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बिहार: महिला पुलिसकर्मी ने लगाया उत्पीड़न का आरोप, महिला आयोग ने एसएसपी से तलब की रिपोर्ट
बिहार की कानून व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। आमजन के अलावा अब पुलिस प्रशासन के अंदर से भी महिला उत्पीड़न की शिकायत सामने आ रही है। मुजफ्फरपुर में तैनात एक महिला पुलिसकर्मी ने चौकी प्रभारी व ट्रेनी एसआई के खिलाफ शारीरिक व मानसिक उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए हैं।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
03 Sep 2020
बिहार

"राज्य के आम लोग कैसे सुरक्षित हो सकते हैं, जब बिहार पुलिस की महिला कर्मचारी पुलिस थाने और पुलिस चौकियों में सुरक्षित और संरक्षित नहीं है।"

ये दर्द मुजफ्फरपुर जिले के फकुली ओपी थाने में तैनात एक महिला ट्रेनी पुलिस सब इंस्पेक्टर का है, जिन्होंने अपने चौकी प्रभारी ओर ट्रेनी एसआई पर शोषण और उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़ित महिला पुलिसकर्मी ने मीडिया को बताया कि वो जिस पुलिस चौकी में बीते एक महीने से कार्यरत हैं, वहां पुलिस कर्मियों द्वारा उनके साथ दुर्व्यवहार, अत्याचार किया जाता है। कोई उनसे ठीक से बात तक नहीं करता।

पीड़िता का ये भी आरोप है कि फकुली पुलिस चौकी के प्रभारी अधिकारी ने 30 अगस्त को उनके पति के साथ मार-पीट की और उन्हें धक्का देकर जमीन पर गिरा दिया।

बता दें कि इस मामले में पीड़ित महिला पुलिसकर्मी ने राज्य के पुलिस महानिदेशक गुप्तेश्वर पांडे, एडीजी (कानून व्यवस्था) और राज्य महिला आयोग में शिकायत दर्ज कराई है। इसके अलावा सोशल मीडिया पर भी पीड़िता का एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें वो मीडियाकर्मियों के सामने अपनी आप-बीती सुना रही हैं।

क्या है पूरा मामला?

पीड़िता ने अपने शिकायती पत्र में लिखा है कि फकुली पुलिस चौकी इंचार्ज और एक प्रशिक्षु पुरुष एसआई ने हाल ही में चौकी परिसर के अंदर उनके साथ दुर्व्यवहार और उत्पीड़न किया।

पीड़िता ने पत्र में कहा कि वो अपने पति के इलाज के लिए फिलहाल पटना के एक अस्पताल में हैं और अब थाना वापस जाने पर उनकी जान को खतरा है।

पीड़िता के अनुसार प्रशिक्षण केंद्र बंद होने के चलते वो फकुली ओपी थाने पर प्रतिनियुक्त थी। इस दौरान वह और उनके पति कोरोना संक्रमित हो गए थे। पटना में इलाज के बाद वह 30 अगस्त को ओपी थाने लौटीं, जहां उनके और उनके पति के साथ मारपीट व बदसलूकी की गई। फकुली पुलिस चौकी कुढ़नी पुलिस थाना के अंतर्गत आती है।

पुलिस प्रशासन का क्या कहना है?

इस संबंध में मुजफ्फरपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक जयंत कांत ने मीडिया से कहा कि इस मामले में शिकायत सामने आने के बाद जांच का आदेश दे दिया गया है। जो भी पुलिसकर्मी दोषी पाए जाएंगे उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

एसएसपी जयंतकांत के मुताबिक प्रारंभिक जांच में ड्यूटी को लेकर विवाद की बात सामने आ रही है। इसके अलावा भी अन्य बिंदुओं पर टीम जांच कर रही है। पूरी रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कार्रवाई होगी।

महिला आयोग ने लिया संज्ञान

मीडिया में आई खबरों के मुताबिक पीड़िता की शिकायत पर राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष दिलमणि मिश्रा ने मुजफ्फरपुर एसएसपी से जांच कर रिपोर्ट तलब की है।

दिलमणि मिश्रा के अनुसार राज्य महिला आयोग की नज़र पूरे घटनाक्रम पर बनी हुई है। इस मामले में एसएसपी की रिपोर्ट सामने आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

पुलिस बल में पहले भी सामने आते रहे हैं ऐसे मामले!

