NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
अपराध
आधी आबादी
उत्पीड़न
भारत
राजनीति
बिहार: मुज़फ़्फ़रपुर कांड से लेकर गायघाट शेल्टर होम तक दिखती सिस्टम की 'लापरवाही'
बीते सालों में मुज़फ़्फ़रपुर, पटना, मधुबनी समेत तमाम दूसरे शेल्टर होम से लड़कियों के भागने और रहस्यमयी परिस्थितियों में गायब होने तक की खबरें सामने आईं, लेकिन शासन-प्रशासन इस सब के बाद भी कभी इस मामले की सुध लेता दिखाई नहीं देता।
सोनिया यादव
07 Feb 2022
patna
फ़ोटो साभार: सोशल मीडिया

बीते हफ्तेभर से बिहार की राजधानी पटना का गायघाट शेल्टर होम सुर्ख़ियों में हैं। यहां उत्तर रक्षा गृह में रहने वाली एक लड़की ने यौन शोषण की शिकायत की है। लड़की के मुताबिक शेल्टर होम के भीतर उसका कथित तौर पर दुष्कर्म हुआ। आरोप है कि उसे शेल्टर होम में नशीली दवाइयां खिलाई गईं और इस सबसे परेशान होकर उसने आत्महत्या की भी कोशिशें की।

सोशल मीडिया पर यहां से बचकर भागी एक लड़की का वीडियो वायरल है। वीडियो में वो शेल्टर होम की सुप्रिटेंडेंट वंदना गुप्ता का नाम लेकर कह रही है कि वापस जाने पर उसे मार दिया जाएगा। वीडियों में वो ये भी बता रही है कि उसे पुरुषों के साथ सोने पर मजबूर किया जाता है।

बता दें कि गायघाट का ये शेल्टर होम समाज कल्याण विभाग के अंतर्गत आता है। इस शेल्टर होम में 250 से 300 बच्चियां रहती हैं। मीडिया में इस घटना से जुड़ी खबरें आने के बाद पटना उच्च न्यायालय ने जुवेनाइल जस्टिस मॉनिटरिंग कमेटी की अनुशंसा पर स्वत: संज्ञान लिया और पटना पुलिस द्वारा इस मामले में प्राथमिकी दर्ज न किए जाने को लेकर नाराजगी जाहिर की।

क्या है पूरा मामला?

'मुजफ्फरपुर शेल्टर होम कांड' की तरह ही गायघाट के इस शेल्टर होम पर भी लड़कियों के शोषण के कई गंभीर आरोप लग रहे हैं। बीते गुरुवार, 3 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट की वकील सीमा कुशवाहा ने महिला अधिकारों के लिए लड़ने वाली कुछ दूसरी महिला कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर पटना में एक प्रेस वार्ता की, जिसमें उन्होंने पूरे मामले पर विस्तार से मीडिया को जानकारी देते हुए बिहार सरकार पर तीखा हमला बोला।

इस दौरान सीमा कुशवाहा ने कहा, " पटना की सड़कों पर पिछले पाँच दिनों से एक बेटी न्याय की भीख माँग रही है। हर जगह गई लेकिन अब तक एफ़आईआर नहीं दर्ज की गई। उस बिटिया की शिकायत मात्र उसकी शिकायत नहीं है। अगर वो वहां (गायघाट शेल्टर होम) गई और अंदर की चीज़ें बता रही तो यह इक्कीसवीं सदी के भारत को शर्मसार करने वाला मामला है।"

पीड़िता ने यौन शोषण के अलावा मारने-पीटने का भी लगाया आरोप

पीड़ित लड़की के वायरल वीडियों में ये साफ तौर पर देखा जा सकता है कि हाथ में ब्लेड के निशान दिखाते हुए लड़की बता रही है कि वंदना गुप्ता से तंग आकर उसने कई बार खुद को खत्म करने की कोशिश की थी। ये पूछे जाने पर कि क्या उसके साथ कभी जबरदस्ती की गई तो उसने हां में जवाब दिया।

