NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
अपराध
उत्पीड़न
भारत
राजनीति
बिहार: 8 साल की मासूम के साथ बलात्कार और हत्या, फिर उठे ‘सुशासन’ पर सवाल
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बार-बार ये दावा करते हैं कि आरजेडी के लालू-राबड़ी शासनकाल के मुक़ाबले उनकी सरकार में अपराध कम हुए हैं। हालांकि, नीतीश कुमार के दावों के इतर बिहार पुलिस के आंकड़े कुछ और ही गवाही देते हैं।
सोनिया यादव
21 Mar 2022
bihar rape
Image courtesy : Feminism in India

होली के उल्लास के बीच बिहार के बांका जिले में एक 8 साल की बच्ची के साथ कथित रेप और हत्या का मामला सामने आया है। पुलिस के मुताबिक बच्ची शनिवार, 19 मार्च को अपने छोटे भाई और दोस्तों के साथ घर के बाहर होली खेल रही थी, तभी कोई उसे उठाकर ले गया। उसके साथ रेप किया, आंखें फोड़ी और हत्या कर उसके शव को एक नाले में बालू से दबा दिया। इस मामले में फिलहाल पुलिस ने 4 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, बाकी की तलाश जारी है।

बता दें कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बार-बार ये दावा करते हैं कि लालू-राबड़ी के शासनकाल के मुक़ाबले उनकी सरकार में अपराध कम हुए हैं। हालांकि, नीतीश कुमार के दावों के इतर बिहार पुलिस के आंकड़े कुछ और ही गवाही देते हैं। बिहार पुलिस की आधिकारिक वेबसाइट पर 2004 (लालू काल) से लेकर 2019 (नीतीश काल) तक के आपराधिक आंकड़े मौजूद हैं। इन आंकड़ों के मुताबिक बिहार में लालू यादव की सरकार के आखिरी साल 2004 में अपराध के कुल 1,15,216 मामले दर्ज हुए थे, जबकि नीतीश कुमार की सरकार में 15 बाद 2019 में अपराध के आंकड़े घटने की बजाय (जैसा कि उनके द्वारा दावा किया जाता है) बढ़कर 2,69,096 हो गए, यानी इस दौरान दोगुने से भी ज्यादा मामलों में बढ़ोत्तरी हुई है।

क्या है पूरा मामला?

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह घटना बांका जिले के चांदन थाना क्षेत्र की है। यहां के वार्ड नंबर-5 में रहने वाले सभी लोग शनिवार यानी 19 मार्च को होली मना रहे थे। बच्ची अपने 5 साल के भाई के साथ घर से होली खेलने बाहर निकली। इसी दौरान कोई उसे उठा ले गया और उसके साथ कथित तौर पर रेप किया गया। मृत पीड़िता के 5 साल के छोटे भाई ने घरवालों को इसकी जानकारी दी, जिसके बाद घर के लोगों ने तलाश शुरू की।

दैनिक भास्कर की खबर के मुताबिक बच्ची की तलाश करते हुए जब परिवार वाले शनिवार की रात करीब 11:30 बजे चांदन रेलवे स्टेशन के पास पहुंचे, तो वहां नाले के ऊपर 2-4 कुत्ते घूम रहे थे। शक होने पर नाले में घुसकर देखा तो बालू के नीचे लाश दिखाई दी। बालू से लाश को ढंकने की कोशिश भी की गई थी। लाश बाहर निकाली तो परिजन पहचान गए। पीड़िता की आंखें भी फोड़ दी गई थी। शव पर कपड़े नहीं थे। लाश देखते ही परिजन चीखने लगे। परिवार के मुताबिक लड़की के साथ सामूहिक दुष्कर्म हुआ है। वारदात की जानकारी मिलते ही चांदन पुलिस दल बल के साथ घटनास्थल पर पहुंची। लाश को अपने कब्जे में ले लिया।

नाराज़ स्थानीय लोगों ने किया प्रदर्शन

इस घटना के विरोध में सैकड़ों महिलाओं और बच्चियों ने रविवार, 21 मार्च को दोपहर चांदन देवघर मुख्य सड़क मार्ग को चांदन बस स्टैंड के समीप करीब दो घंटे तक जाम कर प्रदर्शन किया। गुस्साए लोगों ने नारेबाजी करते हुए दोषियों को बिना देरी के फांसी देने की मांग की। बाद में पुलिस प्रशासन के द्वारा कड़ी कार्रवाई का आश्वासन देते हुए नाराज लोगों को सड़क से हटने के लिये मनाया गया।

