NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
बंगाल चुनाव: भाजपा का बंगाली और प्रवासी के बीच ध्रुवीकरण का ख़तरनाक खेल
बात बोलेगी: कोलकाता के हावड़ा ब्रिज पर खड़े होकर आप जो वाहनों के गुजरने पर कंपन महसूस करते हैं, शायद यही कंपन पश्चिम बंगाल की राजनीति का इस समय बड़ा यथार्थ है। कोलकाता से भाषा सिंह की रिपोर्ट
भाषा सिंह
23 Mar 2021
भाषा सिंह

आज 23 मार्च, देश को कंपनी राज से मुक्ति दिलाने के मतवालों को याद करने का दिन है। भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव का शहादत दिवस है, जिन्होंने ब्रिटिश राज के खिलाफ, ज़ुल्म पर आधारित सत्ता के खिलाफ जंग छेड़ी और फांसी के तख्ते पर हँसते हुए झूल गये थे। उन्होंने जिस भारत के लिए प्राणों की आहुति दी, उस भारत की कल्पना पर तगड़ा दांव लगा हुआ है। इसे एक बार फिर महसूस किया, पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के हावड़ा ब्रिज पर खड़े होकर। यह ऐतिहासिक ब्रिज लंबे काल से कोलकाता और बंगाल की पहचान के तौर पर बना हुआ है। यहां से जब बस, कार या अन्य वाहन गुजरते हैं, तो जबर्दस्त कंपन महसूस होता है। शायद यही कंपन पश्चिम बंगाल की राजनीति का इस समय बड़ा यथार्थ है।

पश्चिम बंगाल में पहले दौर की वोटिंग 27 मार्च 2021 को होनी है। इसके लिए जमकर ध्रुवीकरण वाला राजनीतिक कार्ड खेला जा रहा है। इसमें सबसे तकलीफदेह यह है कि बंगाली और बंगाल में उत्तर प्रदेश-बिहार से आए और यहां बस गये लोगों में जबर्दस्त फांक पैदा कर दी गई है। उत्तर भारतीयों के भीतर भाजपा ने जबर्दस्त पैठ बनाई है और इसकी सबसे मजबूत उपस्थिति 2019 के आम चुनावों के दौरान देखने को मिली थी। आज भी जब हमने सड़क पर आते-जाते हुए लोगों से बातचीत की, तो उनकी बातों में इसकी साफ झलक दिखाई दी। ये सारे लोग श्रमिक वर्ग से या छोटे-मोटे धंधे में लगे लोग थे। वे हावड़ा ब्रिज पैदल ही पार कर रहे थे। इसमें भाजपा समर्थक और खासतौर से मोदी समर्थक सबसे पहले खुद आगे बढ़कर अपनी राजनीतिक समझदारी साझा कर रहे थे। वे बता रहे थे कि मोदी बंगाल ने लिए क्यों ज़रूरी हैं। उनकी बात की धुरी उन्नति और विकास पर टिकी हुई थी। जब हम उनसे पूछते कि क्या विकास पिछले 10 साल में देश का हुआ तो वे कहते हुआ नहीं, पर होगा...यह जो भाव है भारतीय मतदाता का, उसे समझना बेहद जरूरी है। ये आस, ये aspiration  भाजपा नेतृत्व ने उस तबके में जगाई है, जो अभी तक बदहाल है। उसे केंद्र की किसी नीति से कोई फायदा नहीं हुआ। बहुत संभव है कि इसके पीछे धार्मिक अस्मिता का भाव प्रबल हो, उत्तर भारतीय पहचान का भाव निर्णायक हो—और ये भाव इतने प्रमुख हैं जिसमें रोटी-दाल का भाव, पेट्रोल-डीजल की आसमान छूती कीमतें कोई मायने नहीं रखतीं। वे मानते हैं कि महंगाई बहुत बढ़ी है, दिक्कत है, पर वोट तो मोदी के नाम पर ही पड़ेगा।

