NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
घटना-दुर्घटना
भारत
राजनीति
बेंगलुरु में किसान नेता राकेश टिकैत पर काली स्याही फेंकी गयी
टिकैत ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘स्थानीय पुलिस इसके लिये जिम्मेदार है और राज्य सरकार की मिलीभगत से यह हुआ है।’’
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
30 May 2022
rakesh tikait

बेंगलुरु : यहां स्थित गांधी भवन में किसान संगठनों की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान सोमवार को शरारती तत्वों ने किसान नेता राकेश टिकैत पर काली स्याही फेंकी।

घटना के कुछ ही देर बाद आयोजकों और शरारती तत्वों के बीच झड़प हो गयी। इसके बाद दोनों पक्षों ने एक दूसरे पर प्लास्टिक की कुर्सी से हमला किया।

#WATCH Black ink thrown at Bhartiya Kisan Union leader Rakesh Tikait at an event in Bengaluru, Karnataka pic.twitter.com/HCmXGU7XtT

— ANI (@ANI) May 30, 2022

घटना पर प्रतिक्रिया देते हुये टिकैत ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार की मिलीभगत से उनके ऊपर स्याही फेंकी गयी।

टिकैत ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘स्थानीय पुलिस इसके लिये जिम्मेदार है और राज्य सरकार की मिलीभगत से यह हुआ है।’’

किसान नेता की पगड़ी, चेहरे, कुर्ता और हरे शॉल तथा गर्दन के आस-पास काली स्याही का दाग पड़ गया।

किसान एकता मोर्चा ने ट्विटर पर दिए अपने बयान में कहा है, "हम कर्नाटक में राकेश टिकैत पर कायरतापूर्ण हमले की कड़ी निंदा करते हैं। ऐसे हमले हमारे हौसले तोड़ने के लिए किए जा रहे हैं। कुछ लोग #FarmersProtest में किसानों की जीत को पचा नहीं पा रहे हैं। किसानों के स्वाभिमान को ठेस पहुंचाई जा रही है, जिसका हम विरोध करते हैं।"

We strongly condemn the cowardly attack on Rakesh Tikait in Karnataka. Such attacks are happening only to break our spirits. Some people are not able to digest the victory of farmers in the #FarmersProtest. The self-esteem of farmers is being hurt, against which we shall protest.

— Kisan Ekta Morcha (@Kisanektamorcha) May 30, 2022

(समाचार एजेंसी भाषा इनपुट के साथ)

rakesh tikait
Attack on Rakesh Tikait

Related Stories


बाकी खबरें

  • गुजरात के एक जिले में गन्ना मज़दूर कर्ज़ के भंवर में बुरी तरह फंसे
    दमयन्ती धर
    गुजरात के एक जिले में गन्ना मज़दूर कर्ज़ के भंवर में बुरी तरह फंसे
    04 Sep 2021
    डांग जिले के गन्ना कटाई के काम से जुड़े श्रमिकों को न तो मिल-मालिकों द्वारा ही श्रमिकों के तौर पर मान्यता प्रदान की गई है और न ही उन्हें खेतिहर मजदूर के बतौर मान्यता दी गई है।
  • क्या अफ़गानिस्तान में तालिबान सरकार को मान्यता देना भारत के हित में है? 
    एम. के. भद्रकुमार
    क्या अफ़गानिस्तान में तालिबान सरकार को मान्यता देना भारत के हित में है? 
    04 Sep 2021
    इस बात की संभावना जताई जा रही है कि तालिबान के नेतृत्व में बनने वाली सरकार एक समावेशी गठबंधन की सरकार होगी। अब तक की मिली रिपोर्टों के अनुसार इस संबंध में शुक्रवार को काबुल में घोषणा होने की उम्मीद…
  • दिल्ली दंगे: गिरफ़्तारी से लेकर जांच तक दिल्ली पुलिस लगातार कठघरे में
    मुकुंद झा
    दिल्ली दंगे: गिरफ़्तारी से लेकर जांच तक दिल्ली पुलिस लगातार कठघरे में
    04 Sep 2021
    यह कोई पहली बार नहीं है जब पुलिस की जांच पर सवाल उठ रहे हैं। इससे पहले भी कोर्ट ने दिल्ली पुलिस की जांच पर कई गंभीर सवाल उठाए हैं।
  • किसान महापंचायत के लिए एकजुटता। 5 सितंबर की महापंचायत के लिए किसान-मज़दूर पिछले काफी दिनों से लगातार छोटी-छोटी पंचायतें कर रहे हैं। मुज़फ़्फ़रनगर के सरनावली गांव में 23 अगस्त को हुई पंचायत का दृश्य। 
    लाल बहादुर सिंह
    मुज़फ़्फ़रनगर महापंचायत : जनउभार और राजनैतिक हस्तक्षेप की दिशा में किसान आंदोलन की लम्बी छलांग
    04 Sep 2021
    किसान आंदोलन देश में नीतिगत बदलाव की लड़ाई के लिए एक बड़ी राष्ट्रीय संस्था बनने की ओर बढ़ रहा है।
  • बिहार में बाढ़: पिछले 48 घंटों में पूर्वी चंपारण, भागलपुर में कई गांव डूबे, बहुत सारे लोग विस्थापित
    मोहम्मद इमरान खान
    बिहार में बाढ़: पिछले 48 घंटों में पूर्वी चंपारण, भागलपुर में कई गांव डूबे, बहुत सारे लोग विस्थापित
    04 Sep 2021
    गंडक, कोशी नदियों के उफ़ान से हुए कटाव ने कई परिवारों को बेघर कर दिया है। कई परिवारों को अब भी सरकारी मदद का इंतजार है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License