NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
अयोध्या : 10 हज़ार से ज़्यादा मंदिर, मगर एक भी ढंग का अस्पताल नहीं
दरअसल अयोध्या को जिस तरह से दुनिया के सामने पेश किया जा रहा है वो सच नहीं है। यहां लोगों के पास ख़ुश होने के लिए मंदिर के अलावा कोई दूसरा ज़रिया नहीं है। अस्पताल से लेकर स्कूल तक सबकी हालत ख़राब है।
रवि शंकर दुबे
24 Jan 2022
Ayodhya

इस दुनिया में हर चीज़ के दो पहलू होते हैं, एक वो... जो सबको दिखता है, दूसरा वो... जो सुविधा के अनुसार दिखाया जाता है या छिपाया जाता है।

कुछ यही हाल है अनंत इतिहास को महज़ कुछ पत्थरों में समेटे हुए अयोध्या नगरी का... जिसका भविष्य फिलहाल भव्य राम मंदिर का उल्लास है। कहने को तो अयोध्या में राम का जन्म हुआ था, जिसके कारण यहां लोगों की अटूट आस्था है, लेकिन आस्था को कैसे लोगों के गौरव और आत्मसम्मान का विषय बना देना है, कैसे इसे उनके डर का कारण बना देना है।, ये भारतीय जनता पार्टी ने कुछ सालों में कर दिखाया।

1980 में बनी भारतीय जनता पार्टी ने भले ही अयोध्या के सहारे 2 से 282 तक का सफर तय कर लिया हो, लेकिन इनकी भ्रमित करने वाली सोच मंदिर से शुरू होकर मंदिर तक ही सिमट गई। इन्हें ये नहीं याद आया कि मंदिर में पूजा करने वालों को चलने के लिए सड़कें, पानी पीने के लिए नल, बेहतर स्वास्थ्य के लिए अस्पताल और शिक्षा के लिए स्कूल की भी ज़रूरत होती है।

फैज़ाबाद से अयोध्या में तब्दील हो चुके ज़िले में रहने वालों को अगर ठीक से छींक भी आ जाए तो 135 किलोमीटर दूर लखनऊ दौड़ना पड़ता है, तो ज़रा सोचिए कि गंभीर बीमारियों से ग्रसित लोगों का क्या हाल होता होगा।

अयोध्या में स्वास्थ्य से संबंधित सुविधाओं को लेकर न्यज़ क्लिक से बात करते हुए समाजवादी प्रवक्ता राजीव रॉय ने भाजपा को कटघरे में खड़ा कर दिया। उन्होंने बताया कि यहां के लोगों को प्राइवेट अस्पतालों पर निर्भर रहना पड़ता है, क्योंकि सरकारी अस्पतालों में सिर्फ वो डॉक्टर हैं जो अभी ट्रेनिंग ले रहे हैं। ऐसे में कोई भी अपनी जान जोखिम में डालना नहीं चाहता है, इसके अलावा सुविधाओं के अभाव के कारण भी कोई सरकारी अस्पताल जाना नहीं चाहता है। राजीव राय ने बताया कि सिर्फ स्थानीय लोग ही नहीं बल्कि बाहर से आने वाले टूरिस्टों को भी प्राइवेट अस्पतालों की ब्लैकमेलिंग का शिकार होना पड़ता है।

सपा प्रवक्ता ने हालही में जारी की गई नीति आयोग की रिपोर्ट का भी जिक्र किया। जिसमें उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को वेंटिलेटर पर दर्शाया गया है। इस रिपोर्ट के अनुसार उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था 19वें नंबर है। जो ये साबित करने के लिए काफी है कि भाजपा के भाषणों में बोली जाने वाली बातें कितनी सच हैं?

