NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
कला
भारत
कला विशेष: भारतीय कला में ग्रामीण परिवेश का चित्रण
अनेक अग्रणी समकालीन कलाकारों ने अपनी कलाकृतियों में ही गांव और उनकी स्मृतियों को बचाये रखा है और बसाए रखा है।
डॉ. मंजु प्रसाद
21 Mar 2021
धान रोपनी, काग़ज़ पर टेम्परा, चित्रकार: मंजु प्रसाद
धान रोपनी, काग़ज़ पर टेम्परा, चित्रकार: मंजु प्रसाद

हमारी जड़ें गाँवों से शुरू होती हुई शहर में विकसित हुई हैं। हम आगे बढ़ते गये गांव पीछे छूटता गया। लेकिन कहीं हमारे अंदर हमारा गांव उसकी सरल जिंदगी, वहां का पोखर, वहां के खेत खलिहान हमारे मन में बसे रह गये। वहां का किसानी जीवन, उनका सुख, उनका संघर्ष, उनके उत्सव सब कुछ हम मन में बसाए रहते हैं। सब कुछ हमारी कृतियों में बार-बार उल्लसित होते रहते हैं, हम उन स्मृतियों को सीरजते रहते हैं। हालांकि अब शहर के अधकचरे नकल से गांव भी विरूपित हो गया है। नफरत, भेदभाव, आपसी षडयंत्र का केन्द्र बन गया है। अब रांझे गांव की ओर रूख नहीं करते हीर भी गांव में अब नहीं बसती।

अनेक अग्रणी समकालीन कलाकारों ने अपनी कलाकृतियों में ही गांव और उनकी स्मृतियों को बचाये रखा है और बसाए रखा है। नंदलाल बोस (1882-1966) के चित्रों का हम अध्ययन करें तो हम पायेंगे कि देशज और देश भक्ति की भावना कूट कूट कर भरी है। कलाकार यदि सक्षम है तो भावों में उसके चित्र काफी कुछ कह जाते हैं जो वह खुद नहीं कह सकता। आपको अनुभव करने की आवश्यकता पड़ती है।

‘किसान’, रेखांकन, काग़ज़ पर स्याही से, चित्रकार: नन्द लाल बोस, साभार : कला त्रैमासिक 1982, 83 संयुक्तांक, प्रकाशन, उत्तर प्रदेश ललित कला अकादमी।

नन्दलाल बोस का रेखांकन 'किसान' रंगविहीन होने के बावजूद भारतीय किसानों के संघर्षपूर्ण जीवन , व्यथा सबकुछ प्रकट करने में समर्थ है। जलरंगों में चित्रित किया गयी कलाकृति, 'तूफान' भारत के तटीय क्षेत्रों के जनों की व्यथा कहने में पूरी तरह सक्षम है। नंदलाल बोस का बचपन ग्रामीण परिवेश से प्रभावित था। हुगली जिले के जैमूर गांव का उनका परिवार परंपरा से गहरे जुड़ा था। कला अभिरुचि उन्हें अपनी माँ से ही मिली। उन्होंने अपनी कला शिक्षा अवनीन्द्रनाथ टैगोर के सानिध्य में कलकत्ता स्कूल ऑफ आर्ट में पूर्ण की। वे अवनीन्द्रनाथ के प्रिय शिष्यों में से थे। जब तक अवनीन्द्रनाथ जीवित रहे, नन्द लाल बोस उनके सहयोगी बने रहे। रविन्द्र नाथ टैगोर, आनंद कुमार स्वामी, सिस्टर निवेदिता और ओकाकुरा के सानिध्य में उन्होंने अपने भावनात्मक और बौद्धिक स्तर का विकास किया। रवीन्द्र नाथ के साहित्य से वे इतने प्रभावित थे कि उन्होंने उनपर बहुत सारे चित्र बनाए। रवीन्द्र नाथ ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और कद्र किया। उन्हीं के अनुरोध पर 1920 में नंदलाल बोस 'कलाभवन' के निर्देशक का पद धारण किया। नन्द लाल बोस ने पारंपरिक भारतीय कला शैली को आत्मसात किया।

और कहा, "इसमें संदेह नहीं है कि भारतीय कलाकारों को भी शरीर- रचना- विज्ञान की बनावट, आकृति और अनुपात का पूरा ज्ञान होना चाहिए लेकिन यह ज्ञान यूरोपीय अकादमिक पद्धति का नहीं होना चाहिए।' (साभार : भारत की समकालीन कला एक परिपेक्ष्य, ले॰ प्राण नाथ मागो, प्रकाशन-नेशनल बुक ट्रस्ट, इंडिया।)