लड़की ने बताया कि विरोध करने पर वंदना गुप्ता लड़कियों को मारती-पीटती थी। जब लड़की से वापस शेल्टर होम जाने की बात कही गई तो उसने कहा कि वो वहां नहीं जाना चाहती है। वो वंदना गुप्ता के खिलाफ बोल रही है तो उसे मार दिया जाएगा। लड़की का आरोप है कि यह सब सिर्फ़ उसके साथ ही नहीं हुआ बल्कि शेल्टर होम की दूसरी लड़कियों को भी कई बार बाहर भेजा जाता है, और कई बार बाहर से भी लोग भीतर आते हैं।

प्रशासन ने पीड़िता को विक्षिप्त और उद्दंड क़रार दिया

इस मामले में  दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, वीडियो सामने आने के बाद समाज कल्याण विभाग ने इस मामले की जांच शुरू की। जांच के लिए बनाई गई टीम ने लड़की को झगड़ालू बताते हुए शेल्टर होम की सुप्रिटेंडेंट को क्लीन चिट दे दी है। विभाग का दावा है कि शेल्टर होम और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज से लड़की के दावों की पुष्टि नहीं हुई है। जांच टीम ने ये भी कहा है कि समय-समय पर हुई काउंसिलिंग से सामने आया है कि विक्टिम का व्यवहार स्थिर नहीं है और वो वो पहले भी लड़कियों को भड़काने, झगड़ा करने और शेल्टर होम में काम करने वालों को धमकाने में लिप्त रही है।

इस पूरे वाकये पर सीमा कुशवाहा ने बिहार सरकार की आलोचना करते हुए कहा, "समाज कल्याण विभाग ने लड़की के आरोपों की गंभीरतापूर्वक जाँच-पड़ताल करने के बजाय उसे ही विक्षिप्त और उद्दंड क़रार देते हुए एक लेटर जारी कर दिया।"

जुवेनाइल जस्टिस मॉनिटरिंग कमेटी ने की खामियां उजागर

मालूम हो कि पटना हाईकोर्ट के स्वत: संज्ञान के बाद ये मामला हाईलाइट हुआ। जुवेनाइल जस्टिस मॉनिटरिंग कमेटी के सदस्यों द्वारा शेल्टर होम के दौरे के दौरान भी कई तरह की खामियां पाई गईं। जैसे समाज कल्याण विभाग के अधिकारी जिन सीसीटीवी कैमरों के हवाले से किशोरी के आरोपों को नकार रहे हैं, उन सीसीटीवी कैमरों में से तो कई काम ही नहीं करते। इसके अलावा उन्हें वहां रहने और खाने-पीने की व्यवस्था भी दुरुस्त नहीं दिखी।

गौरतलब है कि गायघाट शेल्टर होम की इस घटना को सूबे के चर्चित 'मुजफ्फरपुर शेल्टर होम कांड' का पार्ट दो कहा जा रहा है। कई महिलावादी संगठनों और महिला कार्यकर्ताओं ने इस संबंध में सरकार के खिलाफ प्रदर्शन भी किए। अखिल भारतीय प्रगतिशील महिला संगठन- ऐपवा, बिहार महिला समाज, जनवादी महिला समिति, लोकतांत्रिक जन पहल, नारी गुंजन, डब्लू एस एफ,एम एस एस, आदि कई संगठनों के प्रतिनिधियों ने संयुक्त बयान जारी कर इस मामले की हाई कोर्ट के न्यायाधीश से न्यायिक जांच कराने की मांग की है।

महिला संगठनों ने कहा कि आरोप लगाने वाली महिला गायघाट रिमांड होम में रह चुकी है इसलिए उसकी बातों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। संगठनों ने पीड़ित महिला की सुरक्षा सुनिश्चित करने के संबंध में भी सरकार से गारंटी की मांग की, साथ ही मीडिया से भी अपील की है कि वो पीड़ित महिला की पहचान को बिना उसकी सहमति के सार्वजनिक न करें।

