NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
अपराध
कानून
भारत
बंगाल चुनाव: निर्वाचन आयोग का रेफरी के रूप में आचरण उसकी गरिमा के अनुकूल नहीं
निर्वाचन आयोग ने बंगाल में जारी लंबी चुनावी प्रक्रिया में आलोचना के कई कारण दे दिए हैं। अगले तीन चरण बहुत महत्वपूर्ण हैं।
संदीप चक्रवर्ती
20 Apr 2021
Election Commission of India

कोलकाता: मार्च महीने में कोलकाता हवाई अड्डे पर 140 से अधिक चार्टर्ड फ्लाइटें उतर चुकी हैं-इनमें से 90 फीसदी से अधिक फ्लाइटें पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनावों में चुनाव प्रचार के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) द्वारा भाड़े पर ली गई थीं।

एक राउंड ट्रिप (दिल्ली-कोलकाता-दिल्ली) के लिए प्रत्येक चार्टर्ड फ्लाइट की लागत होती है 10 लाख रुपये तथा उस पर 18 प्रतिशत का टैक्स। हेलिकॉप्टरों के मामलों में यह रकम 1 लाख रुपये प्रति घंटे होती है तथा टैक्स की दर समान होती है। सूत्रों का आरोप है कि भारत के निर्वाचन आयोग ने अवैध नकदी हस्तांतरण के लिए एक भी चार्टर्ड फ्लाइट की जांच नहीं की। अपना नाम न बताने की इच्छा जाहिर करते हुए, एक राजनीतिक विश्लेषक ने कहा, ‘लोकतंत्र से कॉर्पोरैटिज्म का रूपांतरण निर्वाचन आयोग की चौकस नजरों के सामने होता रहा है।’

टेलीविजन चैनल प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के भाषणों का सीधा प्रसारण दिखाते रहे हैं जबकि चुनाव हो रहे हैं। बहरहाल, भारत निर्वाचन आयोग ने चुनाव के दिनों में पूरे राज्य में ऐसे कार्यक्रमों के सीधा प्रसारण पर कोई आपत्ति नहीं जताई जो कि पहले के उसके अपने ही आदेशों का खुला उल्लंघन है।

विवाद का एक और कारण व्यय पर्यवेक्षकों का ढीला रवैया रहा है। विपक्ष के एक पूर्व विधायक ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने चुनाव में प्रचार सामग्री पर 1,000 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए हैं। यह प्रति विधानसभा क्षेत्र किसी उम्मीदवार द्वारा 7 लाख रुपये की अनिवार्य चुनावी खर्च सीमा का घोर उल्लंघन है।

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (एम) के राज्य सचिवालय के सदस्य सामिक लाहिरी ने आरोप लगाया कि ‘भाजपा प्रत्याशियों को लगभग 60 लाख रुपये ट्रांसफर किए गए हैं-35 से 37 लाख रुपये उम्मीदवारों या उनके निकटतम लोगों के खाते में हस्तांतरित किए गए हैं जबकि शेष रकम उन्हें नकदी के रूप में दी गई है।’ उन्होंने दावा किया कि प्रत्येक मंडल में एक जीप या चार-पहिया वाहन उपलब्ध कराया गया है जबकि मंडल सभापति या मंडल प्रमुख को एक मोटरबाइक दी गई है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रत्येक बूथ कमिटी प्रेसीडेंट को एक नया स्मार्टफोन भी दिया गया है।

पहले दो चरणों के दौरान, बताया जाता है कि भारत निर्वाचन आयोग ने टीएमसी की एक याचिका के बाद इस बात पर बल देते हुए कि यह चुनाव अधिकारियों का काम है, केंद्रीय बलों को मतदाताओं के पहचान पत्रों की जांच न करने को कहा था।

सीतलकुची में हुई गोलीबारी घटना के मामले में, भाजपा नेताओं द्वारा की गई टिप्पणियों पर ईसीआई ने उन्हें कोई दंड नहीं दिया था। संयोग से, मुख्य चुनाव आयुक्त का कार्यकाल समाप्त होने तथा नए आयुक्त के पदभार ग्रहण करने के बाद इसका संज्ञान लिया गया।

25 जनवरी, 1950 को गठित ईसीआई एक अर्ध न्यायिक निकाय है जो स्वतंत्र रूप् से कार्य करता है और चुनाव आयुक्तों के पास सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों के समान अधिकार होते हैं। बहरहाल, पश्चिम बंगाल में हाल के उसके ढीले रवैये ने उसकी स्वतंत्र कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जब यह संवाददाता अपना वोट डालने गया तो उसके मतदाता पहचान पत्र की जांच नहीं की गई, केवल एक विशेष राजनीतिक पार्टी द्वारा दी गई एक बूथ स्लिप वोट डालने के लिए पर्याप्त थी जबकि पहले पीठासीन अधिकारी और मतदान अधिकारी खुद इसकी जांच करते थे और उसके बाद ही किसी मतदाता को मतदान कक्ष की ओर बढ़ने की अनुमति देते थे। ये नियम अलग-अलग लोगों के लिए अलग-अलग प्रतीत हो रहे थे। सिलीगुड़ी और कृष्णानगर में जहां अन्य राजनीतिक दलों ने कोविड-19 की स्थिति को देखते हुए स्वैच्छिक रूप से चुनाव प्रचार करने से खुद को हटा लिया था, ईसीआई को शिकायतों के बावजूद प्रधानमंत्री और गृह मंत्री ने चुनाव प्रचार जारी रखा।

भांगर पुलिस स्टेशन के आईसी को हटाने के लिए इस सप्ताह के आरंभ में सीईओ कार्यालय के बाहर धरना दिया गया जो कथित रूप से पिछले एक महीने से चुनावी नियमों की धज्जियां उड़ा रहे थे।

