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बिहारः ग़ैर-क़ानूनी निजी क्लिनिक का पर्दाफ़ाश करने वाले पत्रकार की हत्या
हत्या से पहले पत्रकार बुद्धिनाथ ने एक वीडियो बनाया था जिसमें वे फ़र्ज़ी क्लिनिक का ज़िक्र कर रहे हैं। इस वीडियो में वे बताते हैं कि उन्हें 12 जुलाई 2019 को गोली मारने की धमकी दी गई थी। उन्होंने इसमें आगे कहा कि वे लड़ते रहे है और लड़ते रहेंगे।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
15 Nov 2021
Buddhinath

बिहार में फिर एक पत्रकार की हत्या कर दी गई है। बदमाशों ने उनकी लाश को जलाकर हाई-वे के किनारे फेंक दिया था। ये घटना शुक्रवार 12 नवंबर की शाम को प्रकाश में आया। वे 9 नवंबर से लापता थे। 22 वर्षीय बुद्धिनाथ झा मधुबनी के बेनीपट्टी में अवैध तरीके से चलाए जा रहे हेल्थ क्लिनिक का लगातार पर्दाफाश कर रहे थे। परिजनों का कहना है कि उनकी हत्या के पीछे मेडिकल माफिया हो सकता है। बुद्धिनाथ ने कई अवैध क्लिनिक के खिलाफ शिकायत की थी और प्रशासन ने कुछ के खिलाफ जुर्माना भी लगाया था।

बुद्धिनाथ मधुबनी के बेनीपट्टी के रहने वाले थे और एक हिंदी न्यूज पोर्टल बीएनएन न्यूज बेनीपट्टी से जुड़े थे। 

उन्होंने कई अवैध क्लीनिक के खिलाफ शिकायत की थी जिस पर कार्रवाई हुई और कई क्लिनिक पर जुर्माना लगाया गया था और कई क्लिनिक को बंद करा दिया गया था। 

गोली मारने की मिली थी धमकी 

बुद्धिनाथ का एक वीडियो फेसबुक पर वायरल हो रहा जिसे पटना स्थित वरिष्ठ पत्रकार पुष्यमित्र ने शेयर किया है। इस वीडियो में बुद्धिनाथ कई मामलों का खुलासा करते हुए दिखाई दे रहे हैं। वे इसमें बताते हैं कि बेनीपट्टी में दो दर्जन से अधिक फर्जी नर्सिंग होम हैं। इस दौरान वे जनता से अपील करते हैं कि वे इस तरह के नर्सिंग होम से बचने की सलाह दे रहे हैं। इसमें वे एक क्लिनिक द्वारा मरीज के मारे जाने की घटना का भी जिक्र कर रहे हैं। बुद्धिनाथ कह रहे हैं कि ये क्लिनिक कानून की धज्जियां उड़ाकर चलाए जा रहे हैं। वे कहते हैं कि उन्हें 12 जुलाई 2019 को गोली मारने की धमकी दी गई थी। उन्होंने आगे कहा कि वे लड़ते रहे है और लड़ते रहेंगे। 

बुद्धिनाथ के भतीजे बीजे बिकाश ने द वायर से बताया है कि ‘जब हम सुबह उनके कमरे में गए, तो हमें क्लीनिक के पास उनकी बाइक मिली। उनका लैपटॉप चल रहा था, जिसका मतलब है कि वह कुछ मिनट पहले कहीं जाने की तैयारी कर रहे होंगे।’

10 नवंबर को उनके परिवार के सदस्यों ने स्थानीय पुलिस को उनके लापता होने की जानकारी दी थी। परिजनों के अनुसार 10 नवंबर की सुबह करीब पांच किलोमीटर दूर एक गांव में उनके मोबाइल की लोकेशन का पता चला था। अगले दिन 11 नवंबर को बुद्धिनाथ के बड़े भाई चंद्रशेखर झा ने बेनीपट्टी पुलिस थाने में उनके लापता होने की बाबत शिकायत दर्ज कराई। 

दर्ज कराई गई शिकायत में इलाके के ग्यारह निजी नर्सिंग होम का नाम दिया गया था जिसके बारे में कहा गया कि बुद्धिनाथ झा के लापता होने में इनकी भूमिका हो सकती है क्योंकि पत्रकार ने उनके खिलाफ लोक शिकायत निवारण अधिनियम के तहत शिकायत दर्ज कराई थी।

12 नवंबर की शाम को बेनीपट्टी से करीब पांच किलोमीटर दूर पर स्थित एक गांव से बिकाश को फोन आया कि स्टेट हाईवे के किनारे एक लाश है। ये सूचना मिलने के बाद बिकाश पुलिस के साथ वहां गए और उनकी पहचान की। उनका शव जला हुआ था। बिकाश कहते हैं कि हमने उनकी पहचान करने के बाद पोस्टमॉर्टम कराया और बाद में उनके शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया। 

बेनीपट्टी के एसडीपीओ ने न्यूजक्लिक को कहा कि अभी मामले की जांच की जा जा रही है। 

बुद्धिनाथ की शिकायत पर हुई थी कार्रवाई

बुद्धिनाथ की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए जिला के स्वास्थ्य अधिकारियों ने आठ निजी नर्सिंग होम की जांच की थी जो कथित तौर पर उचित लाइसेंस के बिना क्लिनिक चलाए जा रहे थे। इनमें से चार क्लीनिकों पर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया था।

