NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
मज़दूर-किसान
भारत
राजनीति
भारत बंद अपडेट: झारखंड में भी सफल रहा बंद, जगह-जगह हुए प्रदर्शन
चूंकि इस बंद को वाम दलों समेत भाजपा विरोधी सभी राजनीतिक दलों ने सक्रीय समर्थन दिया था इसलिए झारखंड में इस बार राज्य गठबंधन सरकार में शामिल झामुमो, कांग्रेस व राजद पार्टियों के नेता व कार्यकर्त्ता भारी संख्या में प्रदेश के सभी इलाकों में बंद में सक्रिय रहे। झारखंड सरकार के कई मंत्री विधायक भी सड़कों पर बंद के समर्थन में उतरे।
अनिल अंशुमन
28 Sep 2021
Bharat Bandh

किसान विरोधी तीन कृषि कानूनों के खिलाफ आहूत ‘भारत बंद’ का असर इस बार भी पूरे झारखंड में देखा गया। जगह-जगह पर भरी संख्या में हुए प्रदर्शनों ने यह दिखा दिया कि देश में जारी किसानों के आंदोलन की गूंज के विस्तार का दायरा दिनों दिन व्यापक होता जा रह है।

प्रदेश में गैर भाजपा सरकार होने के कारण राज्य की मीडिया ने इस बार भी केंद्र में बैठे आकाओं के प्रति वफादारी दिखाने में कोई कोताही नहीं छोड़ी। गोदी मीडिया के ही सुर में सुर मिलाते हुए खबरें देने के नाम पर बंद की नकारात्मक छवि– बंद से भारी जाम, सैकड़ों गाड़ियां फंसी रहीं, कारोबार ठप्प हो गए व कोयला उत्पादन प्रभावित हुआ जैसे शब्दों में ही परोसने की ‘आदर्श पत्रकारिता’ दिखाई। चूंकि इस बंद को वाम दलों समेत भाजपा विरोधी सभी राजनितिक दलों ने सक्रीय समर्थन दिया था इसलिए झारखंड में इस बार राज्य गठबंधन सरकार में शामिल झामुमो, कांग्रेस व राजद पार्टियों के नेता व कार्यकर्त्ता भारी संख्या में प्रदेश के सभी इलाकों में बंद में सक्रिय रहे। झारखंड सरकार के कई मंत्री विधायक भी सड़कों पर बंद के समर्थन में उतरे।

प्रदेश भाजपा ने हमेशा की तरह जहां बंद को सुपर फ्लॉप घोषित किया वहीँ सत्ताधारी दलों के प्रवक्ताओं ने इस बंद को अभूतपूर्व बताते हुए जनता को धन्यवाद दिया। झामुमो के केंद्रीय प्रवक्ता ने राजधानी के अलबर्ट एक्का चौक के पास बंद के समर्थन में अपने नेताओं कार्यकर्ताओं के साथ उतरकर मोदी सरकार द्वारा बनाए गए कृषि कानूनों का विरोध किया। इस बंद में शामिल लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि रोटी-कपड़ा हमारी बुनियादी ज़रूरतें हैं और केंद्र की भाजपा सरकार ने इसे कॉर्पोरेट घरानों के हवाले कर दिया है। एक समय देश में ईस्ट इंडिया कंपनी ने आकर अपना राज चलाया था और जब से देश में भाजपा की सरकार बनी है तब से ‘वेस्ट इंडिया कम्पनी’ आ गयी है। जिसका एक नज़ारा इस बंद के दौरान भी साफ़ देखने को मिला कि जो अपने पैसे से दाल रोटी खाता है, वो किसान के साथ खड़ा है और जो सूद व कॉर्पोरेट घरानों का पैसा खाते हैं वो इससे दूर हैं।

गोदी मीडिया की ख़बरों ने ही बता दिया कि झारखंड में हुए इस बार के भारत बंद के प्रभाव से राज्य का कोई भी इलाका अछूता नहीं रह सका। राजधानी रांची से लेकर उत्तरी छोटानागपुर के रामगढ़, हजारीबाग, बरही, कोडरमा, गिरिडीह, धनबाद, बोकारो तथा संताल परगना के देवघर, दुमका, साहेबगंज, पाकुड़, गोड्डा इत्यादि सभी जिलों के साथ साथ कोल्हान क्षेत्र के जमशेदपुर, चाईबासा, चक्रधरपुर, सराइकेला- खरसांवां तथा दक्षिणी छोटानागपुर खूंटी, सिमडेगा, गुमला और लोहरदगा समेत पलामू प्रमंडल के लातेहार, डाल्टनगंज, गढ़वा व चतरा समेत सभी जिलों में बंद का सीधा असर दिखा।