इसके बाद जब न्यूज़ क्लिक ने कांग्रेस अयोध्या के ज़िला अध्यक्ष अखिलेश यादव से बातचीत की, तो उन्होंने  जो बताया वो डरावना था, अखिलेश के मुताबिक अयोध्या के सरकारी अस्पताल के सफाई कर्मी ही मरीज़ों को इंजेक्शन लगाते हैं और पट्टी बांढते हैं। अस्पताल के डॉक्टरों के बारे में पूछे जाने पर अखिलेश ने कहा कि कुछ डॉक्टरों को अपने प्राइवेट क्लीनिक से ही फुरसत नहीं मिलती, बाकी जो आते भी हैं वो खुद की जगह वहां के अनट्रेंड स्टाफ से काम कराते हैं। अखिलेश ने बताया कि जिले भर के ज्यादातर सीएचसी बंद पड़े हैं, और जो खुले हैं उनकी हालत भी ठीक नहीं है।

कांग्रेस के जिला अध्यक्ष से हमने स्थानीय स्कूलों के बारे में भी बात की, इस पर उनका कहना था कि भाजपा की योगी सरकार ने पांच सालों में सिर्फ रंगाई-पुताई करवाकर अपनी मार्केटिंग की है जबकि शिक्षा को बेहतर करने के लिए एक काम नहीं किया। शिक्षा को बेहतर करने के लिए स्कूल में शिक्षक होने चाहिए और बच्चों को शिक्षा के लिए सुविधाएं मिलनी चाहिए।   

ग़ौर करने वाली बात ये है कि जिस शहर में 10 हज़ार से भी ज्यादा मंदिर हों, हर सड़क, हर गली, हर नुक्कड़, हर मोड़ पर भगवान का घर हो, वहां लोगों के स्वास्थ्य के साथ ऐसा खिलवाड़ कितना जायज़ है। बच्चों की शिक्षा के नाम खुद की मार्केटिंग कितनी सही है?

दैनिक भास्कर की एक रिपोर्ट के अनुसार स्थानीय निवासियों का कहना है कि यहां विकास की रफ्तार 30 सालों से सुस्त ही है जबकि आबादी में 8 गुना की बढ़ोत्तरी हुई है। मगर अयोध्या शहर ही नहीं बल्कि आसपास के इलाकों में भी उद्योग धंधे नहीं बढ़े। यहां बेरोजगारी सबसे बड़ा संकट है, जहां भी जाओ सिर्फ पूजन सामग्री की दुकानें मिलती हैं। इसके अलावा यहां के युवाओं के पास आय का कोई ज़रिया नहीं है। ऐसे में पढ़-लिखे युवाओं के पास पलायन के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं है। हर साल हजारों युवा अयोध्या से नौकरी की तलाश में दूसरे शहरों का रुख करते हैं।

भारतीय जनता पार्टी ने राम मंदिर निर्माण के साथ जो काम शुरू करवाए उसका दर्द अब भी ताज़ा ही है, क्योंकि इसके लिए करीब 70 फीसदी शहरों को उधेड़ दिया गया। टूटी सड़कें, उफनती नालियां, और नदियों में मिलता गंदा पानी हर किसी की समस्या बना हुआ है। जो स्थानीय लोगों की नाराज़गी का बड़ा कारण है। शायद यही वजह है कि राजनीति में जिस जगह को भारतीय जनता पार्टी ने सबसे ज्यादा भुनाया मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ वहीं से चुनाव लड़ने की हिम्मत नहीं कर पाए, और वापस अपने घर गोरखपुर शहर लौट गए।

ये कहना ग़लत नहीं होगा कि राम मंदिर निर्माण से ज़िले का एक तबका बेहद खुश हैं, लेकिन ये भी सच है कि मंदिर के अलावा उनके पास खुशी का कोई दूसरा ज़रिया भी नहीं है, क्योंकि जैसे-जैसे मंदिरों का काम आगे बढ़ रहा है करीब 2 किलोमीटर के दायरे में लोगों को उजाड़ा जा रहा है। जिसके कारण भी लोग बेहद परेशान हैं।