बच्ची के चाचा ने मीडिया को घटना की जानकारी देते हुए बताया कि बच्ची जब घर नहीं लौटी तो परिवार के सभी लोग उसे खोजने निकले। इसी दौरान पता लगा कि पड़ोस के मंदिर के पास से कोई उसे लाल टोटो (इलेक्ट्रिक रिक्शे) में बिठाकर ले गया है। इसके बाद हम लोग पूरे क्षेत्र में बच्ची को ढूंढने लगे, पुलिस-प्रशासन को इसकी जानकारी दी।

चाचा के अनुसार, "पुलिस ने कहा कि आप जाकर पहले बच्ची को घर में और आस-पड़ोस में खोजिए, फिर हम कार्रवाई करेंगे। इसके बाद बच्ची को खोजते हुए हमें सुराग मिला कि जिस लाल टोटो में बच्ची बैठकर गई थी, वह पड़ोस के एक गांव का है। हम लोग वहां गए और उसके ड्राइवर डोमन पासवान को हमने पकड़ा तो उसने बताया कि एक व्यक्ति बच्ची को लेकर टोटो पर पीछे बैठा था, मैंने उससे कहा कि बच्ची को नीचे उतारो, लेकिन वह बोला कि तुम चलो कोई दिक्कत नहीं है फिर वह व्यक्ति आगे जाकर बच्ची के साथ उतर गया।"

पुलिस का क्या कहना है?

इस मामले में बांका पुलिस ने घटनास्थल पर पहुंचकर शव को अपने कब्जे में लिया और पोस्टमार्टम के लिए भेजा। परिजनों के कहने पर शक के आधार पर 4 लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है और जिनसे पूछताछ की जा रही है। इस घटना में टोटो के मालिक सागर सोनी का हाथ होने की भी बात कही जा रही है, ड्राइवर के पकड़े जाने के बाद से वह फरार भी है। पुलिस उसे तलाश कर रही है।

इस संबंध में डीएसपी प्रेमचंद सिंह ने मीडिया को बताया, “घटना की जानकारी मिलने के बाद मैं खुद इस पूरे मामले पर नजर रखे हुए हूं। इस मामले में चार लोगों को हिरासत में ले लिया गया है। जल्द सभी आरोपियों की गिरफ्तारी कर ली जाएगी। किसी भी आरोपी को नहीं बख्शा जाएगा। मृतक बच्ची के परिजनों की लिखित शिकायत पर मामला दर्ज कर लिया गया है।"

सुशासन नहीं कुशासन है नीतीश सरकार में!

महिला अधिकार कार्यकरता मीनाक्षी निवारी बताती हैं कि बिहार में महिलाओं- बच्चियों के साथ शोषण-उत्पीड़न रेप जैसा घटनाएं आम हो गई हैं। कोई खबर सुर्खियों में तभी बड़ी बनती है, जब पीड़िता की मौत हो जाए। ज्यादातर मामले अभी भी दबा दिए जाते हैं। अभी कुछ हफ्तों पहले ही पंचायत ने महज़ 70 हज़ार रुपए में मामले को दबाने की वकीलत की थी।

मीनाक्षी ने न्यूज़क्लिक से बातचीत में कहा, “साफ बात ये है कि महिलाओं के ख़िलाफ़ बिहार में लगातार बढ़ते मामले ये दिखा रहे हैं कि नीतीश सरकार अब यूपी की योगी सरकार के नक्शे क़दम पर चल रही है जहां अपराधियों को सत्ता का संरक्षण हासिल है। हाल ही में वैशाली मामले में भी थाने के स्तर पर मामले को दबाया गया था जबकि वर्मा कमीशन मे पुलिस प्रशासन की जवाबदेही तय की गई है। साफ़ है कि बीजेपी की पितृसत्तात्मक राजनीति बिहार के प्रशासनिक अमले में घुस गई है सुशासन नहीं कुशासन है नीतीश सरकार में।"