कई स्थानों पर जीटी रोड और राष्ट्रीय राज मार्गों समेत सभी प्रमुख सड़कों को बंद समर्थकों ने जाम करते हुए जगह जगह भारी संख्या में मार्च भी निकाला। कई स्थानों पर रेल यातायात भी रोकी गयी। इस दौरान कुछ स्थानों पर पुलिस के साथ हल्की नोक झोंक हुई और बंद समर्थकों को हिरासत में भी लिया गया, जिन्हें बाद में छोड़ दिया गया। बंद की पूर्व संध्या पर हर जगह मशाल जुलूस निकाले गए थे। गिरिडीह सदर में मशाल जुलूस निकालने पर झामुमो, भाकपा माले, कांग्रेस व आम आदमी पार्टी के नेताओं समेत 100 लोगों पर प्रशासन ने कोविड नियमों के उलंघन को लेकर प्राथमिकी दर्ज किया।

कोयलांचल के इलाकों में धनबाद क्षेत्र स्थित बीसीसीएल की लगभग सभी कोलियरियों में वाम ट्रेड यूनियनों के लोग सुबह से ही बंद के समर्थन में जत्थे निकालकर कोयला मजदूरों से बंद को समर्थन देने की अपील करते हुए खनन व डिस्पैच कार्य को रोक दिया। कोलियरियों से जुड़े सभी बाज़ार हाट भी पूरी तरह से बंद रहे। धनबाद में दवा सेल्समैन, डाक, एलआईसी, आयकरकर्मी और एसबीआई छोड़कर अन्य बैंकों के कर्मचारी यूनियनों के सदस्यों ने भी बंद को सक्रीय समर्थन देते हुए मोदी सरकार द्वारा सरकारी उपक्रमों के निजीकरण का मुखर विरोध किया। बिहार कोलियरी कामगार यूनियन से जुड़े कोयला मजदूरों ने बंद को सफल बनाने में काफी सक्रियता दिखाई। वहीँ भारतीय मजदूर संघ और इससे जुड़े मजदूरों ने इस बंद से अपने को पूरी तरह से अलग रखा। कोल इंडिया की दूसरी अनुसांगिक इकाई सीसीएल की बोकारो, हजारीबाग और रामगढ़ इत्यादि जिलों की सभी कोलियरियों में भी बंद असरदार रहा और कोयला खनन और डिस्पैच पूरी तरह से ठप्प रहा।

बंद के दौरान राज्य के गठबंधन सरकार में शामिल दलों के नेता कार्यकर्ताओं की ज़मीनी सक्रियता से प्रदेश के सभी आदिवासी बाहुल्य इलाकों में भी लोग सड़कों पर उतरे। जो संताल परगना के सभी जिलों से लेकर कोल्हान क्षेत्र (पूर्वी व पश्चिमी सिंहभूम) तथा दक्षिण छोटानागपुर के जिलों व पलामू प्रमंडल के इलाकों में साफ़ दिखा। जमशेदपुर में जंगल ज़मीन के सवालों पर मुखर रहनेवाले सामाजिक कार्यकर्ताओं ने किसान आंदोलन से पूरी एकजुटता दिखाते हुए बंद को सफल बनाने में बंद समर्थकों के साथ सड़क पर उतरने में काफी सक्रिय भूमिका दिखाई।

भारत बंद के समर्थन में सड़कों पर उतरे विभिन्न जन संगठनों ने भारत बंद के मुख्य मुद्दों के साथ-साथ पेट्रोल डीजल की कीमतें और बेलगाम महंगाई बढ़ने, सरकारी उपक्रमों का निजीकरण किए जाने व रोज़गार के अवसर ख़त्म किए जाने जैसे मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाते हुए मोदी सरकार की नीतियों का ज़ोरदार विरोध किया। इस दौरान ‘तुम मंडी बंद करोगे तो हम भारत बंद करेंगे, देश बेचू साकार होश में आओ और ज़मीन खनिज रोज़गार पर हमले नहीं सहेंगे जैसे नारे भी लगाए।

