NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
नज़रिया
मज़दूर-किसान
भारत
राजनीति
सांप्रदायिक दंगों के ज़रिये किसान आंदोलन से ध्यान भटकाने की कोशिश
सोचने वाली बात है कि राम मंदिर निर्माण के चंदा इकट्ठा करने के लिए शुक्रवार का दिन ही क्यों चुना जाता है। नारे के साथ पत्थरबाजी, फिर हंगामा और पुलिस का मौके पर पहुंचना, लगभग यही कहानी सभी जिलों में  दोहराई जा रही है।
रूबी सरकार
21 Jan 2021
सांप्रदायिक दंगों के ज़रिये किसान आंदोलन से ध्यान भटकाने की कोशिश

केंद्र की नेशनल डेमोक्रेटिक एलायन्स के अगुवा भारतीय जनता पार्टी के लिए किसान आंदोलन गले की फांस बन चुकी है। केंद्र के तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली की पांच सीमाओं पर डटे किसानों और सरकार के बीच टकराव को बढ़ने से रोकने और जनता का ध्यान भटकाने के लिए मध्यप्रदेश सरकार की पहल भी कम नहीं है। किसान आंदोलन से ध्यान भटकाने के लिए यहां तकरीबन एक महीने से राम मंदिर निर्माण के लिए दान देने की अपील के लिए निकली रैलियों के जरिये साम्प्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने की कोशिश की जा रही है। यहां दंगे-फंसाद का माहौल बनाया जा रहे है। प्रदेश के विभिन्न जिलों में कभी राम मंदिर निर्माण के लिए चंदा इकट्ठा करने, तो कभी भाजपा के अनुषांगिक संगठनों द्वारा मुस्लिम बाहुल इलाके में निर्माण करने के नाम पर साम्रदायिक माहौल बिगाड़ा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों की माने, तो यह केवल दो माह से चल रहे ऐतिहासिक किसान आंदोलन से जनता का ध्यान भटकाने का एक नाकाम प्रयास है। वे यह भी कहते  हैं कि प्रदेश में शीघ्र होने वाले स्थानीय निकाय चुनाव के लिए यह साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण का काम करेगा।

रविवार को प्रदेश की राजधानी भोपाल में जब शहर के लोग तनावमुक्त होकर छुट्टि का आनंद लेने के मुड में थे, तो उन्हें पता चला कि जिला प्रशासन द्वारा राजधानी के तीन थाना क्षेत्रों  हनुमानगंज, टीला जमालपुरा और गौतम नगर में कर्फ्यू  तथा 11 थानों में धारा 144 लगा दिया गया है। ये सभी थाने मुस्लिम बाहुल क्षेत्र में स्थित हैं।

दरअसल पुराने शहर के नए कबाड़ाखाना में विवादित लगभग 37 हजार वर्गफीट जमीन का कब्जा राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़े राजदेव जनसेवा न्यास को कब्जा दिलाने, उसमें चारदीवारी खड़ा करने के लिए जिला प्रशासन द्वारा यह कार्यवाही की जा रही है। प्रशासन का कहना है, कि पुराने भोपाल क्षेत्र में एक समुदाय विशेष द्वारा निर्माण कार्य प्रारंभ किया जा रहा है, जिसमें स्थानीय लोगों  द्वारा विरोध किया जाना संभावित है। इससे शहर की शांति व्यवस्था तथा कानून व्यवस्था को खतरा है, साथ ही लोक सम्पत्ति के नुकसान होने का भय है। जबकि धर्मनिरपेक्ष दलों के नेता बताते है, कि दरअसल यह सरकार के संरक्षण में संघ परिवार की ओर से अल्पसंख्यक समुदाय पर किए जा रहे एकतरफा हमला है। इसी तरह पिछले दिनों  इंदौर, उज्जैन, मंदसौर में राममंदिर निर्माण के लिए दान मांगने वाले रैलियों के दौरान साम्प्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने की कोशिश की गई। भोपाल में कर्फ्यू को लेकर मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव जसविंदर सिंह का कहना है कि अनिश्चितकालीन कर्फ्यू के जरिये यह जता दिया कि सत्ताधारी पार्टी देशभर में चल रहे ऐतिहासिक और शांतिपूर्ण किसान आंदालन से कितने परेशान है। उन्होंने कहा दुर्भाग्य से प्रशासन अपनी संवैधानिक जिम्मेदारियों को भुलाकर संघ के निर्देशन में काम कर रहा है।

