NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
शिक्षा
भारत
राजनीति
बीएचयू: लाइब्रेरी के लिए छात्राओं का संघर्ष तेज़, ‘कर्फ्यू टाइमिंग’ हटाने की मांग
बीएचयू में एक बार फिर छात्राओं ने अपने हक़ के लिए की आवाज़ बुलंद की है। लाइब्रेरी इस्तेमाल के लिए छात्राएं हस्ताक्षर अभियान के साथ ही प्रदर्शन कर प्रशासन पर लड़कियों को शिक्षा से वंचित रखने का आरोप भी लगा रही हैं।
सोनिया यादव
15 Apr 2022
BHU

देश की प्रतिष्ठित बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी यानी बीएचयू में बीते दिनों लाइब्रेरी आंदोलन की बड़ी जीत हुई थी। छात्रों के 6 साल के लंबे संघर्ष के बाद आखिरकार बीएचयू प्रशासन ने साइबर लाइब्रेरी को 21 घंटे खोले जाने की मंजूरी दे दी थी। हालांकि इस बड़े फैसले के लगभग तीन हफ्ते बीते जाने के बाद भी अब तक कैंपस की छात्राएं इस सुविधा से वंचित हैं। उन्हें ‘कर्फ्यू टाइमिंग’ की चलते लाइब्रेरी में रात को पढ़ने की अनुमति नहीं है। ये विडंबना ही है कि जिस देश में लड़कियां आंतरिक्ष और जंग के मैदान तक पहुंच गई हैं, वहां उन्हें अब भी पढ़ने के लिए लाइब्रेरी तक पहुंचने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।

बता दें कि छात्राओं के लिए भी सामान्य रूप से पुस्तकालय की व्यवस्था लाइब्रेरी आंदोलन की एक बड़ी और महत्वपूर्ण मांग थी। जिसे प्रशासन ने अब तक महज़ आश्वासन के भरोसे लटका दिया है। छात्राएं लगातार अपनी मांगों को लेकर प्रशासन से गुहार लगा रही हैं लेकिन उन्हें सुरक्षा और सुविधा का हवाला देकर एक विभाग से दूसरे विभाग के चक्कर कटवाए जा रहे हैं।

प्रशासन के रवैए से नाराज़ छात्राओं ने बीते बुधवार यानी 13 अप्रैल से विश्वविद्यालय के विश्वनाथ मंदिर के पास एक हस्ताक्षर अभियान की शुरूआत की है। इस दौरान छात्राओं ने कैंपस के अलग-अलग स्थानों पर जाकर छात्रों से समर्थन और एकजुटता की मांग की। साथ ही लाइब्रेरी के बाहर प्रदर्शन कर अपने साथ हो रहे भेदभाव के विरोध में जमकर नारेबाज़ी भी की। छात्राओं का आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रशासन लड़कियों के साथ भेदभाव कर रहा है, सिर्फ आश्वासन के नाम पर उन्हें शिक्षा के अधिकार से दूर रखा जा रहा है।

image

छात्राओं का प्रदर्शन और ‘कर्फ्यू टाइमिंग’ हटाने की मांग

यहां कर्फ़्यू टाइम का मतलब है हॉस्टल से बाहर निकलने की पाबंदी का समय। ये कई यूनिवर्सिटी हॉस्टल्स में सिर्फ लड़कियों के लिए नियम के तौर पर बनाया गया है। जिसका विरोध दिल्ली से लेकर यूपी तक लंबे समय से लड़कियां करती रही हैं। बीएचयू में पहले हॉस्टल्स में लड़कियों के लिए साल 2017 तक कर्फ्यू टाइमिंग शाम 7 बजे तक थी। इसे लेकर लड़कियों का एक बड़ा आंदोलन देखने को मिला था, जिसके बाद यह टाइमिंग बढ़कर 10 बजे हुई। 