वैसे अपराध के मामलों में बिहार देश में 23वें नंबर पर आता है। लेकिन एनसीआरबी का डेटा कहता है कि 2019 में देश भर में हुए अपराधों में से 5.2 फीसदी अपराध बिहार में दर्ज हुए। इस लिस्ट में उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, केरल, गुजरात, मध्यप्रदेश, दिल्ली और राजस्थान के बाद बिहार का ही नंबर आता है। इस लिहाज़ से नीतीश कुमार के विकास और महिला सुरक्षा का दावा हकीकत से कोसों दूर ही दिखाई पड़ता है।

साल 2005 से नीतीश सरकार के चौथी दफा सत्तासीन होने के बाद राज्य को पहली महिला उपमुख्यमंत्री रेणु देवी मिली हैं, लेकिन ये एक स्वर्णिम लगने वाला ऐतिहासिक तथ्य, राज्य में महिलाओं के साथ बढ़ती बर्बर हिंसा पर लगाम नहीं लगा रहा है। बीते 6 महीनों की ही बात करें तो अक्टूबर 2020 में वैशाली की एक 20 साल की युवती को छेड़खानी का विरोध करने पर ज़िंदा जला दिया गया था, जिसकी मौत हो गई। वहीं मधुबनी की एक मूक बधिर नाबालिग लड़की के साथ सामूहिक दुष्कर्म करके उसकी दोनों आंखों को फोड़ दिया गया था।

इसके अलावा मुज़फ्फरपुर में भी 12 साल की एक बच्ची को दुष्कर्म करके जलाने की घटना 12 जनवरी को सामने आई थी। इसके बाद फरवरी महीने में पूर्वी चंपारण ज़िले में 'दूसरा हाथरस' दोहराया गया। यहां 12 साल की एक नेपाली मूल की बच्ची के साथ पहले कथित तौर पर सामूहिक दुष्कर्म किया गया और फिर हत्या करके उसके शव को जबरन जला दिया गया। फिर गया जिले की 6 साल की मासूम बच्ची के साथ हैवानियत का मामला सामने आया। वहीं महज़ दो हफ्ते पहले ही 6 नाबालिग लड़कों ने आठ साल की 2 बच्चियों से गैंगरेप की घटना सामने आई थी।

बिहार पुलिस के आंकड़े देखें तो साल 2011 में दुष्कर्म के 934 मामले सामने आए थे जो साल 2019 में 1450 हो गए। नवंबर 2020 तक बिहार पुलिस की वेबसाइट के मुताबिक 1330 मामले दुष्कर्म के दर्ज हुए थे। वहीं स्टेट क्राइम रिकार्ड ब्यूरो की रिपोर्ट 'क्राइम इन बिहार 2019' के मुताबिक, साल 2019 में 730 मामले दुष्कर्म के रिपोर्ट हुए।

महिला हिंसा के मामलों में इज़ाफ़ा

इसमें सिर्फ़ एक मामले में 18 साल से कम उम्र की बच्ची का दुष्कर्म रिपोर्ट किया गया है। बाकी सभी 729 मामलों में 'एडल्ट विक्टम' लिखा है। जिसमें 18 से 30 साल की महिलाओं के दुष्कर्म से जुड़े 558 मामले, 30 से 45 साल में 149 मामले, 45 से 60 साल में 22 मामले और 60 साल से ऊपर की महिलाओं के साथ शून्य मामला दिखाया गया है। इस रिपोर्ट में लिखा है कि कुल 730 में से 718 मामलों में दुष्कर्म के आरोपी जान पहचान के ही थे।

गौरतलब है कि तमाम दावों और योजनाओं के बावजूद एनसीआरबी के आंकड़ों की मानें तो बिहार में महिला हिंसा में पिछले कुछ सालों में इजाफा ही हुआ है। साल 2018 की तुलना अगर साल 2019 के आंकड़ों से करें तो महिलाओं के प्रति हिंसा में 9.8 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। साल 2018 में महिला हिंसा की 16920 घटनाएं हुई थीं जो साल 2019 में बढ़कर 18587 हो गईं। इस दौरान सरकार महिला सुरक्षा के तमाम दावे जरूर करती रही लेकिन उसे जमीन पर नहीं उतार सकी। नीतीश बाबू भले ही सुशासन का ढोल पीट कर राज्य में ‘सब ठीक है’ का दावा करते रहे हों लेकिन बिहार में एक के बाद एक हो रही हत्याओं और बलात्कार की घटनाओं ने कानून व्यवस्था और महिला सुरक्षा को लेकर तमाम सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।

इसे भी पढ़ें: बिहार में न विकास है और न ही आपराधिक मामलों पर लगाम!

