NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
कला
भारत
राजनीति
कला विशेष : चित्रकार उमेश कुमार की कला अभिव्यक्ति
चित्र विषय और विचारधारा महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं, किसी कलाकृति का मूल्यांकन करने में। मेरा मानना है कि कलाकृति कभी असुंदर नहीं होती। कलाकार की अभिरुचि ही कला में प्रकट होती है, और सामाजिक स्थिति और परिस्थितियां ही एक निरंतर सृजनशील कलाकार की कृतियों पर हावी हो जाते हैं।
डॉ. मंजु प्रसाद
22 Nov 2020
कला
इंस्टालेशन, कलाकार-उमेश कुमार 

अभिव्यक्ति अर्थात अकथ्य को कलात्मकता से कृतियों में साकार करना। वास्तव में हमारा मन। आम तौर प्रबुद्ध जनों की ये शिकायत रहती है कि समकालीन कलाकार की कला अभिव्यक्ति के विषय समसामयिक नहीं है या जन-सरोकारों से नहीं जुड़े हैं। कहा जाता है अंतर्मुखी हैं। मानो कलाकार इह लोक के वासी नहीं हैं। सच तो ये है कि कलाकार भी काल्पनिक दुनिया में नहीं रहते हैं। यही कलाकार जब समाज की वास्तविकता को उसके विद्रूप रूप को दिखाते हैं तो लोग उनसे कतरा कर निकल जाते हैं उसका सामना नहीं करना चाहते। वास्तव में कुछेक अपवाद छोड़ दें तो कलाकारों को भी भौतिक दुनिया से दो चार होना पड़ता है। समाज जिन समस्याओं से जूझता है वो समस्याएं कलाकारों की भी होती हैं। पर्यावरण, आम जनों की पहुंच से दूर होता स्वच्छ जल, दमघोंटू दूषित हवा। सभी कुछ तो कलाकारों को भी पीड़ित करती हैं। ऐसे विषय को अपने चित्रों का मुख्य विषय बना रहे हैं चित्रकार उमेश कुमार।

जल प्रदूषण और ज़िंदगी, माध्यम- जल रंग, चित्रकार : उमेश कुमार 

उमेश मूल रूप से आरा बिहार के रहने वाले हैं। उनका जन्म पटना में हुआ था। पिता श्री विश्वनाथ प्रसाद बोकारो स्टील प्लांट में कार्यरत थे। उनकी मां सुशीला देवी थीं।

छात्र जीवन से ही मैं उनके चित्रों के विकास क्रम को देखती आ रही हूं। शुरुआत में उमेश ने बड़े पैमाने पर भूदृश्य चित्र बनाए। जो जलरंग माध्यम में थे।‌ जिनकी काफी सराहना भी हुई।

उमेश के 1994-95 के चित्रों में स्त्री-पुरूष के आत्मीय-अंतरंग प्रेम की नैसर्गिक स्निग्धता है, जिनके माध्यम एक्रेलिक और तैल रंग हैं।

जैसा की माना जाता है, कहा जाता है,  'पुरुष की सफलता के पीछे एक महिला की प्रेरणा होती है' , निस्संदेह उमेश के संदर्भ में सही माना जाना चाहिए। उनकी प्रेयसी-पत्नी अराधना जो खुद अच्छी चित्रकार हैं। उनका प्रेमपूर्ण सहयोग है कि उमेश की कला में निरंतरता बनी रही। उमेश को बिहार  के  बेहतर कलासृजन करने वाले कलाकारों की श्रेणी में रखा जा सकता है।

चित्र विषय और विचारधारा महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं, किसी कलाकृति का मूल्यांकन करने में। मेरा मानना है कि कलाकृति कभी असुंदर नहीं होती। कलाकार की अभिरुचि ही कला में प्रकट होती है, और सामाजिक स्थिति और परिस्थितियां ही एक निरंतर सृजनशील कलाकार की कृतियों पर हावी हो जाते हैं। दिल्ली जैसे महानगर में जहां एक तरफ आकर्षक रंगों वाले विशालकाय भवन बाजार के रूप में है, चटख भड़कीले पोस्टर से लैस और उसके तिलस्म में फंसी आम जनता। जिसका सामान्य सौंदर्य बोध भी उसी में विलीन हो गया हो। तो ऐसे में ईमानदार  कलाकार और उसकी मन:स्थिति दृश्यमान अभिव्यक्ति के दबाव में आ जाती है, वह वस्तुगत यथार्थ को नजरंदाज नहीं कर पाता है।

