NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
निजीकरण के खिलाफ बैंक यूनियनों ने की दो दिन की हड़ताल की घोषणा
आल इंडिया बैंक एम्पलायीज एसोसियेसन (एआईबीईए) के महासचिव सी. एच. वेंकटचलम ने एक वक्तव्य में कहा कि 4,9, और 10 मार्च को मुख्य श्रम आयुक्त के साथ हुई समाधान बैठक में कोई सकारात्मक परिणाम नहीं निकला। ‘‘इसलिये 15 और 16 मार्च 2021 को लगातार दो दिन हड़ताल का फैसला किया गया है। बैंकों के करीब 10 लाख कर्मचारी और अधिकारी इसमें भाग लेंगे।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
12 Mar 2021
निजीकरण के खिलाफ बैंक यूनियनों ने की दो दिन की हड़ताल की घोषणा
Image Courtesy : Hindustan

नयी दिल्ली :  सरकारी बैंकों के निजीकरण के प्रस्ताव के खिलाफ यूनाइटेड फोरम आफ बैंक यूनियंस (यूएफबीयू) ने 15 मार्च से दो दिन की हड़ताल का आह्वान किया है। यूएफबीयू नौ बैंक यूनियनों का संयुक्त मंच है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पिछले महीने पेश आम बजट में सार्वजनिक क्षेत्र के दो बैंकों के निजीकरण का प्रस्ताव रखा है। सरकार ने अगले वित्त वर्ष में विनिवेश के जरिये बड़ी राशि जुटाने का प्रस्ताव किया है।

सरकार इससे पहले आडीबीआई बैंक में अपनी अधिकांश की हिस्सेदारी भारतीय जीवन बीमा निगम को बेच चुकी है। पिछले चार साल में सार्वजनिक क्षेत्र के 14 बैंकों का विलय किया जा चुका है।

आल इंडिया बैंक एम्पलायीज एसोसियेसन (एआईबीईए) के महासचिव सी. एच. वेंकटचलम ने एक वक्तव्य में कहा कि 4,9, और 10 मार्च को मुख्य श्रम आयुक्त के साथ हुई समाधान बैठक में कोई सकारात्मक परिणाम नहीं निकला। ‘‘इसलिये 15 और 16 मार्च 2021 को लगातार दो दिन हड़ताल का फैसला किया गया है। बैंकों के करीब 10 लाख कर्मचारी और अधिकारी इसमें भाग लेंगे।

भारतीय स्टेट बैंक सहित ज्यादातर बैंक अपने ग्राहकों को इस बारे में सूचित कर चुके हैं। बैंकों ने हालंकि, यह भी कहा है कि वह बैंक शाखाओं में कामकाज को सामान्य बनाये रखने के लिये हर संभव प्रयास कर रहे हैं।

यूनाइटेड फ्रंट और बैंक यूनियंस (यूएफबीयू) में आल इंडिया बैंक एम्पलायीज एसोसियेसन (एआईबीईए) आल इंडिया बैंक आफीसर्स कन्फेडरेशन (एआईबीओसी) नेशनल कन्फेडरेशन आफ बैंक एम्पलायीज (एनसीबीई) आल इंडिया बैंक आफीसर्स एसोसियेसन (एआईबीओए) और बैंक एम्पलायीज कन्फेडरेशन आफ इंडिया (बीईएफआई) शामिल हैं।

इन कंपनियों के कर्मचारियों और बड़े पदों पर आसीन अधिकारियों ने नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली सरकार पर “खराब-मकसद” से “आम लोगों की कीमत पर कॉर्पोरेट समूहों को लाभ पहुंचाने के लिए लूट की छुट” देने का आरोप लगाया है।

