NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
अयोध्या: पांच एकड़ जमीन को लेकर क्या है मुस्लिम पक्ष की राय?
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में अयोध्या में नई मस्जिद के निर्माण के लिए पांच एकड़ जमीन देने का आदेश दिया है।
असद रिज़वी
12 Nov 2019
supreme court babri masjid
Image courtesy:Muslim Mirror

अयोध्या में मस्जिद निर्माण के लिए सरकार से 5 एकड़ वैकल्पिक ज़मीन स्वीकार की जाए या नहीं इसे लेकर मुस्लिम पक्ष में अलग-अलग मत देखने को मिल रहे हैं। मुस्लिम पक्ष का एक बड़ा हिस्सा मानता है कि विवाद ज़मीन का नहीं बल्कि मस्जिद का था। हालाँकि अयोध्या विवाद के मुख्य मुद्दई उत्तर प्रदेश सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड का कहना है कि ज़मीन स्वीकार करने और अस्वीकार करने इन दोनों पहलुओं पर विचार किया जा रहा है।

अयोध्या विवाद पर 09 नवम्बर को सुप्रीम कोर्ट को दिए अपने फ़ैसले में पूरी विवादित 2.77 एकड़ ज़मीन राम मंदिर निर्माण के लिए दिए जाने का आदेश दिया है। चीफ जस्टिस ऑफ़ इंडिया रंजन गोगोई की अगुआई वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने सर्वसम्मति से दिए फ़ैसले में यह भी कहा की मुस्लिम पक्ष को 5 एकड़ वैकल्पिक ज़मीन दी जाए।

उत्तर प्रदेश सेंट्रल सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड अभी तक वैकल्पिक ज़मीन स्वीकार करने पर कोई निर्णय नहीं ले सका है। अयोध्या विवाद में मुस्लिम पक्ष की तरफ़ से मुख्य मुद्दाई सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड के ज़फ़र फ़ारूक़ी का कहना है कि वैकल्पिक ज़मीन स्वीकार करने और नहीं करने दोनों पहलुओं पर विचार किया जा रहा है। उन्होंने कहा क्योंकि वैकल्पिक ज़मीन की बात सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले में कही गई है, इसलिए इस पर क़ानून के जानकारों की राय भी ली जा रही है।

ज़फ़र फ़ारूक़ी के अनुसार इस बात भी नज़र रखी जा रही है कि ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड इस विषय पर क्या कहता है। उन्होंने कहा सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड अंतिम निर्णय अपनी 26 नवम्बर की मीटिंग में लेगा, जिसमें मुस्लिम समुदाय द्वारा आ रही अलग-अलग राय पर भी विचार किया जाएगा।

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड भी अभी वैकल्पिक ज़मीन को लेकर किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुँचा है। बोर्ड के सदस्य और बाबरी ऐक्शन कमेटी के कन्वेनर ज़फ़रयाब जिलानी मानते हैं कि वैकल्पिक ज़मीन बाबरी मस्जिद के तोड़े जाने के मुआवज़े के तौर पर दी जा रही है। उन्होंने कहा की वैकल्पिक ज़मीन लेने या नहीं का अंतिम निर्णय मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड द्वारा 17 नवम्बर  की मीटिंग में लिया जाएगा। हालाँकि उन्होंने कहा कि उनको यक़ीन है मुस्लिम समुदाय मस्जिद के बदले वैकल्पिक ज़मीन को स्वीकार नहीं करेगा।

वही, ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड ने ज़मीन अस्वीकार करने की बात की है। बोर्ड के प्रवक्ता मौलाना यासूब अब्बास का कहना है कि मुस्लिम पक्ष की क़ानूनी लड़ाई मस्जिद के लिए थी, किसी ज़मीन के लिए नहीं थी। मौलाना यासूब अब्बास का कहना है कि वैकल्पिक ज़मीन पर फ़ैसला सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड को लेना है, लेकिन मुस्लिम समुदाय के पास भारत में ज़मीन की कमी नहीं है जो वह बाबरी मस्जिद तोड़े जाने के मुआवज़े के तौर पर वैकल्पिक ज़मीन को स्वीकार करे।