गौरतलब है कि सत्ताधारी दल के अनुषांगिक संगठनों द्वारा साम्प्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने का यह कोई नया मामला नहीं है। वर्ष 1992 से यह अनवरत चल रहा है। प्रदेश में  इंदौर, मंदसौर तथा उज्जैन इसका ताजा उदाहरण है। इससे प्रदेश की शांतिप्रिय जनता विचलित होती है। इंदौर संभाग के गौतमपुरा तहसील के चंदनखेड़ी गांव में जुम्मे के दिन  अयोध्या में भव्य राममंदिर निर्माण के लिए चंदा इकट्ठा करने के इरादे से निकली रैली में दोनों समुदायों के बीच विवाद हो गया, जिसने थोड़ी ही देर में हिंसक रूप धारण कर लिया।

चंदनखेड़ी गांव के पूर्व सरपंच ने बताया कि इस गांव में तकरीबन 490 मुस्लिम परिवार,  4 दलित परिवार और एक चौधरी परिवार है। इन परिवारों में सदियों से आदर का व्यवहार था। सभी खेती-किसानी और पशुपालन में एक-दूसरे को मदद करते थे। चंदनखेड़ी से लगभग 5000 लीटर दूध प्रतिदिन इलाके के दूसरे गांवों में पहुंचाया जाता है। इससे यह ज्ञात होता है कि आपस में लेनदेन और भाईचारे की कितनी मजबूत कड़ी है। लेकिन उस दिन अचानक क्या हुआ कि एक-दूसरे के दुश्मन बन गए।  

घटना के संबंध में बताते हुए पूर्व सरपंच ने कहा कि रैली में रामभक्त जोर-जोर से जय श्रीराम के नारे लगा रहे थे, जिससे माहौल में डर पैदा हो रहा था। हालांकि रैली में पुलिस बराबर साथ चल रही थी और रैली तकरीबन गांव पार चुकी थी। ऐन मौके पर रैली में शामिल कुछ कार्यकर्ता ईदगाह के मीनार पर चढ़ गए, उनके हाथों में तलवारें थी। यह देखकर गांव के कुछ युवा और बुजुर्ग सामने आए और पुलिस की मदद से उन्हें मीनार से नीचे उतारा। इनमें से दो को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। जिन्हें बाद में जमानत पर छोड़ दिया। प्रत्यक्षदर्शियों ने यह भी बताया कि तलवारों के अलावा डण्डे और ज्वलनशील द्रव्य भी भीड़ में शामिल लोगों के पास था। इस बीच खेतों के बीच से कुछ असामाजिक तत्वों ने पत्थरबाजी शुरू कर दी जिससे माहैल एकदम से बिगड़ गया। लोगों ने गोली चलने की आवाजें भी सुनी। मामला शांत कराने के लिए पुलिस ने आंसूं गैस के गोले छोड़े। इस सिलसिले में पुलिस ने गांव के 23 लोगों के खिलाफ धारा 147,148, 294 और 323 के अंतर्गत आपराधिक प्रकरण दर्ज किये। कुछ की गिरफ्तारियां भी हुई जिन्हें बाद में जमानत भी मिल गई। प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए  गौतमपुर थाना प्रभारी को निलंबित कर दिया गया और सांवेर एसपी को लाईन हाजिर। लेकिन जो हुआ उससे लोगों के दिलों में दूरियां बन गई।

