NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
अपराध
आंदोलन
भारत
राजनीति
पत्रकार हत्याकांड- कैसे मेडिकल माफिया का अड्डा बन गया छोटा सा कस्बा बेनीपट्टी?
इन दिनों उत्तर बिहार के कई ज़िलों में पत्रकार अविनाश झा उर्फ बुद्धिनाथ झा की जघन्य हत्या के विरोध में आंदोलन हो रहे हैं। पुलिस ने हत्या के आरोपी छह लोगों को गिरफ्तार भी किया है, इनमें से तीन का संबंध उस कस्बे में संचालित होने वाले नर्सिंग होम से है। 
पुष्यमित्र
16 Nov 2021
Benipatti

बिहार के मधुबनी जिले का एक छोटा सा कस्बा बेनीपट्टी इस रविवार को अचानक सुर्खियों में आ गया, जब खबर आयी कि वहां के एक स्थानीय पत्रकार की लाश जली हुई अवस्था में बरामद हुई है। साथ ही यह खबर भी आयी कि वह पत्रकार अपने कस्बे में संचालित हो रहे फर्जी नर्सिंग होम और मेडिकल लैब के खिलाफ लगातार खबरें लिख रहा था, उनके खिलाफ शिकायतें कर रहा था। उनकी खबरों और शिकायतों की वजह से कई अस्पताल और जांच घरों को सरकारी आदेश से बंद करा दिया गया। उसकी मौत के बाद भी सोमवार, 15 नवंबर को उसकी शिकायत पर कस्बे के दो फर्जी नर्सिंग होम के खिलाफ कार्रवाई की गयी और उन्हें बंद करने का आदेश जारी हो गया।

इन दिनों उत्तर बिहार के कई जिले में इस पत्रकार अविनाश झा उर्फ बुद्धिनाथ झा की जघन्य हत्या के विरोध में आंदोलन हो रहे हैं। पुलिस ने हत्या के आरोपी छह लोगों को गिरफ्तार भी किया है, इनमें से तीन का संबंध उस कस्बे में संचालित होने वाले नर्सिंग होम से है। इन घटनाओं से इतर एक बात खास तौर पर चकित करती है कि बेनीपट्टी जैसे छोटे से कस्बे, जिसकी सरकारी हैसियत महज अनुमंडल मुख्यालय की है, में इतनी अधिक संख्या में नर्सिंग होम और जांच घर क्यों संचालित हो रहे हैं? क्योंकि अमूमन बिहार के कस्बों में स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति अच्छी नहीं होती, इक्का-दुक्का नर्सिंग होम ही कहीं-कहीं खुले नजर आते हैं।

सरकारी आंकड़े बताते हैं कि पिछले एक साल में बेनीपट्टी कस्बे के 30-32 अस्पतालों और नर्सिंग होम और जांच घरों को बंद किये जाने के आदेश हुए हैं। इस सवाल का जवाब जानने के लिए हमने उस लोकल न्यूज पोर्टल बेनीपट्टी न्यूज नेटवर्क के संपादक बीजे बिकास से बातचीत की, जिसके लिए अविनाश झा रिपोर्टिंग करता था, तो उन्होंने कहा कि यह प्रसंग सचमुच चकित करने वाला है। दो-तीन साल पहले तक यहां इक्का-दुक्का नर्सिंग होम ही होते थे, मगर पिछले तीन साल में खुलने और फिर बंद होने वाले अस्पतालों की संख्या जोड़ी जाये तो वह पचास के पार पहुंच जाती है। इस इलाके में बड़ी संख्या में फर्जी नर्सिंग होम और जांच घर खुल रहे हैं।

ये भी पढ़ें: बिहारः ग़ैर-क़ानूनी निजी क्लिनिक का पर्दाफ़ाश करने वाले पत्रकार की हत्या

यह पूछने पर कि क्या इस इलाके में लोगों को कोई गंभीर बीमारी होती है? यहां एडमिट होने वाले ज्यादातर मरीज किस रोग के शिकार होते हैं? उन्होंने कहा, इस इलाके में कोई गंभीर बीमारी नहीं होती, यहां आने वाले ज्यादातर लोग प्रसव के लिए आते हैं। दरअसल सिर्फ बेनीपट्टी प्रखंड से 33 पंचायत जुड़ी हुई हैं। इसके अलावा अनुमंडल में तीन और प्रखंड हैं। पूरे इलाके का सबसे बड़ा कस्बा यही है। इसलिए स्वाभाविक रूप से मरीज यहीं आते हैं। यहां एक सरकारी प्राथमिक केंद्र जरूर है, मगर वहां चिकित्सकीय सुविधा वैसी नहीं है कि लोगों का सुरक्षित प्रसव हो सके। लिहाजा फिर वे मरीज दलालों के चक्कर में फंस कर इन नर्सिंग होम में एडमिट हो जाते हैं। इसी वजह से यहां अचानक बड़ी संख्या में फर्जी और असली दोनों तरह के नर्सिंग होम खुलने लगे हैं।

