NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
कला
भारत
कला विशेष: चित्र में प्रकृति और पर्यावरण
प्रकृति प्रेम भारतीय चित्रकला और मूर्तिकला दोनों में ही दृष्टिगोचर होता है। लेकिन अब स्थितियां बद से बदतर होती जा रही हैं। आम लोगों की तरह कलाकारों का भी साबका धूल, धुआं और भीड़ से ही होता है।
डॉ. मंजु प्रसाद
06 Sep 2020
कला विशेष
ग्वाले हाट की ओर। टेम्परा चित्र। चित्रकार: मंजु प्रसाद

कंक्रीट निर्मित शहरों ने अपने पांव पसारे,  सूदूर गाँव-देहात सिकुड़ते गये, जैसे नजर लग गई हो हमारी पृथ्वी को। सूरज की रोशनी, पेड़-पौधे, हरियाली, जीवन के ऊर्जावान स्रोत, इनका सानिध्य विपरीत परिस्थितियों में भी जीवित रखता है और इनका अभाव मानव में हताशा, निराशा और क्रूरता के भाव पैदा करता है।

शहरों में रहते गवंई या कस्बाई जनता सुखद जीवन की तलाश में पीढ़ी दर पीढ़ी तंग, सीलन भरे कमरों में दो जून की रोटी ही जुटाने में जिन्दगी गुजार देती है। पेड़ और हरियाली वाले  'सीनरी' (दृश्य चित्र वाले पोस्टर) घर में टंग जाएं बड़ी बात है। अगर थोड़ी संवेदनशीलता बची रह गई, मशीनीकृत बनने से बच गये तो कवि या कलाकार जरूर बन जाते हैं। तब अपना गाँव और कस्बा अपने कृतियों में याद करने लगते हैं।

प्रकृति प्रेम भारतीय चित्रकला और मूर्तिकला दोनों में ही दृष्टिगोचर होता है। भारत में जब ग्रंथ लिखे जाने लगे उसी समय से ही पांडुलिपियों में कथात्मक शैली में लघु चित्रण का विकास हुआ। गुफाओं की भित्ति से उतर कला ताड़पत्रों, कपड़े, काष्ठ के साथ-साथ धार्मिक स्थलों और भवनों पर सृजित होने लगी।

10वीं शती के प्रारंभ में हमें पाल शैली में बंगाल, बिहार (नालंदा और भागलपुर के निकट विक्रमशिला के पास) और नेपाल में महायान बौद्ध पोथी चित्र लकड़ी के पटरों पर मिलें हैं। जिनकी शैली बौद्ध गुफा चित्रों के समान है।

इन चित्रों में लाल (सिंदूर, हिंगुल और महावर), नीला (लाजवर्दी तथा नील),  इनके मिश्रण से बने हरा, गुलाबी, और बैंगनी, श्वेत और श्याम रंगों का प्रयोग मिलता है।

जैन धर्मावलंबियों (सन् 1100 ई से 15वीं सदी के मध्य तक) ने ताड़ पत्रों और कागज पर कई ग्रंथों में सुन्दर लेखांकन (कैलीग्राफ़ी) किया। इन सचित्र पोथियों पर अजंता चित्र शैली में ही चित्र बने जिनपर जैन तीर्थंकरों, मुनियों और साध्वियों को ही पेड़-पौधे, फूलों आदि के साथ चित्रित किया गया है। यद्यपि इन चित्रों में समृद्ध भारतीय चित्र शैली का ह्रास ही दिखता है। इसी वजह से इन्हें अपभ्रंश शैली नाम दिया गया है।

प्रकृति का अत्यंत सुन्दर निरूपण हमें बारहवीं सदी के राजपूत शैली में मिलता है जिसका केंद्रीय स्थल राजस्थान रहा है। राजपूत शैली के अंतर्गत कई शैलियां विकसित हुईं जैसे, ग्वालियर तथा अम्बर शैली, मेवाड़ शैली, बीकानेर शैली, जयपुर शैली, किशनगढ़ शैली व कोटा बूंदी शैली।

राजपूत शैली में लोक चित्रकला का असर देखा जा सकता है। इस शैली के विषय सुपरिचित थे जो कि आम जनता की रूचि के अनुसार थे। मेवाड़ शैली में भू दृश्य चित्रों (लैंडस्कैप पेंटिंग) के अंकन में बारीक विवरण और सुन्दर रंग संगति है। 18वीं सदी के मध्य में निहालचंद्र, ऊमरचंद सीताराम मुख्य कलाकार हुए जिन्होंने किशनगढ़ शैली को विशिष्टता और ख्याति प्रदान की और सैकड़ों चित्र बनाये।

