NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
बिहार– झारखंड: हाईकोर्ट ने तबलीगी जमात के सदस्यों पर लगे सभी आपराधिक मुकदमों को ख़ारिज किया
अब जबकि तबलीगी जमात के लोगों पर सरकारों व प्रशासन द्वारा कोरोना वायरस फैलाने जैसे सारे आरोप सुप्रीम कोर्ट समेत कई राज्यों के हाईकोर्ट ने सिरे से खारिज कर दिए हैं तब वाजिब सवाल बनता है कि कोरोना व लॉकडाउन की संकटपूर्ण स्थितियों में भी नफरती सांप्रदायिक उन्माद संगठित कर पूरे समाज को आतंकित और विभाजित करने का अमानवीय कृत्य करनेवालों के ख़िलाफ़ क्या होना चाहिए?
अनिल अंशुमन
27 Dec 2020
तबलीगी जमात

मुंबई हाईकोर्ट के बाद अब पटना हाईकोर्ट ने भी तबलीगी जमात के विदेशी नागरिकों के खिलाफ चल रहे सभी आपराधिक मामलों को रद्द कर जमात के 18 सदस्यों को उनके देश भेजने का निर्देश दिया है।

जस्टिस राजीव रंजन प्रसाद की एकल पीठ ने मो. एनामुल हुसैन व अन्य तथा मो. रियाजुद्दीन ए अन्य की ओर से दायर रिट याचिका को निष्पादित करते हुए यह आदेश दिया है।

इसका सबसे अहम पहलू ये है कि अपने 68 पन्नों के फैसले में जज महोदय ने विदेशी नागरिकता कानून की विस्तार से व्याख्या करते हुए कहा है कि इन विदेशी नागरिकों के विरुद्ध कोई आपराधिक मामला नहीं बनता है। कोर्ट ने इस मामले में निचली अदालत के आदेश को भी रद्द करने के साथ साथ पुलिस द्वारा जमात के लोगों पर लगाए गए सभी आपराधिक मुकदमों की कार्यवाहियों को भी समाप्त करने का आदेश दिया है।

खबरों के अनुसार झारखंड में भी हाईकोर्ट ने भी यहाँ आकर लॉकडाउन में फंस गए जमात के सभी गिरफ्तार सदस्यों को निजी मुचलके पर जमानत दे दी थी। जबकि सितंबर माह में निचली अदालत ने पुलिस द्वारा कोरोना फैलाने के आरोप में गिरफ्तार जमात के सदस्यों पर कोर्ट में आरोप साबित करने पर नाकाम रहने तथा आरोपितों द्वारा तीन माह क़ैद की अवधि पूरा कर लिए जाने के कारण कोर्ट ने सबको रिहा कर दिया। राजधानी की मीडिया और स्थानीय भाजपा नेताओं ने रिहा होने वाले तीन दम्पतियों की महिलाओं के गर्भवती होने को ‘ क्वारंटाइन में ऐय्याशी ’का परिणाम बताकर राज्य सरकार के खिलाफ काफी हो हल्ला मचाया था। सनद रहे कि गृह मंत्रालय व दिल्ली सरकार द्वारा दिल्ली के निजामुद्दीन और बिहार– झारखंड में पहुंचे जमात के विदेशी सदस्यों पर कोरोना वायरस फैलाने की साजिश करने, वीज़ा उल्लंघन और लॉकडाउन नियमों का उल्लंघन कर छुपकर रहने व धर्म प्रचार करने जैसे कई संगीन आरोप के तहत मुकदमे लगाकर ब्लैक लिस्टेड घोषित कर दिया था। जमात के कई विदेशी सदस्यों को गिरफ्तार कर प्रशासन की कड़ी निगरानी में विशेष क्वारंटाइन शेल्टर में रखा गया था।

सबको यह भी सनद ही होगा कि किस तरह से केंद्र सरकार के ही इशारे पर गोदी मीडिया ने तबलीगी जमात के लोगों पर‘तबलीगी कोरोना बम हैं …. कोरोना का तबलीगी जमात कनेक्शन  ... ’ जैसे सनसनीखेज डरावने आरोप लगाकर राष्ट्र का खलनायक साबित करने का कुत्सित अभियान चलाया था। लॉकडाउन में फंसकर जहां तहां रहने को मजबूर जमात के विदेशी सदस्यों को ‘ छुप कर रहने ’और कोरोना फैलाने का सुनियोजित साज़िशकर्ता बताया गया। बिहार व झारखंड में तो सबों को गिरफ्तार कर जबरन कोरोना जांच कराई गयी और क्वारंटाइन वार्डों में जैसे तैसे ठूंसकर रखने के बाद कइयों को जेल में डाल दिया गया। कई दिनों तक प्रदेश के विभिन्न इलाकों की सड़कों पर ‘ कोरोना वायरस के थूक वाले नोट ’ पाये जाने की खबरें मीडिया ने बढ़ चढ़ कर सुर्खियों में परोसा।

