NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
बंगाल : चुनावों से पहले, ममता बनर्जी की ‘पसंदीदा‘ खनन परियोजनाओं का फिर से विरोध
इधर चुनाव की तिथियां नजदीक आ रही हैं, उधर बीरभूम में देओचा-पछामी ब्लॉक जिसे दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा कोयला खदान माना जाता है, उसमें टीएमसी सरकार खनन शुरू करने की तैयारी कर रही है। बहरहाल, लगभग 70,000 आदिवासी और अन्य छोटे किसान इस कदम से परेशान हैं और इस परियोजना का विरोध कर रहे हैं। 
सुमेधा पाल
04 Mar 2021
खनन

एक तरफ पश्चिम बंगाल में चुनावी यु़द्ध में तेजी आ रही है और सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ममता बनर्जी की पसंदीदा देओछा पछमी कोयला खदान परियोजना के बूते अपनी सत्ता बचाए रखने की उम्मीद कर रही है। पर इस परियोजना को प्रभावित क्षेत्र में रहने वाले स्थानीय लोगों के कड़े विरोध का सामना करना पड़ रहा है। यह परियोजना दुनिया की सबसे बड़ी खदान से जुड़ी परियोजनाओं में से एक मानी जा रही है जिसमें लगभग 2,102 मिलियन टन का अनुमानित कोयला भंडार है। बीरभूम जिले में स्थित लगभग 12.31 वर्ग किलोमीटर का यह कोल ब्लॉक क्षेत्र दिसंबर 2019 में पश्चिम बंगाल को आवंटित किया गया था जिसमें अनगिनत पत्थर की खदानें हैं। जहां ममता बनर्जी दावा करती हैं कि इस खदान से एक लाख से अधिक नौकरियां सृजित होंगी, जनजातीय संथाल आबादी जो अपनी सामाजिक-आर्थिक स्थितियों के कारण विशेष रूप से निर्बल समूह के अंतर्गत आती है, तथा क्षेत्र में रहने वाले छोटे किसानों को इस परियोजना से आजीविका का संकट आता दिखाई दे रहा है। परियोजना प्रभावित जन संगठन के अनुसार, इस परियोजना के कारण लगभग 70,000 लोगों को बेदखल होना पड़ सकता है। यही नहीं, अगर यह परियोजना आरंभ हुई तो लोगों को अपनी पारंपरिक जोतों से भी हाथ धोना पड़ सकता है। जैसे-जैसे चुनावी लड़ाई में तेजी आती जा रही है, स्थानीय लोगों की चिंता भी बढ़ने लगी हैं, जो अपने संसाधनों को संरक्षित करने के लिए राज्य सरकार से भिड़ने की तैयारी कर रहे हैं।

ईस्ट मोजो द्वारा तैयार की गई एक ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार बताया जाता है कि स्थानीय लोग किसी क्षतिपूर्ति या पुनर्वास पैकेज से इंकार कर कोयला खनन का विरोध कर रहे हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कोयला खदान के खिलाफ अभियान चला रहे पर्यावरण कार्यकर्ताओं को प्रशासन द्वारा क्षेत्र से दूर रहने की धमकी दी जा रही है।

इस मुद्दे पर न्यूजक्लिक के साथ बातचीत करते हुए परियोजना प्रभावित जन संगठन (पीएपीए) के संयोजक खोकन मार्दी ने कहा, हमारी आवाज का राज्य सरकार के एजेंडा में कोई जगह नहीं है। जमीन लेते समय हमारी सहमति नहीं ली गई और अब हमारी जमीन सूख रही है। हालांकि खनन गतिविधि अभी आरंभ भी नहीं हुई है, पर मौजूदा स्टोन माइन तथा क्रशर के कारण पहले ही बहुत अधिक प्रदूषण दिखने लगा है जिससे सब्जियों की खेती करने वाले छोटे किसानों के खेतों को नुकसान हो चुका है। यहां रहने वाले अधिकांश लोग बेहद निर्बल समूहों के हैं। हम आदिवासी समुदाय के हैं, कई लोग धार्मिक अल्पसंख्यक वर्ग के हैं, यही वजह है कि सरकार हमारे जीवन को कोई महत्व नहीं दे रही है। ‘        

2019 में, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा था कि प्रस्तावित देवोछा पछामी कोयला ब्लॉक पर काम उस क्षेत्र में रहने वाली जनजातीय आबादी के केवल 40 फीसदी 4,000 लोगों के पुनर्वास के बाद ही आरंभ होगा। बहरहाल, वास्तविक संख्या इससे कहीं ज्यादा है। इससे पहले, दबाव एवं प्रतिरोध का सामना करने के बाद देवोछा पछामी कोयला खदान परियोजना के सामाजिक प्रभाव आकलन सर्वे बीरभूम के मोहम्मद बाजार में सलुका गांव में रोक दिया गया था क्योंकि परिवारों को प्रभावित लोगों के रूप में नहीं गिना गया था। बहरहाल, निवासी परियोजना को पूरी तरह रोक देने की मांग कर रहे हैं। 

रोजगार सृजन के क्षेत्र में कोयला खदान उद्योग के पिछले दयनीय रिकार्ड को देखते हुए टीएमसी के नेतृत्व वाली राज्य सरकार के दावे कि केवल देवोछा पछामी कोयला ब्लॉक से ही कम से कम एक लाख लोगों के लिए रोजगार सृजित होगा, इस दावे  पर भी सवाल उठाये जा रहे हैं। 