प्रदर्शन में शामिल बीएचयू कन्या महाविद्यालय की छात्रा वंदना उपाध्याय ने न्यूज़क्लिक से बातचीत में बताया कि ये प्रदर्शन प्रशासन की अनदेखी और लड़कियों की मज़बूरी है। वंदना के मुताबिक सालों बाद जब 21 घंटे लाइब्रेरी खोलने का फैसला सामने आया तो लड़कियों ने प्रशासन से ‘कर्फ्यू टाइमिंग’ खत्म कर सेफ़्टी के लिए लेट नाइट बस सर्विस की मांग की। यूनिवर्सिटी की कुछ छात्राएं डीन ऑफ स्टूडेंट्स से मिलीं, कुछ ने चीफ प्रोक्टर और वीसी साहब तक से बात की और इस संबंध में कई ज्ञापन भी दिए गए लेकिन सब कुछ अभी तक विफल ही नज़र आया।

वंदना के अनुसार, “हमें बस एक विभाग से दूसरे विभाग टरकाया जा रहा है, चीफ प्रोक्टर कहते हैं कि बस की व्यवस्था हो गई है, बस वॉर्डन की अनुमति बाकी है, कभी कोई कुछ तो कोई कुछ और कहता है। ऐसे में हम अब कल यानी शनिवार को डीन ऑफ स्टूडेंट्स से मिलेंगे, अगर हमारी मांगे समय से मांग ली जाती हैं तो ठीक है, नहीं तो हम लड़कियां अब बड़े स्तर पर आंदोलन करने को मजबूर होंगी।"

बीएचयू की ही एक अन्य छात्रा कहती हैं कि हमारे प्रधानमंत्री, गृहमंत्री और मुख्यमंत्री यूपी को लड़कियों के लिए सुरक्षित बताते हैं। अपने भाषणों में कहते हैं कि यहां लड़कियां आधी रात को भी सुरक्षित सड़कों पर चल सकती हैं। लेकिन जब पढ़ाई की बात आती है तो बीएचयू प्रशासन सुरक्षा के नाम पर छात्राओं को लाइब्रेरी में पढ़ने की अनुमति नहीं देता, उन्हें रात को हॉस्टलों में बंद कर दिया जाता है, ये कैसी सुरक्षा है जो चुनाव तो जिता देती है, लेकिन हमें हमारे मूलभूत अधिकारों से दूर कर देती है।

क्या है पूरा मामला?

बीते महीने 26 मार्च को बीएचयू के पब्लिक रिलेशन ऑफिस ने अपने एक ट्वीट में बताया था कि सोमवार, 28 मार्च से साइबर लाइब्रेरी नए टाइम टेबल के हिसाब से खोली जाएगी। इस ट्वीट में प्रशासन की ओर से कहा गया था कि छात्र हित में काशी हिन्दू विश्वविद्यालय द्वारा एक अहम निर्णय लिया गया है। इसके तहत बीएचयू स्थित सयाजीराव गायकवाड केन्द्रीय ग्रंथालय का साइबर लाइब्रेरी स्टडी सेंटर 28 मार्च 2022 से हर कार्य दिवस में विद्यार्थियों के अध्ययन के लिए प्रातः 08.00 बजे से प्रातः 05.00 बजे तक खोला जायेगा।

छात्र हित में काशी हिन्दू विश्वविद्यालय द्वारा एक अहम निर्णय लिया गया है। इसके तहत #BHU स्थित सयाजीराव गायकवाड केन्द्रीय ग्रंथालय का साइबर लाइब्रेरी स्टडी सेंटर 28.03.2022 से हर कार्य दिवस में विद्यार्थियों के अध्ययन हेतु प्रातः 08.00 बजे से प्रातः 05.00 बजे तक खोला जायेगा। pic.twitter.com/WkQ45bNOuw

— BHU Official (@bhupro) March 26, 2022

मालूम हो कि बीएचयू में साइबर लाइब्रेरी की शुरुआत साल 2012 में तत्कालीन वाइस चांसलर डॉ. लालजी सिंह के कार्यकाल में हुई थी। तब यह लाइब्रेरी सुबह 8 बजे खुलती थी और फिर अगले दिन सुबह 5 बजे (3 घंटे साफ सफाई के लिए) बंद की जाती थी। कुलपति लालजी के कार्यकाल के बाद इस लाइब्रेरी के खुलने के समय को सीमित कर दिया गया था। जिसे लेकर साल 2016 में बीएचयू के छात्रों ने जोरदार आंदोलन किया था। इस दौरान भूख हड़ताल कर रहे छात्रों को आधी रात भारी पुलिस बल की मौजूदगी में प्रशासन ने निलंबित कर जेल तक भिजवा दिया, लेकिन छात्रों ने इसके बाद भी हार नहीं मानी। और अब सालों बाद एक बार फिर पुराने समय को बहाल किया गया।