मुस्लिम समाज में इस बात भी चर्चा हो रही है कि अगर वैकल्पिक ज़मीन देना है तो उसको मुस्लिम समुदाय की पसंद के अनुसार देना चाहिए। अयोध्या के रहने वाले इकबाल अंसारी ने, जो विवादित भूमि के मामले में मुद्दाई भी थे, कहते हैं, अगर मुस्लिम पक्ष को जमीन देना हैं तो हमारी सुविधा और अधिग्रहित 67 एकड़ भूमि से ही देनी चाहिए। वरना हमको कोई वैकल्पिक ज़मीन की ज़रूरत नहीं है। वहीं, मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के वरिष्ठ सदस्य कमाल फ़ारूक़ी कहते हैं कि वह अदालत के फ़ैसले का सम्मान करते हैं, मगर मस्जिद की जगह कोई दूसरी जगह लेने से बेहतर होगा की सप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाख़िल की जाए।

लखनऊ के प्रसिद्ध फ़िज़िशन और सामाजिक कार्यों में सक्रिय रहने वाले डॉक्टर कौसर उस्मान मानते हैं कि वैकल्पिक ज़मीन को स्वीकार करना चाहिए। उनका कहना है कि वैकल्पिक ज़मीन नहीं लेने से बाबरी मस्जिद का नाम इतिहास से मिटा दिया जाएगा। मंदिर तो उसी रोज़ बन गया था जिस दिन मस्जिद को गिराया गया था।

डॉक्टर कौसर उस्मान के अनुसार वैकल्पिक ज़मीन को लेकर वर्ल्ड क्लास का एक विश्वविद्यालय “यूनिवर्सिटी फ़ॉर यूनिटी” का निर्माण होना चाहिए है। इस यूनिवर्सिटी में इस्लाम ने जो शांति का संदेश दिया है वह भी पढ़ाना चाहिए।

अयोध्या विवाद में मध्यस्थता की बात करने वाला संगठन इंडियन मुस्लिम फ़ॉर पीस के सदस्य अनीस अंसारी भी मानते है कि मुस्लिम पक्ष को वैकल्पिक ज़मीन स्वीकार कर लेना चाहिए और वहाँ एक मस्जिद का निर्माण होना चाहिए है। सेवानिवृत्त आईएएस अनीस अंसारी हालाँकि सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले से संतुष्ट नहीं हैं और उनका कहना है कि पुनर्विचार याचिका के विकल्प पर विचार करना चाहिए है, ताकि मौजूदा फ़ैसला भविष्य में किसी दौरे वाद में नज़ीर ना बने। क्योंकि अनीस अंसारी मानते हैं कि अयोध्या विवाद में आये फ़ैसले में विरोधाभास है।

अयोध्या विवाद पर नज़र रखने वाले मानते हैं कि वैकल्पिक ज़मीन को अदालत ने इसलिए दिया है कि विवाद हमेशा के लिए ख़त्म हो जाए। क़ानूनी मामलों के जानकार और बीबीसी के पूर्व पत्रकार रामदत्त त्रिपाठी कहते हैं कि वैकल्पिक ज़मीन मुस्लिम पक्ष के इस लिए भी दी गई क्योंकि विवादित ज़मीन पर लम्बे समय तक उनका क़ब्ज़ा रहा है। उन्होंने बताया कि पीवी नरसिम्हाराव के समय से यह प्रावधान था कि मुक़दमे में जीतने और हारने वाले दोनों को सरकार द्वारा 1993 में अधिकृत जमीन में से हिस्सा दिया जाएगा।

क़ानून के माहिर भी मानते हैं कि अदालत द्वारा मुस्लिम पक्ष को वैकल्पिक ज़मीन अयोध्या विवाद को हमेशा ख़त्म करने के लिए दी गई है। प्रसिद्ध अधिवक्ता मोहम्मद हैदर रिज़वी कहते हैं कि अगर सप्रीम कोर्ट मुस्लिम पक्ष को वैकल्पिक ज़मीन नहीं देता तो भी कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता है।लेकिन अदालत दिखाना चाहता है कि किसी के पक्ष के साथ अन्याय नहीं किया गया है।

अधिवक्ता मोहम्मद हैदर कहते हैं कि वैकल्पिक ज़मीन देने का उद्देश्य विवाद को हमेशा के लिए ख़त्म करना है ताकि ऐसा लगे न कोई पक्ष जीता है और नहीं कोई हारा है।

Supreme Court
Ayodhya Dispute
Ayodhya verdict
Five acres of land
babri masjid
Sunni Waqf Board
All India Muslim Personal Law Board

Related Stories

ज्ञानवापी मस्जिद के ख़िलाफ़ दाख़िल सभी याचिकाएं एक दूसरे की कॉपी-पेस्ट!