चंदनखेड़ी में दंगे के बाद पीडि़तों से मिलने पहुंची सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर ने कहा कि घटना के बाद शासन द्वारा नुकसान की भरपाई किये बिना एकतरफा कार्यवाही करते हुए सड़क चौड़ीकरण के नाम पर एक पक्ष के लोगों के मकानों को तोड़ना ज्यादा शर्मनाक है। और तो और गांव के अंतिम छोर पर कोदर भाई अकबर भाई के घर पर जबरदस्त हमला हुआ। उनके छत पर पत्थर  गिरे हुए थे। उनके तीन ट्रैक्टरों, दो गाडि़यां (एक जीप), 2 मोटरसायकिलों, कुछ पंखे, टेलीविजन, पंप, कपाट, दरवाजे आदि पर हथियारों से तोड़फोड़ के निशान मिले है। उनके भैंसों और बकरियों पर लाठियां बरसाई गई। कई जानवरों के पैरों की हड्डियां टूटी मिली।

परिवार के पांचों भाईयों की बेरहमी से पिटाई हुई। उनके परिवार के सदस्य अभी भी अस्पताल में इलाज करवा रहे हैं। खेती और पशुपालन पर निर्भर इनकी आजीविका की बर्बादी की सारी निशानी कैमरे में कैद है। कादरभाई की बूढ़ी मां ने बताया कि पुलिस मूकदर्शक बनकर खड़ी रही। जबकि बहनों ने बताया कि आगजनी शुरू होते ही पुलिस ने उनके घरवालों को बाहर निकलने को कहा।  उन्होंने 100 नंबर डायल कर पुलिस को बुलाया था। इलाके के पटवारी मुकेश चौहान ने माना कि घटना और बर्बादी का पंचनामा करवाया गया है।  

लगभग इसी तरह की घटना पिछले दिनों उज्जैन और मंदसौर में भी घटी थी। जब रामभक्त भव्य मंदिर निर्माण के लिए चंदा मांगने निकले। मंदसौर जिले में एक संगठन द्वारा सुनियोजित ढंग से रैली निकाल कर मुस्लिम विरोधी नारेबाजी की गई। इतना ही नहीं इन लोगों ने मस्जिद में तोड़फोड़ भी की। मुस्लिम समाज के खिलाफ आपत्तिजनक नारेबाजी करते हुए कानून व्यवस्था खराब करने का प्रयास किया गया था। आपसी सौहार्द बिगाड़ कर साम्प्रदायिक दंगा भड़काने की सत्ताधारी दल की यह कोशिश यहां भी बहुत कामयाब नहीं हो पायी। इसी कड़ी में उज्जैन में राम मंदिर निर्माण के चंदे के लिए जागरण रैली निकाल कर सांप्रदायिक माहौल बिगाड़ने की कोशिशें की गई। यहां भी अल्पसंख्यक इलाके बेगमगंज में माहौल बिगड़ गया। मेधा ने कहा कि सभी घटनाओं का स्वरूप एक ही है। यह सोचने वाली बात है कि भगवान राम के मंदिर निर्माण के चंदा इकट्ठा करने के लिए शुक्रवार का दिन ही क्यों चुना जाता है। नारे के साथ पत्थरबाजी, फिर हंगामा और पुलिस का मौके पर पहुंचना लगभग यही कहानी सभी जिलों में  दोहराई जा रही है। रैली में पुलिस की मौजुदगी में साम्प्रदायिक माहौल क्यों बिगड़ रहा है! यह बहुत सारे सवाल है। जिसके जवाब मिलना शायद मुश्किल है।

मेधा ने आगे बताया कि जब प्रधानमंत्री मंदिर निर्माण के लिए पूरी वित्तीय सहायता मंजूर कर चुके हैं तो फिर इस तरह चंदा जुटाने का औचित्य क्या है! साम्प्रदायिक दंगों को देखते हुए संवैधानिक आधार पर तत्काल इस पर रोक लगाई जानी चाहिए। साथ ही पूर्व न्यायाधीशों के नेतृत्व में एक कमेटी बनाकर इन घटनाओं की जांच करानी चाहिए।  

(रूबी सरकार एक स्वतंत्र पत्रकार है )

farmers protest
Farm bills 2020
Communal riots
Communalism
Religion Politics
Ram Mandir
National Democratic Alliance
BJP
RSS

Related Stories

मूसेवाला की हत्या को लेकर ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन, कांग्रेस ने इसे ‘राजनीतिक हत्या’ बताया

बिहार : नीतीश सरकार के ‘बुलडोज़र राज’ के खिलाफ गरीबों ने खोला मोर्चा!   

