NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
बनारस: ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में वीडियोग्राफी पर रोक, फ़िलहाल नहीं जाएगा कमीशन
‘श्रृंगार गौरी में रोजाना दर्शन पूजन को परंपरा का हिस्सा कतई न बनाया जाए। सिर्फ चैत्र नवरात्रि के दिन ही वहां दर्शन-पूजन की मान्यता है। ज्ञानवापी मस्जिद की बैरिकेडिंग में सिर्फ मसुलमान या सुरक्षाकर्मी जा सकते हैं। कोई दूसरा जाएगा तो उसे विरोध का सामना करना होगा।’
विजय विनीत
19 Apr 2022
Gyanvapi Masjid

वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर और ज्ञानवापी मस्जिद परिसर का 19 अप्रैल को कोर्ट कमिश्नर की अगुवाई में होने वाला सर्वे स्थगित हो गया है। सोमवार को जिला प्रशासन की ओर से कोर्ट में सर्वे के खिलाफ अर्जी दाखिल की गई है। इसमें बताया गया कि सर्वे से ज्ञानवापी परिसर की सुरक्षा व्यवस्था भंग हो सकती है। सिविल जज सीनियर डिवीजन की अदालत ने 19 अप्रैल 2022 को विवादित परिसर में अपना कमीशन भेजने और वीडियोग्राफी कराने का निर्देश दिया था। जिला प्रशासन ने कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए अदालत में अर्जी दी, जिस पर विचार करने के बाद वाराणसी के सिविल जज सीनियर डिवीजन रवि कुमार दिवाकर की अदालत ने वीडियोग्राफी की कार्रवाई को स्थगित करते हुए सुनवाई की अगली तारीख 20 अप्रैल 2022 मुकर्रर कर दी है। 

काशी विश्वनाथ और ज्ञानवापी मामला गरमाता जा रहा है। काशी विश्वनाथ धाम ज्ञानवापी परिसर स्थित श्रृंगार गौरी सहित अन्य विग्रहों को लेकर 18 अगस्त 2021 को वाराणसी के सिविल जज सीनियर डिवीजन के अदालत  में दाखिल मामले में राखी सिंह, लक्ष्मी देवी, सीता साहू, मंजू व्यास और रेखा ने वाद दायर किया है। वादकारियों का कहना है कि श्रृंगार गौरी के नियमित दर्शन की छूट मिलनी चाहिए। साथ ही यह भी मांग की गई थी कि परिसर में अवस्थित आदि विशेश्वर परिवार के सभी विग्रहों के साथ किसी तरह की छेड़छाड़ न की जाए। साथ ही वाद के जरिए ज्ञानवापी परिसर का निरीक्षण-परीक्षण और सर्वेक्षण कराने के लिए कमीशन भेजा जाए। 

बनारस के सिविल जजल की अदालत का आदेश 

अदालत ने वाद को स्वीकार करते हुए सभी पांच प्रतिवादियों मुख्य सचिव यूपी, वाराणसी जिला प्रशासन, वाराणसी पुलिस कमिश्नर, अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी, काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट को नोटिस भी भेजा था। अदालत ने श्रृंगार गौरी मंदिर की मौजूदा स्थिति को जांचने के लिए कमीशन गठित करते हुए अधिवक्ता कमिश्नर नियुक्त करने और तीन दिन के अंदर पैरवी का आदेश भी दिया था। कतिपय कारणों से दो मर्तबा अदालत कमिश्नर पीछे हट गए। बाद में आठ अप्रैल को नए अदालत कमिश्नर के रूप में अजय कुमार मिश्रा को वीडियोग्राफी करने का आदेश किया गया था।  

वादी के पैरोकार जितेंद्र सिंह बिसेन के मुताबिक अदालत में प्रशासन की तरफ से एक प्रार्थनापत्र देकर यह मांग की गई है कि सुरक्षा कारणों की वजह से कमीशन की कार्रवाई स्थगित कर दी जाए। दो अन्य बिंदुओं पर स्पष्टीकरण भी मांगा गया है जिसको अदालत  में 19 अप्रैल 2022 को प्रस्तुत कर दिया जाएगा। फिर 20 अप्रैल को नियत सुनवाई की तिथि पर कमीशन की अगली कार्रवाई अदालत के द्वारा सुनिश्चित की जाएगी। 

प्रशासन की आपत्ति ने इस बात पर आपत्ति जताई है कि रेड जोन में वीडियोग्राफी परिसर की सुरक्षा के लिए खतरा हो सकता है। श्रृंगार गौरी और मस्जिद परिसर का भ्रमण करना कोई औचित्य नहीं है। मस्जिद बैरिकेडिंग के अंदर सिर्फ मुसलमान और सुरक्षाकर्मी प्रवेश कर सकते हैं। अदालत से दरख्वास्त की गई है कि कोर्ट अधिवक्ता की ओर से होने वाली कार्यवाही के दौरान कितने व्यक्तियों को प्रवेश की अनुमति दी जाएगी? कौन-कौन व्यक्ति होंगे? कोर्ट अधिवक्ता किस-किस स्थल और किस चिह्नित स्थान तक अपनी कार्रवाई करेंगे?