इस तरह से भाजपा की तरफ से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही प. बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ चुनावी मैदान में हैं। यही भाजपा की रणनीति भी है। पूरे कोलकाता में सिर्फ और सिर्फ मोदी ही भाजपा के पोस्टर ब्वाय हैं। ऐसा भी लगता है कि ममता बनर्जी जिनकी अभी तक चुनावी समर में बढ़त है, वह बंगाली अस्मिता और #novoteforbjp जैसे अभियानों के जरिये मतदाताओं से सीधा संवाद स्थापित कर रही है। अभी तो लंबा चलेगा चुनाव, लेकिन यह राजनीतिक विभाजन प. बंगाल की राजनीति के दक्षिणपंथी रुझान से पूरे घटनाक्रम (circuit) को पूरा करने वाला लग रहा है। निश्चित तौर पर यह हिंदू-मुस्लिम ध्रुवीकरण, बंगाली और प्रवासी का बंटवारा, रविंद्रनाथ टैगोर के बंगाल को मटियामेट कर देगा। 

सभी फोटो अविनाश सौरव

 (भाषा सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं।)

West Bengal Elections 2021
West Bengal
BJP
TMC
Narendra modi
mamta banerjee
ground report

Related Stories

राज्यपाल की जगह ममता होंगी राज्य संचालित विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति, पश्चिम बंगाल कैबिनेट ने पारित किया प्रस्ताव

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

तिरछी नज़र: सरकार जी के आठ वर्ष

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट


बाकी खबरें

  • general strike
    न्यूज़क्लिक टीम
    क्यों है 28-29 मार्च को पूरे देश में हड़ताल?
    27 Mar 2022
    भारत के औद्योगिक श्रमिक, कर्मचारी, किसान और खेतिहर मज़दूर ‘लोग बचाओ, देश बचाओ’ के नारे के साथ 28-29 मार्च 2022 को दो दिवसीय आम हड़ताल करेंगे। इसका मतलब यह है कि न सिर्फ देश के विशाल विनिर्माण क्षेत्र…
  • Bhagat Singh
    न्यूज़क्लिक टीम
    शहीद भगत सिंह के इतिहास पर एस. इरफ़ान हबीब
    27 Mar 2022
    'इतिहास के पन्ने मेरी नज़र से' के इस एपिसोड में नीलांजन ने बात की है इतिहासकार एस. इरफ़ान हबीब से भगत सिंह के इतिहास पर।
  • Raghav Chadha
    अनिल जैन
    ख़बरों के आगे-पीछे: पंजाब में राघव चड्ढा की भूमिका से लेकर सोनिया गांधी की चुनौतियों तक..
    27 Mar 2022
    हर हफ़्ते की प्रमुख ख़बरों को लेकर एकबार फिर हाज़िर हैं लेखक अनिल जैन…
  • jaunpur violence against dalits
    विजय विनीत
    उत्तर प्रदेश: योगी के "रामराज्य" में पुलिस पर थाने में दलित औरतों और बच्चियों को निर्वस्त्र कर पीटेने का आरोप
    27 Mar 2022
    आरोप है कि बदलापुर थाने में औरतों और बच्चियों को पीटने से पहले सीसीटीवी कैमरे बंद कर दिए गए। पहले उनके कपड़े उतरवाए गए और फिर बेरहमी से पीटा गया। औरतों और लड़कियों ने पुलिस पर यह भी आरोप लगाया कि वे…
  • सोनिया यादव
    अपने ही देश में नस्लभेद अपनों को पराया बना देता है!
    27 Mar 2022
    भारत का संविधान सभी को धर्म, जाति, भाषा, वेशभूषा से परे बिना किसी भेदभाव के एक समान होने की बात करता है, लेकिन नस्लीय भेद इस अनेकता में एकता की भावना को कलंकित करता है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License