NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
कृषि
मज़दूर-किसान
भारत
राजनीति
बिहारः कृषि क़ानून वापस लेने की मांग करते हुए किसानों का राजभवन मार्च, पुलिस ने किया लाठीचार्ज
किसान नेताओं का कहना है कि ये आंदोलन जो अब बिहार में भी उठ खड़ा हुआ है उसे दबाना किसी भी सरकार के बूते की बात नहीं है।
एम.ओबैद
29 Dec 2020
बिहार

नए कृषि क़ानून को वापस लेने की मांग करते हुए आज किसान संगठनों ने बिहार की राजधानी पटना में गांधी मैदान से राजभवन तक मार्च निकाला और प्रदर्शन किया। इस रैली में राज्यभर के किसान शामिल हुए।

अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति और लेफ्ट पार्टियों के आह्वान पर आयोजित इस रैली के दौरान प्रदर्शनकारी किसानों पर पुलिस प्रशासन ने लाठियां बरसाईं जिसकी कड़ी निंदा किसान नेताओं और समाज के विभिन्न वर्गों ने की है।

अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति के बिहार-झारखंड प्रभारी व अखिल भारतीय किसान महासभा के महासचिव राजाराम सिंह ने कहा कि नीतीश कुमार किसान आंदोलनों के दमन से बाज आएं। सिंह ने कहा कि बिहार के दूर-दराज के इलाकों से हज़ारों की तादाद में किसान अपनी जायज मांगों को लेकर पटना आए थे और बिहार के राज्यपाल को अपना ज्ञापन सौंपना चाहते थे लेकिन प्रशासन ने संवेदनशील रवैया अपनाने की बजाय दमन का रास्ता अपनाया। उन्होंने कहा कि किसानों का ये आंदोलन जो अब बिहार में भी उठ खड़ा हुआ है उसे दबाना किसी भी सरकार के बूते की बात नहीं है। सिंह ने कहा कि किसानों का ये आंदोलन सरकार को पीछे हटने के लिए मजबूर कर देगा।

तीनों क़ानून वापस लेने की मांग

राजभवन की ओर मार्च कर रहे किसान अपनी हाथों में तख्तियां लिए हुए थे जिस पर तीनों कृषि कानून को रद्द करने, बिजली बिल 2020 को वापस लेने, न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान सहित सभी फसलों की खरीद की गारंटी देने और बिहार में मंडी व्यवस्था बहाल करने जैसे नारे लिखे हुए थे।

इस रैली में शामिल किसान नेताओं का कहना है कि प्रशासन ने गांधी मैदान से निकलते ही किसानों को जेपी चौक पर रोकने की कोशिश की और धक्का-मुक्की की लेकिन वह किसान के सैलाब को रोक न पाई। जब किसानों की ये रैली डाकबंगला की ओर बढ़ी तब फिर वहां एक बार प्रशासन ने दमनात्मक कार्रवाई की। पुलिस द्वारा लाठीचार्ज में कई किसान नेताओं के घायल होने की खबर है।

किसानों की रैली में शामिल होने आए मुजफ्फरपुर के सीपीएम के जिला सचिव अब्दुल गफ्फार ने कहा कि केंद्र सरकार तीनों कृषि क़ानून को रद्द करे तभी इस आंदोलन को समाप्त करेंगे नहीं तो आंदोलन लगातार करते रहेंगे।

अखिल भारतीय किसान सभा के राष्ट्रीय संयुक्त मंत्री नंदकिशोर शुक्ला ने कहा कि तीनों कृषि कानून कॉर्पोरेट के पक्ष में है इसलिए इन तीनों कानूनों को केंद्र सरकार वापस ले। उन्होंने कहा कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों में कॉर्पोरेट का प्रवेश होगा और इससे किसानों की जमीन कॉर्पोरेट का हाथों में चली जाएगी। शुक्ला ने कहा कि एमएसपी की गारंटी खत्म हो जाएगी और बड़े बड़े बिचौलिए और कॉर्पोरेट किसानों के अनाज का खरीद बिक्री करेंगे। धीरे धीरे किसानों के हाथ से उनकी जमीन निकलने का खतरा पैदा हो जाएगा। उन्होंने कहा कि जमाखोरी पर पहले रोक थी जो जमाखोरी कानून के तहत हट जाएगी और जो जितना चाहे अनाज, दलहन, तिलहन, आलू, प्याज आदि को जमा कर लेगा। इसकी वजह से बाजार में कीमतें बढ़ जाएगी और आम लोग परेशान होंगे।

बिहार किसान आंदोलन का गवाह

डाकबंगला चौराहा सभा को संबोधित करते हुए पूर्व विधायक राजाराम सिंह कहा कि आज भगत सिंह का पंजाब और स्वामी सहजानंद के किसान आंदोलन की धरती बिहार के किसानों की एकता कायम होने लगी है। इससे भाजपाई बेहद डरे हुए हैं। उन्होंने कहा कि बिहार की धरती सहजानंद सरस्वती जैसे किसान नेताओं की धरती रही है जिनके नेतृत्व में जमींदारी राज की चूलें हिला दी गई थी। सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आजादी के बाद भी बिहार मजबूत किसान आंदोलनों की गवाह रही है। 70-80 के दशक में भोजपुर और तत्कालीन मध्य बिहार के किसान आंदोलन ने किसान आंदोलन के इतिहास में एक नई मिसाल कायम की है। सिंह ने कहा कि अब एक बार फिर नए सिरे से बिहार के छोटे-मंझोले-बटाईदार समेत सभी किसान आंदोलित हो गए हैं और बिहार से पूरे देश को उम्मीदें हैं। उन्होंने कहा आज के राजभवन मार्च ने साबित कर दिया है कि अब पूरा देश भाजपा के खिलाफ उठ खड़ा हुआ है।