राजधानी रांची के कई नामचीन पत्रकारों ने तो सोशल मीडिया में बाजाप्ता जमात विरोधी अनर्गल प्रलाप अभियान चलाकर समर्थन नहीं करने वालों को देशविरोधी करार दिया। रांची के ही मुस्लिम बाहुल्य हिन्दपीढ़ी मुहल्ले को तो स्थानीय प्रशासन व मीडिया ने कोरोना वायरस प्रसार का सबसे खतरनाक हॉटस्पॉट घोषित कर कई हफ्तों तक पुलिस छवानी में तब्दील रखा। मुहल्लावासियों द्वारा प्रतिवाद किए जाने पर स्थानीय भाजपा विधायक ने वहाँ सेना तैनाती की मांग तक कर डाली थी। केंद्र में काबिज सत्ताधारी दल प्रायोजित मीडिया दुष्प्रचार के तहत पूरे मुस्लिम समाज को कोरोना संक्रमण के लिए सबसे बड़ा ज़िम्मेवार ठहराकर इस कदर नफरती प्रचार फैलाया गया कि बिहार – झारखंड से लेकर देश के कई हिस्सों में हिंदुओं ने मुस्लिम दुकानदार – व्यवसायियों से समान लेना बंद कर दिया। कई जगहों के हिन्दू मुहल्ले - कॉलनियों में तो ठेला लेकर सब्जी – फल बेचनेवालों के नाम – धर्म पूछकर ही आने की अनुमति दी जाती थी।

रांची स्थित आईसीआई बैंक की स्थानीय शाखा अधिकारी ने तो राजधानी के चर्चित राजनीतिक सामाजिक कार्यकर्त्ता नदीम खान को कोरोना फैलनेवाले समुदाय के होने का आरोप लगाकर बैंक से बाहर जाने कह दिया।

बिहार की गोदी मीडिया ने तो तबलीगी जमात वालों पर नेपाल तक में कोरोना फैलाने का साजिशकर्ता बता डाला। प्रदेश के अधिकांश मुस्लिम बाहुल्य इलाकों को महामारी संक्रमण का सबसे संदेहास्पद स्पॉट घोषित कर देना आम प्रचालन बना दिया गया था। आलम यह था कि हर मुसलमान व्यापक हिंदुओं की नज़र में कोरोना का संदेहास्पद हो चला था।

अब जबकि तबलीगी जमात के लोगों पर सरकारों व प्रशासन द्वारा कोरोना वायरस फैलाने जैसे सारे आरोप सुप्रीम कोर्ट समेत कई राज्यों के हाईकोर्ट ने सिरे से खारिज करते हुए इस प्रकरण में प्रायोजित दुष्प्रचार के लिए मीडिया की भूमिका पर भी ऐतराज जताया है .... वाजिब सवाल बनता है कि कोरोना व लॉकडाउन की संकटपूर्ण स्थितियों में भी नफरती सांप्रदायिक उन्माद संगठित कर पूरे समाज को आतंकित और विभाजित करने का अमानवीय कृत्य करनेवालों के खिलाफ क्या होना चाहिए? पूर्व निर्धारित और घोषित धार्मिक कार्यक्रमों के तहत भारत पहुंचे तबलीगी जमात के विदेशी मेहमानों को जिस अपमान, सामाजिक लांछना और निर्दोष होकर भी अपराधी की भांति जेल यातना का समाना करना पड़ा, इसका ज़िम्मेवार कौन?

इस संदर्भ में इंसाफ मंच के राष्ट्रीय संयोजक मोहम्मद सलीम जी के अनुसार देश के सभी सेक्युलर , वामपंथी और सामाजिक सद्भाव – एकता में यकीन करनेवाली ताक़तों ने तो पूरे मामले को मोदी शासन प्रायोजित बताकर शुरुआत से ही मुखर विरोध किया। लॉकडाउन बंदी और कोरोना के बढ़ते संक्रमण की जटिल स्थितियों के कारण तात्कालिक रूप से सड़कों का प्रतिवाद नहीं हो सका। लेकिन अब जबकि सारा मामला खुलकर सामने आ गया है और कोरोना संकट का सारा ठीकरा मुस्लिम समाज पर फोड़कर आपदा को क्षुद्र सांप्रदायिक राजनीति का अवसर बनानेवालों की सलियत भी सामने आ चुकी है ,जनता के बीच ही सबका राजनीतिक हिसाब मांगा जाएगा। साथ ही व्यापक जन जागरण अभियान चलाकर लोगों को आनेवाले दिनों में सांप्रदायिक कुचक्रों के प्रति सचेत भी बनाया जाएगा।

