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राजनीति
बिहार चुनाव: पहले चरण के लिए आज से नामांकन, माले ने जारी की सीटों की पहली सूची
बिहार में नामांकन प्रक्रिया शुरू हो गई है लेकिन अभी तक किसी भी बड़े राजनीतिक दल के उम्मीदवारों का अता-पता नहीं है। इस बीच वामपंथी दल भाकपा-माले ने बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के लिए राज्य के कुल 30 विधानसभा क्षेत्रों के नाम समेत अपने सीटों की पहली सूची जारी कर दी है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
01 Oct 2020
बिहार चुनाव: पहले चरण के लिए आज से नामांकन, माले ने जारी की सीटों की पहली सूची
image courtesy:Kashish News

आज गुरुवार 1 अक्टूबर से बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण के लिए नामांकन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। परन्तु अभी तक चुनाव को लेकर वो सरगर्मी नहीं दिख रही है जो आमतौर पर रहती है। नामांकन प्रक्रिया शुरू हो गई है लेकिन किसी भी बड़े राजनीतिक दल के उम्मीदवारों का अता-पता नहीं हैं। उम्मीदवार तो दूर की बात जो दोनो बड़े गठबंधन चाहे वो सत्ताधारी या विपक्षी अभी तक वो अपने घटक दलों के लिए सीटों की संख्या निश्चित नहीं कर पाए हैं।  

अभी गठबंधन के घटक दलों को लेकर भी संशय बना हुआ है कि कौन सा दल किस गठबंधन का हिस्सा होगा। ऐसे में वामपंथी दल भाकपा-माले ने बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के लिए राज्य के कुल 30 विधानसभा क्षेत्रों के नाम समेत अपने सीटों की पहली सूची जारी कर दी है। हालंकि वो अभी भी राजद के नेतृत्व में शामिल हैं और महागठबंधन को लेकर रास्ते खोले हुए हैं।

सत्ताधारी गठबंधन एनडीए के लिए भी यह चुनाव आसान नहीं है उसकी प्रमुख सहयोगी एलजेपी भी लगातार नीतीश के नेतृत्व और अपने लिए सीटों की संख्या को लेकर आँखे दिखा रही है। मीडिया रिपोर्ट और जानकारों का कहना है इसबार बिहार चुनाव में जदयू एनडीए में बड़े भाई की भूमिका में नजर आना चाहती है। इसलिए वह भाजपा से ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ने की दावेदारी ठोक रही है।

उसका मानना है जिस तरह मोदी देश में एनडीए का चेहरा है वैसे ही नीतीश बिहार में है। आसान भाषा में कहे तो नीतीश बिहार चुनाव में नरेंद्र मोदी वाली भूमिका चाहते है लेकिन भाजपा को छोटे भाई की भूमिका रास नहीं आ रही।

वहीं, विपक्षी महगठबंधन के साथी आरएलएसपी ने भी सीट बंटबारे में हो रही देरी की वजह से महागठबंधन से खुद को अलग कर लिया है। माले ने भी महगठबंधन को हो रही देरी को देखते हुए अपने चुनावी अभियान को शुरू कर दिया है। उसने इशारों में देरी के लिए राजद को ज़िम्मेदार बताया और कहा जितनी देरी होगी उससे नुकसान होने की अधिक आशंका है। हालंकि बाकि दोनों वामपंथी दलों ने अभी महगठबंधन को लेकर चर्चा जारी है।

अब भी अगर संपूर्ण तालमेल की कोई संभावना बनती है तो हम उस पर विचार करेंगे :माले

भाकपा-माले राज्य सचिव कुणाल ने कहा है कि विधानसभा चुनाव में सीटों के तालमेल को लेकर भाकपा-माले व राष्ट्रीय जनता दल के बीच राज्य स्तर पर कई राउंड की बातचीत चली। हमने अपनी सीटों की संख्या घटाकर 30 कर ली थी। संपूर्ण तालमेल की स्थिति में इन प्रमुख 30 सीटों में से भी 10 सीटें और भी कम करते हुए हमने 20 प्रमुख सीटों पर हमारी दावेदारी स्वीकार कर लेने का प्रस्ताव रखा था।

आगे उन्होंने कहा लेकिन राजद की ओर से हमारे लिए जो सीटें प्रस्तावित की गईं हैं उनमें हमारे सघन कामकाज, आंदोलन व पहचान के पटना, औरंगाबाद, जहानाबाद, गया, बक्सर, नालंदा आदि जिलों की एक भी सीट शामिल नहीं है। ऐसे में जब पहले चरण के नामांकन का दौर शुरू ही होने वाला है, हम अपने सीटों की यह पहली सूची जारी कर रहे हैं।

माले ने कहा लाॅकडाउन के दौरान प्रवासी मजदूरों की तबाही, सबको शिक्षा व सम्मानजनक रोजगार देने में सरकार की नाकामी और मोदी सरकार के किसान विरोधी कृषि कानूनों आदि से बिहार की जनता में व्यापक विक्षोभ है। बिहार की जनता जदयू-भाजपा की डबल इंजन सरकार से छुटकारा पाना चाहती है। इस जनभावना का सम्मान करते हुए विपक्ष की पार्टियों के बीच कारगर गठबंधन व समझौता और एनडीए विरोधी मतों को समेटने की पुरजोर कोशिश करना समय की मांग है। लेकिन, अबतक ऐसा संभव नहीं हो पाना बेहद दुःखद है।

