • coronavirus
    प्रभात पटनायक
    संपत्ति अधिकार और महामारी से मौतें
    13 Jun 2021
    टीके की कमी के चलते– एक बनावटी कमी जो निजी संपत्ति अधिकारों को बचाने के कारण से पैदा हुई है– एक वर्ग के लोगों की जिंदगी को दूसरे वर्ग के लोगों की ज़िंदगी के खिलाफ खड़ी कर दी गयी हैं।
  • book
    अजय कुमार
    नौकरी छोड़ चुके सरकारी अधिकारी का कुछ लिखने से पहले सरकार की मंज़ूरी लेना कितना जायज़?
    13 Jun 2021
    यह अंदेशा ग़लत नहीं कहा जा सकता कि सरकार खुलकर कह रही है कि ख़बरदार! अगर नौकरी छोड़ने के बाद भी कुछ ऐसा बोला या लिखा जिससे सरकार पर आंच पड़े तो अंजाम बुरा हो सकता है।
  • तिरछी नज़र: टीका न हुआ, रायता हो गया, सब फैलाए जाते हैं
    डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
    तिरछी नज़र: टीका न हुआ, रायता हो गया, सब फैलाए जाते हैं
    13 Jun 2021
    मोदी जी के कहने से कोरोना को भगाने के लिए ताली-थाली बजाने वाले हम भला मोदी जी की बात क्यों टालते। तो मोदी जी की बात मान कर हमने टीका लगवाने की ठान ही ली, लेकिन...
  • मुकुल रॉय
    सोनिया यादव
    मुकुल रॉय की वापसी टीएमसी और बीजेपी की आइडियोलॉजी पर भी सवाल खड़े करती है
    13 Jun 2021
    मुकुल की ये मजबूरियां ही हैं कि वो न बीजेपी से वफ़ा कर पाए और न ही टीएमसी से। वैसे ये बीजेपी और टीएमसी की भी मजबूरियां ही हैं जो एक ने दाग़ी नेता को तुरंत भर्ती कर लिया तो दूसरे ने मौका मिलते ही झट…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License