उन्होंने वर्ष 2019 में एक नर्सिंग होम खोला था जिसके चलते स्थानीय डॉक्टर नाराज थे। इसको लेकर उन्हें क्लीनिक बंद करना पड़ा था। इसके बाद उन्होंने इलाके में गैर कानूनी क्लीनिकों का पर्दाफाश करने का मन बना लिया और उन्होंने इस बाबत कई आरटीआई लगाईं। इसके संबंध में उन्होंने संबंधित विभागों में शिकायतें दर्ज कराई थी। 

बुद्धिनाथ के भाई त्रिलोक झा के अनुसार निजी नर्सिंग होम के खिलाफ की गई कार्रवाई से इसके मालिक नाराज थे। इनके मालिकों ने कई बार उन्हें धमकी दी थी और शिकायत दर्ज कराने से रोकने पर पैसे की पेशकश भी की थी। 

हत्या को लेकर प्रदर्शन 

बुद्धिनाथ की हत्या को लेकर रविवार को बेनीपट्टी के लोहिया चौक के पास लोगों ने प्रदर्शन किया और दोषियों को कठोर सजा देने की मांग की। इस दौरान भारी संख्या में लोग मौजूद थे। मांग पत्र में उच्च स्तरीय जांच की मांग की गई और स्पीडी ट्रायल कर दोषियों को कठोर सजा देने की मांग की गई। इसमें मधुबनी के आरक्षी आधीक्षक के गलत बयानी पर सार्वजनिक माफीनामा या बर्ख़ास्तगी की मांग की गई।

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इसमें मृतक के परिवार को एक करोड़ का मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग की गई। साथ ही फर्जी नर्सिंग होम को अविलंब बंद कर संचालक पर मुकदमा दर्ज करने की मांग की गई। 

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विपक्ष का सरकार पर हमला 

सीपीआइएम के प्रदेश सचिव अवधेश कुमार ने इस घटना की निंदा करते हुए कहा है कि इस हत्या की उच्च स्तरीय जांच की जाए और हत्यारे को अविलंब गिरफ्तार किया जाए। पार्टी ने मृतक के परिवार को पर्याप्त मुआवजा देने और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग की है। उन्होंने कहा कि बिहार में अनेकों जगहों पर हो रहे अपराधिक घटनाओं से लगता है कि राज्य में कानून व्यवस्था ध्वस्त हो चुकी है। उन्होंने कहा कि माफिया, अपराधी, पुलिस गठजोड़ को सत्ता का संरक्षण प्राप्त है जिसके चलते अपराध की घटनाओं का ग्राफ बढ़ता ही जा रहा है। 

भाकपा-माले के प्रदेश सचिव कुणाल ने कहा है कि बिहार पूरी तरह से अपराधियों के चंगुल में है। हत्या की घटनाएं लगातार बढ़ती ही जा रही हैं। सरकार नाम की कोई चीज ही नहीं दिखलाई पड़ती है। दरअसल, अपराधियों को सत्ता व प्रशासन का खुलेआम संरक्षण है इसलिए उनका मनोबल सातवें आसमान पर है और वे दिनदहाड़े हत्याओं को अंजाम दे रहे हैं।

उन्होंने कहा कि मधुबनी जिला के बेनीपट्टी लोहिया चौक के निवासी पत्रकार व आरटीआई एक्टिविस्ट बुद्धिनाथ झा का अपहरण व उसके बाद निर्ममता से की गई हत्या बेहद निंदनीय है। उन्होंने कहा कि बिहार में आरटीआई कार्यकर्ताओं की हत्या एक ट्रेंड बनता जा रहा है। इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जानी चाहिए कि आखिर बिहार में पत्रकारों व आरटीआई कार्यकर्ताओं को क्यों निशाना बनाया जा रहा है।

राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने इस हत्याकांड को लेकर नीतीश सरकार पर निशाना साधते हुए लिखा है कि नीतीश राज में सच बोलना, गलत का विरोध करना सबसे बड़ा जुर्म है। सरकार में बैठे लोग अपने निजी हित के लिए माफियाओं और विरोधियों का मनोबल बढ़ाए हुए हैं। 

पहले भी हो चुकी हैं पत्रकारों की हत्याएं

इस साल 10 अगस्त को पूर्वी चंपारण में एक पत्रकार मनीष कुमार सिंह (30 वर्ष) की हत्‍या कर दी गई थी। अपराधियों ने उन्हें अगवा कर गला रेत कर हत्या कर दी थी। मनीष एक न्यूज चैनल से जुड़े हुए थे। 

13 मई 2016 को सीवान में पत्रकार राजदेव रंजन की हत्या कर दी गई थी। बदमाशों ने उस समय उनकी हत्या कर दी थी जब वे अखबार के दफ्तर से अपनी बाइक से देर रात घर लौट रहे थे।

12 नवंबर 2016 को सासाराम में पत्रकार धर्मेंद्र सिंह की बदमाशों ने हत्या कर दी थी। बिहार के समस्तीपुर 3 जनवरी 2017 को एक हिन्दी दैनिक के पत्रकार ब्रजकिशोर ब्रजेश की बदमाशों ने गोली मार कर हत्या कर दी थी। 

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