NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
शिक्षा
भारत
राजनीति
बिहार : सरकारी प्राइमरी स्कूलों के 1.10 करोड़ बच्चों के पास किताबें नहीं
पहली से आठवीं तक के क़रीब 1 करोड़ 67 लाख बच्चों में से 1 करोड़ 10 लाख बच्चों के पास आज भी किताबें उपलब्ध नहीं हैं।
एम.ओबैद
16 May 2022
bihar school
फ़ोटो साभार: हिंदुस्तान टाइम्स

शिक्षा की बदहाली की बात करें तो बिहार आज भी कम साक्षरता दर वाले राज्यों में तीसरे स्थान पर है। इसकी कई कारण हैं जिनमें एक कारण सरकारी स्कूलों के बच्चों को किताबें उपलब्ध न होना है। नए सत्र 2022-23 के दूसरे महीने का आधा महीना अर्थात मई महीने का पंद्रह दिन गुजर चुका है लेकिन राज्य में पहली से आठवीं तक के करीब 1 करोड़ 67 लाख बच्चों में से 1 करोड़ 10 लाख बच्चों के पास आज भी किताबें उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में इन बच्चों की पढ़ाई-लिखाई का स्तर कैसा होगा, यह किसी से छिपा नहीं है।

पैसा देने की व्यवस्था सत्र 2018-19 से

बता दें कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को किताब खरीदने के लिए सरकार बच्चों के बैंक खाते में या उनके अभिभावकों के खाते में पैसा ट्रांसफर करती है जिसके बाद बच्चे किताब खरीदते हैं। यह व्यवस्था सत्र 2018-19 से जारी है। इससे पहले स्कूल से बच्चों को किताबें मिल जाया करती थीं लेकिन समय पर न मिलने की शिकायत के चलते सरकार ने व्यवस्था में बदलाव करते हुए बच्चों या अभिभावकों के बैंक खाते में पैसा ट्रांसफर करने का प्रावधान किया। इन सब कोशिशों के बावजूद आज भी बच्चों के पास किताब नहीं हैं। इन स्कूलों में वही बच्चे पढ़ाई करते हैं जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं।

इस सत्र का अप्रैल में किताब छापने का ऑर्डर

बिहार में 71 हजार प्राइमरी स्कूल हैं जिनमें पहली से आठवीं कक्षा तक 1.67 करोड़ बच्चे रजिस्टर्ड हैं जिनमें से 1.10 करोड़ से ज्यादा बच्चे बिना किताब ही स्कूल जा रहे। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक इसका पहला कारण यह कि बच्चों को किताब खरीदने के लिए राशि नहीं भेजी जा सकी है। वहीं दूसरी वजह ये है कि सभी जगह किताब मिलती नहीं है। सत्र 2022-23 के लिए पब्लिशर को 18 अप्रैल को किताब छापने का ऑर्डर ही दिया गया है।

देर से दी जाती है राशि

सत्र 2018-19 से बच्चों को किताब खरीदने के लिए राशि बैंक खाते में भेजने की व्यवस्था है। किताब खरीदने के लिए ये राशि कभी भी समय पर बच्चों के खाते में नहीं भेजी जाती है। पिछले तीन सत्रों की बात करें तो अप्रैल से शुरू होने वाले सत्र में किताब खरीदने के लिए पैसा बच्चों के खाते में कभी अक्टूबर तो कभी दिसंबर और जनवरी में राशि भेजी जाती है।

पैसा देने के बजाए समय पर किताब उपलब्ध कराई जाए

न्यूज़क्लिक से बात करते हुए बिहार के एक प्राइमरी स्कूल के प्रधानाध्यापक ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि पिछले सत्र (2021-22) का पैसा अभी एक सप्ताह पहले बच्चों के या अभिभावकों के बैंक खाते में गया है। इस सत्र का पैसा अभी बच्चों को नहीं मिला है। पैसा न मिलने की वजह से बहुत बच्चे समय पर किताब नहीं खरीद पाते हैं। वहीं जिन बच्चों या अभिभावकों को पैसा मिल भी जाता है उनमें से बहुत से बच्चों के पास किताब नहीं होती है। हमलोगों को बच्चों और अभिभावकों पर किताब खरीदने के लिए दबाव बनाना पड़ता है। बेहतर होगा कि किताब के लिए बच्चों को पैसा भेजने के बजाए समय पर यानी मार्च के अंतिम सप्ताह तक स्कूल के स्तर पर उनको किताब मुहैया करा दिया जाए ताकि नए सत्र की पढ़ाई में किसी तरह की परेशानी न हो।