किसानों की दुर्दशा के लिए भाजपा-जदयू जवाबदेह

किसान नेताओं का कहना है कि बिहार सरकार ने 2006 में ही बाजार समितियों को खत्म कर दिया। जो काम नीतीश कुमार ने 2006 में बिहार में किया वही मोदी सरकार अब पूरे देश में करना चाहती है। बिहार के किसानों की दुर्दशा के लिए भाजपा-जदयू जवाबदेह है।

किसान संघर्ष समन्वय समिति के नेताओं ने अपना ज्ञापन बिहार के राज्यपाल को सौंपा।

किसानों के राजभवन मार्च में हजा़रों किसानों की भागीदारी पर भाकपा-माले के राज्य सचिव कुणाल ने बिहार के किसानों को बधाई दी और तीनों कृषि कानूनों को रद्द करने, बिजली बिल 2020 वापस लेने, मंडी व्यवस्था फिर से बहाल करने और न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान सहित सभी फसलों की खरीद की गारंटी करने के सवाल पर आगे भी आंदोलन जारी रखने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि आज के राजभवन मार्च से साबित हो गया है कि पंजाब की तरह बिहार के किसान भी मोदी सरकार द्वारा किसान विरोधी लाए गए तीनों कानूनों के पूरी तरह खिलाफ हैं।

माले राज्य सचिव ने राजभवन मार्च में शामिल किसानों के शांतिपूर्ण मार्च पर पुलिसिया कार्रवाई की कड़ी आलोचना की और कहा कि सरकार को आंदोलित किसानों के प्रति संवेदनशील रूख अपनाना चाहिए।

farmers protest
Agriculture Laws
MSP
Bihar
Bihar Protests
bihar police
Police lathicharge
left parties
CPI-ML
BJP
Narendra modi

Related Stories

बिहार : जीएनएम छात्राएं हॉस्टल और पढ़ाई की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन धरने पर

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

छात्र संसद: "नई शिक्षा नीति आधुनिक युग में एकलव्य बनाने वाला दस्तावेज़"

मूसेवाला की हत्या को लेकर ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन, कांग्रेस ने इसे ‘राजनीतिक हत्या’ बताया

दलितों पर बढ़ते अत्याचार, मोदी सरकार का न्यू नॉर्मल!

बिहार : नीतीश सरकार के ‘बुलडोज़र राज’ के खिलाफ गरीबों ने खोला मोर्चा!   

आशा कार्यकर्ताओं को मिला 'ग्लोबल हेल्थ लीडर्स अवार्ड’  लेकिन उचित वेतन कब मिलेगा?

वाम दलों का महंगाई और बेरोज़गारी के ख़िलाफ़ कल से 31 मई तक देशव्यापी आंदोलन का आह्वान

दिल्ली : पांच महीने से वेतन व पेंशन न मिलने से आर्थिक तंगी से जूझ रहे शिक्षकों ने किया प्रदर्शन

राम सेना और बजरंग दल को आतंकी संगठन घोषित करने की किसान संगठनों की मांग


बाकी खबरें

  • Sitaram Yechury
    संदीप चक्रवर्ती
    स्वतंत्रता दिवस को कमज़ोर करने एवं हिंदू राष्ट्र को नए सिरे से आगे बढ़ाने की संघ परिवार की योजना को विफल करें: येचुरी 
    25 Feb 2022
    माकपा महासचिव ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार का “फोकस 5 अगस्त को देश की वास्तविक स्वतंत्रता की तारीख के रूप में बढ़ावा देने पर है।"  
  • russia ukrain
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    यूक्रेन पर रूस के हमले से जुड़ा अहम घटनाक्रम
    25 Feb 2022
    यूरोपीय संघ रूस पर और आर्थिक एवं वित्तीय प्रतिबंध लगाने को सहमत। तो वहीं संयुक्त राष्ट्र ने यूक्रेन में मानवीय सहायता के लिए दो करोड़ डॉलर देने की घोषणा की।
  • ASHA Workers
    अनिल अंशुमन
    बिहार : आशा वर्कर्स 11 मार्च को विधानसभा के बाहर करेंगी प्रदर्शन
    25 Feb 2022
    आशा कार्यकर्ताओं का कहना है कि बिहार सरकार हाई कोर्ट के आदेश का पालन करने में भी टाल मटोल कर रही है। कार्यकर्ताओं ने ‘भूखे रहकर अब और नहीं करेंगी बेगारी’ का ऐलान किया है।
  • covid
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 13 हज़ार से ज़्यादा नए मामले, 302 मरीज़ों की मौत
    25 Feb 2022
    देश में कोरोना संक्रमण के मामलों की संख्या बढ़कर 4 करोड़ 28 लाख 94 हज़ार 345 हो गयी है।
  • up elections
    तारिक़ अनवर
    यूपी चुनाव : अयोध्या के प्रस्तावित  सौंदर्यीकरण में छोटे व्यापारियों की नहीं है कोई जगह
    25 Feb 2022
    अयोध्या के व्यापारियों ने आरोप लगाया है कि प्रस्तावित लेआउट के परिणामस्वरूप दुकानों और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को बड़े पैमाने पर ध्वस्त या उन दुकानों का ज़्यादातर हिस्सा तोड़ दिया जाएगा।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License