इस फैसले के सामने आते ही छात्रों में खुशी की लहर दौड़ गई, उन्होंने प्रशासन का धन्यवाद कर इस निर्णय का स्वागत किया था। कैंपस की लड़कियों ने भी नई उम्मीद और सकारात्मक सोच के साथ प्रशासन को अपनी परेशानियों और कर्फ्यू टाइमिंग की बेड़ियों से अवगत करवाया था। जिसके बाद बीएचयू के पब्लिक रिलेशन ऑफिस से 28 मार्च एक और ट्वीट सामने आया था।

विद्यार्थियों के हित में सयाजी राव गायकवाड़ केन्द्रीय ग्रंथालय के साइबर लाइब्रेरी स्टडी सेन्टर को सभी कार्यदिवसों में सुबह 8 बजे से सुबह 5 बजे तक खोले रखने का निर्णय लिया गया है। ये सुनिश्चित किया जाएगा कि इस सुविधा के इस्तेमाल से छात्राएं वंचित न रहें।#BanarasHinduUniversity pic.twitter.com/yxbKWxRRDT

— BHU Official (@bhupro) March 28, 2022

इस ट्वीट में कहा गया था कि प्रशासन के नए फैसले के तहत यह सुनिश्चित किया जाएगा कि फीमेल स्टूडेंट्स भी पुस्तकालय की इस सुविधा का इस्तेमाल कर पाएं। जाहिर है इसके बाद छात्राओं में एक उम्मीद जागी थी और ये उम्मीद बेहतर कल की थी, जिसे छात्र-छात्राएं सालों से अपने संघर्षों से खूबसूरत बनाने में लगे थे। हालांकि इस सब के बाद दिन और तारीख बदलते गए लेकिन लड़कियों के लिए हॉस्टल और लाइब्रेरी के नियम अभी तक नहीं बदले, जिसे लेकर छात्राओं में नाराज़गी है।

इस संबंध में न्यूज़क्लिक ने बीएचयू प्रशासन का पक्ष जानने के लिए फोन और मेल के माध्यम से पब्लिक रिलेशन ऑफिसर और कुलपति कार्यालय से संपर्क करने की कोशिश की है, खबर लिखे जाने तक हमें जवाब नहीं मिला है, जवाब मिलते ही खबर अपडेट की जाएगी।

गौरतलब है कि बीएचयू की लड़कियां सालों से अपने हक़ और हुकूक के लिए आवाज़ बुलंद करती आई हैं। यौन शोषण के खिलाफ एकजुटता हो या सुरक्षा का मसला यहां की लड़कियों ने कभी हार नहीं मानी और प्रशासन से लोहा लेती रहीं हैं। बीएचयू कैंपस की लड़कियां लंबे समय से ‘कर्फ्यू टाइमिंग’ को हटाने और गर्ल्स हॉस्टल्स में भी बॉयज़ हॉस्टल्स की तरह सुविधा मुहैया कराने की मांग भी करती रही हैं। अब एक बार फिर साइबर लाइब्रेरी के इस्तेमाल के लिए लड़कियां अपनी मांगों को लेकर संघर्ष करने को तैयार हैं, ऐसे में उम्मीद है कि आने वाले दिनों में बीएचयू कैंपस की हवा लड़कियों की ओर रुख कर ले।

इसे भी पढ़ें: बीएचयू: 21 घंटे खुलेगी साइबर लाइब्रेरी, छात्र आंदोलन की बड़ी लेकिन अधूरी जीत

BHU
Banaras Hindu University
students protest
protest for library
central university
gender discrimination