स्थानीय स्तर पर किताब की व्यवस्था हो

सामाजिक कार्यकर्ता सुरेंद्र ने बातचीत में कहा कि जो किताब स्कूलों तक समय पर पहुंचना होता था वह किताब वहां पहुंचने में साल का अंत हो जाता था। इसको लेकर सरकार की आलोचना होने लगी जिसके बाद सरकार ने इस व्यवस्था में बदलाव करते हुए बच्चों के बैंक खाते में पैसा ट्रांसफर करने की व्यवस्था की लेकिन यह भी अब तक सफल नहीं हो पाया है। सत्र के आरंभ में ही सभी बच्चों के स्थानीय स्तर पर किताब की व्यवस्था कर दी जाए।

राशि में केंद्र सरकार का योगदान 60 फिसदी

ज्ञात हो कि शिक्षा का अधिकार कानून के तहत पहली कक्षा से आठवीं कक्षा तक के बच्चों को किताब खरीदने के लिए राशि देने की व्यवस्था है। समग्र शिक्षा अभियान के तहत किताबों के लिए केंद्र सरकार 60% तथा राज्य सरकार 40% राशि बच्चों को देती है। इस साल बच्चों को किताब के लिए 520 करोड़ की राशि का प्रावधान किया गया है। किताब खरीदने के लिए पहली कक्षा से पांचवीं तक के बच्चों को 250 रुपये तथा छठी कक्षा से आठवीं कक्षा तक के 400 रुपये दी जाती है।

किताब छपाई की ज़िम्मेदारी 56 निजी प्रकाशकों पर

रिपोर्ट के अनुसार सत्र 2020-21 तथा 2021-22 में कोरोना के चलते स्कूल बंद रहने से 20 प्रतिशत बच्चों ने ही किताबें खरीदी थी। जिला और प्रखंड स्तर पर किताब उपलब्ध कराना प्रकाशकों की जिम्मेदारी है। प्रकाशकों की मानें तो जिलों की दुकानों में तो किताब उपलब्ध हैं लेकिन प्रखंड और संकुल स्तर पर नहीं है। बिहार टेक्स्ट बुक कॉरपोरेशन (बीटीबीसी) ने किताब छपाई के लिए 56 निजी पुस्तक प्रकाशकों को जिम्मेदारी दी है।

पहले तीन सत्र में 20 फीसदी बच्चे भी नहीं खरीद पाए किताब

ज्ञात हो कि सत्र 2018-19 से सरकार प्रारंभिक स्कूल के बच्चों को किताब देने के बजाए डीबीटी के तहत बैंक खाते में राशि दे रही है। पिछले साल अगस्त महीने की हिंदुस्तान की एक रिपोर्ट के मुताबिक पहले सत्र में 13, दूसरे सत्र में 19 तो तीसरे सत्र में महज 11 फीसदी किताब ही बच्चों द्वारा खरीदी गयी है। इन तीन वर्षों में डीबीटी के माध्यम से पहले सत्र में 264.29 करोड़, दूसरे सत्र में 500.36 करोड़ और तीसरे सत्र में 378.64 करोड़ रुपए दिए गए, इसमें से मुद्रकों द्वारा इन वर्षों में छपी क्रमशः 70.13 करोड़, 94.20 करोड़ और 52.69 करोड़ रुपये की ही किताबें बिकीं।

वर्ष 2020 में भारत की राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय की रिपोर्ट में बिहार कम साक्षरता दर वाले राज्यों में तीसरे स्थान पर रहा। इसमें 70.9 फीसदी समग्र साक्षरता दर के साथ बिहार को राष्ट्रीय औसत (77.7 फीसदी) से 6.8 फीसदी कम दिखाय गया था। इस रिपोर्ट के अनुसार बिहार में पुरुषों की साक्षरता दर महिलाओं से अधिक थी। बिहार में जहां 79.7 फीसदी पुरुष साक्षर थें वहीं 60 फीसदी महिलाएं पढ़ी-लिखी थीं। राज्य के ग्रामीण इलाकों में महिला साक्षरता दर 58.7 फीसदी, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 75.9 फीसदी थी। ग्रामीण क्षेत्रों में पुरुष साक्षरता दर 78.6 फीसदी और शहरी इलाके में 89.3 फीसदी थी। बिहार में कुल ग्रामीण साक्षरता दर 69.5 फीसदी जबकि शहरी साक्षरता 83.1 फीसदी थी।