बिकास बताते हैं कि उनका रिपोर्टर बुद्धिनाथ भी पहले एक क्लीनिक का संचालन करता था, जिसमें बाहर से डॉक्टर आते थे। मगर स्थानीय नर्सिंग होम वालों ने उसे इतना परेशान किया कि मजबूरन उसे अपना क्लीनिक बंद करना पड़ा। इसके बाद उसने तय किया कि वह कस्बे के सभी फर्जी नर्सिंग होम के खिलाफ अभियान चलायेगा। उसके अभियान की वजह से कई नर्सिंग होम और जांच घर बंद हुए। उसकी शिकायत के आधार पर 15 नवंबर को भी मधुबनी जिले के सिविल सर्जन ने एक आदेश जारी किया जिसमें दो नर्सिंग होम- अनन्या नर्सिंग होम और अनुराग हेल्थ केयर को बंद करने की अनुशंसा की गयी। साथ ही उन पर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया।

इस छोटे से कस्बे बेनीपट्टी में इतने निजी नर्सिंग होम क्यों संचालित होते हैं और सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था क्यों इन मरीजों को सुविधा नहीं दे पा रही, यह समझने के लिए न्यूजक्लिक ने बेनीपट्टी के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के मेडिकल अफसर इंचार्ज डॉ. शंभुनारायण झा से संपर्क किया तो उन्होंने कहा कि उनके अस्पताल में फिलहाल तीन एमबीबीएस चिकित्सक कार्यरत हैं। कुछ दिन पहले तक सिर्फ दो डॉक्टर थे। प्रसूती रोग विशेषज्ञ एक भी नहीं है। एक चिकित्सक की नियुक्ति काफी पहले हुई थी, मगर वे ज्वाइन करने के बाद ही यहां से चली गयीं और फिर लौट कर नहीं आयी हैं। वे प्रभारी हैं, इसलिए उनका ज्यादातर वक्त प्रशासनिक कार्यों में बीतता है। ऐसे में हम चाह कर भी मरीजों की उस तरह सेवा नहीं कर पाते जो अपेक्षित है।

बेनीपट्टी प्रशासनिक तौर पर अनुमंडल मुख्यालय है। इस लिहाज से यहां अनुमंडल स्तरीय रेफरल अस्पताल होना चाहिए था, मगर अब तक वह शुरू नहीं हो पाया है। इस इलाके में चार अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भी संचालित हो रहे हैं। मगर वहां भी स्वास्थ्य सुविधाएं न के बराबर हैं।

डॉ. शंभुनारायण झा कहते हैं, हालांकि अभी रेफरल अस्पताल शुरू नहीं हुआ है। मगर कुछ दिन पहले उसके लिए तीन-चार डॉक्टर जरूर भेजे गये। मगर उनमें से भी कुछ ज्वाइन करके लौट गये। चार अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में से दो में ही एमबीबीएस डॉक्टर फिलहाल कार्यरत हैं। 

इन सूचनाओं से जाहिर है कि बेनीपट्टी जो एक दूरदराज का अनुमंडल है बिहार की लचर स्वास्थ्य व्यवस्था और उसकी वजह से फफूंद की तरह विकसित हो रहे फर्जी क्लीनिकों, निजी अस्पतालों और जांच लैब के संगठित उद्योग के रूप में विकसित होने का एक टिपिकल उदाहरण बन चुका है।

मधुबनी जिले से एक वेबपोर्टल आर्यावर्त का संचालन करने वाले वरिष्ठ पत्रकार रजनीश के झा कहते हैं, यह स्थिति सिर्फ बेनीपट्टी की नहीं बल्कि पूरे मधुबनी जिले की है। जहां डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों के अभाव में सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था लगभग नष्ट हो गयी है। और ग्रामीण इलाके में जगह-जगह बड़ी संख्या फर्जी स्वास्थ्य केंद्र खुल रहे हैं। इनमें से ज्यादातर के पास न डॉक्टर हैं, न प्रशिक्षित नर्स। डॉक्टरों के क्लीनिक में नौकरी कर कुछ लोगों ने थोड़ा बहुत इलाज करना सीख लिया है और फिर वे दवा देने से लेकर सर्जरी करने तक का काम बेखौफ होकर कर रहे हैं। इसमें बड़ी संख्या में मरीजों की मौत भी हो रही है।

मधुबनी के एक अन्य वरिष्ठ पत्रकार रमण कुमार कहते हैं कि जयनगर जैसे इलाके में तो ऐसे-ऐसे प्राइवेट अस्पताल खुल गये हैं, जहां ऑटो चालक तक सर्जरी करते हैं। इन अस्पतालों का पूरा कारोबार उन दलालों के भरोसे चलता है, जो मरीजों को फंसा कर लाते हैं। दुर्भाग्यवश इस काम में उन आशा कार्यकर्ताओं का भी नाम सामने आ रहा है, जिनका काम प्रसव के लिए महिलाओं को सरकारी अस्पताल पहुंचाना था।