जो महसूस होगा तो वह वही दिखायेगा, हर समय जिसका उसे प्रत्यक्ष दर्शन और रोजाना का अनुभव है। वास्तव में देश के बड़े शहर, जहां बड़े-बड़े मॉल से भरते जा रहे हैं वहां आम आदमी, स्वच्छ हवा, साफ पानी से वंचित  होता जा रहा है। उसे पौष्टिक खाना-सुंदर वस्त्र मिलने तो दूर भयानक महामारियों से ग्रसित हो जा रहा है।

जल -प्रदूषण और जिन्दगी, माध्यम- जलरंग कागज पर , चित्रकार उमेश कुमार 

उमेश कुमार के महानगरीय जीवन और संस्कृति पर बनाये गये चित्र महत्वपूर्ण तो हैं ही लेकिन डिस्पोजल पानी के बोतलों, जलविहीन चांपाकल, दाने के अभाव में लुढ़के कबूतरों के मॉडल से सज्जित इंस्टालेशन, नवीन और प्रभावशाली कृति है।

यह कृति 95 प्रतिशत भारतीयों की त्रासदपूर्ण जीवन का दर्शन कराती है। इंस्टालेशन या ' संस्थापन ' कला त्रिआयामी (थ्रिडायमेंशनल ) होता है जिसमें कलाकार एक विषय (थीम )को लेकर पूर्वनिर्मित सामग्रियों, ‌पेंटिंग, मूर्ति  आदि को विस्तृत  क्षेत्र में अस्थायी रूप में संयोजित करता है। इसका डिजिटल स्वरूप भी अत्यंत लोकप्रिय है। आजकल भारत में भी प्रचलित है।

चित्रकार: उमेश कुमार 

वर्तमान समय में उमेश कुमार आकर्षक जलरंग माध्यम में जल-जीवन और पर्यावरण को लेकर चित्रण कर रहे हैं। जिसमें उनकी पर्यावरण संरक्षण को लेकर चिंता तो दिखती ही है साथ उनसे पीड़ित निरीह जंगली जानवर भी उनके चित्रों में सुंदर रूप में प्रकट हो रहे हैं। इस श्रृंखला के चित्र आकृतियों की बारीकियां हमें पटना कलम की याद दिलाती हैं। जहां मानव जीवन शैली जटिलताओं से भरी हुई है। वहां प्राकृतिक दृश्य हो या गहन नगरीय जीवन अगर उसकी सहज सरल अभिव्यक्ति हो तो वो निस्संदेह लोगों को प्रभावित करेगी।

निस्संदेह उमेश एक बेहतर कलाकार है। उनका जीवन संघर्षशील जरूर है लेकिन उन्होंने अपने कला जीवन में बहुत सारी उपलब्धियां हासिल कर ली हैं। उन्हें राज्य और अखिल भारतीय पुरस्कार मिल चुके हैं। पुरस्कार तो एक सम्मान है कलाकार या कलाकृति का। असल पुरस्कार तो कलाकार को उसी समय मिलता है जब वह अपनी भावनाओं को विचारों को सफलता पूर्वक अपनी कृतियों में अभिव्यक्त कर लेता है। वर्तमान समय में उमेश दिल्ली को अपना कर्म क्षेत्र बनाए हुए हैं।

(लेखिका डॉ. मंजु प्रसाद एक चित्रकार हैं। आप इन दिनों लखनऊ में रहकर पेंटिंग के अलावा ‘हिन्दी में कला लेखन’ क्षेत्र में सक्रिय हैं।) 

कला विशेष में इन्हें भी पढ़ें :

