NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
भूषण, तेजपाल के खिलाफ 2009 के अवमानना मामले में और सुनवाई की ज़रूरत है : न्यायालय
शीर्ष अदालत ने चार अगस्त को इस मामले की सुनवाई के दौरान प्रशांत भूषण और तेजपाल को स्पष्ट किया था कि अगर वह इस मामले में उनका “स्पष्टीकरण” या “माफ़ी’’ स्वीकार नहीं करती है तो वह आगे सुनवाई करेगी।
भाषा
10 Aug 2020
SC

नयी दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को कहा कि कार्यकर्ता-अधिवक्ता प्रशांत भूषण और पत्रकार तरुण तेजपाल के खिलाफ 2009 के आपराधिक अवमानना मामले में और सुनवाई की जरूरत है ताकि यह देखा जा सके कि न्यायाधीशों के खिलाफ भ्रष्टाचार की टिप्पणी अवमानना है या नहीं।

न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा, न्यायमूर्ति बी आर गवई और न्यायमू्र्ति कृष्ण मुरारी की तीन सदस्यीय पीठ ने कहा कि अवमानना के मामले में आगे सुनवाई की जरूरत है। पीठ इस मामले में अब 17 अगस्त को आगे सुनवाई करेगी।

शीर्ष अदालत ने नवंबर 2009 में एक समाचार पत्रिका के साक्षात्कार में शीर्ष अदालत के कुछ मौजूदा एवं पूर्व न्यायाधीशों पर कथित तौर पर आक्षेप लगाने के लिए भूषण और तेजपाल को अवमानना नोटिस जारी किये थे। तेजपाल तब इस पत्रिका के संपादक थे।

शीर्ष अदालत ने चार अगस्त को इस मामले की सुनवाई के दौरान प्रशांत भूषण और तेजपाल को स्पष्ट किया था कि अगर वह इस मामले में उनका “स्पष्टीकरण” या “माफ़ी’’ स्वीकार नहीं करती है तो वह आगे सुनवाई करेगी।

पीठ ने अपने पिछले हफ्ते के आदेश में कहा था, “प्रतिवादी संख्या एक- प्रशांत भूषण और प्रतिवादी संख्या दो- तरुण तेजपाल द्वारा सौंपा गया स्पष्टीकरण या माफ़ी अब तक प्राप्त नहीं हुई है। अगर हमें स्पष्टीकरण या माफ़ी प्राप्त नहीं होती तो हम मामले को सुनेंगे। हम आदेश सुरक्षित रखते हैं।”

पिछले हफ्ते वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए हुई संक्षिप्त सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा था कि वह बोलने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को प्रतिबंधित नहीं करना चाहती है लेकिन अवमानना के संबंध में इसमें बहुत बारीक सा भेद होता है।

शीर्ष अदालत ने 22 जुलाई को, न्यायपालिका के खिलाफ भूषण के कथित अपमानजनक ट्वीट के लिए उनके खिलाफ अलग से स्वत: संज्ञान लेते हुए शुरू की गई अवमानना की कार्यवाही में नोटिस जारी किया था और कहा था कि उनका बयान प्रथम दृष्टया “न्याय के प्रशासन को बदनाम करता है।”

उच्चतम न्यायालय ने पांच अगस्त को भूषण के खिलाफ अवमानना मामले में अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था।

इसे भी पढ़ें :

‘प्रशांत भूषण के ख़िलाफ़ कार्यवाही असल में आलोचना का दम घोंटने वाली एक कोशिश लगती है’

प्रशांत भूषण के ख़िलाफ़ अवमानना का नोटिस हमारे लोकतंत्र का निर्णायक पल हो सकता है

लॉकडाउन में न्यायापालिका

“लोकतंत्र में किसी को इस तरह चुप कराया जा सकता है?” क्या यही सवाल सुप्रीम कोर्ट पर लागू नहीं होता

Supreme Court
prashant bhushan
Tarun Tejpal

Related Stories

ज्ञानवापी मस्जिद के ख़िलाफ़ दाख़िल सभी याचिकाएं एक दूसरे की कॉपी-पेस्ट!

आर्य समाज द्वारा जारी विवाह प्रमाणपत्र क़ानूनी मान्य नहीं: सुप्रीम कोर्ट

समलैंगिक साथ रहने के लिए 'आज़ाद’, केरल हाई कोर्ट का फैसला एक मिसाल

मायके और ससुराल दोनों घरों में महिलाओं को रहने का पूरा अधिकार

जब "आतंक" पर क्लीनचिट, तो उमर खालिद जेल में क्यों ?

विचार: सांप्रदायिकता से संघर्ष को स्थगित रखना घातक

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक आदेश : सेक्स वर्कर्स भी सम्मान की हकदार, सेक्स वर्क भी एक पेशा

तेलंगाना एनकाउंटर की गुत्थी तो सुलझ गई लेकिन अब दोषियों पर कार्रवाई कब होगी?

मलियाना कांडः 72 मौतें, क्रूर व्यवस्था से न्याय की आस हारते 35 साल

क्या ज्ञानवापी के बाद ख़त्म हो जाएगा मंदिर-मस्जिद का विवाद?


बाकी खबरें

  • modi
    विजय विनीत
    बनारस में मोदी: बनारसी पूछ रहे हैं- ये किस बात के लिए और कैसा महोत्सव है?
    13 Dec 2021
    जनता जानना चाहती है कि यह महोत्सव महंगाई का है, बेरोज़गारी का है, लाचर कानून व्यवस्था का है या फिर पिछले पांच सालों में जितने घपले-घोटाले हुए है उनसे जनता का ध्यान भटकाने के लिए है?
  • Masjid
    राज कुमार
    फ़ैक्ट चेक: मस्जिद खाली-रोड ब्लॉक? वायरल फोटो की सच्चाई
    13 Dec 2021
    ये फोटो न तो गुड़गांव की किसी मस्जिद का है और न ही हरियाणा का। ये फोटो जामा मस्जिद अमरोहा का है और एक साल पुराना है। पिछले साल मार्च में लॉकडाउन के दौरान दिशा-निर्देश थे कि धार्मिक स्थलों पर भीड़ न…
  • waste picker
    सौरभ शर्मा
    अगर हमें कचरे के पहाड़ दिखाई देते हैं, तो कचरा बीनने वाले क्यों नहीं?
    13 Dec 2021
    यह विश्वास करना असंभव है कि कचरा प्रबंधन में भारी विफलता के जिंदा सबूत होते हुए भी सरकार इनसे अपनी आंखें मूंदे हुई है। 
  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 7,350 नए मामले, 202 मरीज़ों की मौत
    13 Dec 2021
    देश में एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 0.26 फ़ीसदी यानी 91 हज़ार 456 हो गयी है।
  • Maulana Azad Library
    न्यूज़क्लिक टीम
    मौलाना आज़ाद पुस्तकालय क्यों ज़रूरी है?
    12 Dec 2021
    ICCR ने मौलाना आज़ाद के संग्रह को 'कोने' में डंप कर दिया है. मौलाना आज़ाद की किताबें क्यों ज़रूरी हैं? 'इतिहास के पन्ने मेरी नज़र से' के इस भाग में नीलांजन बात करते हैं इतिहासकार S इरफ़ान हबीब से.
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License