कोयला ब्लॉकों के आवंटन की ‘बहुत कानूनी प्रक्रिया नहीं‘ की चर्चा करते हुए पर्यावरण वकील राहुल चौधरी ने न्यूजक्लिक को बताया कि ‘ ज्यादातर कोयला ब्लॉकों के आवंटन में एक पैटर्न उभर कर आया है जिसमें आपत्तियों को दरकिनार कर दिया जाता है। जब हमने ईएसी (पर्यावरण आकलन समिति) की बैठक के विवरणों की समीक्षा करते हैं तो हम देख सकते हैं कि इन चिंताओं को स्वीकार किए जाने का कोई संकेत नहीं है। स्थानीय लोगों की आवाज की कोई भी जगह नहीं है। यहां बड़ा प्रश्न यह है कि-किस प्रकार से सरकारें क्षेत्रों और पर्यावरण को क्षति पहुंचा रही हैं और फिर इस कीमत पर स्कूलों या नौकरियों को देने का वादा कर रही हैं जो कि स्थानीय लोगों को स्वीकार्य नहीं है। ‘

 जहां टीएमसी पहले की वामपंथी सरकार का विरोध करने के लिए टाटा-नैनो प्लांट भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलनों की वजह से ही सत्ता में आई है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि किस प्रकार ममता बनर्जी एक तरफ आदिवासियों और छोटे किसानों के विरोध का सामना करेंगी और दूसरी तरफ निवेश आकर्षित करने के लिए अपनी महत्वाकांक्षी परियोजनाओं को पूरी करेंगी। 

अंग्रेज़ी में प्रकाशित मूल आलेख को पढ़ने के लिए नीचे दिये गये लिंक पर क्लिक करें।

Bengal Elections: Ahead of Polls, Mamata Banerjee’s ‘Pet’ Mining Project Faces Renewed Opposition

West Bengal assembly elections
Bengal Elections
Deocha Pachami Coal Block
Tribal Land Acquisition
Adivasi Resistance
Coal Mine
mamata banerjee
TMC government
Tribal Land Rights

Related Stories

PM की इतनी बेअदबी क्यों कर रहे हैं CM? आख़िर कौन है ज़िम्मेदार?

अपनी ज़मीन बचाने के लिए संघर्ष करते ईरुला वनवासी, कहा- मरते दम तक लड़ेंगे

बढ़ती हिंसा और सीबीआई के हस्तक्षेप के चलते मुश्किल में ममता और तृणमूल कांग्रेस

बलात्कार को लेकर राजनेताओं में संवेदनशीलता कब नज़र आएगी?

सालवा जुडूम के कारण मध्य भारत से हज़ारों विस्थापितों के पुनर्वास के लिए केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की मांग 

केजरीवाल का पाखंड: अनुच्छेद 370 हटाए जाने का समर्थन किया, अब एमसीडी चुनाव पर हायतौबा मचा रहे हैं

बीरभूम नरसंहार ने तृणमूल की ख़ामियों को किया उजागर 

क्या यह मोदी लहर के ख़ात्मे की शुरूआत है?

पेगासस कांड: आखिर क्या है RSS से जुड़ा GVF ट्रस्ट? जिसकी अपील पर सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार के आयोग की जांच पर लगा दी रोक

घर वापसी से नरसंहार तक भारत का सफ़र


बाकी खबरें

  • cartoon
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    ख़बर भी-नज़र भी: …लीजिए छापेमारी के साथ यूपी चुनाव बाक़ायदा शुरू!
    18 Dec 2021
    आयकर विभाग की टीम ने आज सपा नेताओं के घर और कैंप कार्यालयों पर छापेमारी की है। इसपर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव का कहना है कि “भाजपा का हार का डर जितना बढ़ता जायेगा, विपक्षियों पर छापों का दौर भी उतना…
  • sudan
    पवन कुलकर्णी
    सूडान के दारफुर क्षेत्र में हिंसा के चलते 83,000 से अधिक विस्थापित: ओसीएचए 
    18 Dec 2021
    सूडान की राजधानी खार्तूम, खार्तूम नार्थ, ओम्डुरमैन सहित देशभर के कई राज्यों के कई अन्य शहरों में गुरूवार 16 दिसंबर को विरोध प्रदर्शनों के दौरान “दारफुर का खून बहाना बंद करो” और “सभी शहर दारफुर हैं”…
  • air india
    भाषा
    पायलटों की सेवाएं समाप्त करने का निर्णय खारिज किये जाने के खिलाफ एअर इंडिया की अर्जी अदालत ने ठुकराई
    18 Dec 2021
    अदालत ने कहा, ‘‘सरकार और उसकी इकाई एक आदर्श नियोक्ता के रूप में कार्य करने के लिए बाध्य हैं और इसलिए, उसे पायलटों को ऐसे समय संगठन (एअर इंडिया) की सेवा करने के अधिकार से वंचित करते नहीं देखा जा सकता…
  • Goa Legislative Assembly
    राज कुमार
    गोवा चुनाव 2022: राजनीतिक हलचल पर एक नज़र
    18 Dec 2021
    स्मरण रहे कि भाजपा ने जिन दो पार्टियों के बल पर सरकार बनाई थी वो दोनों ही पार्टियां भाजपा का साथ छोड़ चुकी है। गोवा फॉरवर्ड पार्टी कांग्रेस का समर्थन कर रही है तो महाराष्ट्रवादी गोमंतक पार्टी तृणमूल…
  • Nuh
    सबरंग इंडिया
    नूंह के रोहिंग्या कैंप में लगी भीषण आग का क्या कारण है?
    18 Dec 2021
    हरियाणा के नूंह में लगी आग में रोहिंग्याओं की 32 झुग्गियां जलकर खाक हो गईं। उत्तर भारत के रोहिंग्या शरणार्थी शिविर में इस साल इस तरह की यह तीसरी आग है
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License