मुजफ्फरपुर शेल्टर होम कांड को अभी भी बिहार की महिलाएं नहीं हैं भूली

महिला संगठनों ने अपने बयान में कहा है कि समाज कल्याण निदेशालय की तरफ से दिया गया जवाब बहुत ही सतही है। महिला द्वारा लगाए गए आरोप का जवाब देने के बदले उस महिला के चरित्र पर ही सवाल उठाया गया है जो बहुत ही शर्मनाक है। कानूनन महिला की पहचान को सार्वजनिक करना अपराध है और हैरानी की बात है कि समाज कल्याण विभाग यह कर रहा है। सरकार यदि तत्काल इस मामले पर गंभीरता से नहीं पेश आएगी तो महिला संगठन इस मुद्दे को आगे बढ़ाने को विवश होंगे क्योंकि मुजफ्फरपुर शेल्टर होम कांड को अभी भी बिहार की महिलाएं भूली नहीं हैं।

ज्ञात हो कि साल 2018 में टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंस (टीआईएसएस) ने बिहार सरकार को एक रिपोर्ट सौंपी थी। जिसमें मुजफ्फरपुर शेल्टर होम में नाबालिग लड़कियों का यौन शोषण किए जाने का जिक्र किया गया था। तब नैतिकता और पारदर्शिता के सवाल पर समाज कल्याण मंत्री मंजू वर्मा को इस्तीफा तक देना पड़ा था। बाद में कोर्ट ने एनजीओ के संचालक ब्रजेश ठाकुर समेत 19 अभियुक्तों को दोषी ठहराया। अब एक बार फिर इस घटना ते बाद शेल्टर होम के भीतर होने वाली अनैतिक क्रियाकलापों और उसके संचालकों के सियासी गठजोड़ को लेकर बिहार की सियासत खासा गर्मा रही है।

विपक्ष ने बिहार सरकार पर लगाया अपराधियों को संरक्षण देने का आरोप

इस मामले में बिहार की पूर्व सीएम राबड़ी देवी ने बिहार की नीतीश सरकार पर जोरदार हमला बोला है। राबड़ी देवी ने गायघाट रिमांड होम सेक्स स्कैंडल के लिए बिहार सरकार को पूरी तरह से जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि इस तरह की अमानवीय घटना पूरी मशीनरी की विफलता का प्रतीक है। जनता चुप नहीं बैठेगी।

उन्होंने कहा कि यह सब सरकार की निगरानी यानी संरक्षण में में हो रहा है। बिहार के लोग देख रहे हैं कि राज्य में सरकार कैसे काम कर रही है। बिहार के बालिका गृह में पहले भी इस तरह की घटनाएं हो चुकी हैं। उस वक्त भी सरकार की संलिप्तता पूरी तरह उजागर हो गयी थी और एक बार फिर जिस तरह से गायघाट का मामला सामने आया है, इससे साफ है कि इस कांड के लिए सरकार ही पूरी तरह से जिम्मेदार है।

इससे पहले वीडियो वायरल होने के बाद मामले को लेकर जन अधिकारी पार्टी के प्रमुख पप्पू यादव ने कोर्ट जाने की चेतावनी दी थी। बिहार की राजनीति का बड़ा चेहरा कहे जाने वाले तेजस्वी यादव भी इस बड़े मामले में नीतीश सरकार पर निशाना साध चुके हैं। उन्होंने कहा था कि मुजफ्फरपुर कांड वाले मोटी तोंद वाले नीतीश के संरक्षण में आजाद घूम रहे हैं। इसके अलावा पूर्व आईपीएस अमिताभ दास ने भी राज्यपाल को पत्र लिखकर जांच की मांग की है।

बहरहाल, सियासत अपनी जगह है और सच्चाई अपनी। सच्चाई यही कहती है कि मुज़फ़्फ़रपुर कांड के बाद भी बिहार सरकार ने कभी इस मुद्दे को गंभीरता से नहीं लिया। बीते सालों मुज़फ़्फ़रपुर, पटना, मधुबनी समेत तमाम दूसरे शेल्टर होम से लड़कियों के भागने और रहस्यमयी परिस्थितियों में गायब होने तक की खबरें सामने आ चुकी हैं, लेकिन शासन-प्रशासन इस सब के बाद भी इस मामले की सुध लेता दिखाई नहीं देता। शेल्टर होम में लड़कियों की कथित रूप से ऐसी स्थिति ये दर्शाता है कि मुज़फ़्फ़रपुर कांड के बाद भी सिस्टम कितना 'लापरवाह' बना हुआ है।

Bihar
PATNA
shelter home
muzaffarpur
Gaighat shelter Home
Gaighat shelter home case
Bihar government
Nitish Kumar
crimes against women
violence against women
women security

Related Stories

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

तेलंगाना एनकाउंटर की गुत्थी तो सुलझ गई लेकिन अब दोषियों पर कार्रवाई कब होगी?

