NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
भारत
राजनीति
बिहार: छोटे क़र्ज़ की माफ़ी सहित अन्य मांगों पर स्वयं सहायता समूह की महिलाओं का विधानसभा मार्च
गर्दनीबाग धरनास्थल पर हुई सभा में हजारों महिलाओं की भागीदारी देखने को मिली। जीविका दीदियों को भी सरकार नहीं दे रही न्यूनतम मानदेय, भाकपा-माले के विधायक भी हुए शामिल।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
05 Mar 2021
AIPWA

पटना: माइक्रो फायनेंस संस्थाओं की मनमानी पर रोक लगाने व महिलाओं की कर्ज़ माफ़ी की मांगों के साथ आज पटना में स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं ने अखिल भारतीय प्रगतिशील महिला एसोसिएशन (ऐपवा) व स्वयं सहायता समूह संघर्ष समिति के संयुक्त बैनर के तहत मार्च किया। उनकी बाकी मांगों में ब्याज वसूली पर अविलंब रोक लगाने, कर्ज पर 0 से 4 प्रतिशत की दर से ब्याज लेने, स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को अनिवार्य रूप से रोजगार देकर उत्पादों की खरीद करने, कर्ज के नियमन के लिए राज्य स्तरीय प्राधिकार का गठन करने, जीविका दीदियों को 21,000 रु. देने आदि शामिल थीं।

मार्च का नेतृत्व ऐपवा की महासचिव मीना तिवारी, स्वयं सहायता समूह संघर्ष समिति की समन्वयक रीता वर्णवाल, ऐपवा की बिहार राज्य अध्यक्ष सरोज चैबे, राज्य सचिव शशि यादव, अनिता सिन्हा, सोहिला गुप्ता आदि महिला नेताओं ने किया। गर्दनीबाग धरनास्थल पर हुई सभा को माले विधायक महबूब आलम, सुदामा प्रसाद और संदीप सौरभ ने भी संबोधित किया। माले विधायकों ने अपने संबोधन में कहा कि उनकी मांगों को उन्होंने विधानसभा में भी आज मजबूती से रखा है और आगे भी लड़ाई जारी रहेगी।

इसके पूर्व गेट पब्लिक लाइब्रेरी से अपने हाथों में तख्तियां लिए और नारे लगाती महिलाओं का जत्था 12 बजे दिन में निकला और मार्च करते हुए गर्दनीबाग धरनास्थल पर पहुंचा। वे अपनी मांगों को तख्तियां पर लिखकर लाई थीं। प्रदर्शनकारी महिलाएं अपना ज्ञापन मुख्यमंत्री के नाम लिखकर आई थीं  और उन्हें सौंपना चाहती थीं, लेकिन मुख्यमंत्री से उनका प्रतिनिधिमंडल नहीं मिलाया गया। उन्होंने अपने मांग पत्र के माध्यम से कहा कि बिहार की करोड़ो महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों, माइक्रो फायनेंस वित्त कंपनियों और निजी बैंकों द्वारा स्व-रोजगार के जरिए आत्मनिर्भर बनाने के नाम पर कर्ज दिया गया था, लेकिन लॉकडाउन के दौरान महिलाओं का कारोबार पूरी तरह ठप्प हो गया था। वे इन कर्जों को चुकाने और उन पर ब्याज़ देने पर पूरी तरह असमर्थ थीं। फिर भी उस कठिन दौर में महिलाओं को धमकी देकर कर्ज की वसूली की गई।  जीविका दीदियों को न्यूनतम 21000 रुपया मानदेय देने पर भी सरकार आनाकानी कर रही है। उनकी प्रमुख मांग में आंध्रप्रदेश की सरकार द्वारा अगस्त 2020 में समूहों के 27 हजार करोड़ रुपये की देनदारी का भुगतान कर कर्ज माफ करने की तर्ज पर बिहार सरकार से भी कर्ज माफी की थी।

सभा को संबोधित करते हुए ऐपवा की महासचिव मीना तिवारी ने कहा, “सरकार एक ओर पूंजीपतियों केा बेल आउट पैकेज दे रही है, लॉकडाउन के समय में जब सारे लोग परेशान थे, उस दौर में पूंजपतियों की संपति बढ़ रही थी लेकिन महिलाओं से जबरन कर्ज वसूला गया। यह सरासर अन्याय है। आज कर्ज के जाल में महिलाओं को ऐसे उलझा दिया गया है कि वे कर्ज चुकाने के लिए कर्ज लेती हैं और इस भंवरजाल से उबर नहीं पाती है।” उन्होंने आगे कहा कि कर्ज चुकता न करने के कारण कई महिलाओं को अपना सबकुछ बेचना पड़ा और उनकी आर्थिक स्थिति बद से बदतर होती जा रही है।

