NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
बीपीसीएल : सरकार के हिस्से की बिक्री को लेकर कर्मचारी चिंतित
ज़्यादातर स्थायी श्रमिक पेट्रोलियम फ़ेडरेशन के नेतृत्व में अप्रैल महीने में बीपीसीएल की सभी इकाइयों में दो दिन की देशव्यापी हड़ताल की योजना बना रहे हैं।
रौनक छाबड़ा
11 Mar 2020
बीपीसीएल

केंद्र द्वारा सरकार के स्वामित्व वाली तेल कंपनी भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) के निजीकरण के लिए प्रारंभिक बोली मंगाए जाने के बाद इसके कर्मचारियों ने विरोध करने का फ़ैसला किया है। पिछले साल नवंबर में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा रणनीतिक विनिवेश को मंज़ूरी दिए जाने के बाद से इन्होंने इस फ़ैसले का विरोध करने का फ़ैसला किया है। हालांकि यह ऐसे समय में हुआ है जब संघ निकायों की बहुत सी शक्ति समाप्त हो गई है।

इस वास्तविकता का सामना करते हुए कर्मचारी जिनकी संख्या लगभग 12,000 है और वे कथित तौर पर अधिकारियों और श्रमिकों के बीच लगभग समान रूप से बराबर हैं वे मोदी सरकार की इस कंपनी में सरकार की समूची 52.98% हिस्सेदारी बेचने की योजना का विरोध करने के प्रयास में संभावित क़दम उठाने पर विचार कर रहे हैं।

पिछले साल नवंबर के महीने में एक दिन के लिए काम के हड़ताल के बाद पेट्रोलियम फ़ेडरेशन के नेतृत्व में ज़्यादातर श्रमिक अप्रैल के महीने में बीपीसीएल की सभी इकाइयों में दो दिन की देशव्यापी हड़ताल की योजना बना रहे हैं।

न्यूज़क्लिक को मिली जानकारी के मुताबिक ऑफ़िसर्स एसोसिएशन के नेतृत्व में अधिकारियों ने श्रमिकों द्वारा की जाने वाली अप्रैल महीने की हड़ताल को "नैतिक समर्थन" दिया है। ऑफिसर्स एसोसिएशन जिसने पहले काम के हड़ताल करने की कार्रवाई को नकार दिया था और कथित तौर पर सरकार से चाहती है कि सरकार देश के तीसरे सबसे बड़े रिफ़ाइनरी और दूसरे सबसे बड़े ईंधन रिटेलर बीपीसीएल के निजीकरण के विचार को छोड़ दे।

वर्कर्स फ़ेडरेशन और ऑफ़िसर एसोसिएशन की चिंताओं के बीच कॉमन एक्शन प्रोग्राम की सूची बनाने की असमर्थता को लेकर पेट्रोलियम एंड गैस वर्कर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (पीजीडब्ल्यूएफआई) के अध्यक्ष प्रदीप मेयकर का मानना है कि अधिकारियों और श्रमिकों के लिए "महत्वपूर्ण" है कि अपने विरोध प्रदर्शन में एक साथ आएँ।

उन्होंने कहा कि "हम निजीकरण के ख़िलाफ़ हैं।" उन्होंने आगे कहा कि सीमित शक्ति के साथ "हम केवल अपना विरोध दर्ज कर सकते हैं।" उन्होंने यह भी कहा कि "अधिकारी के साथ आंतरिक बैठकें की गई हैं, मंत्रियों के साथ बातचीत की गई है। हमने राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश की। यह एक करो या मरो की लड़ाई है हालांकि, यह कठिन है।”

इन सीमाओं के बावजूद मेयकर अप्रैल में श्रमिकों की हड़ताल को जारी रखने के लिए दृढ़ है। मेयकर ने न्यूजक्लिक से बताया कि, "बीपीसीएल के कर्मचारी 20 और 21 अप्रैल को हड़ताल करेंगे। हमें अन्य तेल क्षेत्र यूनियनों और महासंघों से समर्थन मिला है। विभिन्न शहरों में सम्मेलन आयोजित किए जाने हैं। हमें उम्मीद है कि हड़ताल में बड़ी भागीदारी सुरक्षित होगी।"

बीपीसीएल अधिकारियों की भागीदारी के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, “वे निजीकरण के विचार के विरोध में हैं। उन्होंने हड़ताल का नैतिक समर्थन किया है।”

इसके साथ ही, फ़ेडरेशन ऑफ़ ऑयल पीएसयू ऑफिसर्स (एफओपीओ) और कन्फेडरेशन ऑफ महारत्न कंपनी (सीओएमसीओ) के बैनर तले अधिकारियों ने लाभकारी पीएसयू के निजीकरण के फैसले का विरोध करते हुए पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है।

पिछले साल दिसंबर के महीने में पहली बार प्रेस कॉन्फ्रेंस में दोनों महासंघों ने बीपीसीएल की बिक्री को सरकार की सामाजिक प्रतिबद्धता के साथ-साथ अन्य चीजों के लिए एक झटका बताया।

बीपीसीएल ही नहीं तेल उद्योग के विभिन्न हिस्सों के पेट्रोलियम कर्मचारियों में तनाव व्याप्त है क्योंकि केंद्र सरकार कथित रूप से तेल व्यापार से बाहर निकलने की कोशिश कर रही है। हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) के रणनीतिक विनिवेश के बाद जिसे केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा मंजूरी दे दी गई है और रिपोर्ट सामने आ रही है कि केंद्र इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईाओसी) में अपने हिस्सेदारी को 51% से कम करने के लिए विचार कर रही है। पेट्रोलियम वर्कर्स फेडरेशन के अनुसार इन तीन सार्वजनिक तेल कंपनियों के पास 75% से अधिक भारतीय ईंधन विपणन व्यवसाय की स्वामित्व है।