अब ऐसी दिखती है मस्जिद

इस मामले में अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी को अदालत की ओर से वीडियोग्राफी कराए जाने पर बेहद आपत्ति है। ज्वाइंट सेक्रेटरी सैयद मोहम्मद यासीन कहते हैं कि श्रृंगार गौरी के वीडियोग्राफी से उन्हें किसी तरह की आपत्ति नहीं है, लेकिन अन्य जगहों की वीडियोग्राफी पर उन्हें एतराज है। श्रृंगार गौरी मस्जिद की बैरिकेडिंग के बाहर है। अगर मस्जिद की बैरिकेडिंग के अंदर कोई जाना चाहेगा तो मुस्लिम समुदाय के लोग कड़ा विरोध करेंगे। 

यासीन कहते हैं, ‘प्रशासनिक अफसरों को अवगत कराया जा चुका है कि साल 1995 में वादी शिव कुमार शुक्ला की ओर से श्रृंगार गौरी में दर्शन पूजन को लेकर एक वाद सिविल जज जूनियर डिवीजन की अदालत में दाखिल किया गया था, जिसको लेकर वाराणसी जिला प्रशासन की ओर से एक जवाबदेही दाखिल की गई थी। प्रशासन पहले ही स्थिति स्पष्ट कर चुका है कि उसका स्थान ज्ञानवापी बैरिकेडिंग से बाहर है। श्रृंगार गौरी में रोजाना दर्शन पूजन को परंपरा का हिस्सा कतई न बनाया जाए। सिर्फ चैत्र नवरात्रि के दिन ही वहां दर्शन-पूजन की मान्यता है। ज्ञानवापी मस्जिद की बैरिकेडिंग में सिर्फ मसुलमान या सुरक्षाकर्मी जा सकते हैं। कोई दूसरा जाएगा तो उसे विरोध का सामना करना होगा।’

ये भी पढ़ें: EXCLUSIVE: उलझती जा रही विश्वनाथ मंदिर-ज्ञानवापी मस्जिद विवाद की गुत्थी, अब पांच और नए मुकदमे!

UttarPradesh
banaras
Gyanvapi mosque
Gyanvapi Masjid
Gyanvapi mosque complex
kashi vishwnath corridor

Related Stories

बदायूं : मुस्लिम युवक के टॉर्चर को लेकर यूपी पुलिस पर फिर उठे सवाल

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

ज्ञानवापी मामले में अधिवक्ताओं हरिशंकर जैन एवं विष्णु जैन को पैरवी करने से हटाया गया

ज्ञानवापी सर्वे का वीडियो लीक होने से पेचीदा हुआ मामला, अदालत ने हिन्दू पक्ष को सौंपी गई सीडी वापस लेने से किया इनकार

ज्ञानवापी केसः वाराणसी ज़िला अदालत में शोर-शराबे के बीच हुई बहस, सुनवाई 4 जुलाई तक टली

ज्ञानवापी मामला : अधूरी रही मुस्लिम पक्ष की जिरह, अगली सुनवाई 4 जुलाई को

यूपी में  पुरानी पेंशन बहाली व अन्य मांगों को लेकर राज्य कर्मचारियों का प्रदर्शन

विचार: सांप्रदायिकता से संघर्ष को स्थगित रखना घातक

ज्ञानवापी कांड एडीएम जबलपुर की याद क्यों दिलाता है

बनारस : गंगा में डूबती ज़िंदगियों का गुनहगार कौन, सिस्टम की नाकामी या डबल इंजन की सरकार?


बाकी खबरें

  • jharkhand
    अनिल अंशुमन
    झारखंड: स्वास्थ्य विभाग का नया ‘संकल्प पत्र, सरकारी ब्लड बैंकों से नहीं मिलेगा निःशुल्क ख़ून, स्वास्थ्य जन संगठनों ने किया विरोध
    06 Dec 2021
    राजधानी रांची स्थित रिम्स और सदर अस्पताल में लोगों को पैसों से ब्लड मिल रहा है। बीपीएल व आयुष्मान कार्ड धारकों को छोड़ किसी भी गरीब-लाचार अथवा धनवान व्यक्ति को समान रूप से प्रदेश के किसी भी सरकारी…
  • Babasaheb
    बादल सरोज
    65 साल बाद भी जीवंत और प्रासंगिक बाबासाहब
    06 Dec 2021
    जाति के बारे में उनका दृष्टिकोण सर्वथा वैज्ञानिक था। उन्होंने जाति व्यवस्था का तब तक का सबसे उन्नत विश्लेषण किया था। वे अपने जमाने के बड़े नेताओं में अकेले थे, जिसने जाति व्यवस्था के ध्वंस यानि…
  • vinod dua
    शंभूनाथ शुक्ल
    मृतक को अपमानित करने वालों का गिरोह!
    06 Dec 2021
    हम लोगों ने जब पत्रकारिता शुरू की थी, तब इमरजेंसी के दिन थे। लोगों में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के प्रति ग़ुस्सा था और लोग आंदोलन कर रहे थे। किंतु धार्मिक आधार पर बँटवारे की कोई बात नहीं थी। कोई…
  • india and bangladesh
    एम. के. भद्रकुमार
    भारत-बांग्लादेश संबंध का मौजूदा दौर
    06 Dec 2021
    नई दिल्ली के मौन प्रोत्साहन से प्रधानमंत्री शेख़ हसीना की घरेलू राजनीति को उनके सत्तावादी शासन के मामले में निर्णायक रूप से फ़ायदा हुआ है।
  • Ambedkar
    राज वाल्मीकि
    वर्तमान संदर्भ में डॉ. अंबेडकर की प्रासंगिकता
    06 Dec 2021
    बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर की आज पुण्यतिथि है। 6 दिसंबर 1956 को दिल्ली में उनका निधन हुआ। उन्होंने हमें सफलता के तीन मंत्र दिए थे – ‘शिक्षित हो,  संगठित हो, संघर्ष करो।’ हाल ही में हमें किसान आंदोलन…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License