IMG-20200906-WA0012.jpg

लघु चित्रण शैली, मुगल शैली, साभार : द वर्ल्ड ग्रेटेस्ट आर्ट

मुगल काल में राजपूत शैली और ईरानी शैली के समन्वय से एक सुन्दर लघु चित्रण शैली का जन्म हुआ। कलाप्रेमी अकबर बादशाह ने भारतीय चित्रकला को पुनर्जीवित किया। दरअसल अकबर के दरबार में हिन्दू-मुस्लिम कलाकार साथ मिल कर चित्रांकन करते थे। ईरानी कलाकारों ने प्रकृति का अनुपम अंकन किया। उनकी लेखांकन शैली भी पुष्पलताओं के समान गतित्वपूर्ण गतिशील और मनोहारी थीं। वहीं हिन्दू कलाकार मानवीय आकृतियों का भारतीय चित्र शैली के अनुसार भावपूर्ण अंकन करते थे। अकबर की चित्रशाला के मशहूर उस्ताद थे अब्दुस्समद खां और उनके शिष्यों में प्रमुख थे दशवंत और बसावन।

जहाँगीर के शासन काल में लघु चित्रण शैली अपनी चरमोत्कर्ष पर पहुंची। जहाँगीर खुद ही चित्रकार और कला मर्मज्ञ थे। उनके दरबार में कुशल कलाकारों (हिन्दू-मुस्लिम) की अच्छी संख्या थी जिन्होंने व्यक्ति चित्रों और पोथी चित्रों में भारतीय पौराणिक और धार्मिक कथाओं को निसर्ग के साथ अत्यंत सुन्दर  ढंग से अंकन किया। केशव लाल, मुकुन्द, मिसकीन, फरूख बेग, माधौ, जगन्नाथ आदि प्रमुख कलाकार थे।

मुगल शैली के सुन्दर दृश्य चित्रों और राजपूत शैली के वैशिष्ट्य के सामंजस्य से 'पहाड़ी शैली' और उसकी विभिन्न उपशाखाओं के जन्म ने भारतीय चित्रकला को उन्नति के चरम पर पहुंचाया। जम्मू, गढ़वाल, पठानकोट,कुल्लू ,चम्बा ,बसौली ,कांगड़ा, गुलेर और मंडी आदि तक पहाड़ी शैली का विस्तार रहा है। पहाड़ी शैलियों में 'कांगड़ा शैली' अपना विशिष्ट स्थान रखती है। कांगड़ा के शासक संसार चंद के शासन काल में कांगड़ा लघुचित्रण शैली का बहुत विकास हुआ। कांगड़ा शैली दृश्य प्रधान और प्रेम प्रधान है। कांगड़ा शैली के चित्रों की कथावस्तु पौराणिक, धार्मिक और लौकिक हैं। उनकी पृष्ठभूमि आध्यात्मिक विचारों पर आधारित हैं लेकिन उनको मानवीय अनुभूतियों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है। भारतीय लघुचित्रण शैली में सभी ॠतुओं को बड़ी कुशलतापूर्वक नयनाभिराम ढंग से चित्रित किया गया है। 19 वीं सदी के आरम्भ में मोलाराम, गुरु सहाय, बसिया पहाड़ी शैली के मुख्य कलाकार थे।

पिछले कुछ वर्षों से जबकि देश में तेजी से वनों का सफाया हो रहा है, हर कहीं पेड़ कट रहे हैं और हर जगह घनघोर प्रदूषण व्याप्त हैं। ऐसे में कलाकारों को भी सचेत होना चाहिए। अब तो कला में निसर्ग चित्रण घिसी-पिटी और महत्वहीन बात हो गई है। अतः समकालीन कलाकारों के विषय कांक्रीट वाले नगरीय सभ्यता, रोजमर्रा इस्तेमाल होने वाली सामग्री जैसे पानी के बोतल, टिफिन, कुकर आदि भौतिक सामग्री हो गये हैं। क्योंकि सुरम्य प्रकृति बसती है शहर के पार्कों में।

अब स्थितियां बद से बदतर होती जा रही हैं। आम लोगों की तरह कलाकारों का भी साबका धूल, धुआं और भीड़ से ही होता है। अतः चित्रों के विषय चाय का ढाबा, फलों के दुकान, बस स्टेशन और रेलवे स्टेशन आदि हो गये हैं।