पिछले महीने वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने 2021-22 का केंद्रीय बजट पेश करते हुए 1.75 लाख करोड़ रुपये विनिवेश के माध्यम से उगाही का लक्ष्य रखा है- जिसमें विनिवेश से 75,000 करोड़ रुपये और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और वित्तीय संस्थानों के शेयर की बिक्री से 1,00,000 करोड़ रुपये उगाए जाने की घोषणा की गई थी। वित्तमंत्री ने अपने बजट भाषण में कहा कि भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) की प्रारंभिक सार्वजनिक निवेश खोलने की पेशकश 2021-22 में पूरी हो जाएगी।

बैंक कर्मचारियों तथा जनरल इंश्योरेंस कॉरपोरेशन (जीआईसी) और एलआईसी का प्रतिनिधित्व करने वाली यूनियनों ने सरकार के निर्णय की कड़ी आलोचन की है, इसके खिलाफ सभी बैंक यूनियनों ने 15 और 16 मार्च को दो दिवसीय हड़ताल और 17 मार्च को जीआईसी और 18 मार्च एलआईसी ने एक दिन की हड़ताल का आह्वान किया है।

 “बैंक कर्मचारी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के निजीकरण के निर्णय के साथ सरकार को आगे नहीं बढ़ने देंगे। यह एक ऐसा कदम है जिसका उद्देश्य आम लोगों की कीमत पर कॉरपोरेट समूहों को लाभ पहुंचाना है। उक्त बातें सौमया दत्ता, महासचिव, आल इंडिया बैंक ओफिसर्स कनफेडरेशन ने कही।  

एआईबीओसी यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (यूएफबीयू) का एक धड़ा है जो नौ बैंक यूनियनों के संयुक्त मोर्चा से बना है, और जिसने हड़ताल का आह्वान किया है।

शनिवार को न्यूज़क्लिक से बात करते हुए, दत्ता ने कहा कि बैंक यूनियनें मोदी सरकार देश द्वारा बैंकिंग क्षेत्र को "राष्ट्रीयकरण से पूर्व" के चरण में ले जाने के खिलाफ अपना प्रतिरोध पहले ही दर्ज़ कर चुकी हैं, क्योंकि निजीकरण “गलत इरादे” से किया रहा है। उन्होंने कहा कि इस बार रणनीति में बदलाव हुआ है।

देश के सबसे बड़े निजी बैंकों में से चौदह बैंकों का 19 जुलाई 1969 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने राष्ट्रीयकरण कर दिया था- तब उनके पास वित्त मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार भी था- इस निर्णय के तहत अधिकांश बैंकिंग परिसंपत्तियाँ हुकूमत के नियंत्रण में आ गईं थी।

उन्होंने कहा, "यूनियनें अन्य वित्तीय कंपनियों के साथ-साथ सेल्फ-हेल्प-ग्रुप (एसएचजी) और बड़े पैमाने पर आम जनता से संपर्क साधने का प्रयास कर रही है जो कि बैंकों में प्रमुख हितधारक हैं।"

दत्ता ने कहा कि जन-संपर्क का उद्देश्य सबको यह संदेश देना है कि सार्वजनिक बैंकों के निजीकरण से केवल कर्मचारी ही नहीं बल्कि आम लोग और उनमें पैसा जमा करने वाले सभी हितधारक गंभीर रूप से प्रभावित होंगे। उन्हें डर है कि बैंकों के निजीकरण से "आम लोग बैंक सेवा का फाइदा उठाने से वंचित हो जाएंगे, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों के लोग बुरी तरह से प्रभावित होंगे।"

इसी तरह की चिंता अखिल भारतीय बीमा कर्मचारी यूनियन (एआईआईईए) के उपाध्यक्ष ए.के. भटनागर ने जताई और कहा कि केंद्र सरकार की "वैचारिक प्रतिबद्धता" नीतिगत निर्णयों को प्रभावित कर रही है।