Bihar
Rape and murder 8-year old girl
rape case
minor girl raped
bihar police
Nitish Kumar
crimes against women
violence against women
Women safety and security
Minor girl case

Related Stories

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

तेलंगाना एनकाउंटर की गुत्थी तो सुलझ गई लेकिन अब दोषियों पर कार्रवाई कब होगी?

चंदौली पहुंचे अखिलेश, बोले- निशा यादव का क़त्ल करने वाले ख़ाकी वालों पर कब चलेगा बुलडोज़र?

यूपी : महिलाओं के ख़िलाफ़ बढ़ती हिंसा के विरोध में एकजुट हुए महिला संगठन

पिता के यौन शोषण का शिकार हुई बिटिया, शुरुआत में पुलिस ने नहीं की कोई मदद, ख़ुद बनाना पड़ा वीडियो

बिहार: आख़िर कब बंद होगा औरतों की अस्मिता की क़ीमत लगाने का सिलसिला?

यूपी: अयोध्या में चरमराई क़ानून व्यवस्था, कहीं मासूम से बलात्कार तो कहीं युवक की पीट-पीट कर हत्या

मध्य प्रदेश : मर्दों के झुंड ने खुलेआम आदिवासी लड़कियों के साथ की बदतमीज़ी, क़ानून व्यवस्था पर फिर उठे सवाल

चारा घोटाला: सीबीआई अदालत ने डोरंडा कोषागार मामले में लालू प्रसाद को दोषी ठहराया

बिहार: मुज़फ़्फ़रपुर कांड से लेकर गायघाट शेल्टर होम तक दिखती सिस्टम की 'लापरवाही'


बाकी खबरें

  • goa elections
    न्यूज़क्लिक टीम
    ग्राउंड रिपोर्टः गोवा चुनावों में जोड़-तोड़ व हिंदुत्व ख़िलाफ क्या होगा बदलाव
    11 Feb 2022
    ग्राउंड रिपोर्ट में वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह ने गोवा में चल रहे चुनावी समर का आकलन करते हुए जानने की कोशिश की इस बार क्या चल पाएगा हिंदुत्व का नफ़रती कार्ड या जनता के बुनियादी मुद्दों पर होगा मतदान।…
  • Sunderbans
    अयस्कांत दास
    सुंदरबन में अवैध रिसॉर्ट के मालिक की पहचान नहीं कर पा रही ममता सरकार
    11 Feb 2022
    पारिस्थितिक रूप से नाजुक सुंदरबन में कथित तौर पर केंद्र प्रायोजित मनरेगा योजना के धन का इस्तेमाल एक अवैध 'इको-टूरिज्म' रिसॉर्ट के निर्माण में किया गया है।
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    देश में पुलिसकर्मियों की भारी कमी, पांच लाख से ज़्यादा पद रिक्त
    11 Feb 2022
    संयुक्त राष्ट्र के मानक के अनुसार एक लाख व्यक्तियों पर 222 पुलिकर्मी होने चाहिए जबकि भारत में ये आंकड़ा 156 है। वहीं भारत में स्वीकृत पुलिसकर्मियों की संख्या प्रति एक लाख व्यक्तियों पर 195 है।
  • पीपल्स डिस्पैच
    प्यूर्टो रिको में शिक्षकों ने की वेतन और सुविधाओं की मांग के साथ देशव्यापी हड़ताल
    11 Feb 2022
    सरकार ने वेतन में बढ़ोतरी न करने के साथ साथ पेंशन में कटौती भी कर दी है, इसके ख़िलाफ़ शिक्षकों ने देशव्यापी हड़ताल का आह्वान किया है।
  • suicide
    पुलकित कुमार शर्मा
    कोविड के दौरान बेरोजगारी के बोझ से 3 हजार से ज्यादा लोगों ने की आत्महत्या
    11 Feb 2022
    गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने राज्यसभा में लिखित में जवाब दिया है कि एनसीआरबी डाटा के मुताबिक साल 2020 में बेरोजगारी की वजह से 3548 लोगों ने आत्महत्या की।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License