यूनियनों ने घरेलू और विदेशी निजी तेल एवं गैस की दिग्गज कंपनियों के प्रवेश को लेकर चिंता जताई है जो कथित रूप से देश की ऊर्जा सुरक्षा पर गंभीर आर्थिक नतीजों को सहन करेंगे। नवंबर महीने में एक दिन की हुई हड़ताल में तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम लिमिटेड (ओएनजीसी) की सहायक कंपनी बीपीसीएल, एचपीसीएलऔर मैंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड (एमआरपीएल) के कर्मचारियों की भागीदारी देखी गई।

बढ़ी इन चिंताओं के बावजूद केंद्र में भाजपा सरकार अपनी योजना के साथ आगे बढ़ी और शनिवार को बीपीसीएल की रणनीतिक बिक्री के लिए आवेदन आमंत्रित किया जिसे 2 मई तक भेजा जा सकता है। भारत सरकार-संचालित संस्थाएं, जिसमें सरकार का कम से कम 51% की हिस्सेदारी होती है, बोली लगाने में शामिल होने के योग्य नहीं होगी। इसे ब्लूमबर्ग क्विंट ने निवेश और सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग की वेबसाइट पर पोस्ट किए गए दस्तावेज़ का उल्लेख करते हुए बताया।

सरकार के स्वामित्व वाली तेल कंपनियों के अहमियत से समझौता करके सरकार ने निजी कंपनियों का पक्ष लिया है, इसका आरोप लगाते हुए मेयकर ने कहा, “अर्थव्यवस्था बेहतर स्थिति में नहीं है और अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार की कीमतें कभी तय नहीं होती हैं। ऐसे मामलों में कई निजी कंपनियां बोली लगाने के लिए तैयार नहीं होंगी।”

उन्होंने कहा, "यह स्पष्ट है कि सरकार केवल वित्तीय घाटे के लक्ष्य को पूरा करने के लिए बीपीसीएल जैसी मुनाफा कमाने वाली कंपनियों केवल को बेच रही है।" मोदी सरकार का वित्त वर्ष 2020-21 के लिए सरकारी कंपनियों की हिस्सेदारी की बिक्री कर 2.1 ट्रिलियन रुपये निकालने का लक्ष्य है।

सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन (सीटू) के सचिव स्वदेश देव रॉय ने निजीकरण के विचार को "भ्रष्ट" कहा है। उन्होंने कहा, ''वाजपेयी की भाजपा सरकार के अधीन भी बीपीसीएल के निजीकरण के प्रयास किए गए थे हालांकि इसको लेकर कर्मचारियों से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई। मोदी सरकार केवल कुछ निजी कंपनियों के लिए इन महत्वाकांक्षाओं को पूरा कर रही है।”

Bharat Petroleum Corporation Limited
BPCL
BPCL privatisation
Petroleum and Gas Workers’ Federation of India
Federation of Oil PSU Officers
Confederation of Maharatna Companies
Centre of Indian Trade Union
BJP
Modi government
disinvestment

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !


बाकी खबरें

  • Lebanon
    पीपुल्स डिस्पैच
    लेबनान में ड्राइवरों और परिवहन कर्मचारियों को लेकर सरकारी उदासीनता के ख़िलाफ़ हड़ताल
    15 Jan 2022
    हड़ताली श्रमिकों ने कई प्रमुख राजमार्गों और सड़कों को अवरुद्ध कर दिया और सरकार से बढ़ती महंगाई के मद्देनज़र ईंधन और दूसरी वस्तुओं पर दी जा रही पिछली सब्सिडी को बहाल करने की मांग की।
  • Akhilesh
    रवि शंकर दुबे
    स्वामी प्रसाद मौर्य के साथ कई विधायक सपा में शामिल, अखिलेश बोले ‘’हिट विकेट हो गए बाबा’’
    14 Jan 2022
    यूपी चुनाव से पहले सभी राजनीतिक पार्टियां अपनी-अपनी बिसात बिछा रही हैं, ऐसे में अखिलेश यादव ने स्वामी प्रसाद मौर्य के साथ कई विधायकों को पार्टी में शामिल कराकर बीजेपी करारा झटका दिया है।  
  • nato
    न्यूज़क्लिक टीम
    अमेरिका-नेटो के निशाने पर रूस, उक्रैन पर खलबली
    14 Jan 2022
    पड़ताल दुनिया भर की में वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह ने अमेरिका व रूस और नेटो पर रूस के शीर्ष नेताओं की बैठक, उक्रैन को लेकर चल रहे विवाद पर न्यूज़ क्लिक के प्रधान संपादक प्रबीर पुरकायस्थ से बातचीत की।…
  • Privatization
    न्यूज़क्लिक टीम
    बैंक निजीकरण का खेल
    14 Jan 2022
    बैंकों के निजीकरण के लिए तर्क दिया जाता है कि सरकारी बैंक ठीक तरह से काम नहीं कर रहे और वे नुकसान झेल रहे हैं हैं। आखिर क्यों सरकारी बैंक घाटे में चलते हैं? क्या है इसका कारण ? जानते हैं ऑनिंद्यो से
  • YATI NARSINGHANAND
    रवि शंकर दुबे
    यति नरसिंहानंद से क्यों डर रही है सरकार? आज भी खुलेआम दे रहा चुनौती
    14 Jan 2022
    डासना मंदिर का महंत यति नरसिंहानंद हरिद्वार संसद के बाद से अभी तक आज़ाद घूम रहा है और लगातार दूसरे धर्मों पर कीचड़ उछाल रहा है, ऐसे में सवाल है कि अभी तक उन्हें गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया, आखिर…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License