NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
स्वास्थ्य
भारत
बिहार में नवजात शिशुओं के लिए ख़तरनाक हुआ मां का दूध, शोध में पाया गया आर्सेनिक
“बिहार के जिन 6 जिलों में मां के दूध में आर्सेनिक की मात्रा काफ़ी अधिक पाई गई है वहां की महिलाओं को इसके लिए अपने दूध की जांच कराना बहुत ज़रूरी है ताकि उनके बच्चे स्वस्थ और सुरक्षित रह सकें।”
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
27 Feb 2022
bihar
मदर मिल्क का सैंपल कलेक्ट कर हो रही जांच। फ़ोटो साभार : दैनिक भास्कर

नवजात बच्चों के लिए मां का दूध अमृत होता है लेकिन बिहार के कुछ जिलों में इन नवजात बच्चों के लिए मां का दूध पीने के लायक नहीं है। बिहार की राजधानी पटना स्थित महावीर कैंसर संस्थान में हुए शोध में ये चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। संस्थान की शोध में पाया गया है कि बिहार के कुछ जिलों से लिए गए मां के दूध के सैंपल में आर्सेनिक की मात्रा मानक से काफी अधिक है। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च द्वारा दिए गए प्रोजेक्ट पर शोध के क्रम में बिहार के कई ज़िलों में मां के दूध में आर्सेनिक भारी मात्रा में पाया गया है जो नवजात के लिए सीधे-सीधे जहर तुल्य है।

छह ज़िलों से लिया गया सैंपल

महावीर कैंसर संस्थान की टीम ने बिहार के बक्सर, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर और राजधानी पटना के ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर जांच की तो मां के दूध में भारी मात्रा में आर्सेनिक के अंश पाए गए। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार मां के दूध में आर्सेनिक की मात्रा का प्रतिशत 0.2 से 0.6 माइक्रोग्राम प्रति लीटर को पीने योग्य माना गया है।

बक्सर में इसकी सबसे ज्यादा मात्रा 495.2 माइक्रोग्राम प्रति लीटर के करीब पाई गई। महावीर कैंसर संस्थान के शोध विभाग के प्रभारी और पटना के प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के चेयरमैन प्रोफेसर अशोक कुमार घोष ने अखबार को बताया कि आर्सेनिक उपचार की अभी तक कोई भी दवाई देश दुनिया में उपलब्ध नहीं हो सकी है।

बातचीत में उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में मदर मिल्क का सैंपल कलेक्ट करना बहुत ही चैलेंज भरा काम है। इसके लिए जब शोध विभाग की टीम ग्रामीण क्षेत्रों का भ्रमण करती है तो इस दौरान महिला शोधकर्ताओं को भी टीम में शामिल किया जाता है ताकि वे महिलाओं को इस बात के लिए समझा-बुझाकर तैयार कर सकें।

20 से 40 वर्ष की महिलाओं के दूध का लिया गया सैंपल

उन्होंने बताया कि महिलाओं में बच्चों के पीने योग्य दूध के सैंपल के लिए 20 वर्ष से 40 वर्ष की महिलाओं के दूध का सैंपल इकट्ठा किया गया और जब उसकी जांच की गई तो उसके काफी चौंकाने वाले परिणाम सामने आए हैं। घोष ने कहा कि बिहार के जिन 6 जिलों में मां के दूध में आर्सेनिक की मात्रा काफी अधिक पाई गई है वहां महिलाओं को इसके लिए अपने दूध की जांच कराना बहुत जरूरी है ताकि उनके बच्चे स्वस्थ और सुरक्षित रह सकें।

उन्होंने कहा कि इसके अलावा जिन महिलाओं के मां के दूध में आर्सेनिक की मात्रा स्पष्ट हो चुकी है वैसी महिलाएं अपने खानपान और पीने योग्य पानी के लिए आर्सेनिक मुक्त पानी की व्यवस्था करें। शोध विभाग के डॉक्टर अरुण कुमार ने बताया कि "एटॉमिक एजपशन पेट्रो फोटो मीटर" के माध्यम से मां के दूध में आर्सेनिक के जांच की जाती है जो अमेरिका से मंगाई गई एक मशीन है। यह बिहार में पहली मशीन है जो महावीर कैंसर संस्थान में शोध के लिए लगाई गई है।