गौरतलब है कि पुलिस सेवा के अंतर्गत उत्पीड़न और प्रताड़ना का यह कोई नया मामला नहीं है। हाल ही में बिजनौर के डीसीआरबी अनुभाग में तैनात एक महिला पुलिसकर्मी ने अपने सीनियर एडिशनल एसपी पर शोषण और उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए थे। पीड़िता का कहना था कि वो एक बार पहले भी इस मामले में शिकायत कर चुकी हैं लेकिन बावजूद इसके उन्हें लगातार परेशान किया जा रहा था।

इसे भी पढ़ें: बिजनौर: महिला पुलिसकर्मी के उत्पीड़न मामले में महिला आयोग ने लिया संज्ञान, एसपी ने डीजीपी को भेजी रिपोर्ट

जानकारों की मानें तो इससे पहले भी पुलिस और अर्धसैनिक बलों से इस तरह की शिकायतें सार्वजनिक रूप से सामने आती रही हैं। लेकिन ज्यादातर मामलों में विभागीय जांच के बाद मामला ठप्प हो जाता है। शिकायतकर्ता महिला का ट्रांसफर कर दिया जाता है या उसे और प्रताड़ना झेलने को मज़बूर होना पड़ता है।

महिलाओं के लिए कहीं भी न्याय पाना आसान नहीं

पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता ऋचा सिंह आईटीबीपी अधिकारी करुणाजीत कौर की कहानी याद दिलाते हुए कहती हैं कि महिलाओं के लिए कहीं भी न्याय पाना आसान नहीं होता। करुणाजीत ने अपने आत्मसम्मान के लिए अपनी नौकरी तक छोड़ दी, लेकिन कई साल बीतने के बाद आज भी वो सड़कों पर न्याय के लिए संघर्ष कर रही हैं।

ऋचा आगे कहती हैं, 'कई मामलों में थोड़ी गंभीरता दिखाने के लिए कई बार आरोपित को निलंबित तो कर दिया जाता है, लेकिन उससे बदलता कुछ नहीं है। थोड़े दिन बाद जब मामला शांत हो जाता है उसे फिर से बहाल भी कर दिया जाता है। कई मामलों में विभागीय कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ती कर दी जाती है। तो कई बार समझौता करने का दबाव बनाया जाता है। इस मामले में आगे क्या होगा, ये भी कुछ दिनों में सबके सामने होगा।'

मालूम हो कि बिहार की कानून व्यवस्था लगातार महिला उत्पीड़न और शोषण की खबरों को लेकर चर्चा में है। राज्य की नितीश सरकार भले ही ‘सुशासन’ का दावा कर रही हो लेकिन हक़ीक़त इससे उलट ही नज़र आ रही है ।

पुलिस मुख्यालय के आंकड़ों पर गौर करें तो दुष्कर्म के आंकड़े डराने वाले हैं। राज्य में इस साल अप्रैल महीने तक 404 घटनाएं घट चुकी हैं। यानी हर महीने 101 बलात्कार हो रहे हैं। इसके साथ ही इस दौरान 874 हत्याएँ हुई हैं।

2019 के आंकड़ों की बात करें तो बिहार में पिछले साल हत्या के कुल 3138 मामले दर्ज किए गए थे तो वही बलात्कार के 1450 मामले दर्ज हुए थे।

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो ने वर्ष 2018 के लिये जारी अपनी रिपोर्ट में देश भर के 19 मेट्रोपॉलिटन शहरों में होने वाली हत्याओं में पटना को पहले स्थान पर बताया है, तो वहीं अपराध के मामले में बिहार पांचवें स्थान पर रहा। बिहार में महिलाओं के ख़िलाफ़ अपराध में भी बढ़ोतरी हुई है जबकि दहेज के कारण होने वाली हत्या में भी पटना पहले स्थान पर था।

इसे भी पढ़ें: बिहार में हर महीने 100 से अधिक बलात्कार, क्या यही है सुशासन?

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