यूपी : महिलाओं के ख़िलाफ़ बढ़ती हिंसा के विरोध में एकजुट हुए महिला संगठन

पिता के यौन शोषण का शिकार हुई बिटिया, शुरुआत में पुलिस ने नहीं की कोई मदद, ख़ुद बनाना पड़ा वीडियो

बिहार: आख़िर कब बंद होगा औरतों की अस्मिता की क़ीमत लगाने का सिलसिला?

बिहार: 8 साल की मासूम के साथ बलात्कार और हत्या, फिर उठे ‘सुशासन’ पर सवाल

मध्य प्रदेश : मर्दों के झुंड ने खुलेआम आदिवासी लड़कियों के साथ की बदतमीज़ी, क़ानून व्यवस्था पर फिर उठे सवाल

चारा घोटाला: सीबीआई अदालत ने डोरंडा कोषागार मामले में लालू प्रसाद को दोषी ठहराया

यूपी: बुलंदशहर मामले में फिर पुलिस पर उठे सवाल, मामला दबाने का लगा आरोप!

बिहार शेल्टर होम कांड-2: युवती ने अधीक्षिका पर लगाए गंभीर आरोप, कहा- होता है गंदा काम


बाकी खबरें

  • custodial death
    अब्दुल अलीम जाफ़री
    उत्तर प्रदेश: पुलिस की ज़्यादती का एक और मामला, सफ़ाईकर्मी की पुलिस हिरासत में मौत
    22 Oct 2021
    घटना से वाल्मीकि समाज ग़ुस्से में है। दलित कार्यकर्ताओं समेत बड़ी संख्या में लोग पोस्टमार्टम स्थल पर इकट्ठा हो गए और संबंधित पुलिस कर्मियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की मांग की।
  • jail
    सोनिया यादव
    प्रिवेंटिव डिटेंशन क्या क़ानून के नाम पर भरपूर मनमानियां करने का ज़रिया है?
    22 Oct 2021
    एहतियातन हिरासत को लेकर देश के 100 रिटायर्ड प्रशासनिक अधिकारियों ने केंद्रीय कानून मंत्री किरण रिजिजू को एक खुली चिट्ठी लिखी है। चिट्ठी में कहा गया है कि इस अधिसूचना को जारी करने में 43 वर्षों की…
  • cartoon
    आज का कार्टून
    100 करोड़ वैक्सीन डोज आंकड़े के सिवाय और कुछ भी नहीं!
    22 Oct 2021
    100 करोड़ वैक्सीन डोज महज आंकड़ा है। अगर देश के सामर्थ्य का प्रतिबिंब होता तो अब तक 100 करोड़ लोगों को दोनों डोज मुफ्त में आसानी से लग चुका होता।
  • jammu
    अबास राथर
    जम्मू-कश्मीर: सुस्त प्रशासन का लोकतांत्रिक प्रक्रिया में बाधा डालना जारी
    22 Oct 2021
    जिला विकास परिषद (डीडीसी) के चुनावों के लगभग नौ महीने बीत चुके हैं, लेकिन नौकरशाही और निर्वाचित प्रतिनिधियों के बीच कामकाजी संगति नहीं बन सकी है। यह होने की बजाय, हम केंद्र शासित प्रदेश के प्रशासन को…
  • Refugees
    ट्राईकोंटिनेंटल : सामाजिक शोध संस्थान
    अगर सभी शरणार्थी एक देश में रह रहे होते, तो वह देश दुनिया का 17वाँ सबसे बड़ा देश होता
    22 Oct 2021
    अकेले संयुक्त राष्ट्र की गणना के हिसाब से, इस समय लगभग 8.3 करोड़ लोग विस्थापित हैं, और यदि ये सभी विस्थापित एक ही स्थान पर रहें तो वे आपस में मिलकर दुनिया का 17वाँ सबसे अधिक आबादी वाला देश बन जाएँगे।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License