(लेखक डॉ. मंजु प्रसाद एक चित्रकार हैं। आप इन दिनों लखनऊ में रहकर पेंटिंग के अलावा ‘हिन्दी में कला लेखन’ क्षेत्र में सक्रिय हैं।) 

art
artist
Nature
Environment
Indian painting
Indian Folk Life
Art and Artists
Folk Art
Folk Artist
Indian art
Modern Art
Traditional Art

Related Stories

'द इम्मोर्टल': भगत सिंह के जीवन और रूढ़ियों से परे उनके विचारों को सामने लाती कला

राम कथा से ईद मुबारक तक : मिथिला कला ने फैलाए पंख

पर्यावरण, समाज और परिवार: रंग और आकार से रचती महिला कलाकार

सार्थक चित्रण : सार्थक कला अभिव्यक्ति 

आर्ट गैलरी: प्रगतिशील कला समूह (पैग) के अभूतपूर्व कलासृजक

आर्ट गैलरी : देश की प्रमुख महिला छापा चित्रकार अनुपम सूद

छापा चित्रों में मणिपुर की स्मृतियां: चित्रकार आरके सरोज कुमार सिंह

जया अप्पा स्वामी : अग्रणी भारतीय कला समीक्षक और संवेदनशील चित्रकार

कला गुरु उमानाथ झा : परंपरागत चित्र शैली के प्रणेता और आचार्य विज्ञ

चित्रकार सैयद हैदर रज़ा : चित्रों में रची-बसी जन्मभूमि


बाकी खबरें

  • sever
    रवि शंकर दुबे
    यूपी: सफ़ाईकर्मियों की मौत का ज़िम्मेदार कौन? पिछले तीन साल में 54 मौतें
    06 Apr 2022
    आधुनिकता के इस दौर में, सख़्त क़ानून के बावजूद आज भी सीवर सफ़ाई के लिए एक मज़दूर ही सीवर में उतरता है। कई बार इसका ख़ामियाज़ा उसे अपनी मौत से चुकाना पड़ता है।
  • सोनिया यादव
    इतनी औरतों की जान लेने वाला दहेज, नर्सिंग की किताब में फायदेमंद कैसे हो सकता है?
    06 Apr 2022
    हमारे देश में दहेज लेना या देना कानूनन अपराध है, बावजूद इसके दहेज के लिए हिंसा के मामले हमारे देश में कम नहीं हैं। लालच में अंधे लोग कई बार शोषण-उत्पीड़न से आगे बढ़कर लड़की की जान तक ले लेते हैं।
  • पटनाः डीजल-पेट्रोल से चलने वाले ऑटो पर प्रतिबंध के ख़िलाफ़ ऑटो चालकों की हड़ताल
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    पटनाः डीजल-पेट्रोल से चलने वाले ऑटो पर प्रतिबंध के ख़िलाफ़ ऑटो चालकों की हड़ताल
    06 Apr 2022
    डीजल और पेट्रोल से चलने वाले ऑटो पर प्रतिबंध के बाद ऑटो चालकों ने दो दिनों की हड़ताल शुरु कर दी है। वे बिहार सरकार से फिलहाल प्रतिबंध हटाने की मांग कर रहे हैं।
  • medicine
    ऋचा चिंतन
    दवा के दामों में वृद्धि लोगों को बुरी तरह आहत करेगी – दवा मूल्य निर्धारण एवं उत्पादन नीति को पुनर्निर्देशित करने की आवश्यता है
    06 Apr 2022
    आवश्यक दवाओं के अधिकतम मूल्य में 10.8% की वृद्धि आम लोगों पर प्रतिकूल असर डालेगी। कार्यकर्ताओं ने इन बढ़ी हुई कीमतों को वापस लेने और सार्वजनिक क्षेत्र के दवा उद्योग को सुदृढ़ बनाने और एक तर्कसंगत मूल्य…
  • wildfire
    स्टुअर्ट ब्राउन
    आईपीसीसी: 2030 तक दुनिया को उत्सर्जन को कम करना होगा
    06 Apr 2022
    संयुक्त राष्ट्र की नवीनतम जलवायु रिपोर्ट कहती है कि यदि​ ​हम​​ विनाशकारी ग्लोबल वार्मिंग को टालना चाहते हैं, तो हमें स्थायी रूप से कम कार्बन का उत्सर्जन करने वाले ऊर्जा-विकल्पों की तरफ तेजी से बढ़ना…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License