NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
बिहार : लचर स्वास्थ्य व्यवस्था के ख़िलाफ़ जन अभियान
केंद्र व बिहार सरकारों की उक्त अकर्मण्य और जन स्वास्थ्य के प्रति लापरवाह रवैये के खिलाफ व्यापक जन दबाव बनाने के लिए 22 जून से भाकपा माले ने पूरे बिहार में जन स्वास्थ्य अभियान शुरू कर दिया है।
अनिल अंशुमन
24 Jun 2021
बिहार : लचर स्वास्थ्य व्यवस्था के ख़िलाफ़ जन अभियान

यदि गांव, पंचायत से लेकर प्रखंड और जिला स्तर तक पर समुचित इलाज़, दवा, ऑक्सिजन, बेड, एम्बुलेंस के साथ साथ डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मियों की उपलब्धता होती तो कईयों की जानें बचायी जा सकती थी। लेकिन केंद्र और बिहार की सरकारें अपनी विफलताओं से कोई सबक लेकर सरकारी नियंत्रण में नीचे से लेकर ऊपर तक की लचर स्वास्थय व्यवस्था ठीक करने की बजाय मौतों के आंकड़े छुपाने और वैक्सीन फर्जीवाड़े में ही लिप्त दीख रही है।                                                 

केंद्र व बिहार सरकारों की उक्त अकर्मण्य और जन स्वास्थ्य के प्रति चालू लापरवाह रवैये के खिलाफ व्यापक जन दबाव खड़ा करने के लिए 22 जून से भाकपा माले ने पूरे बिहार में जन स्वास्थ्य अभियान शुरू कर दिया है। जिसके प्रथम चरण के तहत प्रदेश के सभी प्राथमिक जन स्वास्थ्य केन्द्रों तथा सुपर स्पेशलिटी अस्पतालों के समक्ष धरना प्रदर्शन कर लोगों को जन स्वस्थ्य के मौलिक अधिकार के लिए सक्रीय बनाया जा रहा है। साथ ही आसन्न तीसरी लहर की आपदा के प्रति स्वास्थ्य तैयारियों को लेकर सतर्क किया जा रहा है।

बिहार के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों व अस्पतालों के समक्ष प्रदर्शनकारियों ने क्षोभ जताते हुए सरकार पर आरोप लगाया है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन समेत दुनिया भर के तमाम स्वस्थ्य विशेषज्ञ लगातार कोरोना महामारी की तीसरी लहर के आने की चेतावनी देते हुए अभी से उसके मुकाबले की तैयारी करने पर जोर दे रहें हैं। लेकिन तब भी केंद्र और बिहार की सरकारें वैक्सिनेसन और महामारी से मुकाबले की आधी-अधूरी तैयारियों को लेकर जनता में लगातार झूठ का प्रचार जारी रखे हुए हैं। जबकि कोविड महामारी काल ने इन सभी सरकारों की लचर स्वास्थ्य व्यवस्था की सारी पोल खोल कर दिखला दिया है कि किस तरह से लाखों लोग कोविड महामारी के संक्रमण से भी अधिक लोग सिर्फ इसलिए तड़प तड़प कर मर गए क्योंकि उन्हें  समय पर आवश्यक इलाज, ऑक्सिजन, बेड, दवा और एम्बुलेंस नहीं मिल पाया। इन सभी मौतों के लिए सीधे तौर पर सरकार जिम्मेदार है जो अभी भी पंचायतों व प्रखंडों के बंद पड़े सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों को नहीं चालू कर रही है। 

ऐसे में हर मौत को गिनने और गांव, पंचायत व प्रखंडों के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों को सभी ज़रूरी स्वस्थ्य उपकरणों, आवश्यक दवाओं और जांच सुविधाओं के साथ साथ इन सभी केन्द्रों में डॉक्टर, नर्स व अन्य स्वास्थ्यकर्मियों की उपलब्धता की गारंटी के लिए सरकार पर व्यापक जनदबाव आवश्यक हो गया है। 