ज्ञात हो कि पिछले साल महावीर कैंसर संस्थान के शोध में पाया गया था कि बिहार के कुछ जिलों के ग्राउंड वाटर में यूरेनियम की मात्रा हद से ज्यादा होने की बात सामने आई थी। इससे पहले यहां पानी में आर्सेनिक की मात्रा अधिक होने की बात सामने आई थी जो कि सेहत के लिए काफी नुकसानदेह है। 

ग्राउंडवाटर में मिला चुका है आर्सेनिक और यूरेनियम

बीते साल अक्टूबर महीने में सामने आए एक शोध की रिपोर्ट में पाया गया कि सेहत के लिए बेहद ख़तरनाक यूरेनियम बिहार के छह जिलों के ग्राउंड वाटर में है। पानी में इसकी मात्रा मानक से दोगुना ज्यादा थी। डब्ल्यूएचओ के मानक के मुताबिक पानी में इसकी मात्रा 30 माइक्रो ग्राम प्रति लीटर या इससे कम होनी चाहिए लेकिन बिहार के सीवान, गोपालगंज, सारण, पटना, नालंदा और नवादा जिलों में इसकी मात्रा 85 माइक्रो ग्राम प्रति लीटर पाई गई जिससे सेहत पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है। यूरेनियम का ये उच्च स्तर गंडक नदी के पूर्व दक्षिण गंगा की तरफ पाया गया।

इसका स्तर अधिक होने से कैंसर और लीवर संबंधी खतरा बढ़ सकता है। ये शोध बिहार की राजधानी पटना स्थित महावीर कैंसर संस्थान और यूके की यूनिवर्सिटी ऑफ मैनचेस्टर द्वारा संयुक्त रुप से किया गया। ये अनुसंधान वर्ष 2020 से किया जा रहा था। आर्सेनिक और यूरेनियम के लिए किए गए अध्ययन का शीर्षक डिस्ट्रीब्यूशन एंड जियोकेमिकल कंट्रोल्स ऑफ आर्सेनिक एंड यूरेनियम इन ग्राउंडवाटर-डिराइव्ड ड्रिंकिंग वाटर इन बिहार था।

2004-05 में आर्सेनिक पर काम हुआ शुरू

राज्य प्रदूषण नियंत्रण परिषद के अध्यक्ष तथा महावीर संस्थान में शोध करने वाले वैज्ञानिक अशोक कुमार घोष ने पिछले साल ग्राउंड वाटर के शोध के बाद मीडिया को बताया था कि, "पानी में आर्सेनिक की मात्रा मिलती रही लेकिन बिहार में यूरेनियम का पाया जाना पहली घटना है। बिहार में 2004-05 में आर्सेनिक पर काम करना शुरू किया गया और अब तक करीब 46 हजार हैंडपंपों की जांच की जा चुकी है। पिछले दो-तीन वर्षों के शोध में आर्सेनिक के अलावा दूसरे तत्वों को लेकर भी काम शुरू किया गया।"

शोध में कई संस्थान हुए शामिल

पूरे बिहार में आर्सेनिक और यूरेनियम के लिए सर्वे किया गया। इसमें महावीर कैंसर संस्थान के साथ-साथ इस शोध में यूके के यूनिवर्सिटी ऑफ मैनचेस्टर, ब्रिटिश जियोलॉजिकल सोसायटी, यूनिवर्सिटी ऑफ बरमिंघम, आईआईटी खडगपुर और नेशनल इंस्टीच्यूट ऑफ हाइड्रोलॉजी के वैज्ञानिक शामिल हुए। इन वैज्ञानिकों के शोध में यह चौंकाने वाला मामला सामने आया।

शोध में यह पाया गया था कि एक ही हैंडपंप में दोनों तत्व एक साथ नहीं पाए गए जो कि अब शोध का विषय बन गया है। जहां यूरेनियम बहुत उच्च स्तर में पाया गया वहां आर्सेनिक की मात्रा कम थी और जहां आर्सेनिक अधिक था वहां यूरेनियम की मात्रा कम थी। 

साधारण आरओ में यूरेनियम को अलग करने की क्षमता नहीं

बीते वर्ष ग्राउंडवाटर में यूरेनियम के पाए जाने के खुलासे के बाद वैज्ञानिकों ने दावा किया कि हालांकि सभी हैंडपंप में यूरेनियम नहीं पाया गया लेकिन क़रीब 10 प्रतिशत हैंडपंप में इसकी मात्रा पाई गई। उनका यह भी कहना था कि घर में साधारण वॉटर फिल्टर से भी यूरेनियम दूर नहीं होगा। इसके लिए अलग से एक खास तरह का मेमरेन तैयार किया जाता है। साधारण वॉटर फिल्टर और आरओ में यूरेनियम को अलग करने की क्षमता नहीं होती है चाहे इसके लिए जितना भी दावा कर लिया जाए।

