NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
जन आंदोलनों के आयोजन पर प्रतिबंध अलोकतांत्रिक, आदेश वापस लें सरकार : माकपा
माकपा ने सवाल किया है कि अब जन आंदोलन क्या सरकार और प्रशासन की कृपा से चलेंगे?
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
26 Apr 2022
cpim

छत्‍तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार ने अपने एक आदेश में कहा कि प्रदेश में बिना अनुमति के धरना-प्रदर्शनों सहित अन्य आंदोलन नहीं कर सकते। सरकार के इस फैसले को विपक्ष ने तुगलकी फ़रमाना बताया है और मुख्य विपक्षी बीजेपी ने कोर्ट जाने का एलान किया है। वही वाम दल भारत की कम्युनिस्ट पार्टी( मार्क्सवादी) यानी माकपा ने जन आंदोलनों के आयोजन पर प्रदेश की कांग्रेस सरकार द्वारा थोपी गई कड़ी शर्तों को आंदोलनों पर प्रतिबंध के समान बताते हुए इसकी कड़ी निंदा की है और इस अलोकतांत्रिक आदेश को वापस लेने की मांग की है। माकपा ने सवाल किया है कि अब जन आंदोलन क्या सरकार और प्रशासन की कृपा से चलेंगे?

स्थानीय अख़बार में छपी खबर के मुताबिक़ प्रदेश गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव सुब्रत साहू के हस्ताक्षर से जारी इस आदेश में कहा गया है कि पहले इस तरह के आयोजनों के लिए जिला प्रशासन से अनिवार्य रूप से अनुमति ली जाती थी, लेकिन अब विधिवत अनुमति के बिना ही कार्यक्रम हो रहे हैं। इतना ही नहीं अनुमति प्राप्त करने के बाद आयोजन का स्वरूप में परिवर्तन कर देते हैं, जो सही नहीं है। ऐसी स्थिति में आम नागरिकों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा व्यावसायिक गतिविधियां भी प्रभावित होती है।

हालांकि सरकार कुछ भी कहे लेकिन सच्चाई यह है कि प्रदेश में धरना-प्रदर्शन और आंदोलनों का दौर तेज हो गया है।जिसने भूपेश बघले की चिंताए बढ़ा दी हैं। इसे देखते हुए सरकार ने बिना अनुमति के किसी भी तरह के निजी और सार्वजनिक आयोजन पर सख्ती करने का फैसला किया है। सरकार ने राज्य में धरना, जुलूस, रैली, प्रदर्शन, भूख हड़ताल के साथ ही सभी तरह के धार्मिक, सामाजिक और राजनैतिक आयोजनों के लिए पूर्व अनुमति अनिवार्य कर दी है।

अपने जारी एक बयान में माकपा राज्य सचिव संजय पराते ने कहा है कि कांग्रेस सरकार की कॉर्पोरेटपरस्त नीतियों के खिलाफ आदिवासी समुदाय में तथा चुनावी वादों को पूरा न करने के कारण कर्मचारियों और असंगठित क्षेत्र के मजदूरों के बीच जो जन असंतोष पैदा हो रहा है, उसे कुचलने के लिए ही जन आंदोलनों पर प्रतिबंध लगाया जा रहा है। प्रदेश का लोकतांत्रिक जन मानस ऐसे दमनात्मक आदेशों को स्वीकार नहीं करेगा। इस सरकार को यह जवाब देना चाहिए कि क्यों उसके राज में जनता के विभिन्न तबकों को लंबे-लंबे आंदोलन करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है और उनकी मांगों पर लोकतांत्रिक ढंग से कोई सुनवाई क्यों नहीं हो रही है।

माकपा नेता ने कहा कि कांग्रेस का यह तर्क कि भाजपा शासित राज्यों में भी ऐसे प्रतिबंध थोपे गए हैं, यह दिखाता है कि दोनों पार्टियों का जन आंदोलनों के प्रति एक समान नजरिया है और सत्ता में आने के बाद दोनों पार्टियां जन आंदोलनों के प्रति दमनात्मक रवैया ही अपनाती है। बिजली विभाग के संविदा कर्मचारियों के आंदोलन तथा नया रायपुर में किसान आंदोलन के पंडाल को उखाड़कर फेंकने से यह स्पष्ट हो गया है।