आर्य समाज द्वारा जारी विवाह प्रमाणपत्र क़ानूनी मान्य नहीं: सुप्रीम कोर्ट

समलैंगिक साथ रहने के लिए 'आज़ाद’, केरल हाई कोर्ट का फैसला एक मिसाल

मायके और ससुराल दोनों घरों में महिलाओं को रहने का पूरा अधिकार

जब "आतंक" पर क्लीनचिट, तो उमर खालिद जेल में क्यों ?

विचार: सांप्रदायिकता से संघर्ष को स्थगित रखना घातक

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक आदेश : सेक्स वर्कर्स भी सम्मान की हकदार, सेक्स वर्क भी एक पेशा

तेलंगाना एनकाउंटर की गुत्थी तो सुलझ गई लेकिन अब दोषियों पर कार्रवाई कब होगी?

मलियाना कांडः 72 मौतें, क्रूर व्यवस्था से न्याय की आस हारते 35 साल

क्या ज्ञानवापी के बाद ख़त्म हो जाएगा मंदिर-मस्जिद का विवाद?


बाकी खबरें

  • एजाज़ अशरफ़
    ब्राह्मणों को रिझाना यानी आदित्यनाथ के जाल में फंसना
    29 Jul 2021
    राज्य में नई विधानसभा के चुनाव होने से ठीक छह महीने पहले, उत्तर प्रदेश के दो प्रमुख विपक्षी दल - बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी- कोविड-19 द्वारा बरपाई गई भयावह बरबादी की पृष्ठभूमि म
  • forest
    राजा मुज़फ़्फ़र भट
    जब जम्मू-कश्मीर में आर्द्रभूमि भूमि बन गई बंजर
    29 Jul 2021
    जम्मू-कश्मीर की आर्द्रभूमि (वेटलैंड) में नगरपालिका द्वारा कूड़ा-कचरा जमा करने के विरोध में दायर की गई एक याचिका पर सुनवाई करते हुए एनजीटी ने एमके बालाकृष्णन एवं अन्य बनाम भारतीय संघ के एक मामले में…
  • पीपल्स डिस्पैच
    अमेरिकी ड्रोन प्रोग्राम और किल लिस्ट का पर्दाफ़ाश करने के लिए डेनियल हेले को 45 महीने की सज़ा
    29 Jul 2021
    अमेरिकी ड्रोन युद्ध कार्यक्रम पर गोपनीय दस्तावेज़ लीक करने की बात स्वीकार करने के बाद व्हिसलब्लोअर को बाइडेन प्रशासन के तहत सज़ा सुनाए जाने का पहला मामला है।
  • natural disaster
    सीमा शर्मा
    जलवायु परिवर्तन से विश्व में विषम मौसम की घटनाओं में बढ़ोतरी, भारत अछूता नहीं
    29 Jul 2021
    भारत को पहले से ही चेतावनी दी जा चुकी है कि वैश्विक तापमान में वृद्धि के साथ मानसून की बारिश के और बढ़ते जाने का अनुमान है और इससे कृषि एवं अर्थव्यवस्था दोनों पर ही असर पड़ेगा।
  • Cartoon Click: ...we are ready
    आज का कार्टून
    कार्टून क्लिक: ...हैं तैयार हम
    29 Jul 2021
    पेगासस जासूसी कांड, महंगाई और किसानों के मुद्दे पर विपक्ष एक बार फिर एकजुट होने और सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा है। तो सत्ता पक्ष भी तो तैयार होगा। क्योंकि अगले साल की शुरुआत में ही पांच अहम…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License