Related Stories

बीएचयू : सेंट्रल हिंदू स्कूल के दाख़िले में लॉटरी सिस्टम के ख़िलाफ़ छात्र, बड़े आंदोलन की दी चेतावनी

बीएचयू: 21 घंटे खुलेगी साइबर लाइब्रेरी, छात्र आंदोलन की बड़ी लेकिन अधूरी जीत

गरमाने लगा बनारस: किसान आंदोलन के समर्थक छात्रों के खिलाफ FIR, सिंधोरा थाने पर प्रदर्शन

यूपी में पश्चिम से पूरब तक रही भारत बंद की धमक, नज़रबंद किए गए किसान नेता

बीएचयू: यौन हिंसा के खिलाफ छात्रों का प्रदर्शन, प्रशासन का असंवेदनशील रवैया!

बीएचयू: सोते हुए छात्रों पर पुलिस की बर्बर कार्रवाई, थाना घेराव के बाद गिरफ़्तार छात्र हुए रिहा

सुपवा: फीस को लेकर छात्रों का विरोध, कहा- प्रोजेक्ट्स-प्रैक्टिकल्स के बिना नहीं होती सिनेमा की पढ़ाई

बीएचयू: प्रवेश परीक्षा के ख़िलाफ़ ‘छात्र सत्याग्रह’ जारी, प्रशासन का किसी भी विरोध से इंकार

तुर्की : महिलाओं के ख़िलाफ़ हिंसा के विरोध में हज़ारों ने मार्च किया

परीक्षा का मसला: छात्रों का सोशल मीडिया से लेकर सड़क तक विरोध प्रदर्शन जारी


बाकी खबरें

  • up vidhansabha
    रवि शंकर दुबे
    आज़ादी से लेकर अब तक उत्तर प्रदेश ने दिए 21 मुख्यमंत्री, 10 बार लगा राष्ट्रपति शासन
    14 Jan 2022
    यूपी की राजनीति हर वक़्त दिलचस्प रही है, यहां होने वाले उतार-चढ़ाव हर दिन नई कहानियां गढ़ते हैं, ऐसे में उत्तर प्रदेश की राजनीतिक कब और किस मुख्यमंत्री के हाथ में रही, विस्तार से देखिए।
  • Kamal Khan
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कमाल ख़ान का निधन : ख़ामोश हो गई पत्रकारिता जगत की बेबाक और मधुर आवाज़
    14 Jan 2022
    न्यूज़क्लिक कमाल ख़ान के अचानक हुए निधन पर दुख व्यक्त करता है और उनके परिवार और तमाम चाहने वालों के प्रति अपनी संवेदनाएँ ज़ाहिर करता है।
  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 2.64 लाख नए मामले, ओमीक्रॉन के मामले बढ़कर 5,753 हुए  
    14 Jan 2022
    महाराष्ट्र में आज फिर 46 हज़ार से ज़्यादा नए मामले सामने आए हैं, वहीं दिल्ली में कोरोना के अब तक के रिकार्ड 28,867 नए मामले दर्ज किए गए हैं।
  • poverty
    अजय कुमार
    खुदरा महंगाई दर में रिकॉर्ड उछाल से आम लोगों पर महंगाई की मार पिछले 6 महीने में सबसे ज़्यादा
    14 Jan 2022
    महंगाई की मार लगातार पड़ती आ रही है। लेकिन फिर भी यह चर्चा के केंद्र में इसलिए नहीं उभरती, क्योंकि महंगाई की मार वह वर्ग नहीं सहन करता जो टीवी पर नियंत्रण रखता है।
  • xi putin
    जॉन पी. रुएहल
    ऐतिहासिक मतभेद भी 21वीं सदी की चीनी-रूसी साझेदारी को नहीं मिटा पाएंगे
    14 Jan 2022
    सैकड़ों वर्षों से चीन-रूसी संबंधों में सतर्क सहयोग, निरंतर अविश्वास, और सीधा टकराव एक विशेषता रही है। लेकिन सहयोग करने के कुदरती कारणों के साथ, अमेरिका के प्रति दोनों देशों की साझा दुश्मनी यह…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License