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राजनीति
बिहार: छोटे क़र्ज़ की माफ़ी सहित अन्य मांगों पर स्वयं सहायता समूह की महिलाओं का विधानसभा मार्च
गर्दनीबाग धरनास्थल पर हुई सभा में हजारों महिलाओं की भागीदारी देखने को मिली। जीविका दीदियों को भी सरकार नहीं दे रही न्यूनतम मानदेय, भाकपा-माले के विधायक भी हुए शामिल।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
05 Mar 2021
AIPWA

पटना: माइक्रो फायनेंस संस्थाओं की मनमानी पर रोक लगाने व महिलाओं की कर्ज़ माफ़ी की मांगों के साथ आज पटना में स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं ने अखिल भारतीय प्रगतिशील महिला एसोसिएशन (ऐपवा) व स्वयं सहायता समूह संघर्ष समिति के संयुक्त बैनर के तहत मार्च किया। उनकी बाकी मांगों में ब्याज वसूली पर अविलंब रोक लगाने, कर्ज पर 0 से 4 प्रतिशत की दर से ब्याज लेने, स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को अनिवार्य रूप से रोजगार देकर उत्पादों की खरीद करने, कर्ज के नियमन के लिए राज्य स्तरीय प्राधिकार का गठन करने, जीविका दीदियों को 21,000 रु. देने आदि शामिल थीं।

मार्च का नेतृत्व ऐपवा की महासचिव मीना तिवारी, स्वयं सहायता समूह संघर्ष समिति की समन्वयक रीता वर्णवाल, ऐपवा की बिहार राज्य अध्यक्ष सरोज चैबे, राज्य सचिव शशि यादव, अनिता सिन्हा, सोहिला गुप्ता आदि महिला नेताओं ने किया। गर्दनीबाग धरनास्थल पर हुई सभा को माले विधायक महबूब आलम, सुदामा प्रसाद और संदीप सौरभ ने भी संबोधित किया। माले विधायकों ने अपने संबोधन में कहा कि उनकी मांगों को उन्होंने विधानसभा में भी आज मजबूती से रखा है और आगे भी लड़ाई जारी रहेगी।

इसके पूर्व गेट पब्लिक लाइब्रेरी से अपने हाथों में तख्तियां लिए और नारे लगाती महिलाओं का जत्था 12 बजे दिन में निकला और मार्च करते हुए गर्दनीबाग धरनास्थल पर पहुंचा। वे अपनी मांगों को तख्तियां पर लिखकर लाई थीं। प्रदर्शनकारी महिलाएं अपना ज्ञापन मुख्यमंत्री के नाम लिखकर आई थीं  और उन्हें सौंपना चाहती थीं, लेकिन मुख्यमंत्री से उनका प्रतिनिधिमंडल नहीं मिलाया गया। उन्होंने अपने मांग पत्र के माध्यम से कहा कि बिहार की करोड़ो महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों, माइक्रो फायनेंस वित्त कंपनियों और निजी बैंकों द्वारा स्व-रोजगार के जरिए आत्मनिर्भर बनाने के नाम पर कर्ज दिया गया था, लेकिन लॉकडाउन के दौरान महिलाओं का कारोबार पूरी तरह ठप्प हो गया था। वे इन कर्जों को चुकाने और उन पर ब्याज़ देने पर पूरी तरह असमर्थ थीं। फिर भी उस कठिन दौर में महिलाओं को धमकी देकर कर्ज की वसूली की गई।  जीविका दीदियों को न्यूनतम 21000 रुपया मानदेय देने पर भी सरकार आनाकानी कर रही है। उनकी प्रमुख मांग में आंध्रप्रदेश की सरकार द्वारा अगस्त 2020 में समूहों के 27 हजार करोड़ रुपये की देनदारी का भुगतान कर कर्ज माफ करने की तर्ज पर बिहार सरकार से भी कर्ज माफी की थी।

सभा को संबोधित करते हुए ऐपवा की महासचिव मीना तिवारी ने कहा, “सरकार एक ओर पूंजीपतियों केा बेल आउट पैकेज दे रही है, लॉकडाउन के समय में जब सारे लोग परेशान थे, उस दौर में पूंजपतियों की संपति बढ़ रही थी लेकिन महिलाओं से जबरन कर्ज वसूला गया। यह सरासर अन्याय है। आज कर्ज के जाल में महिलाओं को ऐसे उलझा दिया गया है कि वे कर्ज चुकाने के लिए कर्ज लेती हैं और इस भंवरजाल से उबर नहीं पाती है।” उन्होंने आगे कहा कि कर्ज चुकता न करने के कारण कई महिलाओं को अपना सबकुछ बेचना पड़ा और उनकी आर्थिक स्थिति बद से बदतर होती जा रही है।

AIPWA
Bihar
Women protest
CPI-ML

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