सीपीआई (एम) के पोलित ब्यूरो के सदस्य मोहम्मद सलीम ने हाल में कोलकाता में आरोप लगाया कि यहां तक समय का चयन भी कि किस वक्त चुनाव प्रचार स्थगित किया जाएगा, ‘राज्य में प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के चुनाव प्रचार के कार्यक्रम के अनुरूप है।’

न्यूजक्लिक से बातचीत करते हुए लेफ्ट फ्रंट तथा संयुक्ता मोर्चा के राबिन देब ने कहा, ‘हमारी ज्यादातर शिकायतों का समाधान नहीं किया जा रहा है क्योंकि एक अयोग्य प्रशासन इस पर विचार ही कर रहा है, कोई कदम उठाया जाए या नहीं।’

मतदान के शेष चरणों को एक साथ जोड़ने से इनकार करने से भी कोरोना-19 महामारी को देखते हुए लोगों की तकलीफें बढ़ गई हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अगले तीन

चरणों में ऐसे कई क्षेत्र शामिल हैं, जहां वोट डालने में लोगों को दिक्कतें हुई हैं और किसी भी ढिलाई से अप्रिय घटनाओं में वृद्धि हो सकती है।

ईसीआई को राज्य में मतदान के बचे तीन चरणों में अपने भरोसे को फिर से स्थापित करने की आवश्यकता है, जोकि पश्चिम बंगाल में वक्त का तकाजा है।

अंग्रेज़ी में प्रकाशित मूल आलेख को पढ़ने के लिए नीचे दिये गये लिंक पर क्लिक करें।

https://www.newsclick.in/Bengal-Elections-EC-Referee-Conduct-Leaves-Much-Desired 

 

election commission of India
West Bengal Elections
BJP

Related Stories

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

मूसेवाला की हत्या को लेकर ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन, कांग्रेस ने इसे ‘राजनीतिक हत्या’ बताया

रुड़की से ग्राउंड रिपोर्ट : डाडा जलालपुर में अभी भी तनाव, कई मुस्लिम परिवारों ने किया पलायन

हिमाचल प्रदेश के ऊना में 'धर्म संसद', यति नरसिंहानंद सहित हरिद्वार धर्म संसद के मुख्य आरोपी शामिल 

ग़ाज़ीपुर; मस्जिद पर भगवा झंडा लहराने का मामला: एक नाबालिग गिरफ़्तार, मुस्लिम समाज में डर

लखीमपुर हिंसा:आशीष मिश्रा की जमानत रद्द करने के लिए एसआईटी की रिपोर्ट पर न्यायालय ने उप्र सरकार से मांगा जवाब

टीएमसी नेताओं ने माना कि रामपुरहाट की घटना ने पार्टी को दाग़दार बना दिया है

चुनाव के रंग: कहीं विधायक ने दी धमकी तो कहीं लगाई उठक-बैठक, कई जगह मतदान का बहिष्कार

कौन हैं ओवैसी पर गोली चलाने वाले दोनों युवक?, भाजपा के कई नेताओं संग तस्वीर वायरल

तमिलनाडु : किशोरी की मौत के बाद फिर उठी धर्मांतरण विरोधी क़ानून की आवाज़


बाकी खबरें

  • Victims of Tripura
    मसीहुज़्ज़मा अंसारी
    त्रिपुरा हिंसा के पीड़ितों ने आगज़नी में हुए नुकसान के लिए मिले मुआवज़े को बताया अपर्याप्त
    25 Jan 2022
    प्रशासन ने पहले तो किसी भी हिंसा से इंकार कर दिया था, लेकिन ग्राउंड से ख़बरें आने के बाद त्रिपुरा सरकार ने पीड़ितों को मुआवज़ा देने की घोषणा की थी। हालांकि, घटना के तीन महीने से अधिक का समय बीत जाने के…
  • genocide
    अजय सिंह
    मुसलमानों के जनसंहार का ख़तरा और भारत गणराज्य
    25 Jan 2022
    देश में मुसलमानों के जनसंहार या क़त्ल-ए-आम का ख़तरा वाक़ई गंभीर है, और इसे लेकर देश-विदेश में चेतावनियां दी जाने लगी हैं। इन चेतावनियों को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।
  • Custodial Deaths
    सत्यम् तिवारी
    यूपी: पुलिस हिरासत में कथित पिटाई से एक आदिवासी की मौत, सरकारी अपराध पर लगाम कब?
    25 Jan 2022
    उत्तर प्रदेश की आदित्यनाथ सरकार दावा करती है कि उसने गुंडाराज ख़त्म कर दिया है, मगर पुलिसिया दमन को देख कर लगता है कि अब गुंडाराज 'सरकारी' हो गया है।
  • nurse
    भाषा
    दिल्ली में अनुग्रह राशि नहीं मिलने पर सरकारी अस्पतालों के नर्सिंग स्टाफ ने विरोध जताया
    25 Jan 2022
    दिल्ली नर्स संघ के महासचिव लालाधर रामचंदानी ने कहा, ‘‘लोक नायक जयप्रकाश अस्पताल, जीटीबी हस्पताल और डीडीयू समेत दिल्ली सरकार के अन्य अस्पतालों के नर्सिंग स्टाफ ने इस शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन में भाग…
  • student
    भाषा
    विश्वविद्यालयों का भविष्य खतरे में, नयी हकीकत को स्वीकार करना होगा: रिपोर्ट
    25 Jan 2022
    रिपोर्ट के अनुसार महामारी के कारण उन्नत अर्थव्यवस्था वाले देशों में विश्वविद्यालयों के सामने अनेक विषय आ रहे हैं और ऐसे में विश्वविद्यालयों का भविष्य खतरे में है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License