ये भी पढ़ेंः बिहार: आर्सेनिक के बाद अब भूजल में यूरेनियम संदूषण मिलने से सेहत को लेकर चिंता बढ़ी

Bihar
Mother Milk
newborn babies
Arsenic
Arsenic in water

Related Stories

बिहार में ज़िला व अनुमंडलीय अस्पतालों में डॉक्टरों की भारी कमी

बिहारः पिछले साल क़हर मचा चुके रोटावायरस के वैक्सीनेशन की रफ़्तार काफ़ी धीमी

बिहारः मुज़फ़्फ़रपुर में अब डायरिया से 300 से अधिक बच्चे बीमार, शहर के विभिन्न अस्पतालों में भर्ती

बिहार की राजधानी पटना देश में सबसे ज़्यादा प्रदूषित शहर

लोगों को समय से पहले बूढ़ा बना रहा है फ्लोराइड युक्त पानी

बिहार में फिर लौटा चमकी बुखार, मुज़फ़्फ़रपुर में अब तक दो बच्चों की मौत

शर्मनाक : दिव्यांग मरीज़ को एंबुलेंस न मिलने पर ठेले पर पहुंचाया गया अस्पताल, फिर उसी ठेले पर शव घर लाए परिजन

नक्शे का पेचः भागलपुर कैंसर अस्पताल का सपना अब भी अधूरा, दूर जाने को मजबूर 13 ज़िलों के लोग

बिहार की लचर स्वास्थ्य व्यवस्थाः मुंगेर सदर अस्पताल से 50 लाख की दवाईयां सड़ी-गली हालत में मिली

कोरोना काल में भी वेतन के लिए जूझते रहे डॉक्टरों ने चेन्नई में किया विरोध प्रदर्शन


बाकी खबरें

  • Rajasthan
    सोनिया यादव
    राजस्थान: अलग कृषि बजट किसानों के संघर्ष की जीत है या फिर चुनावी हथियार?
    22 Feb 2022
    किसानों पर कर्ज़ का बढ़ता बोझ और उसकी वसूली के लिए बैंकों का नोटिस, जमीनों की नीलामी इस वक्त राज्य में एक बड़ा मुद्दा बना हुआ है। ऐसे में गहलोत सरकार 2023 केे विधानसभा चुनावों को देखते हुए कोई जोखिम…
  • up elections
    रवि शंकर दुबे
    यूपी चुनाव, चौथा चरण: केंद्रीय मंत्री समेत दांव पर कई नेताओं की प्रतिष्ठा
    22 Feb 2022
    उत्तर प्रदेश चुनाव के चौथे चरण में 624 प्रत्याशियों का भाग्य तय होगा, साथ ही भारतीय जनता पार्टी समेत समाजवादी पार्टी की प्रतिष्ठा भी दांव पर है। एक ओर जहां भाजपा अपना पुराना प्रदर्शन दोहराना चाहेगी,…
  • uttar pradesh
    एम.ओबैद
    यूपी चुनाव : योगी काल में नहीं थमा 'इलाज के अभाव में मौत' का सिलसिला
    22 Feb 2022
    पिछले साल इलाहाबाद हाईकोर्ट ने योगी सरकार को फटकार लगाते हुए कहा था कि "वर्तमान में प्रदेश में चिकित्सा सुविधा बेहद नाज़ुक और कमज़ोर है। यह आम दिनों में भी जनता की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त…
  • covid
    टी ललिता
    महामारी के मद्देनजर कामगार वर्ग की ज़रूरतों के अनुरूप शहरों की योजना में बदलाव की आवश्यकता  
    22 Feb 2022
    दूसरे कोविड-19 लहर के दौरान सरकार के कुप्रबंधन ने शहरी नियोजन की खामियों को उजागर करके रख दिया है, जिसने हमेशा ही श्रमिकों की जरूरतों की अनदेखी की है। 
  • aicctu
    मधुलिका
    इंडियन टेलिफ़ोन इंडस्ट्री : सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के ख़राब नियोक्ताओं की चिर-परिचित कहानी
    22 Feb 2022
    महामारी ने इन कर्मचारियों की दिक़्क़तों को कई गुना तक बढ़ा दिया है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License