नंदलाल ने बड़े पैमाने पर कठोर मेहनत से अजंता के गुफा चित्रों की प्रतिलिपियाँ तैयार कीं। उनकी चित्र शैली भारत के लघु चित्रों, चीनी और जापानी कला तकनीक से प्रभावित थी।

हरि अम्बादास गाडे (जन्म 19 अगस्त 1917 , अमरावती, मृत्यु-16 दिसंबर 2001) प्रगतिशील कलाकार समूह (प्रोग्रेसिव आर्टिस्ट ग्रुप) के सदस्य थे। उन्होंने ग्रामीण जीवन को और प्राकृतिक दृश्यों को डूब कर अपने चित्रों में उतारा। गाडे ने महाराष्ट्र के अमरावती में बचपन बिताया। अम्बा दास गाडे की गणित और विज्ञान में गहन रूचि थी। परन्तु कला में रूचि ने उन्हें चित्रकार बनने को प्रेरित किया। एस एच रजा उनके घनिष्ठ मित्र थे जिनके हौसला बढ़ाने से शुरुआती दौर में खूब जलरंग चित्र बनाया। पैग में शामिल होने बाद में वे घनवाद और अमूर्त अभिव्यंजना वाद से प्रेरित नजर आते हैं।

‘संथाल लड़के’, तैल रंग में, चित्रकार विनोद बिहारी मुखर्जी, साभार: भारत की समकालीन कला एक परिपेक्ष्य, लेखक: प्राण नाथ मागो

विनोद बिहारी मुखर्जी ( 1904 - 1980 ) के चित्रों में  बंगाल का लोक जीवन सुंदर और सरल ढंग से प्रकट होता है। जिसमें गतिशील रेखाएं कलकत्ता के बाजार चित्र शैली से प्रेरित नजर आती हैं। उन्होंने भी चीन और जापानी चित्रण तकनीक को आत्मसात किया है।

शैलोज मुखर्जी (1907 - 1960) कला में भी बंगाल शैली परिलक्षित होती है। लेकिन उन्होंने विश्व कला आंदोलन का नेतृत्व करने वाले कलाकारों से भी प्रेरणा ग्रहण कर एक मौलिक शैली का विकास किया।

उन्होंने निरंतर कार्यरत महिलाओं का चित्रण और ग्राम्य भू दृश्यों का अंकन किया  जो चटख रंगों और गतिशील रेखाओं से सुसज्जित हैं। और भी बहुत भारतीय चित्रकार गिनाए जा सकते हैं जिन्होंने  कृषि प्रधान भारतीय परिवेश को थोड़ा बहुत जरूर अपनी कलाकृतियों में बांधा है, लेकिन बाद में उन्होंने भी आधुनिक कला तकनीक को अपना लिया। कुछ अलग और कुछ नया करने की होड़ में ही हुआ ये सब। सोवियत संघ मिसाल था जिसने रूसी कलाकारों को प्रेरित किया कृषि कार्य को और किसानों के श्रम को अपनी कला का विषय बनाने के लिए। मुझे तो हमेशा ही गांव, मेहनतकश, ग्रामीण महिलाएं, किसान प्रेरित करते रहे हैं। जिनकी वजह से मुझे पिछड़ा समझा जाता रहा।

वर्तमान दौर में और माहौल के अनुरूप भारत के कई क्षेत्रीय स्तर के कलाकारों का ध्यान ग्राम्य जीवन ने फिर से अपनी ओर आकर्षित किया है। बड़े पैमाने पर कलाकार किसानी जीवन को अपने चित्रों में आकर्षक ढंग से अभिव्यक्त कर रहे हैं। सुकून की बात है। मुझे भी विश्व के स्तरीय कलाकारों खासकर रूस, अफ्रीका, फ्रांस, जर्मनी आदि देशों के चित्रकारों की अद्भुत कृतियों को लगातार देखने का मौका मिल रहा है। जो ग्राम्य महिलाओं के कठिन श्रम को दिखा रहे हैं।

(लेखिका डॉ. मंजु प्रसाद एक चित्रकार हैं। आप इन दिनों लखनऊ में रहकर पेंटिंग के अलावा ‘हिन्दी में कला लेखन’ क्षेत्र में सक्रिय हैं।)