Government School in Bihar
education in bihar
Lack of Infrastructure in Government Schools
Nitish Kumar
JDU Government
Bihar
Schools without Books

Related Stories

बिहार : जीएनएम छात्राएं हॉस्टल और पढ़ाई की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन धरने पर

बिहार : सातवें चरण की बहाली शुरू करने की मांग करते हुए अभ्यर्थियों ने सिर मुंडन करवाया

बिहार मिड-डे-मीलः सरकार का सुधार केवल काग़ज़ों पर, हक़ से महरूम ग़रीब बच्चे

बीपीएससी प्रश्न पत्र लीक कांड मामले में विपक्षी पार्टियों का हमला तेज़

कोरोना लॉकडाउन के दो वर्ष, बिहार के प्रवासी मज़दूरों के बच्चे और उम्मीदों के स्कूल

बिहारः प्राइवेट स्कूलों और प्राइवेट आईटीआई में शिक्षा महंगी, अभिभावकों को ख़र्च करने होंगे ज़्यादा पैसे

बिहार में शिक्षा व्यवस्था को बेहतर करने की मांग में भाकपा-माले विधायकों का प्रदर्शन

बिहार : सीटेट-बीटेट पास अभ्यर्थी सातवें चरण की बहाली को लेकर करेंगे आंदोलन

बिहार और यूपी पढ़ाई में फिसड्डी: ईएसी-पीएम

बिहारः प्रारंभिक शिक्षकों की काउंसलिंग टलने के बाद दसवीं और बारहवीं शिक्षकों की नियुक्त‍ि पर भी ग्रहण


बाकी खबरें

  • putin
    एम. के. भद्रकुमार
    रूस द्वारा डोनबास के दो गणराज्यों को मान्यता देने के मसले पर भारत की दुविधा
    24 Feb 2022
    डोनबास के संदर्भ में, भारत की वास्तविक दुविधा स्वयं के दूर-दराज के प्रदेशों की जमीनी हकीकत को देखते हुए उनके आत्मनिर्णय को लेकर है। 
  • putin
    एपी
    पुतिन की पूर्वी यूक्रेन में सैन्य अभियान की घोषणा
    24 Feb 2022
    पुतिन ने दावा किया है कि हमले पूर्वी यूक्रेन में लोगों की रक्षा करने के मकसद से किए जा रहे हैं। पुतिन ने अन्य देशों को आगाह भी किया है कि रूसी कार्रवाई में किसी प्रकार के हस्तक्षेप के प्रयास ‘‘के ऐसे…
  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 14,148 नए मामले, 302 मरीज़ों की मौत
    24 Feb 2022
    देश में एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 0.35 फ़ीसदी यानी 1 लाख 48 हज़ार 359 हो गयी है।
  • aaj ki baat
    न्यूज़क्लिक टीम
    यूपी में हिन्दुत्व बेअसर, हिजाब-विवाद, 'सायकिल' पर निशाना और मलिक अरेस्ट
    24 Feb 2022
    यूपी विधानसभा चुनाव में चौथे चरण के मतदान के बाद सत्ता की लड़ाई और दिलचस्प हो गयी है. सत्ताधारी भाजपा के पांव डगमगाते नज़र आ रहे हैं. पार्टी का हिन्दुत्व एजेंडा भी काम नहीं आ रहा है.
  • subhashini
    न्यूज़क्लिक टीम
    UP Elections: जनता के मुद्दे भाजपा के एजेंडे से गायब: सुभाषिनी अली
    23 Feb 2022
    उत्तर प्रदेश में चुनावी माहौल तेज़ी से बदल रहा है, यह मानना है CPI(M) नेता और कानपुर से पूर्व संसद सुभाषिनी अली का। किस तरफ है जनता का झुकाव, क्या हैं चुनावी मुद्दे और किसका है पलड़ा भारी, जानने के…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License