उत्तर बिहार के प्रमुख नगर केंद्र दरभंगा स्थित दरभंगा मेडिकल कॉलेज अस्पताल की बदहाली तथा वहां सरकार घोषित सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के नहीं चालू किये जाने के खिलाफ विगत कई महीनों से नागरिक अभियान जारी है। 22 जून को भी डीएमसीएच की जर्जर स्थिति के प्रति बिहार सरकार और स्थानीय भाजपा सांसदों और विधायकों के जारी उपेक्षापूर्ण रवैये के खिलाफ एक बार फिर प्रतिवाद किया गया। जिसके माध्यम से केन्द्रीय मंत्री अश्विनी चौबे व भाजपा सांसदों द्वारा यहां दिखावे का कुछ निर्माण कार्य किये जाने और वहां फोटो खिंचाकर लोगों को गुमराह करने का आरोप भी लगाया गया। सनद हो कि 16 जून को भी दरभंगा शहर के नागरिक समाज और भाकपा माले ने पूरे नगर में नागरिक आक्रोश मार्च निकाल कर बिहार सरकार को इस स्वास्थ्य संस्थान को अविलम्ब शुरू करने के लिए एक महीने का अल्टीमेटम दिया है। सरकार की पूर्व घोषणा के तहत डीएमसीएच स्थित इस सुपर स्पेशिलिटी अस्पताल को 2018 में ही चालू हो जाना था लेकिन 2021 में भी यह तैयार नहीं किया जा सका है। 

डीएमसीएच बचाओ तथा सुपर स्पेशलिटी अस्पताल ज़ल्द चालू करो नागरिक अभियान का नेतृत्व कर रहे भाकपा माले पोलित ब्यूरो सदस्य व उत्तर बिहार प्रभारी धीरेन्द्र झा ने सरकार पर आरोप लगाया है कि महामारी की दूसरी लहर के समय यदि यह अस्पताल चालू स्थिति में रहता तो समय पर सही इलाज के अभाव में इस इलाके के लोगों की जानें नहीं जातीं। यहां के बदहाल हालात केंद्र की  मोदी और बिहार की डबल इंजन वाली नितीश कुमार सरकार की जनता के स्वास्थ्य के प्रति संवेदनहीन नज़रिए को दिखलाने के लिए काफी है। 

कोरोना की तीसरी लहर से निपटने की चुनौतियों के मद्दे नज़र बिहार सरकार द्वारा दिखावे की तैयारी और इस मामले को लेकर जनता से लगातार झूठ बोलने के खिलाफ 21 जून को बिहार भाकपा माले विधायकों ने  पटना में बैठक कर एक स्वर से सरकार की फिर से संवेदनहीन आचरण की तीखी निंदा की है। माले विधायकों ने मोदी सरकार द्वारा कोविड काल में असमय मौत के शिकार लोगों के परिजनों को मुआवजा देने से इन्कार करने को अमानवीय बताते हुए प्रति परिवार 4 लाख मुआवजा देकर उनके भविष्य के जीवन यापन की गारंटी की मांग की है। समय रहते ज़ल्द से ज़ल्द नीचे से ऊपर तक की ध्वस्त स्वास्थ्य व्यवस्था को दुरुस्त करे। साथ ही जन स्वास्थय से जुड़े सभी कार्यों को निजी एजेंसियों को देने की बजाय सरकारी नियंत्रण में करने की गारंटी हो। क्योंकि सरकार विधायक मद के पैसों से ख़रीदे गए सभी एम्बुलेंसों को वह एनजीओ के हवाले कर विधायकों के क्षेत्र से जैसे तैसे बाहर चलवा रही है। उन्होंने इस बाबत सरकार से पूछा भी है कि वह क्यों इन एम्बुलेंसों नहीं को चलाना चाहती है। 

सनद यह भी रहे कि कोवड संक्रमितों कि मौत के आंकड़ों और वैक्सीनेशन में हो रही गड़बड़ियों को लेकर सरकार के दावों की मीडिया भंडाफोड़ से बिहार सरकार की काफी किरकिरी हुई और इस मामले पर विपक्ष ने भी सरकार को काफी घेरा। लेकिन कोरोना की संभावित तीसरी लहर आपदा को देखते हुए निचले स्तर पर स्वास्थय व्यवस्था को समय रहते चुस्त दुरुस्त करने के मामले में यह सवाल उठना बिलकुल ही मौजू है। बिहार सरकार की जन स्वास्थय को लेकर कोई गंभीरता अभी तक नज़र नहीं आ रही है। जिसका प्रत्यक्ष उदाहरण राज्य में जारी कोविड वैक्सीनेशन प्रक्रिया की अराजक स्थिति को देखकर ही समझा जा सकता है। ऐसे में जन स्वास्थय को लेकर ज़मीनी अभियान का होना महत्व रखता है।     