“एक लाख से अधिक जीवन बीमा कर्मचारी- जो कर्मचारियों के चार वर्ग समूहों से संबंधित हैं- एक दिन के लिए हड़ताल पर जाएंगे; जीआईसी के कर्मचारी भी देश भर में हड़ताल को सफल बनाने की तैयारी कर रहे हैं, "भटनागर ने कहा, कि संदेश बहुत साफ है" न केवल कर्मचारी बल्कि पॉलिसी धारक भी आईपीओ के कारण पीड़ित होंगे।"

(समाचार एजेंसी भाषा इनपुट के साथ)

Bank union strike
privatization
AIBEA
AIBOC
NCBE
AIBOA
UIBU
UFBU
Nirmala Sitharaman
Narendra modi

Related Stories

तिरछी नज़र: सरकार जी के आठ वर्ष

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

भारत के निर्यात प्रतिबंध को लेकर चल रही राजनीति

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !

क्या जानबूझकर महंगाई पर चर्चा से आम आदमी से जुड़े मुद्दे बाहर रखे जाते हैं?

PM की इतनी बेअदबी क्यों कर रहे हैं CM? आख़िर कौन है ज़िम्मेदार?

छात्र संसद: "नई शिक्षा नीति आधुनिक युग में एकलव्य बनाने वाला दस्तावेज़"

भाजपा के लिए सिर्फ़ वोट बैंक है मुसलमान?... संसद भेजने से करती है परहेज़


बाकी खबरें

  •  अपनी सहूलियत से इतिहास को बदलते नेता
    न्यूज़क्लिक प्रोडक्शन
    अपनी सहूलियत से इतिहास को बदलते नेता
    09 Jan 2022
    प्रधानमंत्री मोदी अपने भाषण में इतिहास को कई बार अपनी सुविधा से बदलते पाए गए हैं। 'इतिहास के पन्ने मेरी नज़र से' के इस अंक में वरिष्ठ पत्रकार नीलांजन मुखोपाध्याय इस विषय पर इतिहासकार हरबंस मुखिया से…
  • Kejriwal
    अनिल जैन
    ख़बरों के आगे पीछे: हिंदुत्व की प्रयोगशाला से लेकर देशभक्ति सिलेबस तक
    09 Jan 2022
    देश में हर रोज़ हो रहीं घटनाओं के बीच बहुत सी ख़बरें आगे-पीछे हो जाती हैं। ख़बरों के इस राउंड-अप में पुरानी ताजी ख़बरों को एक साथ बताया गया है। जिसमें आर्थिक-राजनीतिक सब तरह की ख़बरें हैं।
  • lynching
    अनिल अंशुमन
    झारखंड: भाजपा कार्यकर्ताओं ने मुस्लिम युवक से की मारपीट, थूक चटवाकर जय श्रीराम के नारे लगवाए
    09 Jan 2022
    मुख्यमंत्री ने पुलिस को जांच के आदेश देते हुए अपने ट्वीट में कहा है, कि अमन चैन से रहने वाले झारखंडवासियों के इस राज्य में वैमनस्य कि कोई जगह नहीं है।
  • cartoon
    न्यूज़क्लिक डेस्क
    बना रहे रस: वे बनारस से उसकी आत्मा छीनना चाहते हैं
    09 Jan 2022
    सुब्ह-ए-बनारस में सूरज की लालिमा के साथ अपनी सांसों को आवाज़ बनाकर शहनाई के जरिए रंग भरने वाले बिस्मिल्लाह खां को गंगा का किनारा आज भी ढूंढता है। बनारस में जो नदी आठों पहर अमनपसंद लोगों का पांव पखारती…
  • राजेंद्र शर्मा
    कटाक्ष: खाली कुर्सियों का डर न कहो इसको!
    09 Jan 2022
    अब यह तो विपक्ष वालों की सरासर बेईमानी है कि पीएम जी के संदेश में से थैंक्यू को छोडक़र, ‘जिंदा लौट आया’ को ही पकडक़र बैठ गए हैं।… और प्लीज, पीएम जी की नहीं हुई सभा में खाली कुर्सियों के ताने मारना बंद…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License