कला विशेष: हितकारी मानवतावाद से प्रेरित चित्रकार अर्पणा कौर के चित्र

चित्रकार बी.सी. सान्याल की‌ कलासाधना : ध्येय, लोक रूचि और जन संवेदना

सतीश गुजराल : एक संवेदनशील चित्रकार-मूर्तिकार

कला विशेष: शक्ति और दृष्टि से युक्त अमृता शेरगिल के चित्र

कला विशेष : शबीह सृजक राधामोहन

कला विशेष: चित्र में प्रकृति और पर्यावरण

Umesh Kumar
Painter
sculptor
Art teacher
Indian painter
art
artist
Indian painting
Indian Folk Life
Art and Artists
Folk Art
Folk Artist
Indian art
Modern Art
Traditional Art

Related Stories

'द इम्मोर्टल': भगत सिंह के जीवन और रूढ़ियों से परे उनके विचारों को सामने लाती कला

राम कथा से ईद मुबारक तक : मिथिला कला ने फैलाए पंख

पर्यावरण, समाज और परिवार: रंग और आकार से रचती महिला कलाकार

सार्थक चित्रण : सार्थक कला अभिव्यक्ति 

आर्ट गैलरी: प्रगतिशील कला समूह (पैग) के अभूतपूर्व कलासृजक

आर्ट गैलरी : देश की प्रमुख महिला छापा चित्रकार अनुपम सूद

छापा चित्रों में मणिपुर की स्मृतियां: चित्रकार आरके सरोज कुमार सिंह

जया अप्पा स्वामी : अग्रणी भारतीय कला समीक्षक और संवेदनशील चित्रकार

कला गुरु उमानाथ झा : परंपरागत चित्र शैली के प्रणेता और आचार्य विज्ञ

चित्रकार सैयद हैदर रज़ा : चित्रों में रची-बसी जन्मभूमि


बाकी खबरें

  • russia attack on ukrain
    न्यूज़क्लिक टीम
    यूक्रेन पर हमला, रूस के बड़े गेम प्लान का हिस्सा, बढ़ाएगा तनाव
    25 Feb 2022
    'पड़ताल दुनिया भर की' में वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह ने बात की न्यूज़क्लिक के प्रधान संपादक प्रबीर पुरकायस्थ से। यूक्रेन पर रूस हमला, जो सरासर अंतर्राष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन है, के पीछे पुतिन द्वारा…
  • News Network
    न्यूज़क्लिक टीम
    आख़िर क्यों हुआ 4PM News Network पर अटैक? बता रहे हैं संजय शर्मा
    25 Feb 2022
    4PM News नामक न्यूज़ पोर्टल को हाल ही में कथित तौर पर हैक कर लिया गया। UP की राजधानी लखनऊ का 4PM News योगी सरकार की नीतियों की आलोचनात्मक रिपोर्टिंग के लिए जाना जाता है। 4PM News का आरोप है कि योगी…
  • Ashok Gehlot
    सोनिया यादव
    राजस्थान : कृषि बजट में योजनाओं का अंबार, लेकिन क़र्ज़माफ़ी न होने से किसान निराश
    25 Feb 2022
    राज्य के बजटीय इतिहास में पहली बार कृषि बजट पेश कर रही गहलोत सरकार जहां इसे किसानों के हित में बता रही है वहीं विपक्ष और किसान नेता इसे खोखला और किसानों के साथ धोखा क़रार दे रहे हैं।
  • ADR Report
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    यूपी चुनाव छठा चरणः 27% दाग़ी, 38% उम्मीदवार करोड़पति
    25 Feb 2022
    एडीआर की रिपोर्ट के अनुसार छठे चरण में चुनाव लड़ने वाले 27% (182) उम्मीदवारों पर आपराधिक मामले दर्ज हैं वहीं 23% (151) उम्मीदवारों पर गंभीर प्रकृति के आपराधिक मामले हैं। इस चरण में 253 (38%) प्रत्याशी…
  • up elections
    न्यूज़क्लिक टीम
    यूपी चुनाव 2022: मोदी सभा में खाली कुर्सियां, योगी पर अखिलेश का तंज़!
    25 Feb 2022
    बोल के लब आज़ाद हैं तेरे के इस एपिसोड में वरिष्ठ पत्रकार अभिसार शर्मा बात करेंगे आवारा पशुओं के बढ़ते हुए मुद्दे की, जो यूपी चुनाव में बीजेपी की मुश्किलें बढ़ा सकता है। उसके साथ ही अखिलेश यादव द्वारा…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License