Bihar
Bihar Health Care Facilities
COVID-19
Nitish Kumar
Nitish Kumar Government
CPIML

Related Stories

बिहार: पांच लोगों की हत्या या आत्महत्या? क़र्ज़ में डूबा था परिवार

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना ने फिर पकड़ी रफ़्तार, 24 घंटों में 4,518 दर्ज़ किए गए 

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 3,962 नए मामले, 26 लोगों की मौत

बिहार : जीएनएम छात्राएं हॉस्टल और पढ़ाई की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन धरने पर

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

आर्थिक रिकवरी के वहम का शिकार है मोदी सरकार

कोरोना अपडेट: देश में 84 दिन बाद 4 हज़ार से ज़्यादा नए मामले दर्ज 

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना के मामलों में 35 फ़ीसदी की बढ़ोतरी, 24 घंटों में दर्ज हुए 3,712 मामले 

बिहारः नदी के कटाव के डर से मानसून से पहले ही घर तोड़कर भागने लगे गांव के लोग

कोरोना अपडेट: देश में नए मामलों में करीब 16 फ़ीसदी की गिरावट


बाकी खबरें

  • modi
    अनिल जैन
    खरी-खरी: मोदी बोलते वक्त भूल जाते हैं कि वे प्रधानमंत्री भी हैं!
    22 Feb 2022
    दरअसल प्रधानमंत्री के ये निम्न स्तरीय बयान एक तरह से उनकी बौखलाहट की झलक दिखा रहे हैं। उन्हें एहसास हो गया है कि पांचों राज्यों में जनता उनकी पार्टी को बुरी तरह नकार रही है।
  • Rajasthan
    सोनिया यादव
    राजस्थान: अलग कृषि बजट किसानों के संघर्ष की जीत है या फिर चुनावी हथियार?
    22 Feb 2022
    किसानों पर कर्ज़ का बढ़ता बोझ और उसकी वसूली के लिए बैंकों का नोटिस, जमीनों की नीलामी इस वक्त राज्य में एक बड़ा मुद्दा बना हुआ है। ऐसे में गहलोत सरकार 2023 केे विधानसभा चुनावों को देखते हुए कोई जोखिम…
  • up elections
    रवि शंकर दुबे
    यूपी चुनाव, चौथा चरण: केंद्रीय मंत्री समेत दांव पर कई नेताओं की प्रतिष्ठा
    22 Feb 2022
    उत्तर प्रदेश चुनाव के चौथे चरण में 624 प्रत्याशियों का भाग्य तय होगा, साथ ही भारतीय जनता पार्टी समेत समाजवादी पार्टी की प्रतिष्ठा भी दांव पर है। एक ओर जहां भाजपा अपना पुराना प्रदर्शन दोहराना चाहेगी,…
  • uttar pradesh
    एम.ओबैद
    यूपी चुनाव : योगी काल में नहीं थमा 'इलाज के अभाव में मौत' का सिलसिला
    22 Feb 2022
    पिछले साल इलाहाबाद हाईकोर्ट ने योगी सरकार को फटकार लगाते हुए कहा था कि "वर्तमान में प्रदेश में चिकित्सा सुविधा बेहद नाज़ुक और कमज़ोर है। यह आम दिनों में भी जनता की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त…
  • covid
    टी ललिता
    महामारी के मद्देनजर कामगार वर्ग की ज़रूरतों के अनुरूप शहरों की योजना में बदलाव की आवश्यकता  
    22 Feb 2022
    दूसरे कोविड-19 लहर के दौरान सरकार के कुप्रबंधन ने शहरी नियोजन की खामियों को उजागर करके रख दिया है, जिसने हमेशा ही श्रमिकों की जरूरतों की अनदेखी की है। 
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License