Painter
sculptor
Art teacher
Indian painter
art
artist
Indian painting
Indian Folk Life
Art and Artists
Folk Art
Folk Artist
Indian art
Modern Art
Traditional Art

Related Stories

'द इम्मोर्टल': भगत सिंह के जीवन और रूढ़ियों से परे उनके विचारों को सामने लाती कला

राम कथा से ईद मुबारक तक : मिथिला कला ने फैलाए पंख

पर्यावरण, समाज और परिवार: रंग और आकार से रचती महिला कलाकार

सार्थक चित्रण : सार्थक कला अभिव्यक्ति 

आर्ट गैलरी: प्रगतिशील कला समूह (पैग) के अभूतपूर्व कलासृजक

आर्ट गैलरी : देश की प्रमुख महिला छापा चित्रकार अनुपम सूद

छापा चित्रों में मणिपुर की स्मृतियां: चित्रकार आरके सरोज कुमार सिंह

जया अप्पा स्वामी : अग्रणी भारतीय कला समीक्षक और संवेदनशील चित्रकार

कला गुरु उमानाथ झा : परंपरागत चित्र शैली के प्रणेता और आचार्य विज्ञ

चित्रकार सैयद हैदर रज़ा : चित्रों में रची-बसी जन्मभूमि


बाकी खबरें

  • cartoon
    आज का कार्टून
    सरकार की क़ानून वापस न लेने की ज़िद्द बरक़रार, फिर किस पर बातचीत के लिए किसानों को आमंत्रण? 
    09 Jul 2021
    एक बार फिर उत्तर प्रदेश चुनाव को मद्देनजर रखते हुए सरकार ने किसानों को बातचीत के लिए आमंत्रित किया है। लेकिन किसानों ने एक बार फिर दोहराया कि बातचीत बिना किसी पूर्व शर्त के होगी।
  • आसमान छू रहीं ईंधन क़ीमतों के ख़िलाफ़ हुए अखिल भारतीय प्रदर्शन में शामिल हुए किसान संगठन
    रवि कौशल
    आसमान छू रहीं ईंधन क़ीमतों के ख़िलाफ़ हुए अखिल भारतीय प्रदर्शन में शामिल हुए किसान संगठन
    09 Jul 2021
    एक किसान नेता ने कहा, "अगर हमें अंतरिम राहत नहीं पहुंचाई गई, तो हम हर गांव से लोगों को इकट्ठा करेंगे और बीजेपी विधायकों के कार्यालयों को घेरेंगे।"
  • दिल्ली उच्च न्यायालय
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    दिल्ली : वेतन, पेंशन से वंचित एमसीडी कर्मचारियों की स्थिति पर उच्च न्यायालय ने जताया दुख  
    09 Jul 2021
    ‘जब लोग अपने वेतन के भुगतान के लिए हमारे पास आते हैं तो हमें दुख होता है, उनकी दुर्दशा की कल्पना कीजिए...हमें समूची स्थिति और अधिकारियों की निष्ठुरता को देखकर कष्ट होता है। जब हम कुछ करते हैं तो आप…
  • उत्तर प्रदेश : जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव के बाद ब्लॉक प्रमुख चुनाव में भी धांधली के लग रहे आरोप, नामांकन के दौरान कई जिलों में झड़प
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    उत्तर प्रदेश : जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव के बाद ब्लॉक प्रमुख चुनाव में भी धांधली के लग रहे आरोप, नामांकन के दौरान कई जिलों में झड़प
    09 Jul 2021
    ‘‘उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था को भाजपा ने बंधक बना लिया है। ब्लॉक प्रमुख (क्षेत्र पंचायत अध्यक्ष) चुनाव में नामांकन दाखिल करने के दौरान भाजपा नेताओं-कार्यकर्ताओं द्वारा अराजकता और हिंसा किया जाना…
  • खोरी गांव विस्थापन संकट : घरों को तोड़ने की कार्रवाई शुरू, निवासियों ने जंतर मंतर पर किया प्रदर्शन
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    खोरी गांव विस्थापन संकट : घरों को तोड़ने की कार्रवाई शुरू, निवासियों ने जंतर मंतर पर किया प्रदर्शन
    09 Jul 2021
    फरीदाबाद के खोरी गांव में भारी पुलिस बल के साथ प्रशासन ने बृहस्पतिवार को घरों को तोडने की कार्रवाई शुरू कर दी। जबकि दूसरी तरफ़ बृहस्पतिवार को  ही गांव को तोड़ने के फैसले के खिलाफ़ खोरी गांव से…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License