ख़ैर... अयोध्या में सिर्फ मंदिर बना देने भर से काम नहीं चलने वाला है। यहां के लोग तबतक विकाश शील नहीं होगे जब अच्छी सड़कें, नालियां, अस्पताल और स्कूल नहीं होंगे। 

ayodhya
10 thousand temples
Uttar pradesh
healthcare
Healthcare Facilities
Yogi Adityanath

Related Stories

आजमगढ़ उप-चुनाव: भाजपा के निरहुआ के सामने होंगे धर्मेंद्र यादव

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

उत्तर प्रदेश: "सरकार हमें नियुक्ति दे या मुक्ति दे"  इच्छामृत्यु की माँग करते हजारों बेरोजगार युवा

यूपी : आज़मगढ़ और रामपुर लोकसभा उपचुनाव में सपा की साख़ बचेगी या बीजेपी सेंध मारेगी?

श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही मस्जिद ईदगाह प्रकरण में दो अलग-अलग याचिकाएं दाखिल

ग्राउंड रिपोर्ट: चंदौली पुलिस की बर्बरता की शिकार निशा यादव की मौत का हिसाब मांग रहे जनवादी संगठन

जौनपुर: कालेज प्रबंधक पर प्रोफ़ेसर को जूते से पीटने का आरोप, लीपापोती में जुटी पुलिस

यूपी में  पुरानी पेंशन बहाली व अन्य मांगों को लेकर राज्य कर्मचारियों का प्रदर्शन

उपचुनाव:  6 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश में 23 जून को मतदान

UPSI भर्ती: 15-15 लाख में दरोगा बनने की स्कीम का ऐसे हो गया पर्दाफ़ाश


बाकी खबरें

  • ऋचा चिंतन
    डब्ल्यूएचओ द्वारा कोवैक्सिन का निलंबन भारत के टीका कार्यक्रम के लिए अवरोधक बन सकता है
    09 Apr 2022
    चूँकि डब्ल्यूएचओ के द्वारा कोवैक्सिन के निलंबन के संदर्भ में विवरण सार्वजनिक क्षेत्र में उपलब्ध नहीं हैं, ऐसे में यह इसकी प्रभावकारिता एवं सुरक्षा पर संदेह उत्पन्न कर सकता है।
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    इमरान के ख़िलाफ़ अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान के लिए पाक संसद का सत्र शुरू
    09 Apr 2022
    पाकिस्तान के उच्चतम न्यायालय के एक ऐतिहासिक फैसले के बाद खान के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान के लिए नेशनल असेंबली का सत्र सुबह साढ़े 10 बजे (स्थानीय समयानुसार) शुरू हुआ।
  • भाषा
    दिल्ली में एक फैक्टरी में लगी आग, नौ लोग झुलसे
    09 Apr 2022
    दिल्ली दमकल सेवा (डीएफएस) के अनुसार, आग बुझाने की कोशिश में दमकल विभाग के छह कर्मी, एक पुलिसकर्मी, दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) का एक अधिकारी और एक स्थानीय व्यक्ति झुलस गया।
  • वसीम अकरम त्यागी
    महंगाई के आक्रोश को मुस्लिमों के ख़िलाफ़ नफ़रत बढ़ाकर ढकने की कोशिश, आख़िर किसका नुक़सान? 
    09 Apr 2022
    पेट्रोलियम और रोज़मर्रा के सामान की दर लगातार आसमान छू रही हैं और तो दूसरी तरफ़ मुस्लिमों के ख़िलाफ़ नफ़रत बेतहाशा बढ़ रही है।
  • रूबी सरकार
    सीधी प्रकरण: अस्वीकार्य है कला, संस्कृति और पत्रकारिता पर अमानवीयता
    09 Apr 2022
    सीधी की घटना को लेकर पत्रकार, रंगकर्मियों के अलावा मध्यप्रदेश हिंदी साहित्य सम्मेलन, प्रगतिशील लेखक संघ व अन्य प्रसिद्ध लेखक-साहित्याकारों ने गहरा प्रतिरोध दर्ज कराया है और इसे लोकतंत्र में तानाशाही…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License