झारखंड एआईपीएफ के ज़ेवियर कुजूर का कहना है कि झारखंड में उन सभी कानूनी प्रावधानों का अध्ययन किया जा रहा है जिनसे तबलीगी जमात के नाम पर उग्र सांप्रदीयकता फैलाकर समाज में नफरत का जहर घोलने वालों के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़कर सज़ा दिलाई जाय। साथ ही इस पूरे प्रकरण में मीडिया के जिन लोगों ने भी अखबारों और सोशल मीडिया में फेक नफरती दुष्प्रचार चलाया है, उन्हें चिह्नित कर सरे समाज नींदित किया जाएगा ....!

tabligi jamat
Bihar
Jharkhand
Patna High Court
Coronavirus
Lockdown
Religion Politics
Muslims

Related Stories

बदायूं : मुस्लिम युवक के टॉर्चर को लेकर यूपी पुलिस पर फिर उठे सवाल

बिहार: पांच लोगों की हत्या या आत्महत्या? क़र्ज़ में डूबा था परिवार

बिहार : जीएनएम छात्राएं हॉस्टल और पढ़ाई की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन धरने पर

भारत में धार्मिक असहिष्णुता और पूजा-स्थलों पर हमले को लेकर अमेरिकी रिपोर्ट में फिर उठे सवाल

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

बिहारः नदी के कटाव के डर से मानसून से पहले ही घर तोड़कर भागने लगे गांव के लोग

भाजपा के लिए सिर्फ़ वोट बैंक है मुसलमान?... संसद भेजने से करती है परहेज़

मिड डे मिल रसोईया सिर्फ़ 1650 रुपये महीने में काम करने को मजबूर! 

बिहार : दृष्टिबाधित ग़रीब विधवा महिला का भी राशन कार्ड रद्द किया गया

बिहार : नीतीश सरकार के ‘बुलडोज़र राज’ के खिलाफ गरीबों ने खोला मोर्चा!   


बाकी खबरें

  • farmers
    शंभूनाथ शुक्ल
    सरकार औपनिवेशक नीतियां न लादे!
    28 Jul 2021
    संसद का मानसून सत्र हंगामे की भेंट चढ़ता जा रहा है और सरकार किसी भी सर्वमान्य हल की तरफ़ बढ़ने का संकेत नहीं दे रही है। यह सरकार की ज़िद है और लोकतंत्र-विरोधी काम है।
  • p
    कुमुदिनी पति
    मनोरंजन का कारोबार बनाम पॉर्न का बाज़ार
    28 Jul 2021
    आखिर हम कैसे फर्क करें कि राज का धंधा इरोटिका से जुड़ा था या पॉर्न उद्योग से? हम कैसे समझें कि वह अपनी टीम के साथ जो कुछ कर रहा था वह समाज के लिए अस्वस्थ है या नहीं और कानूनी रूप से अपराध की श्रेणी…
  • पीपल्स डिस्पैच
    म्यांमार में 4,800 खदान कर्मचारियों की हड़ताल के छह महीने पूरे
    28 Jul 2021
    माइनिंग वर्कर्स फ़ेडरेशन ऑफ़ म्यांमार से जुड़े ये खनिक फ़रवरी में सैन्य तख़्तापलट के बाद से हड़ताल पर हैं। उनकी लंबी हड़ताल ने सैन्य शासन के राजस्व को प्रभावित किया है।
  • neoliberalism
    अजय गुदावर्ती
    नवउदारवाद के तीन ऐसे रास्ते जिन्होंने नए भारत में राजनीति को बदल दिया है
    28 Jul 2021
    आज के नेता विचारधारा की परवाह नहीं करते हैं और एक पार्टी से दूसरी पार्टी में आते-जाते रहते हैं, और फिर भी वे जनता के हितों का प्रतिनिधित्व करने का दावा करते हैं। आख़िर ऐसा क्यों है?
  • सफाइकर्मचारियों की हड़ताल
    अजीत सिंह
    उत्तराखंड में स्वच्छता के सिपाही सड़कों पर, सफाई व्यवस्था चौपट; भाजपा मांगों से छुड़ा रही पीछा
    28 Jul 2021
    उत्तराखंड राज्य के नगर निगमों, नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों में स्वच्छता और सफ़ाई व्यवस्था में लगे हजारों की तादाद में सफ़ाईकर्मी अपना काम छोड़ कर हड़ताल पर हैं।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License