अंत में माले नेताओ ने साफ किया कि अब भी अगर संपूर्ण तालमेल की कोई संभावना बनती है तो हम उस पर विचार करेंगे।

माले द्वारा जारी सीटों की पहली सूची


1. तरारी 2. अगिआंव 3. जगदीशपुर 4. संदेश 5. आरा 6. दरौली 7. जिरादेई 8. रघुनाथपुर 9. बलरामपुर 10. पालीगंज 11. मसौढ़ी 12. फुलवारीशरीफ 13. काराकाट 14. ओबरा 15. अरवल 16. घोषी 17. सिकटा 18. भोरे 19. कुर्था 20. जहानाबाद 21. हिलसा 22. इसलामुपर 23. हायाघाट 24. वारिसनगर 25. औराई 26. गायघाट 27. बेनीपट्टी 28. शेरघाटी 29. डुमरांव 30. चैनपुर

इसमें से तीन सीटों तरारी ,दरौली और बलरामपुर में माले ने पिछले चुनावो में जीत दर्ज की थी और वर्तमान में उसके विधायक है।

हालंकि कई जानकार इसे माले द्वारा महगठंबधन की बड़ी पार्टी राजद पर दबाव बनाने की कोशिश बता रहे हैं लेकिन माले नेताओं का कहना है कि यह कोई दबाव नहीं बल्कि समय की जरूरत है। पहले ही बहुत देरी हो चुकी अब नामांकन भी शुरू हो गया ऐसे में और देरी हमारे चुनाव अभियान को नुकसान देगी।

आपको बता दें पहले चरण के 16 जिलों की 71 विधानसभा सीटों के लिए एक अक्टूबर से 8 अक्टूबर तक उम्मीदवार अपना नामांकन दाखिल कर सकेंगे जबकि 12 अक्टूबर को नाम वापस लेने की तिथि है। इस चरण के लिए 28 अक्टूबर को वोट डाले जाएंगे। पहले चरण में जिन इलाकों में चुनाव है उसे महागठबंधन के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जबकि नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार के सात मंत्रियों की किस्मत का भी फैसला यही से होना है।

पहले चरण कौन-कौन से जिले हैं शामिल

बिहार विधानसभा चुनाव में पहले चरण में 16 जिलों की विधानसभा सीटों पर वोटिंग होगी। इनमें भागलपुर, बांका, मुंगेर, लखीसराय, शेखपुरा, पटना, भोजपुर, बक्सर, सासाराम, कैमूर, अरवल, जहानाबाद, औरंगाबाद, गया, नवादा और जमुई जिले की 71 विधानसभा सीटें हैं।

इसबार क्या है नया?

* नामांकन को लेकर सभी अनुमंडल कार्यालय, कलेक्ट्रेट पर धारा 144 लागू रहेगी।

*कोरोना को देखते हुए प्रत्याशी ऑनलाइन नामांकन पत्र जमा करा सकते हैं। इसके लिए शपथ पत्र से लेकर शुल्क भी ऑनलाइन जमा कर सकते हैं। यह एक विकल्प के रूप में है। प्रत्याशी यदि हार्ड *कॉपी के साथ नामांकन पत्र दाखिल करना चाहते हैं तो वह भी कर सकते हैं।

*नामांकन प्रारूप जिला निर्वाचन पदाधिकारी की वेबसाइट पर उपलब्ध है। ऐसे अभ्यर्थी जो ऑनलाइन पद्धति से नामांकन करना चाहते हैं, वह वेबसाइट में नामांकन पत्र की प्रविष्टि कर सकते हैं। उसका प्रिंट निकाल कर प्रारूप एक में निर्वाची पदाधिकारी द्वारा निर्गत सूचना में अंकित स्थान पर नामांकन दाखिल कर सकते हैं।

*ऑनलाइन पद्धति से जमानत राशि को निर्धारित पोर्टल पर जमा कर सकते हैं। अभ्यर्थी चाहें तो नगद रूप से जमानत राशि जमा करने के लिए ट्रेजरी चालान के माध्यम से भी जमानत राशि जमा कर सकते हैं।

*प्रत्याशी बनने के इच्छुक स्वयं अपना या किसी निर्वाचक के प्रमाणीकरण के लिए भी ऑनलाइन नामांकन पद्धति का उपयोग कर सकते हैं।

*नामांकन दाखिल करते समय अभ्यर्थी सहित प्रत्याशी के अलावा दो व्यक्ति ही उपस्थित हो सकते हैं।

*नामांकन के अवसर पर ज्यादा से ज्यादा दो वाहनों की ही अनुमति होगी।

*नामांकन संवीक्षा एवं प्रतीक आवंटन के अवसर पर सोशल डिस्टेंसिंग के पालन के लिए निर्वाची पदाधिकारी के कक्ष में पर्याप्त स्थान उपलब्ध हो।  


 

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