AIPWA
Bihar
Women protest
CPI-ML

Related Stories

बिहार : जीएनएम छात्राएं हॉस्टल और पढ़ाई की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन धरने पर

बिहार : नीतीश सरकार के ‘बुलडोज़र राज’ के खिलाफ गरीबों ने खोला मोर्चा!   

पटना : जीएनएम विरोध को लेकर दो नर्सों का तबादला, हॉस्टल ख़ाली करने के आदेश

बिहार: 6 दलित बच्चियों के ज़हर खाने का मुद्दा ऐपवा ने उठाया, अंबेडकर जयंती पर राज्यव्यापी विरोध दिवस मनाया

बिहार: विधानसभा स्पीकर और नीतीश सरकार की मनमानी के ख़िलाफ़ भाकपा माले का राज्यव्यापी विरोध

बिहार में आम हड़ताल का दिखा असर, किसान-मज़दूर-कर्मचारियों ने दिखाई एकजुटता

पटना: विभिन्न सरकारी विभागों में रिक्त सीटों को भरने के लिए 'रोज़गार अधिकार महासम्मेलन'

बिहार बजट सत्र: विधानसभा में उठा शिक्षकों और अन्य सरकारी पदों पर भर्ती का मामला 

बिहार : सीटेट-बीटेट पास अभ्यर्थी सातवें चरण की बहाली को लेकर करेंगे आंदोलन

बिहार : आशा वर्कर्स 11 मार्च को विधानसभा के बाहर करेंगी प्रदर्शन


बाकी खबरें

  • yogi
    विजय विनीत
    अखिलेश बनाम योगीः यूपी की चुनावी लड़ाई में अब पूजा-अनुष्ठान, तंत्र-मंत्र और जाप की एंट्री!
    07 Jan 2022
    यूपी में सत्ता की चाबी हथियाने के लिए सियासी लड़ाई के तौर-तरीकों में पूजा-पाठ, तंत्र-मंत्र, टोना-टोटका के साथ अब जाप का पाखंड भी शामिल हो गया है। अखिलेश यादव के समर्थकों ने हरदोई के एक दुर्गा मंदिर…
  • banaras
    विजय विनीत
    बनारस में विहिप और बजरंग दल बेलगाम, गंगा घाटों के किनारे लगाए 'ग़ैर-हिंदुओं के प्रवेश प्रतिबंध' के पोस्टर
    07 Jan 2022
    बनारस में जो नदी आठों पहर अमनपसंद लोगों के पांव पखारती रही है, उस गंगा के आंचल में विहिप और बजरंग दल ने ग़ैर-हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध वाले विवादित पोस्टर लगाए हैं। ये संगठन अब अपनी काली…
  • US
    जॉन मार्शल
    एक साल पहले हुए कैपिटॉल दंगे ने अमेरिका को किस तरह बदला या बदलने में नाकाम रहा
    07 Jan 2022
    सत्ता के शांतिपूर्ण हस्तांतरण को अमेरिकी लोकतंत्र की एक शानदार मिसाल के तौर पर देखा जाता रहा है। लेकिन, यह व्यापक धारणा 6 जनवरी, 2021 को अपनी बुनियाद के साथ हिल गयी थी।
  • Punjab security lapse
    लाल बहादुर सिंह
    पीएम को राजनीतिक लाभ के लिए पंजाब और किसानों के ख़िलाफ़ भावनाएं भड़काने से बाज़ आना चाहिए
    07 Jan 2022
    पंजाब का 5 जनवरी का नाटकीय घटनाक्रम आने वाले दिनों की बड़ी घटनाओं का ट्रेलर साबित हो सकता है।
  • Cofee beans
    निखिल करिअप्पा
    अरेबिका कॉफ़ी के दाम सबसे ज़्यादा, पर छोटे किसान को नहीं मिल रहा फ़ायदा
    07 Jan 2022
    भारी बारिश और फ़सल के नुकसान के कारण उन छोटे किसानों को बड़ा घाटा हुआ है जो बड़े पैमाने पर रोबस्टा कॉफ़ी उगाते हैं।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License