स्थानीय विजुअल मीडियाकर्मियों को दिए गए बयानों की बातों में इस क़दर समानता दिखी कि मानो सबको कहीं एक जगह बैठाकर इसका प्रशिक्षण दिया गया हो। जो साबित करता है कि देश में जारी किसान आंदोलन के मुद्दों ने मोदी शासन की तमाम जन विरोधी नीतियों के खिलाफ लोगों में बढ़ते गुस्से को और भड़का दिया है।    

Jharkhand
Bharat Bandh
Farmers' Bharat Bandh
kisan andolan
New Farm Laws
MSP

Related Stories

झारखंड : नफ़रत और कॉर्पोरेट संस्कृति के विरुद्ध लेखक-कलाकारों का सम्मलेन! 

‘मैं कोई मूक दर्शक नहीं हूँ’, फ़ादर स्टैन स्वामी लिखित पुस्तक का हुआ लोकार्पण

देशव्यापी हड़ताल: दिल्ली में भी देखने को मिला व्यापक असर

झारखंड: केंद्र सरकार की मज़दूर-विरोधी नीतियों और निजीकरण के ख़िलाफ़ मज़दूर-कर्मचारी सड़कों पर उतरे!

दो दिवसीय देशव्यापी हड़ताल को मिला व्यापक जनसमर्थन, मज़दूरों के साथ किसान-छात्र-महिलाओं ने भी किया प्रदर्शन

देशव्यापी हड़ताल का दूसरा दिन, जगह-जगह धरना-प्रदर्शन

मोदी सरकार की नीतियों के खिलाफ भारत बंद का दिखा दम !

क्यों मिला मजदूरों की हड़ताल को संयुक्त किसान मोर्चा का समर्थन

क्यों है 28-29 मार्च को पूरे देश में हड़ताल?

28-29 मार्च को आम हड़ताल क्यों करने जा रहा है पूरा भारत ?


बाकी खबरें

  • Farmers
    रूबी सरकार
    प्रधानमंत्री फसल बीमा के नाम पर किसानों से लूट, उतना पैसा दिया नहीं जितना ले लिया
    18 Aug 2021
    कृषि पर संसद की स्थायी समिति की रिपोर्ट कहती है कि निजी बीमा कंपनियों को प्रीमियम के तौर पर जितनी राशि मिली और कंपनियों द्वारा नुकसान के एवज में जो राशि किसानों को दी गई, अगर इसकी तुलना की जाए तो…
  • taiban
    पीपल्स डिस्पैच
    तालिबान द्वारा दिए गए आश्वासनों के बावजूद अफ़ग़ानवासियों को अपने भविष्य की चिंता
    18 Aug 2021
    कई मीडिया संगठनों की रिपोर्ट के मुताबिक़, अमेरिका ने रविवार को देश में अरबों डॉलर की अफ़ग़ान संपत्ति को फ्रीज़ कर दिया है।
  • संदीपन तालुकदार
    नया शोध बताता है कि सबसे पहले चीन में बने थे सिक्के
    18 Aug 2021
    शोधकर्ताओं ने दावा किया है कि उन्होंने कांसे से बने छोटे फावड़े के आकार के सिक्कों की खोज की है जो लगभग 2,600 साल पहले चीन में बड़े पैमाने पर बनाए गए थे।
  • afgan
    अजय कुमार
    कैसे अमेरिका का अफ़ग़ानिस्तान में खड़ा किया गया 20 साल का झूठ भरभरा कर ढह गया?
    18 Aug 2021
    सबसे गहरी सच्चाई तो यही है कि भले ही अमेरिकी राष्ट्रपति कुछ भी कहें कि उन्होंने अफगानिस्तान की कई स्तर पर मदद की। लेकिन हकीकत यह है कि बम, बारूद, गोली और सेना के बलबूते समाज को नहीं बदला जा सकता।…
  • Satyapal Malik
    भाषा
    मेघालय में कर्फ़्यू के बाद भी हिंसा, राज्यपाल सत्यपाल मलिक के काफिले पर हमला
    18 Aug 2021
    राज्यपाल सत्यपाल मलिक को असम में हवाई अड्डे पर छोड़कर आ रहे उनके काफिले पर, अज्ञात उपद्रवियों ने मंगलवार को पत्थरों से हमला कर दिया। राजभवन के एक अधिकारी ने यह जानकारी दी है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License