रजनीश कहते हैं, ऐसी स्थिति में अगर कोई बुद्धिनाथ भ्रष्टाचार की इस गंदगी को साफ करने की कोशिश करता है तो उसकी हत्या कर दी जाती है। ये मेडिकल माफिया इतने ताकतवर हैं कि प्रशासन उनपर सख्ती करने के बदले उनके खिलाफ अभियान चलाने वालों को ही संदिग्ध बताने में जुट जाता है।

बिहार में ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की ऐसी स्थिति क्यों बन जाती है, यह पूछने पर आईजीआईएमएस, पटना में कार्यरत चिकित्सक डॉ रत्नेश चौधरी कहते हैं कि इसकी अमूमन दो वजहें लगती हैं। पहली वजह यह है कि हर बार शिकायत मिलने पर ही स्वास्थ्य विभाग फर्जी क्लीनिकों के खिलाफ अभियान चलाता है, वह खुद अपने स्तर पर जांच और कार्रवाई क्यों नहीं करता? दूसरी वजह यह है कि जब यह मानक निश्चित है कि कितनी आबादी पर एपीएचसी खुलेंगे, कितनी आबादी पर पीएचसी, कहां कितने डॉक्टर बहाल होंगे, तो स्वतः ही सरकार को इसकी व्यवस्था करनी चाहिए। जब तक सरकारी तंत्र खुद सक्रिय नहीं होगा, इस तरह की अनियमितता होती रहेगी और इसके खिलाफ आवाज उठाने वाले ही हिंसा का शिकार हो जायेंगे।

(लेखक पटना स्थित स्वतंत्र पत्रकार हैं।)

Bihar
Buddhinath
Buddhinath murdered case
bihar police
Press freedom
attack on journalists

Related Stories

पिता के यौन शोषण का शिकार हुई बिटिया, शुरुआत में पुलिस ने नहीं की कोई मदद, ख़ुद बनाना पड़ा वीडियो

बिहार: आख़िर कब बंद होगा औरतों की अस्मिता की क़ीमत लगाने का सिलसिला?

बिहार: 8 साल की मासूम के साथ बलात्कार और हत्या, फिर उठे ‘सुशासन’ पर सवाल

चारा घोटाला: सीबीआई अदालत ने डोरंडा कोषागार मामले में लालू प्रसाद को दोषी ठहराया

यूपी में मीडिया का दमन: 5 साल में पत्रकारों के उत्पीड़न के 138 मामले

बिहार: मुज़फ़्फ़रपुर कांड से लेकर गायघाट शेल्टर होम तक दिखती सिस्टम की 'लापरवाही'

बिहार शेल्टर होम कांड-2: युवती ने अधीक्षिका पर लगाए गंभीर आरोप, कहा- होता है गंदा काम

बिहारः पांच वर्ष की दलित बच्ची के साथ रेप, अस्पताल में भर्ती

बिहारः बंधक बनाकर नाबालिग लड़की से गोरखपुर में 1 महीने तक किया गैंगरेप

बिहारः ग़ैर-क़ानूनी निजी क्लिनिक का पर्दाफ़ाश करने वाले पत्रकार की हत्या


बाकी खबरें

  • punjab
    रवि कौशल
    पंजाब चुनाव: पार्टियां दलित वोट तो चाहती हैं, लेकिन उनके मुद्दों पर चर्चा करने से बचती हैं
    12 Feb 2022
    दलित, राज्य की आबादी का 32 प्रतिशत है, जो जट्ट (25 प्रतिशत) आबादी से अधिक है। फिर भी, राजनीतिक दल उनके मुद्दों पर ठीक से चर्चा नहीं करते हैं क्योंकि वे आर्थिक रूप से कमज़ोर, सामाजिक रूप से उत्पीड़ित…
  • union budget
    बी. सिवरामन
    केंद्रीय बजट 2022-23 में पूंजीगत खर्च बढ़ाने के पीछे का सच
    12 Feb 2022
    क्या पूंजीगत खर्च बढ़ने से मांग और रोजगार में वृद्धि होती है?
  • Rana Ayyub
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट/भाषा
    जनता के पैसे का इस्तेमाल ख़ुद के लिए नहीं किया : राना अय्यूब
    12 Feb 2022
    सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक बयान जारी करते हुए अय्यूब ने कहा कि उन्होंने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और आयकर विभाग के अधिकारियों को ‘‘स्पष्ट रूप से दिखाया’’ है कि ‘‘राहत अभियान के धन का कोई भी हिस्सा…
  • sc and yogi
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    सुप्रीम कोर्ट की यूपी सरकार को चेतावनी; सीएए विरोधी प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ वसूली नोटिस वापस लें या हम इसे रद्द कर देंगे
    12 Feb 2022
    शीर्ष अदालत ने कहा कि दिसंबर 2019 में शुरू की गई यह कार्यवाही उच्चतम न्यायालय द्वारा प्रतिपादित कानून के खिलाफ है और इसकी अनुमति नहीं दी जा सकती है।
  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 50 हज़ार नए मामले सामने आए 
    12 Feb 2022
    देश में 24 घंटों में कोरोना के 50,407 नए मामले सामने आए हैं। देश में कोरोना संक्रमण के मामलों की संख्या बढ़कर 4 करोड़ 25 लाख 86 हज़ार 544 हो गयी है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License