माकपा ने राज्य के सभी जनतांत्रिक तबकों से इस अलोकतांत्रिक आदेश का विरोध करने की अपील की है।

Chattisgarh
Congress
Chhattisgarh Govt
bhupesh baghel
movement
Mass movement
CPIM

Related Stories

हार्दिक पटेल भाजपा में शामिल, कहा प्रधानमंत्री का छोटा सिपाही बनकर काम करूंगा

राज्यसभा सांसद बनने के लिए मीडिया टाइकून बन रहे हैं मोहरा!

ED के निशाने पर सोनिया-राहुल, राज्यसभा चुनावों से ऐन पहले क्यों!

ईडी ने कांग्रेस नेता सोनिया गांधी, राहुल गांधी को धन शोधन के मामले में तलब किया

त्रिपुरा: सीपीआई(एम) उपचुनाव की तैयारियों में लगी, भाजपा को विश्वास सीएम बदलने से नहीं होगा नुकसान

राज्यसभा चुनाव: टिकट बंटवारे में दिग्गजों की ‘तपस्या’ ज़ाया, क़रीबियों पर विश्वास

मूसेवाला की हत्या को लेकर ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन, कांग्रेस ने इसे ‘राजनीतिक हत्या’ बताया

केरल उप-चुनाव: एलडीएफ़ की नज़र 100वीं सीट पर, यूडीएफ़ के लिए चुनौती 

कांग्रेस के चिंतन शिविर का क्या असर रहा? 3 मुख्य नेताओं ने छोड़ा पार्टी का साथ

‘आप’ के मंत्री को बर्ख़ास्त करने से पंजाब में मचा हड़कंप


बाकी खबरें

  • Environment
    टिकेंदर सिंह पंवार
    कॉर्पोरेट के फ़ायदे के लिए पर्यावरण को बर्बाद कर रही है सरकार
    31 Jan 2022
    कई परियोजनाओं को बहुत तेज़ी से पर्यावरण मंज़ूरी दी जा रही है।
  • Gandhi ji
    न्यूज़क्लिक डेस्क
    इतवार की कविता: के मारल हमरा गांधी के गोली हो
    30 Jan 2022
    लोककवि रसूल मियां (1872-1952), गांव- जिगना मजार टोला, जिला- गोपालगंज, बिहार। कविता कोश के परिचय के अनुसार भोजपुरी के शेक्सपियर नाम से चर्चित भिखारी ठाकुर, नाच या नौटंकी की जिस परम्परा के लोक कलाकार…
  • Gandhi ji
    न्यूज़क्लिक टीम
    महात्मा गाँधी, सावरकर और गोडसे
    30 Jan 2022
    'इतिहास के पन्ने मेरी नज़र से' के इस एपिसोड में नीलांजन बात करते हैं इतिहासकार अशोक पांडे से। 30 जनवरी को गाँधी जी की हत्या कर दी गयी थी। ये दोनों गाँधी, सावरकर और गोडसे के बारे में चर्चा करते हैं और…
  • Buddhadev
    अनिल जैन
    ख़बरों के आगे पीछे: बुद्धदेब बाबू को पद्मभूषण क्यों? पेगासस पर फंस गई सरकार और अन्य
    30 Jan 2022
    'ख़बरों के आगे-पीछे' के इस अंश में बीते हफ़्ते ख़बरों की दुनिया में क्या कुछ हुआ, इस पर राय रख रहे हैं अनिल जैन।
  • liquor
    डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
    तिरछी नज़र: शराब भली चीज है, जी भर के पीजिए!
    30 Jan 2022
    शराब जब वोट डालने से एक दो दिन पहले पिलाई जाये तो वह वोटर पटाने के लिए होती है पर जब उसका बंदोबस्त पूरे पांच साल के लिए किया जाये तो वह शराब और शराबियों के प्रति सम्मान प्रकट करने के लिए ही होता है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License