आशा कार्यकर्ताओं को मिला 'ग्लोबल हेल्थ लीडर्स अवार्ड’  लेकिन उचित वेतन कब मिलेगा?

झारखंड : नफ़रत और कॉर्पोरेट संस्कृति के विरुद्ध लेखक-कलाकारों का सम्मलेन! 

दिल्ली : पांच महीने से वेतन व पेंशन न मिलने से आर्थिक तंगी से जूझ रहे शिक्षकों ने किया प्रदर्शन

राम सेना और बजरंग दल को आतंकी संगठन घोषित करने की किसान संगठनों की मांग

आईपीओ लॉन्च के विरोध में एलआईसी कर्मचारियों ने की हड़ताल

जहाँगीरपुरी हिंसा : "हिंदुस्तान के भाईचारे पर बुलडोज़र" के ख़िलाफ़ वाम दलों का प्रदर्शन

दिल्ली: सांप्रदायिक और बुलडोजर राजनीति के ख़िलाफ़ वाम दलों का प्रदर्शन

आंगनवाड़ी महिलाकर्मियों ने क्यों कर रखा है आप और भाजपा की "नाक में दम”?


बाकी खबरें

  • बेनतीजा रही बातचीत, किसानों ने घेरा सचिवालय
    न्यूज़क्लिक टीम
    बेनतीजा रही बातचीत, किसानों ने घेरा सचिवालय
    08 Sep 2021
    न्यूज़क्लिक के डेली राउंडअप में आज हमारी नज़र रहेगी हरियाणा के करनाल में धरना दे रहे किसानों पर, रेलवे के निजीकरण के ख़िलाफ़ रेल कर्मियों के राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन पर, तालिबान की नई सरकार द्वारा जारी…
  • सोनिया यादव
    बहुजनहित की बात करने वाली मायावती अचानक ब्राह्मणों के मान-सम्मान लिए क्यों आवाज़ उठा रही हैं?
    08 Sep 2021
    उत्तर प्रदेश में ब्राह्मण मतदाता बीएसपी के जाटव और सपा के यादवों के बाद चुनाव का एक महत्वपूर्ण कारक हैं। ऐसे में क़रीब 14 साल बाद अब एक बार फिर बीएसपी दलित और ब्राह्मण ‘सोशल इंजीनियरिंग’ के जरिए अपने…
  • किसानों से डरी सरकार, उसके जन और जनतंत्र विरोध का हुआ पर्दाफाश
    न्यूज़क्लिक टीम
    किसानों से डरी सरकार, उसके जन और जनतंत्र विरोध का हुआ पर्दाफाश
    08 Sep 2021
    करनाल की किसान मोर्चेबंदी का विश्लेषण कर रहे हैं वरिष्ठ पत्रकार उर्मिलेश.
  • क्या जरूरी थी जलियाँवाला बाग के इर्द गिर्द हुई मरम्मत?
    न्यूज़क्लिक टीम
    क्या जरूरी थी जलियाँवाला बाग के इर्द गिर्द हुई मरम्मत?
    08 Sep 2021
    'इतिहास के पन्ने मेरी नज़र से' के इस एपिसोड में नीलांजन बात करते हैं इतिहासकार सलिल मिश्र से जलियाँवाला बाग के नवीनीकरण के बारे में.
  • geelani
    अजाज़ अशरफ
    क्या सैयद शाह गिलानी राष्ट्रीय मीडिया से श्रृद्धांजलि मिलने के भी पात्र नहीं थे?
    08 Sep 2021
    कश्मीरी अलगाववादी नेता गिलानी और संपादक चंदन मित्रा के निधन की विरोधाभासी कवरेज से पता चलता है कि राष्ट्रीय प्रेस सरकारी जुबान में बोलती है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License